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Wednesday, June 26, 2019
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देश चाहे जिसको सौंप दिया, घर बचा लीजिये। आख़िर बच्चे तो आपके हैं न !
एक पीढ़ी की उम्र 30 साल होती है। आजादी के दौरान की पीढ़ी का समय आप 1960 तक मान सकते है। उस पीढ़ी ने आजादी की लड़ाई , बंटवारा और हिंसा का नंगा नाच देखा। वो पीढ़ी इस उथल-पुथल के दौर से दग्ध थी। अपने बच्चों को भाईचारे , एकता और धर्मनिरपेक्षता का संदेश दिया। विज्ञान, नए दौर और सहिष्णुता की घुट्टी दी। उसने गरीबी देखी थी, शिक्षा और परिश्रम से गरीबी से उबरने की राहें खोजने की समझ अपने बच्चो को दी। दूसरी पीढ़ी कोई 1990-95 तक समझिये। इस दौरान शिक्षित, सहिष्णु, परिश्रमी वर्ग में देश को मजबूत बनाने में समय लगाया। खाक से शुरू कर एक सामान्य मध्यम, कंफर्टेबल जीवन अपने बच्चो को दिया। उसे हर तकलीफ़ से बचाया। रिलेटव इज के साथ बढ़ी यह पीढ़ी, गढ़े हुए मन्दिर मस्जिद विवाद, मुम्बई, गोधरा, कश्मीर अहमदाबाद की गवाह हुई। नई सदी में इनका वक्त आया, तो दबे छिपे रूप में ही सही, कंम्यूनलिज्म दिमाग के एक हिस्से बैठा हुआ था। निजी बातचीत में "उनको" ठीक करने की बाते करता था। मौका मिले तो निपटा देने की सोच थी। देश की राजनीति में इस भावना का दोहन करने वाले मजबूत हो रहे थे। qqq इतिहास बोध पर प्रोपेगेंडा हावी आज 2020 के आते आते अगली पीढ़ी पूरी तरह इस रंग में रंग चुकी है। सत्ता इस भावना को भड़का रही है। इस पीढ़ी ने न युद्ध देखे है,न हिंसा, और न उस स्तर की गरीबी। फ्री डेटा और बकने की आजादी इसमे घी का काम कर रही है। नफरती बातों के लिए कोई लोक लाज नही है।अगर किसी को कुछ इतिहास बोध हो भी, तो उसे प्रोपेगेंडा से ध्वस्त किया जा रहा है। धर्मनिपेक्षता और लिब्रलिज्ज्म गाली है। नेहरू, गांधी मख़ौल के पात्र हैं। कोई आश्चर्य नही की जिन्ना स्टाईल का डायरेक्ट एक्शन यहां वहां देखने को मिल रहा है। लिंचिंग को स्वीकार्यता मिल चुकी है। जल्द ही ये अनकहा सिविल राइट हो जायेगा। विघटित समाज देश का निर्माण नहीं करता इसे रिवर्स करने का मौका हम खो चुके हैं। 2019 , पुरानी पीढ़ी के बचे लोगों के पास आखरी मौका था। अब तो 30 साल हमे यह सब बढ़ते क्रम में देखना है। कांग्रेस हमारा डीएनए थी। अब भाजपा होगी। और ये गांधीवादी समाजवाद की भाजपा नही। ये गोडसे, सावरकर, बाबू बजरंगी की भाजपा है। इतिहास में ऐसे शासन तबाही के रास्ते पर ले जाते देखे गए हैं। विघटित समाज कभी एक देश का निर्माण नहीं करता। सत्ता के अतिकेंद्रीकरण और धर्म के मिश्रण से औरंगजेब ने 150 साल से जमे मुगलिया सलतनत की जड़ें खोद दी थी। हमें तो अभी 75 नहीं हुए। ख़ैर, देश का जो होगा, सो होगा। वो राजनैतिक लड़ाई हारी जा चुकी है। 10 वर्ष की लगातार सत्ता किसी भी विचारधारा को गहरा आधार देने के लिए पर्याप्त है। इससे मोहभंग किसी बड़ी राष्ट्रीय क्षति के बाद ही होगा। आप इसका इंतजार ही कर सकते है, और इसके टलने की प्रार्थना कर सकते है। qqq सक्रिय लड़ाई अब घर पर मगर सक्रिय लड़ाई अब घर पर है। अपने बच्चों को इस जॉम्बीवाद से बचाने की। उनको टीवी से बचाना है, मोबाइल से बचाना है, उसके दोस्तों से बचाना है। सिनेमा हाल से बचाना है। किसी दल, संगठन से जुड़ने से बचाना है। नहीं बचाया, किसी दिन अपने , या किसी और के खून से लथपथ होकर घर आएगा। हम उसकी लाश से बातें कर रहे होंगे, या वो हमें किसी और लाश का जस्टिफिकेशन दे रहा होगा। देश चाहे जिसको सौंप दिया। घर बचा लीजिये। आख़िर बच्चे तो आपके हैं न ... (लेखक शिक्षाविद होने के साथ-साथ अंचल के मशहूर समाजसेवी हैं लेख में उनके निजी विचार हैं। )
ओपिनियन
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वन विभाग में चल रहा जंगल कानून, दिहाड़ी मजूदरों का एक साल से भुगतान नहीं
आसपास
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अगले 48 घंटे में रायगढ़ पहुंचेगा मॉनसून
मौसम
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गिद्ध... यह तस्वीर याद है आपको?
ओपिनियन
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बेटे-बेटियों को समझाइये डाक्टर नहीं बने !
ओपिनियन
वन विभाग में चल रहा जंगल कानून, दिहाड़ी मजूदरों का एक साल से भुगतान नहीं
रायगढ़ रेंज ऑफिस में सोमवार से मजदूर धरने पर, मजदूरों का 25 लाख का भुगतान बाकी
मजदूरों का शोषण होता था, हो रहा है और क्या होता ही रहेगा ?
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष: रायगढ़ का सबसे बड़ा मजदूर विद्रोह और वर्तमान में मजदूरों की स्थिति
अविनाश पंडा हिट एंड रन केस, पुलिस की थ्योरी पर उठ रहे सवाल!
परिजनों ने लगाया आरोप सीसीटीवी फुटेज से साफ है ड्राइवर को मिरगी का दौरा नहीं आया था
मुफ्त का श्रवण यंत्र और वसूल रहे 7 हजार रुपये
जतन केंद्र की बर्खात ऑडियोलॉजिस्ट ग्रामीणों से कर रही ठगी
धनकुबेरों का लोकतंत्र
संदर्भ : भारतीय लोकतंत्र की नई परिभाषा धनकुबेरों की, धनकुबेरों द्वारा, धनकुबेरों के लिये
सुरुज ले आंखी मिला के मनिस लोकतंत्र के जब्बर तिहार
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सरकार चुनने के लिए लोगों ने दिखाया उत्साह। बैसाख की भरी दोपहरी में भी लंबी कतारों में खड़े रहे मतदाता। लोकसभा क्षेत्र में 74.76 फीसदी वोटिंग हुई।
दिलचस्प आंकड़ों के आईने में रायगढ़ लोकसभा सीट
लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के मतदान के एक दिन पहले जिले में सन्नाटा फैला हुआ था। चुनाव काम में लगी गाड़ियां ही सड़कों पर आती-जाती दिखीं। इसके पहले प्रचार के अंतिम दिन दोनों दलों ने शहर मे रैली कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। कांग्रेस के तरफ से एनएसयूआई के अगुवाई में जहां रैली निकाली गई वहीं भाजपा ने अलग अलग क्षेत्रों में स्थानीय चेहरों के साथ रैली निकाली। हालांकि आम लोगों पर किसी भी रैली का असर नहीं दिखा। मतदाता अभी ख़ामोश है और 23 अप्रैल के इंताजर कर रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों पर गौर करें तो भाजपा प्रत्याशी विष्णुदेव साय को 6,62,478 वोट मिले थे वहीं कांग्रेस प्रत्याशी आरती सिंह को 4,45,728 वोट मिले थे और भाजपा ने 216450 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी लेकिन इस वर्ष चुनावी समीकरण बदल गए और रायगढ़ लोकसभा के सभी आठों विधानसभा में कांग्रेस के विधायक जीत कर आए हैं और इन सभी विधायकों के जीत का अंतर 1,97,527 है। वहीं भाजपा ने वर्तमान सांसद विष्णु देव साय की टिकट काटकर नए प्रत्याशी गोमती साय को मैदान में उतारा है ऐसे में देखना होगा कि क्या भाजपा नए और महिला प्रत्याशी के बल पर इस आंकड़े को पाटने में सक्षम हो पाती है? रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र में करीब 17 लाख मतदाता 14 प्रत्याशियों के भविष्य तय करेंगे। जिसमें 10 लाख 99 हजार मतदाता रायगढ़ जिले के हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में 8 विधानसभा क्षेत्र हैं रायगढ़, सारंगढ़, धरमजयगढ़, खरसिया, लैलूंगा, पत्थलगांव, कुनकुरी, जशपुर। इन सभी सीटों पर फिलहाल कांग्रेस काबिज है। पिछले चार बार से लगातार भाजपा ने यहां जीत दर्ज की है। पिछले विधानसभा चुनाव में जशपुर जिले की तीनों सीट भाजपा से कांग्रेस ने छीन ली। जशपुर और कुनकुरी लगातार 35 वर्षों से भाजपा के कब्जे में थी। यहां सांसद ने एक बार भाजपा की टिकट से विधानसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस ने दो बार अपने विधायकों को लोकसभा का टिकट दिया लेकिन न तो सांसद विधायक बन पाए और न ही विधायक कभी सांसद। इस बार फिर कांग्रेस ने धरमजयगढ़ विधायक को टिकट दी है। लालजीत राठिया के नाना उमेद सिंह राठिया यहां से सांसद रह चुके है और पिता संयुक्त मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के सरकारों में मंत्री लेकिन गोमती साय की कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है। वे वर्तमान में जशपुर जिले पंचायत अध्यक्ष हैं। रायगढ़ सीट से कांग्रेस ने वर्ष 1967, 1980, 1985, 1989, 1991, 1996, 1999 एवं 2014 में महिला प्रत्याशियों को मौका दिया था। इसमें चार बार महिलाएं सफल हुई है जबकि भाजपा ने इस सीट से पहली बार किसी महिला प्रत्याशी को मौका दिया है। qqq उम्मीदवार घर-घर जाकर कर रहे संपर्क लोकसभा निर्वाचन के तीसरे और प्रदेश में अंतिम चरण में सात लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए प्रचार का काम रविवार शाम पाँच बजे समाप्त हो गया था। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुब्रत साहू ने रायगढ़ एक्सप्रेस से हुई खास बातचीत में बताया कि तीसरे चरण में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जांजगीर, कोरबा, रायगढ़ तथा सरगुजा लोकसभा क्षेत्रों के लिए 23 अप्रैल को मतदान होगा। लोकसभा क्षेत्रों के लिए कुल 123 अभ्यर्थी निर्वाचन में हिस्सा ले रहें हैं। प्रचार का शोर थमने के बाद अभ्यर्थी घर-घर जाकर और व्यक्तिगत संपर्क कर अपना प्रचार कर सकेंगे। सुब्रत साहू ने बताया कि लोकसभा निर्वाचन के तीसरे चरण में 123 अभ्यर्थियों (रायपुर और बिलासपुर में 25, दुर्ग में 21, कोरबा में 13, रायगढ़ में 14, जांजगीर में 15 तथा सरगुजा में 10 अभ्यर्थी के निर्वाचन के लिए एक करोड़ 27 लाख 13 हजार 816 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। शत प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने के लिए 15 हजार 408 मतदान केन्द्र बनाए गए हैं। छत्तीसगढ़ में लोकसभा निर्वाचन के दो चरणों में 4 लोकसभा क्षेत्रों के लिए 11 तथा 18 अप्रैल को मतदान हो चुका है। उन्होंने बताया कि तृतीय चरण के मतदान के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। लोकसभा निर्वाचन के दौरान तृतीय चरण में सबसे अधिक बिलासपुर और रायपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में 25 अभ्यर्थी वहीं सरगुजा लोकसभा क्षेत्र के लिए सबसे कम 10 अभ्यर्थी हैं। साहू ने बताया कि कुल मतदाताओं में 64 लाख 16 हजार 252 पुरूष, 62 लाख 96 हजार 992 महिला तथा 572 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं। qqq मीडिया पर चुनाव आयोग की पैनी नज़र निर्वाचन के दौरान मीडिया के गलत उपयोग को रोकने भारत निर्वाचन आयोग ने व्यापक तैयारियां की हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि मतदान दिवस तथा उसके पहले दिन कोई भी प्रत्याशी, राजनीतिक दल अथवा अन्य कोई संगठन राजनीतिक विज्ञापन प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित करने के पूर्व मीडिया प्रमाणन समिति से पूर्व प्रमाणन सुनिश्चित करेंगे। इसके लिए भारत निर्वाचन आयोग ने जिला तथा राज्य मीडिया प्रमाणन समिति को प्रमाणन हेतु प्राप्त आवेदन पर त्वरित निर्णय लेने के निर्देश पहले ही दे दिए हैं। भारत निर्वाचन आयोग के परिपत्र के अनुसार प्रदेश में तृतीय चरण के निर्वाचन के लिए 23 अप्रैल तथा उसके एक दिवस पहले 22 अप्रैल 2019 को प्रिंट मीडिया में राजनीतिक विज्ञापन जारी करने से पहले मीडिया प्रमाणन समिति से विज्ञापन का पूर्व प्रमाणन कराना आवश्यक है। इसी प्रकार लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1951 के प्रावधानों के तहत लोकसभा निर्वाचन के लिए पहले चरण का मतदान शुरू होने के 48 घंटे पहले से लेकर लोकसभा तथा विधानसभा निर्वाचन वाले सभी राज्यों में मतदान की समाप्ति के आधा घंटा बाद तक तक मीडिया द्वारा एक्जिट पोल और इसके परिणाम का प्रकाशन-प्रसारण प्रतिबंधित किया गया है। इस अवधि में कोई भी व्यक्ति किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में एक्जिट पोल सर्वेक्षण नहीं कर सकेगा और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, चलचित्र, टेलीविजन या किसी अन्य माध्यम पर इसके परिणाम का प्रकाशन-प्रसारण नहीं कर सकेगा। इसके अतिरिक्त इस अवधि में किसी भी प्रकार के जनमत सर्वेक्षण की रिपोर्ट का प्रकाशन अथवा प्रसारण भी प्रतिबंधित होगा।
न तो शाह माहौल बना पाए न ही भूपेश
दिग्गज नेताओं की सभा में नहीं जुट रहे लोग
अगले 48 घंटे में रायगढ़ पहुंचेगा मॉनसून
शुक्रवार सुबह जगदलपुर पार कर चुका है मॉनसून, अगले तूफान का नाम होगा छत्तीसगढ़ी शब्द गर्रा
15 जून तक आएगा मानसून, 1100 एमएम बारिश की संभावना
2017 में 940 एमएम और 2018 में 942 एमएम बारिश हुई थी
पारा पहुंचा 38 डिग्री, मौसम बदलने के आसार
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस फिर लाएगी आंधी और गरज के साथ बारिश
बासंती बयार में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस, होगी बारिश
आगामी दो दिनों तक बने बारिश के आसार,पश्चिमी विक्षोभ के कारण होगी बारिश
पारा 40 पार, बच्चे निजी स्कूलों में हो रहे बेहोश, फिर भी लग रही हैं कक्षाएं
राज्य सरकार के आदेश को ताक पर रख भीषण गर्मी में भी चल रहे निजी स्कूल
रायगढ़ की प्रगति ने सीबीएसई 10वीं बोर्ड में किया स्टेट टॉप, देशभर में पाया तीसरा स्थान
पहली बार रायगढ़ के किसी छात्र ने किया सीबीएसई में स्टेट टॉप
ऐ भगत सिंह तू जिंदा है, हर एक लहू के कतरे में..
शहीद दिवस पर युवा परिसंवाद, हमारी नज़रों में भगत सिंह
केआईटी की बढ़ी मुसीबतें, नई बिल्डिंग लोकसभा चुनाव का स्ट्रांग रूम
साढ़े 13 करोड़ में बनी नई बिल्डिंग का अभी तक लोकार्पण नहीं हुआ
खबरों की बहती बयार के 50 बरस
शहरनामा : मौलिक पत्रकारिता करते हुए रायगढ़ के पहले अखबार बयार की गोल्डन जुबली
अ डॉग डाइस, विस्थापन के मर्म को बताती रायगढ़ की पहली फीचर फिल्म
विशेष : रिलायंस की नौकरी छोड़कर रायगढ़िया ने बनाई रायगढ़ पर फिल्म
रायगढ़ के असल शिल्पी श्यामजी सावरिया और जयराम वालजी
शहरनामा : 130 साल से भी अधिक समय से रायगढ़ में बसे गुजरातियों की कहानी
लोक कलाओं को जीवित रखने कर रहे नित-नए प्रयोग
साक्षात्कार : रायपुर के रंगकर्मी निसार अली के नाचा-थियेटर का सफर
देश चाहे जिसको सौंप दिया, घर बचा लीजिये। आख़िर बच्चे तो आपके हैं न !
एक पीढ़ी की उम्र 30 साल होती है। आजादी के दौरान की पीढ़ी का समय आप 1960 तक मान सकते है। उस पीढ़ी ने आजादी की लड़ाई , बंटवारा और हिंसा का नंगा नाच देखा। वो पीढ़ी इस उथल-पुथल के दौर से दग्ध थी। अपने बच्चों को भाईचारे , एकता और धर्मनिरपेक्षता का संदेश दिया। विज्ञान, नए दौर और सहिष्णुता की घुट्टी दी। उसने गरीबी देखी थी, शिक्षा और परिश्रम से गरीबी से उबरने की राहें खोजने की समझ अपने बच्चो को दी। दूसरी पीढ़ी कोई 1990-95 तक समझिये। इस दौरान शिक्षित, सहिष्णु, परिश्रमी वर्ग में देश को मजबूत बनाने में समय लगाया। खाक से शुरू कर एक सामान्य मध्यम, कंफर्टेबल जीवन अपने बच्चो को दिया। उसे हर तकलीफ़ से बचाया। रिलेटव इज के साथ बढ़ी यह पीढ़ी, गढ़े हुए मन्दिर मस्जिद विवाद, मुम्बई, गोधरा, कश्मीर अहमदाबाद की गवाह हुई। नई सदी में इनका वक्त आया, तो दबे छिपे रूप में ही सही, कंम्यूनलिज्म दिमाग के एक हिस्से बैठा हुआ था। निजी बातचीत में "उनको" ठीक करने की बाते करता था। मौका मिले तो निपटा देने की सोच थी। देश की राजनीति में इस भावना का दोहन करने वाले मजबूत हो रहे थे। qqq इतिहास बोध पर प्रोपेगेंडा हावी आज 2020 के आते आते अगली पीढ़ी पूरी तरह इस रंग में रंग चुकी है। सत्ता इस भावना को भड़का रही है। इस पीढ़ी ने न युद्ध देखे है,न हिंसा, और न उस स्तर की गरीबी। फ्री डेटा और बकने की आजादी इसमे घी का काम कर रही है। नफरती बातों के लिए कोई लोक लाज नही है।अगर किसी को कुछ इतिहास बोध हो भी, तो उसे प्रोपेगेंडा से ध्वस्त किया जा रहा है। धर्मनिपेक्षता और लिब्रलिज्ज्म गाली है। नेहरू, गांधी मख़ौल के पात्र हैं। कोई आश्चर्य नही की जिन्ना स्टाईल का डायरेक्ट एक्शन यहां वहां देखने को मिल रहा है। लिंचिंग को स्वीकार्यता मिल चुकी है। जल्द ही ये अनकहा सिविल राइट हो जायेगा। विघटित समाज देश का निर्माण नहीं करता इसे रिवर्स करने का मौका हम खो चुके हैं। 2019 , पुरानी पीढ़ी के बचे लोगों के पास आखरी मौका था। अब तो 30 साल हमे यह सब बढ़ते क्रम में देखना है। कांग्रेस हमारा डीएनए थी। अब भाजपा होगी। और ये गांधीवादी समाजवाद की भाजपा नही। ये गोडसे, सावरकर, बाबू बजरंगी की भाजपा है। इतिहास में ऐसे शासन तबाही के रास्ते पर ले जाते देखे गए हैं। विघटित समाज कभी एक देश का निर्माण नहीं करता। सत्ता के अतिकेंद्रीकरण और धर्म के मिश्रण से औरंगजेब ने 150 साल से जमे मुगलिया सलतनत की जड़ें खोद दी थी। हमें तो अभी 75 नहीं हुए। ख़ैर, देश का जो होगा, सो होगा। वो राजनैतिक लड़ाई हारी जा चुकी है। 10 वर्ष की लगातार सत्ता किसी भी विचारधारा को गहरा आधार देने के लिए पर्याप्त है। इससे मोहभंग किसी बड़ी राष्ट्रीय क्षति के बाद ही होगा। आप इसका इंतजार ही कर सकते है, और इसके टलने की प्रार्थना कर सकते है। qqq सक्रिय लड़ाई अब घर पर मगर सक्रिय लड़ाई अब घर पर है। अपने बच्चों को इस जॉम्बीवाद से बचाने की। उनको टीवी से बचाना है, मोबाइल से बचाना है, उसके दोस्तों से बचाना है। सिनेमा हाल से बचाना है। किसी दल, संगठन से जुड़ने से बचाना है। नहीं बचाया, किसी दिन अपने , या किसी और के खून से लथपथ होकर घर आएगा। हम उसकी लाश से बातें कर रहे होंगे, या वो हमें किसी और लाश का जस्टिफिकेशन दे रहा होगा। देश चाहे जिसको सौंप दिया। घर बचा लीजिये। आख़िर बच्चे तो आपके हैं न ... (लेखक शिक्षाविद होने के साथ-साथ अंचल के मशहूर समाजसेवी हैं लेख में उनके निजी विचार हैं। )
गिद्ध... यह तस्वीर याद है आपको?
संदर्भ : मुजफ्फरपुर अस्पताल में मीडिया का तांडव
बेटे-बेटियों को समझाइये डाक्टर नहीं बने !
ख़ासतौर पर प्रतिभाशाली हैं तो पापड़ बनाना सीखें । मगर डाक्टर बिल्कुल न बनें।
क्या रायगढ़ प्रदूषण मुक्त जिला बनेगा, क्या इसका भविष्य संवरेगा?
जिले के सभी विधायक एक ही दल के हैं। सरकार भी उनके ही दल की है तब रायगढ़ के समुचित विकास की उम्मीदें ज्यादा बढ़ गई है।
इप्टा रायगढ़ के 25वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की झलकियां
27 से 31 जनवरी तक पॉलिटेक्निक ऑडिटोरिम में इप्टा रायगढ़ द्वारा 25वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जिसमें चार नाटक एवं दो फीचर फिल्में दिखाई गईं। समारोह की शुरुआत रायपुर के मशहूर रंगकर्मी मिर्जा मसूद को 10वां शरदचंद्र वैरागकर अवार्ड देकर की गई। यह कूवत सिर्फ रंगमंच रखता है जो वर्तमान सत्ता के मठाधीशों पर अजब मदारी गजब तमाशा नाटक के माध्यम से सीधे कटाक्ष कर सकता है। जहां एक मदारी को राजा बना दिया जाता है, शब्दों के अस्तित्व को खत्म कर दिया जाता है। बंदर राष्ट्रीय पशु बन जाता है। गांधी चौक नाटक में गांधीजी की प्रतिमा स्वयं यह चलकर वहां से हट जाती है कि जब रक्षक की भक्षक बन गए तो कोई क्या कर सकता है। नोटबंदी और जीएसटी पर गांव वाले सीधे प्रहार करते हैं। सुबह होने वाली है की लेखी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध होने के बाद लोगों को जागरूक करने को किताब लिखती और किताब को ही फांसी हो जाती है। बोल की लब आजाद हैं तेरे लोगों को दर्शकदीर्घा में झकघोर के रख देती है। तुरूप और भूलन जैसी फिल्में लोगों के मनोरंजन के अलावा दमदार संदेश भी देती है। तो देखें इस शानदार नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की कुछ झलकियां
70 वें गणतंत्र दिवस के फुल ड्रेस रिहर्सल की मनमोहक तस्वीरें
जिले में 70वां गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। गणतंत्र दिवस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल दो दिन पहले की जाती है। महीने भर से चल रही तैयारी को 25 जनवरी के दिन आराम दिया जाता है। इस गणतंत्र दिवस समारोह के रंग को देखिए इन तस्वारों से...
तस्वीरों में देखें 19वें युवा महोत्सव के रंग
खेल एवं युवा कल्याण विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा रायगढ़ स्टेडियम, पॉलीटेक्निक ऑडिटोरिम और न्यू ऑडिटोरियम में तीन दिवसीय 19 वां राज्य स्तरीय उत्सव संपन्न हुआ। जिसमें सूबे के 27 जिलों के युवाओं ने भाग लिया। तीन दिन तक शहर के लोगों को प्रदेश के लोकरंग, लोक संस्कृति, लोक नृत्य की झलक देखने को मिली। तीन दिन चले इस युवा उत्सव की चुनिंदा फोटो को हमने अपनी गैलरी में शामिल किया है।
तस्वीरों में देखें रायगढ़ की शानदार रंगोलियों को
दिवाली में हुआ क्रिएटिव रंगोली कॉम्पिटिशन
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