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Raigarh Express, news of raigarh chhattisgarh

Wednesday, February 01, 2023
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अलंकार फार्म हाउस किचन रेस्त्रां में नहीं डॉक्टर के घर में मिले फायरिंग के सुबूत
पुलिस की पड़ताल में सामने आया तथ्य
आसपास
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कार्डिनल रोटी बैंक मना रहा हर घर मुस्कान वाली दिवाली
हमारे बच्चे
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जाने सीपीआर और बचाएं जान
आसपास
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ईडी के छापे से हुआ भूपेश सरकार है भ्रष्ट :ओपी चौधरी
राजनीति
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शंखनाद परिवर्तन यात्रा से भाजपा का शक्ति प्रदर्शन
राजनीति
अलंकार फार्म हाउस किचन रेस्त्रां में नहीं डॉक्टर के घर में मिले फायरिंग के सुबूत
पुलिस की पड़ताल में सामने आया तथ्य
जाने सीपीआर और बचाएं जान
सीपीआर को हर व्यक्ति को सिखाने के लिए प्रयास करेंगे : डॉ. मनोज गोयल
डॉ. सूर्यनारायण केशरी : जिले के सबसे शांत डॉक्टर बीते 3 दशक से दे रहे सेवाएं
सबसे चुनौती भरा रहा डॉ. एसएन केशरी का कार्यकाल
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डटी है स्वास्थ्य विभाग की टीम
किसी भी आपात स्थिति में तुरंत डॉक्टर से करें संपर्क: सीएमएचओ डॉ. केशरी
ईडी के छापे से हुआ भूपेश सरकार है भ्रष्ट :ओपी चौधरी
ईडी के प्रेस नोट को लेकर भाजपा की प्रेस वार्ता, कांग्रेस से की 5 मांग
शंखनाद परिवर्तन यात्रा से भाजपा का शक्ति प्रदर्शन
पैर का मोच मूव से ठीक हो जाएगा, सरकार खिसक रही कौन सा मूव लगाओगे :ओपी चौधरी
एक्शन मोड में भाजपा, संगठन को ही तवज्जो
शर्तिया वापसी संगठन का बड़ा दांव,एक-एक सीट पर रखी जा रही पैनी नज़र
विजय अग्रवाल : समंदर जो लौट आया
किंग या फिर किंगमेकर, शक्ति प्रदर्शन के कई मायने
किसी भी आपात स्थिति से निबटने स्वास्थ्य अमला पूरी तरह से तैयार: सीएमएचओ डॉ. केशरी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन का स्वास्थ्य सेवाएँ पहुंचाने पर जोर*
रायगढ़ में मूसलाधार बारिश की संभावना
बारिश से महानदी में बढ़ा जलस्तर, रायगढ़ जिला प्रशासन अलर्ट
आने वाले तीन दिनों में भारी बारिश की चेतावनी
मॉनसून का पहला ऑरेंज अलर्ट
27% कम गिरा पानी, अब रफ्तार पकड़ भरपाई की आशा
कल भी बने बारिश के आसार
कार्डिनल रोटी बैंक मना रहा हर घर मुस्कान वाली दिवाली
2 साल से बचे हुए खाने को जरूरमंदों में बांटता है कार्डिनल रोटी बैंक
जो रायगढ़ चाहता है उसे सरकार क्यों नहीं चाहती
परिवार समेत शहीद हुए कर्नल विप्लव त्रिपाठी कहीं भुला तो नहीं दिये जाएंगे
कोल माइंस क्षेत्र में स्कूली शिक्षा में सार्थक बदलाव ला रहा हिंडाल्को
माइनिंग क्षेत्र के 7 गांवों के बच्चों की शिक्षा का केंद्र बना गुरुकुल स्कूल
अधिक एंटीबायोयटिक दवाओं का सेवन ठीक नहीं: डॉ. एमएम श्रीवास्तव
बच्चों को दें बेहतर खानपान की सीख, मौसमी बीमारियों से कम होंगे बीमार
सेठ पालूराम और सेठ किरोड़ीमल ने ऐसे बदली रायगढ़ की तस्वीर
रायगढ़ के उद्योगनगरी बनने की कहानी
पंडित सिद्धेश्वर गुरू : एक था ग्रामीण गांधी
शहरनामा : आजादी की लड़ाई के झंडाबरदार और स्टेट कांग्रेस के संस्थापक गुरू बाबा कितने याद हैं रायगढ़ियों को
चक्रधर समारोह : 5 लाख का बजट और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग
प्रशासन ने शुरू की तैयारी, कलाकारों के रिकॉर्डिंग आना शुरू
एमसीएच : कोरोना मरीजों को दे रहा जीवनदान
ठीक हुए मरीज पत्र लिखकर जता रहे एमसीएच का आभार, पत्र हुए वायरल
घर-घर तिरंगा के बाद, घर-घर हिन्दी
एशिया के 48 देशों में भारत को छोड़कर अंग्रेजी किसी भी देश की मुख्य भाषा नहीं है
केन्द्र के बिजली महोत्सव को रायगढ़ में लगा झटका!
आजादी के अमृत महोत्सव के तहत गुरूवार को नगर निगम के लखटकिया ऑडिटोरियम में पूरे ताम-झाम के साथ बिजली विभाग और एनटीपीसी ने बिजली महोत्सव का आयोजन किया। पूरे देश में उज्जवल भारत-उज्जवल भविष्य पावर एट 2047 महोत्सव मनाया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक जन भागीदारी हो और बिजली के क्षेत्र में हुए विकास को बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचाया जा सके, लेकिन इस कार्यक्रम के बारे में न तो लोगों को जानकारी थी और न ही मीडिया बिरादरी को। सब कुछ एकदम गुपचुप तरीके से हुआ। मौके पर मौजूद बिजली विभाग के अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की, कि जानबूझ कर इतने वृहद कार्यक्रम को लो रखा गया। यहां लो का मतलब है कि जानकर प्रचार नहीं करना। चूंकि कार्यक्रम भाजपा शासित केन्द्र सरकार का है और राज्य में कांग्रेस की सरकार। जाहिर है राजनीति तो होगी ही। केन्द्र की ओर से जारी किये गये बैनर, पोस्टर, फ्लेक्स में से केन्द्रीय नेतृत्व का हर चेहरा गायब था और सूबे के मुखिया का हंसता हुआ नूरानी चेहरा कई पोस्टरों में दिखलाई दे रहा था। कार्यक्रम तय समय से 1 घंटे देर से शुरू हुआ। कार्यक्रम में मौजूद लोग जबरदस्ती बुलाये हुए से प्रतीत हो रहे थे। मंच में फूलों की ऐसी सजावट की गई थी मानों किसी बड़े धनाड्य सेठ के बेटे की शादी हो। फुल साईज का एलईडी डिस्प्ले भी मौजूद था और जो मौजूद नहीं थे वे थे जागरूक और स्थानीय लोग। कार्यक्रम को लेकर राजनीति की बू बुधवार रात से ही आने लगी थी जब बिजली विभाग के अधिकारी गुपचुप तरीके से छपे आमंत्रण पत्र को सोशल मीडिया पर शेयर कर चुनिंदा लोगों को आमंत्रित करने की कूटरचना करने में जुट गये जबकि इतने बड़े ऑडिटोरियम, इतना महंगा इंतेजाम और राष्ट्रीय कार्यक्रम को लेकर माहौल तो कई दिनों पहले से ही तैयार हो जाता है। छोटे से कार्यक्रम को लेकर शो-ऑफ करने वाला विभाग जिसमें एनटीपीसी भी शामिल है। एक पौधा भी रोप देता है तो खूब प्रचार करता है, लेकिन यहां वह राजनीतिक दबाव के आगे अपने घुटने टेक देता है। मजे की बात यह है कि इसमें भाजपा के लोगों को जानकर नहीं आमंत्रित किया गया था। हरेली की भीड़ और छुट्टी का फायदा इस महोत्सव को मिल गया।
थप्पड़ मारने से स्कूल का गुस्सा ठंडा नहीं होता
निजी स्कूल के शिक्षकों का शोषण,तनख्वाह कम और काम ज्यादा, प्रबंधन का बुरा बर्ताव
घृणा और हिंंसा के दौर में आम आदमी...
हिंंसा किसी भी क्षेत्र मे बुरी होती है और हिंसक होना हमारी पाशविक प्रवृत्ति को ही दर्शाता है।फिर वह हिंंसा चाहे देश, धर्म या राजनीतिक...... किसी भी कारणों से पनपती हो। उसका शिकार अमूमन साधारण आदमी ही क्यों होता हैं यह गहन चिंतन का विषय होना चाहिए।तब यह लगता है कि उपरोक्त सभी क्षेत्र के स्वयंभू इन साधारण लोगों का इस्तेमाल एक टूलकिट की तरह करते हैं क्या? यह प्रश्न है ? एक साधारण दर्जी को अपनी भावाभिव्यक्ति की फीस अपनी जान की कीमत देकर चुकानी पडी जबकि सोशल मीडिया मे घमासान मचा हुआ हुआ है ऐसे अनेक मुद्दों पर।तब लगता है कन्हैया,रियाज और गास मोहम्मद क्या इन तीनों का इस्तेमाल हथियारों के रूप मे किया गया है।रियाज और मुहम्मद की फितरत में एक वर्ग विशेष, एक धर्म विशेष के लिए नफरत इस कदर कूट कर भरी गई यह उनके मारने और साथ ही वीडियो बनाने के अंदाज से ही पता चलता है। मारने के अलावा वो दोनों जिस का आंतक पैदा चाहते थे उसमें वे पूरी तरह सफल रहे लेकिन टारगेट कन्हैयालाल की हत्या यह महज एक संयोग नहीं साजिश हो सकती है जिसकी कीमत उसे चुकानी पडी और खामियाजा पूरा परिवार आजीवन भोगेगा।कोई भी फौरी सहायता उनके परिवार के दुख के लिए राहत का एक फाहा मात्र है।यह बात पूरे तौर पर सही नहीं है कि समय के साथ गहरे जख्म भर जाते है। जख्म दिखावे तौर पर भर भी जाऐं तो निशान ताउम्र नहीं मिटते।इस पीडा़ को वे ही समझ सकते हैं जिन्होंने खोया है।स्मृतियों के साथ जीवित रहना किसी लाईलाज पीडा के साथ जीवित रहने जैसा होता है। जिस समाज मे हम जी रहे है उस समाज के चंद मठाधीशों और उनके अनुयायियों द्वारा जो जहर विभिन्न माध्यमों द्वारा फैलाया जा रहा है उसके पीछे मकसद होगें आम लोगों के लिए ऐसे मकसदों को जानना जरूरी है तभी घृणा और हिंसा के उमडते ज्वार पर कारगर रोक लगाई जा सकती है। जहां एक ओर -50डिग्री से +50 तक नेटवर्क कव्हरेज से दूर तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारी सेना देशहित के लिए अपनी जान की बाजी तक लगाने नहीं हिचकिचाती है वहीं चंद लोग भरपेट खाकर आरामदायक कमरों मे अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए देश को ही दांव पर लगा रहे हैं। सम्मान न सही, देश की अखंडता और एकता की जड़ों पर मट्ठा डालने का प्रयास न करें तो बेहतर होता। (लेखिका वरिष्ठ शिक्षाविद और समाजसेवी हैं, लेख में उनके निजी विचार हैं)
कलेक्टर भीम सिंह ने भारी बारिश के बीच संभाला मोर्चा, देखें तस्वीरें
निगम अमला बीती रात से आयुक्त के साथ पूरे शहर में डटा हुआ है
तस्वीरों में देखें रायगढ़ में जनता कर्फ्यू का असर
22 मार्च यानी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर जिले में भी जनता कर्फ्यू का असर देखने को मिला। दोपहर तक पूरा शहर स्वस्फूर्त बंद था। हर मुख्य मार्ग और बाजार बंद मिले। गली-कूचे तक कोई व्यक्ति बाहर नहीं निकला।
हरि बोल, जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ निकली रथयात्रा, देखें गैलरी
रायगढ़ में दो दिनों की रथयात्रा आयोजित होती रही है। इसी क्रम में आज रथ द्वितिया के दिन शहर के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भगवान श्री को विधिविधान पूर्वक पूजा अर्चना पश्चात मंदिर के गर्भगृह तथा मंदिर परिसर से जय जगन्नाथ के जयघोष और घंट शंख ध्वनि के बीच ससम्मान बाहर निकाला गया। राजापारा स्थित प्रांगढ़ में मेले सा माहौल था और हजारो की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण भगवान श्री के दर्शन करने के लिए पहुंचे हुए थे। इससे पहले कल भगवान जगन्नाथ की विधि विधान से पूजा की गई जिसे फोटोग्राफर वेदव्यास गुप्ता ने अपने कैमरे में कैद किया।
इप्टा रायगढ़ के 25वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की झलकियां
27 से 31 जनवरी तक पॉलिटेक्निक ऑडिटोरिम में इप्टा रायगढ़ द्वारा 25वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जिसमें चार नाटक एवं दो फीचर फिल्में दिखाई गईं। समारोह की शुरुआत रायपुर के मशहूर रंगकर्मी मिर्जा मसूद को 10वां शरदचंद्र वैरागकर अवार्ड देकर की गई। यह कूवत सिर्फ रंगमंच रखता है जो वर्तमान सत्ता के मठाधीशों पर अजब मदारी गजब तमाशा नाटक के माध्यम से सीधे कटाक्ष कर सकता है। जहां एक मदारी को राजा बना दिया जाता है, शब्दों के अस्तित्व को खत्म कर दिया जाता है। बंदर राष्ट्रीय पशु बन जाता है। गांधी चौक नाटक में गांधीजी की प्रतिमा स्वयं यह चलकर वहां से हट जाती है कि जब रक्षक की भक्षक बन गए तो कोई क्या कर सकता है। नोटबंदी और जीएसटी पर गांव वाले सीधे प्रहार करते हैं। सुबह होने वाली है की लेखी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध होने के बाद लोगों को जागरूक करने को किताब लिखती और किताब को ही फांसी हो जाती है। बोल की लब आजाद हैं तेरे लोगों को दर्शकदीर्घा में झकघोर के रख देती है। तुरूप और भूलन जैसी फिल्में लोगों के मनोरंजन के अलावा दमदार संदेश भी देती है। तो देखें इस शानदार नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की कुछ झलकियां
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