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Thursday, February 25, 2021
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स्वच्छता दूतों के साथ नाइंसाफी बर्दाश्त नही: ओपी चौधरी
प्रदेश भाजपा के मंत्री ओपी चौधरी ने आज कलेक्टोरेट के सामने आंदोलनरत स्वच्छताकर्मियों के बीच जाकर उनके आंदोलन का समर्थन किया। साथ में प्रदेश भाजपा के कार्यसमिति सदस्य गुरुपाल सिंह भल्ला एवं जिला भाजपा के प्रवक्ता मनीष शर्मा भी आंदोलन के समर्थन में खड़े नजर आये। स्वच्छताकर्मियों का साथ देते हुए ओपी चौधरी ने कहा कि यह प्रदेश सरकार की मंशा को स्पष्ट कर रही है कि उनको, इनके साथ हो रहे अन्याय से कोई सारोकार नहीं। हम सभी जानते है कि हमारा विश्व कोविड-19 जैसे भयंकर महामारी से जुझ रहा है ऐसे विपरित परिस्थितियों में जब मानव स्वंय अपने सगे संबंधियों से दुरी बनाकर रहने में विवश है, पुत्र अपने पिता की अर्थी को कांधा नही दे पा रहा, प्रकति के साथ हुये छेड़छाड़ का दंड हम सभी ने भोगा। ऐसे कठिन दौर में हमारी सेवा के लिये यदि कोई खड़ा है तो वह है हमारे स्वच्छता दूत एवं स्वास्थ्य दूत। आज भूपेश राज में हमारे यह स्वच्छता दूत अपने लिये इंसाफ मांगने, धरने में बैठने को मजबूर है। कोरे वादे एवं झुठ की बुनियाद डालकर इन्होने सत्ता रूपी इमारत खड़ी करी है तो इनका हृदय भी उसी तरह कठोर हो चला है। जो इनको स्वच्छता दूतों की तकलीफ नजर नहीं आ रही। आज जिला भाजपा की बैठक में रायगढ़ आये ओपी चौधरी को जैसे ही स्वच्छताकर्मियों के आंदोलन की खबर लगी वे तत्काल धरना स्थल में पहॅुचकर स्वच्छता कर्मियों की व्यथा सुनी। स्वचछता कर्मियों ने बताया कि राज्य आपदा मिशन निधीमत अंतर्गत इन्हे 29.09.2020 से स्वच्छताकर्मी पद मेडिकल कॉलेज रायगढ़ में नियुक्त किया गया है। वो भी ऐसे कठिन दौर में जब मानव समाज एक छोटे से अदृश्य वायरस के डर से घरों में कैद था ,ये अपना सामाजिक कर्तव्य निभाने, इन पदों में कार्यरत हुये परंतु अब स्थिति पहले से बेहतर है तो इन्हे इनके कार्यो से मुक्त किया जा रहा है। स्वच्छता कर्मियों की टीम को महसूस कर ओ.पी. चौधरी ने तत्काल जिला प्रशासन के मुखिया से बात की और आंदोलनरत स्वच्छता दूतों को इनसे मिलवाया। कड़े लहजे में ओपी ने कहा कि इनके साथ हो रही नाइंसाफी हमें मंजूर नहीं यदि जिला प्रशासन तत्काल इनके आवेदन पर सहानुभूति पूर्वक विचार नहीं करती तो पूरी भाजपा मुखर होकर इसके लिये आंदोलन करेगी। इन्होने कहा कि सर्वप्रथम कल ही इन स्वच्छता दूतों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज दी जाये। केन्द्र सरकार की मंशा कोरोना वैक्सीन को लेकर बेहद स्पष्ट है कि स्वास्थ्य कर्मचारी एवं स्वच्छताकर्मियों को पहले चरण में ही वैक्सीन लगना है परंतु हमने कोरोना काल के प्रथम माह से ही प्रदेश सरकार की विपरीत कार्यप्रणाली को देखा है इनकी इच्छाशक्ति है ही नही कि ये इस भयंकर महामारी से लड़ सकें। प्रदेश कार्यसमिति सदस्य गुरुपाल सिंह भल्ला ने भी इनको आश्वस्त करते हुये कहा कि मै पूरी उर्जा के साथ आप लोगो को न्याय दिलाने हेतु संघर्ष करुंगा।
राजनीति
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मैं खाकी हूँ : यह शिवांश नहीं एक विश्वास की जीत है
आसपास
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एसएस स्टील की जनसुनवाई: झूठी ईआईए रिपोर्ट के आधार पर होगी !
आसपास
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वैलेंटाइ डे को अनोखे तरीक से मनाया रायगढ़ के लोगों ने
हमारे बच्चे
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लैंड, सैंड, कोल और लीकर माफिया की है कांग्रेस सरकार : डॉ. रमन सिंह
राजनीति
मैं खाकी हूँ : यह शिवांश नहीं एक विश्वास की जीत है
खरसिया के एक व्यावसायिक परिवार के चिराग का अपहरण फिरौती के मकसद से किया गया था जिसे रायगढ़ पुलिस ने महज ८ घंटों में सुलझाकर जिस प्रकार अपह्त बच्चे की सकुशल वापसी की है वह वाकई प्रशंसनीय है। रायगढ़वासियों ने इन बीते ग्यारह माह में पुलिस प्रशासन का जो चेहरा देखा है वह उनके लिए अकल्पनीय है। लम्बे-अरसे से कोरोना से जूझते रायगढ़वासियों के लिये यह घटना एक नई ऊर्जा का संचार करती है, एक नया विश्वास रचती है। अमूमन पुलिस का चेहरा आम जनमानस में एक भय मिश्रित कौतूहल से भरा होता है लेकिन साथ ही आश्चर्यजनक पहलू एक यह भी है कि मुसीबतों में उनकी उपस्थिति मात्र ही उसे साहस भी प्रदान करती है। गाली गुफ्तारों के मंगलाचरण से अपने दिन की शुरूवात करने वाली पुलिस के भीतर भी एक इन्सानी दिल न केवल अपने लिए समाज के लिए भी उसी संवदेनशीलता से धड़कता है ये घटना यह दर्शाता है। खुदा न खास्ता यदि उस बच्चे को ढूंढऩे में एक या दो दिन और लग जाते या उसके साथ कोई अनहोनी घटित हो जाती तो सोशल मीडिया से लेकर प्रिंट मीडिया तक इस विभाग की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर बाकी नहीं रहने देते। देश के अतिरेक का दौर उफान पर चल रहा है अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर जो नफरत और आक्रोश आम लोगों में पनपाई जा रही है वह वाकई शोचनीय है। खैर इसे हटाइए और अपने शहर पर फिर से बात केन्द्रित करें तो इसमें कोई दो राय नहीं कि तकरीबन पिछले ग्यारह महिने से लॉक डाऊन के दौर में राशनिंग की व्यवस्था हो, चाहे बैंक डकैती को विफल करने का प्रयास हो, चाहे असहाय लोगों की सहयोग की बात हो या फिर सोशल पुलिसिंग के अन्तर्गत मास्क बटवाने का रिकार्ड हो रायगढ़ पुलिस ने हर जगह अपने को खरा ही साबित किया। उन्हें तो इस देशव्यापी लॉक डाऊन में दोहरी मार झेलनी पड़ी है। अपने परिवार और समाज को सुरक्षित रखने के साथ-साथ कानून और व्यवस्था की जिम्मेदारी भी निभाई है उन्होंने। फिलहाल अब तक हमने इस तरह की घटना रील में देखी थी या अखबारों में पढ़ी होगी लेकिन इन रीयल हिरो को अपने इर्द-गिर्द देखते हो तो तारीफ पाने का हक तो उनका बनता भी है। धन्यवाद कप्तान साहब
एसएस स्टील की जनसुनवाई: झूठी ईआईए रिपोर्ट के आधार पर होगी !
लाखा डेम के नजदीक गेरवानी में एसएस स्टील की जनसुनवाई रखी गई है। यह जनसुनवाई पूरी तरह से झूठी ईआईए रिपोर्ट के आधार पर होने जा रही है। इस लोक सुनवाई के बाद प्लांट के विस्तार से लाखा डेम भी प्रभावित होगा। प्लांट का दूषित जल भी केलो नदी में प्रभावित किया जाएगा। एक तरफ जहां सराईपाली गेरवानी में उद्योगों के कारण प्रदूषण की भारी मार झेल रहा है वही एक और उधोग के छमता विस्तार से यह छेत और बर्बाद हो जाएगा। कोरोना आपदाकाल मे गेरवानी स्थित एसएस स्टील के विस्तार की जनसुनवाई 24 मार्च को रखी गई है। प्रशासनिक अधिकारियों की साठगाँठ से जानबूझकर आपदाकाल मे लोक सुनवाई रखी गई है ताकि लोग विरोध करने न पहुच सके। वैसे भी एसएस स्टील में किसी तरह का प्रदूषण नियंत्रण यंत्र स्थापित नहीं किया गया है। पर्यावरण विभाग के अधिकारियों से मिली भगत से अब तक यह प्लांट संचालित हो रही है। प्लांट अपनी तीन और यूनिट का विस्तार करना चाहती है। जिसकी लोकसुनवाई पर्यावरण विभाग ने 24 मार्च को बंजारी मंदिर मैदान में रखी है। कोविड के इस दौर में प्रदूषण पर रोक के साथ सभा आयोजन पर भी पाबंदी है लेकिन एसएस स्टील इस आपदा में अपना फायदा देख रहा है। जिसमे प्रशासन भी अपनी हामी भरता नजर आ रहा है। गेरवानी सराईपाली छेत्र वैसे ही बेहद प्रदूषण की चपेट में है ऐसे में लोग और किसी प्लांट का विस्तार नहीं चाहते। अब देखने वाली बात होगी कि कैसे इस प्लांट की लोकसुनवाई होती है। जनप्रतिनिधियों में भी इसको लेकर आक्रोश दिख रहा है । यानी हर बार की तरह शासन प्रसाशन को गुमराह कर ईआईए रिपोर्ट को कॉपी पेस्ट किया गया है।
शराब प्लेसमेंट एजेंसी के लोकेशन मैनेजर पर प्राथमिकी दर्ज
सुपरवाईजर ने मैनेजर पर धमकाने और चोरी करने का लगाया आरोप,
जिले में सोनू बंधन को लगा कोरोना का पहला टीका
शुभारंभ : पहले दिन रायगढ़ में लगा 319 लोगों को टीका, 80 फीसद दर से राज्य में दूसरा स्थान
स्वच्छता दूतों के साथ नाइंसाफी बर्दाश्त नही: ओपी चौधरी
प्रदेश भाजपा के मंत्री ओपी चौधरी ने आज कलेक्टोरेट के सामने आंदोलनरत स्वच्छताकर्मियों के बीच जाकर उनके आंदोलन का समर्थन किया। साथ में प्रदेश भाजपा के कार्यसमिति सदस्य गुरुपाल सिंह भल्ला एवं जिला भाजपा के प्रवक्ता मनीष शर्मा भी आंदोलन के समर्थन में खड़े नजर आये। स्वच्छताकर्मियों का साथ देते हुए ओपी चौधरी ने कहा कि यह प्रदेश सरकार की मंशा को स्पष्ट कर रही है कि उनको, इनके साथ हो रहे अन्याय से कोई सारोकार नहीं। हम सभी जानते है कि हमारा विश्व कोविड-19 जैसे भयंकर महामारी से जुझ रहा है ऐसे विपरित परिस्थितियों में जब मानव स्वंय अपने सगे संबंधियों से दुरी बनाकर रहने में विवश है, पुत्र अपने पिता की अर्थी को कांधा नही दे पा रहा, प्रकति के साथ हुये छेड़छाड़ का दंड हम सभी ने भोगा। ऐसे कठिन दौर में हमारी सेवा के लिये यदि कोई खड़ा है तो वह है हमारे स्वच्छता दूत एवं स्वास्थ्य दूत। आज भूपेश राज में हमारे यह स्वच्छता दूत अपने लिये इंसाफ मांगने, धरने में बैठने को मजबूर है। कोरे वादे एवं झुठ की बुनियाद डालकर इन्होने सत्ता रूपी इमारत खड़ी करी है तो इनका हृदय भी उसी तरह कठोर हो चला है। जो इनको स्वच्छता दूतों की तकलीफ नजर नहीं आ रही। आज जिला भाजपा की बैठक में रायगढ़ आये ओपी चौधरी को जैसे ही स्वच्छताकर्मियों के आंदोलन की खबर लगी वे तत्काल धरना स्थल में पहॅुचकर स्वच्छता कर्मियों की व्यथा सुनी। स्वचछता कर्मियों ने बताया कि राज्य आपदा मिशन निधीमत अंतर्गत इन्हे 29.09.2020 से स्वच्छताकर्मी पद मेडिकल कॉलेज रायगढ़ में नियुक्त किया गया है। वो भी ऐसे कठिन दौर में जब मानव समाज एक छोटे से अदृश्य वायरस के डर से घरों में कैद था ,ये अपना सामाजिक कर्तव्य निभाने, इन पदों में कार्यरत हुये परंतु अब स्थिति पहले से बेहतर है तो इन्हे इनके कार्यो से मुक्त किया जा रहा है। स्वच्छता कर्मियों की टीम को महसूस कर ओ.पी. चौधरी ने तत्काल जिला प्रशासन के मुखिया से बात की और आंदोलनरत स्वच्छता दूतों को इनसे मिलवाया। कड़े लहजे में ओपी ने कहा कि इनके साथ हो रही नाइंसाफी हमें मंजूर नहीं यदि जिला प्रशासन तत्काल इनके आवेदन पर सहानुभूति पूर्वक विचार नहीं करती तो पूरी भाजपा मुखर होकर इसके लिये आंदोलन करेगी। इन्होने कहा कि सर्वप्रथम कल ही इन स्वच्छता दूतों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज दी जाये। केन्द्र सरकार की मंशा कोरोना वैक्सीन को लेकर बेहद स्पष्ट है कि स्वास्थ्य कर्मचारी एवं स्वच्छताकर्मियों को पहले चरण में ही वैक्सीन लगना है परंतु हमने कोरोना काल के प्रथम माह से ही प्रदेश सरकार की विपरीत कार्यप्रणाली को देखा है इनकी इच्छाशक्ति है ही नही कि ये इस भयंकर महामारी से लड़ सकें। प्रदेश कार्यसमिति सदस्य गुरुपाल सिंह भल्ला ने भी इनको आश्वस्त करते हुये कहा कि मै पूरी उर्जा के साथ आप लोगो को न्याय दिलाने हेतु संघर्ष करुंगा।
लैंड, सैंड, कोल और लीकर माफिया की है कांग्रेस सरकार : डॉ. रमन सिंह
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भूपेश सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, बोले – इनके राज में छत्तीसगढ़ की हर एक चीज बिकाऊ है
धान खरीदी को लेकर सड़क पर उतरी भाजपा
ओपी चौधरी बोले- आगामी दिनों में आंदोलन और तेज होगा, तानाशाह हो गई है कांग्रेसी सरकार - सांसद गोमती साय
शराबबंदी सभी के सहयोग से संभव : सीएम भूपेश बघेल
मुख्यमंत्री ने नये साल में रायगढ़ जिले को दी 1146 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात
पश्चिमी विक्षोभ का असर शुरू आने वाले दिनों में बारिश की संभावना
बसंत ऋतु की शुरुआत होने वाली है, उसकी बासंती बयार के पहले ठंड का तड़का पड़ चुका है। अब फिर से मौसम बदलने को है रायपुर मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर एच पी चन्द्रा के अनुसार एक पश्चिमी विक्षोभ अफगानिस्तान और उससे लगे पाकिस्तान के ऊपर एक चक्रीय चक्रवाती घेरा के रूप में 5.8 किलोमीटर ऊंचाई तक स्थित है। इसके प्रभाव से एक चक्रीय चक्रवाती घेरा पश्चिम राजस्थान और उसके आसपास 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक स्थित है। इसके प्रभाव से प्रदेश में हवा की दिशा में परिवर्तन होने के कारण न्यूनतम तापमान में अगले दो दिनों में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस बढ़ने की संभावना है। प्रदेश में 5 फरवरी और 6 फरवरी को उत्तर और मध्य भाग में गरज चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने आकाशीय बिजली गिरने तथा मेघ गर्जन के साथ एक-दो स्थानों पर ओले गिरने (सरगुजा संभाग और उससे लगे जिलों में) की संभावना है। बस्तर संभाग में 5 और 6 फरवरी को बादल छाने की संभावना बनी हुई है । यहाँ वर्षा होने की सम्भावना कम है । फिर भी उत्तर बस्तर में छीटें पड सकते हैं।
कड़ाके की ठंड, उत्तरी छत्तीसगढ़ में जमी ओस
जशपुर में पारा पहुंचा 1.4 डिग्री सेल्सियस
अब बढ़ेगी ठंड, गिरेगा पारा, एडवाइजरी जारी
शीतलहर के भी दिए गए हैं संकेत,सप्ताह भर तक जारी रहेगा ट्रेंड
क्रिसमस-न्यू ईयर वीक में पड़ेगी कड़ाके की ठंड,और गिरेगा तापमान
बनी शीतलहर की संभावना
वैलेंटाइ डे को अनोखे तरीक से मनाया रायगढ़ के लोगों ने
ह्दय की देखभाल के लिए वॉकेथान का आयोजन, रेड कलर थीम में एक साल से लेकर 60 साल तक के लोगों ने लिया हिस्सा
कार्डिनल कप : राज्य स्तरीय फ्लड लाइट टेनिस बॉल क्रिकेट प्रतियोगिता 28 से
ओडिसा, नागपुर, भिलाई, दुर्ग की दिग्गज टीमें लेंगी हिस्सा
विजय हजारे ट्रॉफी में छत्तीसगढ़ की टीम से खेलेगा रायगढ़ का रवि सिंह
बिना कोचिंग के अपने ही दम पर तय कर रहा मकाम
पोस्ट कोविड के बाद मानसिक स्वास्थ्य को तवज्जो दे रहे लोग
कोरोना काल में 1,200 से अधिक लोगों की हुयी फोन के जरिये काउंसलिंग
साहित्यवाचस्पति पुरातत्वविद कवि लोचन प्रसाद पाण्डेय देश की अनमोल धरोहर
पुण्यतिथि पर विशेष : सम्मान पुरस्कार यशोकीर्ति और धन पांडेय जी के लिए सर्वथा महत्वहीन थे
अजय ने इस शहर से वो वादे निभाये हैं, जो इस शहर ने मांगे न थे
हम रायगढ़ वाले अपनी तरह से अगर राजकपूर को लें, उसमे दादा साहब फाल्के मिलाएं, हबीब तनवीर को शक्कर की तरह बुरकें, बाबा नागार्जुन की फक्कड़-मस्ती का वर्क लगायें, और इस मिश्रण को बड़े भाई की पैकेजिंग में सामने रखे, तो जो मीठी मीठी डिश बने - वो भाऊ होते है। अजय आठले- रंगकर्मी, शोमैन, ऑर्गनाइजर, विचारक, एक्टिविस्ट, धीर गम्भीर, चिन्तामुक्त, हंसता.. जी हल्का कर देने वाला शख्स। कॅरोना ने छीन लिया। रायगढ़ इप्टा उनकी सृजनशीलता से उठी है। साधारण लोगो मे टैलेंट खोजकर उसे रंगमंच की स्पॉटलाइट में खड़ा कर देना, पहचान देना, आत्मविश्वास भर देना भाऊ का शगल रहा। जितनी प्रतिभाओं को उन्होंने तराशा, वो राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से लेकर मुबई की मायानगरी तक उनका नाम लेते हुए पताका लहरा रहे हैं। साल में एक बार आयोजित होने वाला पांच दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह, यह ज्योतिपुंज खुद जलकर आयोजित करता। देश का हर नामी गिरामी रंगमंच का स्टार और मशहूर नाटक हमने अपने शहर में देखे हैं। तमाम सरकारी फंड और तामझाम के साथ होने वाले चक्रधर समारोह के मुकाबले इप्टा का यह एकल प्रयास, बराबर छूटता था। रायगढ़ को कल्चरल सिटी और संस्कारधानी का दर्जा क्लेम करने में यह कार्यक्रम बड़े अंक देता। इसे भाऊ का योगदान कहना अतिश्योक्ति न होगी। रायगढ़ इप्टा की ओर से दिया जाने वाला शरदचन्द्र वैरागकर सम्मान किसी भी रंगकर्मी के सीने पर जीवन भर की उपलब्धियों का बड़ा बैज है। बरसों पहले छह फुटे इस शानदार व्यक्तित्व लांग कोट पहने, डिग्री कालेज के वार्षिकोत्सव में देखा था। वह छवि दिल मे बस गयी। कुछ बरस पहले मैनचेस्टर में ठीक वैसा कोट दिखा। चट से खरीदा, कभी कभी पहनता हूँ, पर हम मोर्टल्स में वो बात कहां। हम उनके जैसा दिख नहीं सकते, बन नहीं सकते। बस, रश्क कर सकते है, आदर कर सकते हैं। कुछ दिनों पहले भगतसिंह पर चर्चा के लिए उन्होंने बुलावा दिया। यह कोई दादा साहब फाल्के सम्मान से कम न था। जब बातचीत चल रही थी, वे कैमरे के पीछे से चर्चा देख रहे थे। एक बार कैमरा बन्द हो गया, चर्चा चलती रही। फिर रीटेक हुआ, मगर थॉट्स और शब्द समान नही थे। मगर भाऊ वैसे ही मजा लेते रहे। लॉक डाउन के दौरान उनके पास मिलने गया था। यह एक ही बार है जब उनके घर गया। खानदानी लोग हैं, पर सादा रहन सहन, कोने कोने से वही बौद्धिकता और विचार झलकते जिन्हें आप उनकी बातों में पाते है। जो अनुरोध किया था, उन्होंने लाकडाउन खत्म होने के बाद कोशिश करने का वादा किया था। टूट गया। फिर उनके स्वास्थ्य की कामना को लेकर पोस्ट लिखी। उनका जवाब आया, स्वस्थ होकर मिलते हैं। वह वादा भी टूट गया। मगर अजय आठले ने इस शहर से वो वादे निभाये है, जो इस शहर ने मांगे न थे। स्वेच्छा से समाज के लिए, कला के लिए, पैशन के लिए पूरे किए गए अनकहे वादे एक शख्स को कितना बुलन्द बना जाते है, अजय आठले के कद से जाना जा सकता है। भाऊ को सलाम। पर अंतिम नही.. हम ये सलाम हमेशा करते रहेंगे।
रंगकर्म एक जुनून है,ताउम्र इसे जिंदा रखने की कला अजय के पास थी
कल सुबह-सुबह दिल को झकझोर देने वाला समाचार मिला अजय आठले नही रहे। रायगढ़ की रंगकर्मियों और कलासाधकों की बिरादरी के लिए एक अपूरणीय क्षति है। रायगढ़ को रंगकर्म के क्षेत्र में देशव्यापी स्थान दिलाने में अजय की महत्वपूर्ण भूमिका है। वैसे तो रायगढ़ में रंगकर्म को लेकर एक स्वाभाविक परंपरा विद्धमान थी किंतु देश के क्षितिज में रायगढ़ के रंगकर्म की निरंतरता और रंगकर्मियों की तीन पीढ़ी तैयार करना और संवाद कायम रखना अभूतपूर्व है। अतीत के 1980-81 के वे दिन मेरी स्मृतियों में कौंध रहे हैं जब हम सबने इप्टा की रायगढ़ इकाई का गठन किया था उस दौर में रायगढ़ में कॉमरेड मुमताज भारती प्रगतिशील आंदोलन के मुख्य स्तंभ और प्रेरणा स्रोत थे प्रगतिशील लेखक संघ की रायगढ़ इकाई सक्रिय थी और इप्टा के गठन की सक्रियता की जरूरत थी। एक महत्वकांक्षी निर्णय लिया मध्यप्रदेश इप्टा के प्रथम राज्य सम्मेलन के आयोजन का। रायगढ़ इकाई के निर्णय से उत्साहित भोपाल से डॉ कमला प्रसाद और जबलपुर से ज्ञानरंजन के मार्गदर्शन का सिलसिला प्रारम्भ हुआ रायगढ़ के राज्य सम्मलेन का शुभारंभ प्रख्यात साहित्यकार भीष्म साहनी जी के द्वारा किया गया। देश के प्रख्यात व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई और रायगढ़ से वरिष्ठ रंगकर्मी उमाशंकर चौबे के संरक्षण में मध्यप्रदेश में इप्टा की राज्यव्यापी इकाइयां गठित की गईं। रंगकर्म को निरंतर 40 वर्षों तक किसी भी कस्बाई शहर में जीवित रखना कम चुनौतीपूर्ण नही है। लेकिन ऐसे असाध्य काम को जारी रखने का हौसला अजय आठले का नाम है। हमारी रंगकर्म की यात्रा शुरू हुई विजय तेंदुलकर के नाटक पंक्षी ऐसे आते हैं, मुझे याद है रंगकर्म की स्लेट हमारे जेहन में काली थी। समझने और सीखने की ललक हमे तब कलकत्ता लेकर गई और हमने साथ मे यही प्रोडक्शन रविन्द्र भवन में साथ मे देखा जो प्रख्यात रंगकर्मी श्यामानंद जालान का था। रंगकर्म एक जुनून है और ताउम्र इस जुनून को जिंदा रखने की कला अजय के पास थी। 1994 -95 से एक नया दौर शुरू होता है इप्टा के वार्षिक रंग महोत्सव का, अभी हाल में ही इसकी रजत जयंती मनाई गई। इसमें रायगढ़ ने देश की विभिन्न रंगमण्डलियो के शताधिक नाटक देखे और रंगकर्मियों ने भी ऊर्जा ग्रहण की। इसमें प्रख्यात रंगकर्मियों रंगनिर्देशकों के नाटक हुए। हबीब तनवीर,ऊषा गांगुली, बंशी कौल, देवेंद्रराज अंकुर,मिर्ज़ा मसूद, संजय उपाध्याय, सुमन कुमार, अरुण पांडेय, रघुवीर यादव,राजकमल नायक जैसे कई नाम जिनके नाटक रायगढ़ ने इन समारोह के दरमियान देखे। इन समस्त आयोजनों ने रायगढ़ के रंग परिवार को समृद्ध किया और इसकी देश व्यापी दस्तक सुनाई दी। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा जैसी विख्यात संस्था में भी रायगढ़ से योगेंद्र चौबे और स्वप्निल कोत्तरीवर का चयन इसी रंग विरासत की देन है ऐसे आयोजन के केंद्र में अजय आठले की सक्रियता थी और उसकी भरपाई असम्भव है, साथी ऊषा आठले एक समर्थवान साहित्यकार रंगकर्मी और एक्टिविस्ट हैं। रायगढ़ की रंग बिरादरी उनके साथ हमेशा खड़ी रहेगी। प्रगतिशील लेखक संघ और इप्टा बुनियाद से ही साथ - साथ है। राष्ट्रीय स्तर पर लेखकों और रंगकर्मियों के रिश्ते हमेशा मनुष्यता और इसकी बेहतरी के पक्ष में संघर्षरत हैं और रहेंगें । आज जब इसकी और जरूरत है बेहद अफ़सोस होता है ये कहते हुए की अलविदा साथी अजय।
और जब सारंगढ़ हाईकोर्ट का फैसला वायसरॉय भी नहीं पलट सके
कहानी स्वतंत्र प्रिंसली स्टेट सारंगढ़ की
हैप्पी मदर्स डे केलो....
नदी पूज्यनीया होती हैं इनकी पूजा अस्वाभाविक नहीं है, ऐसी पूजा तो प्रतिदिन होनी चाहिए। हमारे देश के अनेक जगहों पर इस तरह की पूजा संपन्न भी की जाती हैं। इसी कड़ी में हमारे जिले की जीवन रेखा केलो नदी भी पूजा और श्रद्धा की हकदार है, इसके किनारे बसे सैकड़ों गांव और शहर इससे अपनी जरूरतें पूरी करते हैं। वैसे ही केलो नदी की अपनी जरूरत होती है अगर केलो नदी हमें जीवन देती है तो उसके अस्तित्व को बचाए रखने का दायित्व किसी और का नहीं बल्कि हमारा ही है। साल के एक दिन नदी की पूजा और आरती करते हुए हमें इस बात पर भी सोचना होगा कि साल के शेष दिनों में हमारा बर्ताव उसके प्रति क्या है? यह जगजाहिर है कि केलो का अस्तित्व खतरे में है औऱ इसे बचाने की एक ईमानदार कोशिश हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता में होनी चाहिए। इसलिए हमें अपने आप से सवाल पूछना होगा कि केलो को इस दुर्दशाग्रस्त अवस्था में लाने में हमारी अपनी भूमिका क्या रही है? यहां जब हम अपनी बात करते हैं तो उसका दूसरा अर्थ हमारे जनप्रतिनिधियों से होता है जिन्हें हम विश्वास के साथ पंचायतों से लेकर संसद तक भेजते हैं कि वे हमारे हित-अहित का ध्यान रखें और अपने उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से हमारे दुख और तकलीफों का समाधान निकालें। महज एक दिन की महाआरती और शेष दिन की उदासीनता एक ज्वलंत मुद्दा है उन सभी के लिए। अब यदि बात केलो नदी की करें तो इतिहास यह बताता है कि लैलूंगा के पहाड़ लुड़ेग नामक ग्राम की घाटियों से निकली यह नदी लगभग 190 किलोमीटर का रास्ता तय करती है। जानकार यह भी बताते हैं कि किसी समय यह मध्य भारत की एक स्वच्छ जल वाली नदी थी क्योंकि जल शुद्धिकरण हेतु जितने खनिजों की आवश्यकता होती है वह सब नैसर्गिक रूप से इसके प्रवाह के रास्ते में मौजूद थे। आज भी रायगढ़ के कई वृद्ध या बुजुर्ग स्त्रियां गवाह होंगे कि कार्तिक माह में जब वे पूजन और दीप प्रवाह के लिए केलो के घाट में जाती थीं तो तकरीबन ऐसा प्रतीत होता था कि स्वंय आसमान जमीन पर आ गया हो। साफ स्वच्छ केलो में तैरते सैकड़ों प्रज्जवलित दीप की छटा रमणीय होती थी। यह कोई अतीत की नहीं महज 20-25 वर्ष पूर्व की बात है। औद्योगिकीकरण के चलते और उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट को केलो में प्रवाहित करने के चलते केलो प्रदूषित होती ही गई और यह सिलसिला आज भी निरंतर जारी है। जनप्रतिनिधि आए-गए उनके द्वारा लुभावने वादों का सपना भी बुना गया लेकिन कमी जो रही वह थी एक फौलादी ईमानदार कोशिश की। एक बार निगम ने कोष्टा पारा में 2010 के आसपास वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया था जो बमुश्किल 10 दिन चला होगा और उसके बाद आजतक बंद है। 14 जनवरी को संपन्न होने जा रहे इस मेगा शो की तैयारी महज उसके तीन चार तीन पहले और शो के दो-तीन दिन बाद तक सिमट कर रह जाती है। यदि हम कहें कि केलो आज मरणासन्न अवस्था में है तो यह कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी इसमें रहने वाली कई जलचर प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं और जो मौजूद हैं वो तकरीबन विलुप्ति के कगार पर है। नदी में मौजूदा पानी की स्थिति यह है कि नहाने पर कई चर्म रोगों का खतरा है। इसकी दशा अब भी न संभली तो आने वाले समय में रायगढ़ शहर में जल संकट की नौबत आ सकती है। लाखों रुपये खर्च कर हजारों की भीड़ इकट्ठी कर ऐसे मेगा शो के आयोजन के माध्यम से हम अपनी उत्सवधर्मी मानसिकता का परिचय देकर भले ही ताली बटोर लें लेकिन इसे केलो के साथ एक क्रूर मजाक कहना होगा, यह मेरी अपनी राय है। बल्कि, मेरी तो गुजारिश है यहां के जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों से कि वे बिलासपुर अरपा नदी के संरक्षण के लिए गठित अरपा विकास प्राधिकरण की तरह केलो विकास प्राधिकरण बनाने की मांग शासन के पास रखे ताकि अंतिम सांसे ले रही केलो को नया जीवन मिल सके। तब तक के लिए मनाने और देखने वालों की तरफ से हैप्पी मदर्स डे केलो मईया...364 दिन बाद फिर मिलेंगे हालत शायद और बदतर हो जाए या कुछ सुधर भी जाए। हम दोनों का मिलना तो नियति है। (लेखिका वरिष्ठ शिक्षाविद और समाजसेवी हैं, लेख में उनके निजी विचार हैं)
वायु प्रदूषण के चलते कोविड-19 मरीज़ों की मृत्यु दर में इजाफ़ा
वायु प्रदूषण - कोराना महामारी के लिए गंभीर खतरा, प्रशासन को सचेत होने की जरूरत है
स्त्री के साथ सोना ही नहीं जागना भी चाहिए
नाम कुछ भी हो सकता है कभी निर्भया, कभी मनीषा तो कुछ और। शहर भी कोई और हो सकता है।दिल्ली, हाथरस या बलरामपुर। रायगढ भी हो सकता है। यहां चन्द वर्षों पहले एक बच्ची के साथ ऐसा घट चुकी है और आज भी ऐसी घटनाएं जारी है। कानून में आए बदलाव के बाद भी बलात्कार जैसे घिनौने अपराध थम नहीं रहे हैं बल्कि बढते जा रहे हैं। 2019 की बात करें तो लगभग साढे चार लाख महिलाओं पर अपराध दर्ज हुए जो 2018 की तुलना मे सात प्रतिशत अधिक था।ऐसी स्थिति सोचने पर मजबूर करती है कि बेटी बचाओ बेटी पढाओ,कन्या भ्रूण हत्या पर लगाम कसने के बाद भी ये सिलसिला बदस्तूर जारी है। स्त्री आज भी समाज मे अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। बेशक आज मनीषा रेप केस मे उसे दलित बताकर उसे जातिगत रंग दे उसका राजनीतिकरण करने की कोशिश भी की जा रही है लेकिन स्त्री की,स्त्री के अलावा कोई दूसरी जाति होती ही नही। समाज को इसे समझने की जरूरत है। पहले बलात्कार कर उसे मार दिया जाता था कभी कभी पीडिता स्वयं आत्महत्या कर लेती थी लेकिन अब बलात्कार कर उसके साथ बर्बरतापूर्वक हिंसा करना किस बात को दर्शाता है? किस आदिम युग की ओर जा रहे हम?प्रशासन या न्यायपालिका इस तरह की घटनाओं पर क्या कर रही है? सैकडो प्रश्न खडे हो जाते हैं।प्रशासन या पुलिस इतनी कमजोर भी नहीं होती लेकिन कभी कभी राजनैतिक रसूख के आगे उन्हें भी बेबस होना पडता है। ग्रामीण क्षेत्रों मे ऐसी घटनाओं मे अक्सर पुलिस की भूमिका संदिग्ध सी होती है।इतना ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों मे तो ऐसे मामले दर्ज तक नहीं होते।          यह तो हुई कानून और प्रशासन की बात।अब जरा समाज की बात करें, उनके भी दायित्वों की बात करें।महज मोमबत्ती जलाकर या सोशल मीडिया पर हैशटैग चलाकर उसके लिए न्याय मांगने से घटना की गंभीरता बढ जरूर जाती है । प्रशासन पर एक दबाव बनता है पर क्या यही इसका हल है? समाजशास्त्रियों और बुद्धिजीवियों को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।हिन्सा और क्रूरता का ग्राफ क्यों बढता जा रहा है? ऐसे अपराधियों की सामाजिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या होती होगी जिसके चलते वे ऐसी कच्ची उम्र मे अपराध के दलदल मे धँसते चले जाते हैं।अनेक सवाल खडे हो उठते हैं।        दरअसल स्त्री को लेकर एक संकीर्ण और सामंती मानसिकता सदियों से चली आ रही है जो आज भी बनी हुई है कि वह एक उपभोग की वस्तु है।इस मानसिकता के खिलाफ एक सामाजिक चेतना की जरूरत है जिसकी पहल स्त्री को ही करनी होगी और उसके साथ जागरूक पुरुषों को भी जुडना होगा।अब तक नारी पुनरूत्थान के जितने भी आन्दोलन हुए उनमें नेतृत्वकारी भूमिका पुरुषों की ही रही है।अब पुरूष समाज को यह चेतना लानी होगी और उन्हे परिवार मे स्त्री की जगह को फिर से परिभाषित करनी होगी।खासकर पारिवारिक मुद्दों पर उसे बराबरी का दर्जा देना होगा चाहे वह कामकाजी हो या गृहिणी तभी स्त्री को लेकर समाज मे बदलाव की अपेक्षा की जा सकती है।स्त्री को लेकर एक सडांध जो समाज मे गहरे तक जम चुकी है उसकी सफाई के लिए उन्हें ही आना होगा।स्त्री तो अपने वजूद की लडाई लडते हुए ही आज इस मुकाम तक पहुंची है।छिटपुट और सतही चल रहे स्त्री स्वातंत्र्य के आन्दोलन को गहरा धरातल और नई दिशा देनी होगी।परिवार और समाज मे उचित स्थान मिलने पर ही उसमें एक नैतिक मनोबल पूरे आत्मविश्वास से दमकेगा। कितनी अजीब बात है कि एक ओर हम कोऱोना जैसे महामारी से मुक्ति के लिए वैज्ञानिक अनुसंधानो के माध्यम से वेक्सीन की तलाश मे जुटे है लेकिन दूसरी तरफ बलात्कार जैसे मानसिक विकृति के जीवाणु के लिए सामाजिक स्तर पर कोई भी वेक्सीन तलाशने मे असफल रहे।क्या आज भी हमारी मानसिकता सोलहवीं शताब्दी की गिरफ्त में है? (लेखिका वरिष्ठ शिक्षाविद और समाजसेवी हैं, लेख में उनके निजी विचार हैं)
अजय आठले को अन्तिम लाल सलाम
तुम्हारे सपने को मंज़िल तक पहुंचाएंगे। तुम नहीं रहे इसका गम तो है लेकिन लाल झंडा लेकर कामरेड आगे बढ़ते जाएंगे।
कलेक्टर भीम सिंह ने भारी बारिश के बीच संभाला मोर्चा, देखें तस्वीरें
निगम अमला बीती रात से आयुक्त के साथ पूरे शहर में डटा हुआ है
तस्वीरों में देखें रायगढ़ में जनता कर्फ्यू का असर
22 मार्च यानी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर जिले में भी जनता कर्फ्यू का असर देखने को मिला। दोपहर तक पूरा शहर स्वस्फूर्त बंद था। हर मुख्य मार्ग और बाजार बंद मिले। गली-कूचे तक कोई व्यक्ति बाहर नहीं निकला।
हरि बोल, जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ निकली रथयात्रा, देखें गैलरी
रायगढ़ में दो दिनों की रथयात्रा आयोजित होती रही है। इसी क्रम में आज रथ द्वितिया के दिन शहर के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भगवान श्री को विधिविधान पूर्वक पूजा अर्चना पश्चात मंदिर के गर्भगृह तथा मंदिर परिसर से जय जगन्नाथ के जयघोष और घंट शंख ध्वनि के बीच ससम्मान बाहर निकाला गया। राजापारा स्थित प्रांगढ़ में मेले सा माहौल था और हजारो की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण भगवान श्री के दर्शन करने के लिए पहुंचे हुए थे। इससे पहले कल भगवान जगन्नाथ की विधि विधान से पूजा की गई जिसे फोटोग्राफर वेदव्यास गुप्ता ने अपने कैमरे में कैद किया।
इप्टा रायगढ़ के 25वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की झलकियां
27 से 31 जनवरी तक पॉलिटेक्निक ऑडिटोरिम में इप्टा रायगढ़ द्वारा 25वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जिसमें चार नाटक एवं दो फीचर फिल्में दिखाई गईं। समारोह की शुरुआत रायपुर के मशहूर रंगकर्मी मिर्जा मसूद को 10वां शरदचंद्र वैरागकर अवार्ड देकर की गई। यह कूवत सिर्फ रंगमंच रखता है जो वर्तमान सत्ता के मठाधीशों पर अजब मदारी गजब तमाशा नाटक के माध्यम से सीधे कटाक्ष कर सकता है। जहां एक मदारी को राजा बना दिया जाता है, शब्दों के अस्तित्व को खत्म कर दिया जाता है। बंदर राष्ट्रीय पशु बन जाता है। गांधी चौक नाटक में गांधीजी की प्रतिमा स्वयं यह चलकर वहां से हट जाती है कि जब रक्षक की भक्षक बन गए तो कोई क्या कर सकता है। नोटबंदी और जीएसटी पर गांव वाले सीधे प्रहार करते हैं। सुबह होने वाली है की लेखी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध होने के बाद लोगों को जागरूक करने को किताब लिखती और किताब को ही फांसी हो जाती है। बोल की लब आजाद हैं तेरे लोगों को दर्शकदीर्घा में झकघोर के रख देती है। तुरूप और भूलन जैसी फिल्में लोगों के मनोरंजन के अलावा दमदार संदेश भी देती है। तो देखें इस शानदार नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की कुछ झलकियां
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