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Saturday, August 15, 2020
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इस बार महामारी के साये में होगा स्वाधीनता दिवस समारोह
सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मनाया जाएगा राष्ट्रीय उत्सव
हमारे बच्चे
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17 अगस्त से 1 हफ्ते तक रायगढ़ में रहेगा पूर्ण लॉक डाऊन
आसपास
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आज रायगढ़ शहरी क्षेत्र में ही पाये गये 9 नये कोरोना मरीज
आसपास
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सारंगढ़ में कागजों में हो गया 570 हेक्टेयर में प्लांटेशन, जांच के नाम पर मामले को दबाने में लगा वन विभाग
राजनीति
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टीवी टावर के सामने की दुकानें सील, कहीं पहले जैसे न हो जाए डील
आसपास
17 अगस्त से 1 हफ्ते तक रायगढ़ में रहेगा पूर्ण लॉक डाऊन
इस रविवार खुली रहेंगी दुकाने
आज रायगढ़ शहरी क्षेत्र में ही पाये गये 9 नये कोरोना मरीज
कलेक्टर ने कोविड-19 जांच लैब केन्द्र का उद्घाटन किया
टीवी टावर के सामने की दुकानें सील, कहीं पहले जैसे न हो जाए डील
माथा देखकर कार्रवाई कर रहा राजस्व विभाग
डॉ. खुर्शीद पर कसा शिकंजा, कलेक्टर ने दिखाए तल्ख तेवर
टीएल बैठक में सीएमएचओ पर कलेक्टर बिफरे, डॉ. खुर्शीद ने खेला पुराना दांव
सारंगढ़ में कागजों में हो गया 570 हेक्टेयर में प्लांटेशन, जांच के नाम पर मामले को दबाने में लगा वन विभाग
पूर्व डीएफओ के खेल में वर्तमान डीएफओ भी दे रहे साथ
पूर्व महापौर चौहथा के बेटों ने गरीब का घर तोड़वाया, प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल
तहसीलदार की कार्रवाई या रसूखदारों का दबाव !
निगम में ठेकेदारी का खेल, 12 कार्य में 6 कामों का ठेका शौर्य कंस्ट्रक्शन को
नेता के चहेते ठेकेदार को मिल रहा काम, अन्य ठेकेदार ताक रहे मुंह, निर्माण कार्यो की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिन्ह
सांसद की प्रेसवार्ता में अपनी पोल खुलते देख स्थानीय भाजपा नेताओं ने खोया आपा
गोमती साय से पूछे गए सवालों का जवाब भाजपा के स्थानीय नेता देने लगे, प्रेस पर भी दागे सवाल
ना सावन हरे, ना भादो सूखे
जुलाई रहा सूखा, हुई 45 फीसदी कम हुई बारिश
आगामी पांच दिनों तक हल्की से मध्यम वर्षा का अनुमान
उमस से मिली राहत, मंगलवार शाम झमाझम बरसे बदरा
उमस से मिलेगी राहत, रिमझिम होगी बरसात
आगामी पांच दिनों तक मध्यम बारिश की संभावना
इस बरसात करें किचन गार्डन की शुरुआत
पर्यावरण संरक्षण समिति ने किया लोगों से आह्वान
इस बार महामारी के साये में होगा स्वाधीनता दिवस समारोह
सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मनाया जाएगा राष्ट्रीय उत्सव
रायगढ़ पुलिस की मुहिम : इस रक्षाबंधन एक रक्षासूत्र मास्क का
रायगढ़ पुलिस का मास्क वितरण का वृहद अभियान, जिले में रिकार्ड न्यूनतम 01 लाख से अधिक मास्क वितरण का लक्ष्य
हाईकोर्ट का आदेश, प्राइवेट स्कूल ले सकेंगे ट्यूशन फीस
देनी होगी पिछले सत्र की पूरी फीस, निजी स्कूलों को मिली राहत
रियासतकालीन राजा तालाब और शिव मंदिर की बर्बादी का जिम्मेदार कौन ?
बड़े नेताओं के इस मोहल्ले में गंजेड़ी-शराबियों का आतंक
एक रक्षासूत्र मास्क का : रक्षाबंधन के दिन इतिहास रचेगा रायगढ़
पुलिस अधीक्षक ने मुहिम को दिखाई हरी झंडी
फादर्स डे : पिता मां भी बन जाते हैं
विशेष : सेल्फ मेड पिताओं की संघर्षपूर्ण कहानी और उनका पितृत्व
युद्ध ख्याली हैं । मौतें असली और जिंदगियों की बर्बादी भी
वे लड़ रहे हैं, समय काल से परे, एक ख्याली युद्ध।
एखर का भरोसा, चोला माटी के हे राम...
रंगकर्मी पूनम तिवारी को दिया गया 11वां शरदचंद्र वैरागकर स्मृति रंगकर्मी सम्मान
निगम का विशेष सम्मेलन : देख तमाशा जनतंत्र का
कभी कभी तमाशे बाज को भी पता नहीं होता कि वह तमाशा किसके लिए और क्यों कर रहा है?
आज शिक्षक क्यू पिता नहीं बन पाता
सालों से या कहे बचपन से सुनता रहा हूं कि शिक्षक भी माता- पिता स्वरूप होते हैं वो अपने स्टूडेंट्स के लिए कुछ भी कर गुजरते हैं, समय बीतता गया और यह धारणा बदल गई अब लोग शिक्षक को मतलबी और अपने लिए सोचना वाला कहने लगे है पर किसी ने भी ये न सोचा कि माता- पिता का रूप रखने वाले शिक्षक को क्यू मजबूर होना पड़ा कि वो अपनेपन वाले व्यवहार से प्रोफेसनल व्यवहार पर आ जाए। उसकी मजबूरी रही क्युकी माता पिता जो अधिकार बच्चो पर रखते है पहले वो अधिकार शिक्षक को भी देते थे पर आज समय बदल गया है, अब शिक्षक अगर किसी बच्चे को सुधारने के लिए प्रयास करता है तो पालक कहते हैं आप कौन होते हो उसे बोलने वाले, यहां तक कि एक थप्पड़ की गूंज उस शिक्षक को थाने या जेल पहुंचा सकती है। आप उसे बोल नहीं सकते, सजा न दे सकते, पालक कहता है मै पैसे दे रहा हूं स्कूल को जबकि पहले पालक अपना बच्चा देते थे स्कूल को तो शिक्षक बच्चे को कोयले के रूप से बदलकर हीरा बनाकर देते थे जिसके लिए वो सुनार के समान थोड़ी- थोड़ी हथौड़ी भी मारते थे। पर आज बहुत समय बदल गया है पालक ये मानते हैं कि अब आप नौकर हो जो स्कूल में नौकरी कर रहे तो मै कलेक्टर या उद्योगपति हूं मेरे बच्चे को हाथ कैसे लगा सकते हो। ऐसी बहुत सारी बातों ने शिक्षक के आत्मविश्वास को कमजोर कर दिया और केवल नौकरी करने लगा। जब तक आप शिक्षक को अधिकार नहीं देंगे तब तक आपका बेटा या बेटी पत्थर से मूर्ति न बन पाएगा। पर शायद ऐसा समझने का वक्त चला गया। और शिक्षक को गुरुजी मानने की अवधारणा भी। नमस्कार (लेखक एक पिता और एक शिक्षाविद् हैं। लेख में इनके विचार निजी है)
कोरोना की विभीषिका से जूझते कर्मवीरों को सलाम तो हम कर ही सकते हैं
जो बसे हैं वे उजड़ते हैं प्रकृति के जड़ नियम से पर किसी उजड़े हुए को फिर बसाना कब मना है -(हरिबंशराय बच्चन)
आत्मनुशासन व धैर्य ही हमारी सबसे बड़ी ताकत
वैश्विक महामारी कोरोना Covid- 19 के अप्रत्याशित हमले ने एकबारगी पूरे मानव जगत को विषम परिस्थिति में ला खड़ा किया है। भावनात्मक स्तर पर आपस में अधिक नजदीकी से गूंथा हुआ भारतीय समाज लॉकडाउन के बाद एक साथ कई मोर्चों से जूझने पर विवश है। सभी गतिविधियां ठप्प हैं। पारिवारिक, आर्थिक व सामाजिक जीवन अस्त-व्यस्त हो जाने के कारण लोग मानसिक दवाब झेल रहे हैं। इन सबके बावजूद संतोषजनक बात यह है कि छिटपुट घटनाओं व बहुत थोड़े से लोगों की उद्दंडताओं के अतिरिक्त पूरा देश एकजुटता के साथ सहयोग कर रहा है। यही कारण है कि देश कम्युनिटी संक्रमण के स्टेज से अब तक बचा हुआ है। हालांकि यह खतरा अभी टला नहीं है। हमारे देश में जनसंख्या का घनत्व अधिक है और स्वास्थ्य सुविधाएं उन्नत देशों की तुलना में कम है। अतः यदि यह वायरस कम्युनिटी संक्रमण तक पहुंच गया तो हमारे यहां इसके बेहद भयावह परिणाम सामने आयेंगे। इसीलिये यह और भी अधिक जरूरी हो गया है कि हम तमाम कठिनाइयों के बाद भी लॉकडाउन 2 में पूरे धैर्य व संयम के साथ सरकार के सभी निर्देशों का पालन करें। इस संकट का दुर्भाग्यजनक पहलू यह है कि कोरोना का कोई प्रामाणिक इलाज अभी तक नहीं मिल पाया है। इस परिस्थिति में खुद को घर में छिपाकर सोशल डिस्टेनसिंग के जरिये इस वायरस के आक्रमण से बचे रहना ही एकमात्र कारगर विकल्प है। यही कारण है कि केंद्र व राज्य सरकारें लॉकडाउन के अमल पर सख्त हैं। सरकार द्वारा अनेक राहत योजनायें चलायी जा रही है। सरकारें अंतिम व्यक्ति तक उसके बुनियादी जरूरतों का सामान पहुँचाने हेतु सीमित विकल्पों के बीच दिन-रात जुटी हुई हैं। सरकारी मशीनरी, जिला व पुलिस प्रशासन, डॉक्टर्स, नर्सिंग व स्वास्थ्य कर्मी, सफाईकर्मी, म्युनिसिपल व पंचायत अमला सहित सामाजिक संगठन व मीडियाकर्मी सभी जोखिम उठाकर व्यवस्था बनाये रखने के चुनौतीपूर्ण काम में तन्मयता के साथ लगे हुये हैं। इस समय यह हम सबका नागरिक कर्तव्य है कि हम न केवल उनकी सेवाओं का सम्मान करें वरन सोशल डिस्टेनसिंग का पालन करके उनका सहयोग भी करें। qqq धैर्य से पूरा विश्व आश्चर्यचकित यह सही है कि तमाम प्रयासों के बावजूद कुछ समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। कुछ मामलों में सरकार की स्थिति सरोते के दो पाटों के बीच फंसी हुई सुपारी की तरह है। उसके पास दो विपरीत उपायों में से किसी एक विकल्प को चुनने की मजबूरी है। हर स्थिति में आलोचना की गुंजाइश तलाशी जा सकती हैं। लेकिन संकटकालीन परिस्थिति में प्रत्येक सभ्य समाज अपने जागरूक तबके से इस जिम्मेदारीपूर्ण रवैये की उम्मीद रखता है कि वह सभी दायरों से ऊपर उठकर सरकार को हरसंभव सहयोग करे। यह वक्त अपनी चिंताओं व भावनाओं के सार्वजनिक प्रकटीकरण पर उचित नियंत्रण रखने का समय है। समाज के जागरूक तबके को अपनी अभिव्यक्ति के प्रभाव का आंकलन स्वयं करना चाहिये। उसे आत्मनुशासन में रहकर निर्धारित फोरम तक अपनी चिंता व सुझाव पंहुचाने चाहिये ताकि ध्यानाकर्षण भी हो जाये और लोगों में अनावश्यक असंतोष उपजने तथा अव्यवस्था फैलने से बचा जा सके । अपने देशभक्त नागरिकों की सामूहिक एकता, त्याग, आत्मनियंत्रण व परस्पर सहयोग के बलबूते पर भारत विषम से विषम परिस्थितियों से लड़कर विजय हासिल करना जानता है। कोरोना से यह लड़ाई एक प्रकार से हमारी दृढ़ता, धैर्य व संयम की अग्नि परीक्षा है। अब तक भारतीय नागरिकों द्वारा प्रदर्शित परिपक्वता व धैर्य से पूरा विश्व आश्चर्यचकित है। qqq लेकिन हमें स्वछंद नहीं होना है हमारा सौभाग्य है कि हमारा रायगढ़ जिला कोरोना मुक्त जिला है। यह भी उत्साहवर्धक बात है कि हमारे छत्तीसगढ़ के एम्स का रिकवरी स्कोर बहुत अच्छा है। विश्व के कई देशों ने हमारी तरफ सहायता के लिए हाथ पसारे हैं। ये देश एक वेबिनार के जरिये हमारे अनुभवों से लाभान्वित हो रहे हैं। आरंभिक सफलताओं के बाद लॉकडाउन को कुछ शिथिल किया गया है लेकिन हमें स्वछंद नहीं होना है। पूरी सावधानी रखते इस छूट का बहुत सीमित उपयोग करना है। इस निर्णायक मोड़ पर हमारी एक छोटी सी चूक भी पूरे किये कराये पर पानी फेर सकती है। अतः हमें लॉकडाउन के पूर्णतः पालन के लिए मन, वचन व कर्म से संकल्पित होना होगा। हम कोरोना से आत्मविश्वास के साथ लड़ रहे हैं और हम अवश्य जीतेंगे। सभी कोरोना वारियर्स व जरूरतमन्दों को सहयोग करने वाली संस्थाओं व व्यक्तियों का अभिनंदन। मनोबल ऊंचा रखें, अनुशासित रहें, प्रसन्न रहें और सबका सहयोग करें।
तस्वीरों में देखें रायगढ़ में जनता कर्फ्यू का असर
22 मार्च यानी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर जिले में भी जनता कर्फ्यू का असर देखने को मिला। दोपहर तक पूरा शहर स्वस्फूर्त बंद था। हर मुख्य मार्ग और बाजार बंद मिले। गली-कूचे तक कोई व्यक्ति बाहर नहीं निकला।
हरि बोल, जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ निकली रथयात्रा, देखें गैलरी
रायगढ़ में दो दिनों की रथयात्रा आयोजित होती रही है। इसी क्रम में आज रथ द्वितिया के दिन शहर के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भगवान श्री को विधिविधान पूर्वक पूजा अर्चना पश्चात मंदिर के गर्भगृह तथा मंदिर परिसर से जय जगन्नाथ के जयघोष और घंट शंख ध्वनि के बीच ससम्मान बाहर निकाला गया। राजापारा स्थित प्रांगढ़ में मेले सा माहौल था और हजारो की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण भगवान श्री के दर्शन करने के लिए पहुंचे हुए थे। इससे पहले कल भगवान जगन्नाथ की विधि विधान से पूजा की गई जिसे फोटोग्राफर वेदव्यास गुप्ता ने अपने कैमरे में कैद किया।
इप्टा रायगढ़ के 25वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की झलकियां
27 से 31 जनवरी तक पॉलिटेक्निक ऑडिटोरिम में इप्टा रायगढ़ द्वारा 25वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जिसमें चार नाटक एवं दो फीचर फिल्में दिखाई गईं। समारोह की शुरुआत रायपुर के मशहूर रंगकर्मी मिर्जा मसूद को 10वां शरदचंद्र वैरागकर अवार्ड देकर की गई। यह कूवत सिर्फ रंगमंच रखता है जो वर्तमान सत्ता के मठाधीशों पर अजब मदारी गजब तमाशा नाटक के माध्यम से सीधे कटाक्ष कर सकता है। जहां एक मदारी को राजा बना दिया जाता है, शब्दों के अस्तित्व को खत्म कर दिया जाता है। बंदर राष्ट्रीय पशु बन जाता है। गांधी चौक नाटक में गांधीजी की प्रतिमा स्वयं यह चलकर वहां से हट जाती है कि जब रक्षक की भक्षक बन गए तो कोई क्या कर सकता है। नोटबंदी और जीएसटी पर गांव वाले सीधे प्रहार करते हैं। सुबह होने वाली है की लेखी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध होने के बाद लोगों को जागरूक करने को किताब लिखती और किताब को ही फांसी हो जाती है। बोल की लब आजाद हैं तेरे लोगों को दर्शकदीर्घा में झकघोर के रख देती है। तुरूप और भूलन जैसी फिल्में लोगों के मनोरंजन के अलावा दमदार संदेश भी देती है। तो देखें इस शानदार नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की कुछ झलकियां
70 वें गणतंत्र दिवस के फुल ड्रेस रिहर्सल की मनमोहक तस्वीरें
जिले में 70वां गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। गणतंत्र दिवस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल दो दिन पहले की जाती है। महीने भर से चल रही तैयारी को 25 जनवरी के दिन आराम दिया जाता है। इस गणतंत्र दिवस समारोह के रंग को देखिए इन तस्वारों से...
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