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Raigarh Express, news of raigarh chhattisgarh

Thursday, June 30, 2022
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27% कम गिरा पानी, अब रफ्तार पकड़ भरपाई की आशा
कल भी बने बारिश के आसार
मौसम
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क्राइमगढ़ : शराबियों के आतंक से मोहल्ला छोड़ रहे लोग
आसपास
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बच्चों ने सीखा सांसों को नियंत्रित करना
हमारे बच्चे
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मुस्कुराइये.... आप क्राइमगढ़ में हैं !
ओपिनियन
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विजय अग्रवाल की बाजीगरी
राजनीति
क्राइमगढ़ : शराबियों के आतंक से मोहल्ला छोड़ रहे लोग
शिकायतों के बाद भी पुलिस मौन, घर-घर बिक रही अवैध शराब, बहु-बेटियां हुईं घर में बंद
फिर बढ़ रहे कोविड के मरीज, सतर्कता अब भी जरूरी
मास्क का प्रयोग करें और सामाजिक दूरी का करें पालन : सीएमएचओ डॉ. केशरी
पर्यावरण संरक्षण जेएसपी की सर्वोच्च प्राथमिकताः अजमेरिया
जिंदल स्टील एंड पॉवर में उत्साह के साथ मनाया गया विश्व पर्यावरण दिवस
मेडिकल कॉलेज के डीन और डॉक्टर्स में रार
मेडिकल कॉलेज के डीन पर लगे गंभीर आरोप, डीन बोले सभी आरोप बेबुनियाद छवि खराब करने के लिए षड़यंत्र
विजय अग्रवाल की बाजीगरी
साढ़े तीन साल बाद भंडारे से निकली दहाड़
शिव सेना ने आतंकवाद का पुतला फूंका
कश्मीर में हिन्दुओ के टारगेट किलिंग पर जताया विरोध
सेवा सुशासन और गरीब कल्याण के लिए समर्पित है केंद्र की मोदी सरकार-अमर अग्रवाल
छतीसगढ़ शासन में पूर्व मंत्री रहे अमर अग्रवाल ने आज जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित किया।भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा नीत सरकार ने शानदार ऐतिहासिक 8 वर्ष पूर्ण किए है।इस आठ वर्ष की स्वर्णिम यात्रा को कम शब्दों में सेवा,सुशासन और गरीब कल्याण का वर्ष कहा जा सकता है।मोदी जी के नेतृत्व में युगपरिवर्तन कारी यह यात्रा अहर्निश जारी है।पत्रकारों को संबोधित करते हुए भाजपा नेता अमर अग्रवाल ने कहा कि कोरोना के इस वैश्विक संकट में देश के सभी नागरिकों के लिए विश्वप्रसिद्ध दोनों टीके के दोनों डोज मुफ्त देने की सेवा से लेकर देश के पीड़ितों तक चिकित्सा एवं अन्य तमाम राहत सामग्री की सेवा की।जिस प्रधानमंत्री ने अपना पदनाम ही प्रधान सेवक रख लिया हो,उनके संवेदनशील नेतृत्व में केंद्रीय सत्ता और संगठन को सेवा का पर्याय ही बना दिया गया।समूचा देश आज दंगामुक्त हो गया है,सांप्रदायिक और तुष्टिकरण की राजनीति को विराम लगा है।कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत की एकता और अखंडता जितनी आज मजबूत है,वैसा पहले कभी नही रही।दुनिया भर में आज मोदी जी के सुशासन की पहचान है।अनेक वैश्विक संगठनों ने मोदी जी को विश्व के सर्वश्रेष्ठ नेता का खिताब दिया है।यह हम सभी भारतीयों के लिए गौरव की बात है।देश के 80 करोड़ से अधिक नागरिको तक अनवरत खाद्यान की आपूर्ति कोरोना के वैश्विक संकट के दौरान,सुनिश्चित करते रहने से बड़ा गरीब कल्याण और क्या हो सकता है भला?मोदी जी ने सभी गरीबों के सर के छत की चिंता की,शुद्ध नल जल उपलब्ध कराने से लेकर उन्हें आयुष्मान भारत के तहत मुफ्त चिकित्सा से लेकर तमाम कल्याणकारी योजनाओं से उन्हें जोड़ा।पिछले 8 वर्षों में देश की गरीबी 22℅ से घट कर 10%से नीचे आ गई है।कोरोना संकट के बावजूद अत्यंत गरीबी की दर भी 1% से कम 0.8%पर स्थिर बनी हुई है।पहले देश मे एक सामान्य सोच बन गई थी कि इस देश का कुछ भी नही हो सकता।अब आम जनमानस में यह धारणा बनी है कि मोदी है तो मुमकिन है।8साल की यह यात्रा देश की सोच को बदलने की यात्रा है।पहले सरकार जनता से कहती थी -"हुआ तो हुआ" अब जनता कह रही है।जो कभी नही हुआ वो मोदी जी के शासन काल मे हुआ।ये आत्मनिर्भर भारत की यात्रा है,विश्वगुरु के पद पर भारत को प्रतिष्ठित करने का मार्ग बनाने की यात्रा है।8 वर्ष की यह यात्रा आत्मनिर्भर भारत की संकल्प से सिद्धि की यात्रा है।आत्मनिर्भर भारत देश का रास्ता भी है और संकल्प भी । आत्मनिर्भरता में देश के अनेक मुश्किलों का हल है । ॥ बदलाव की कहानी , प्रगति की निशानी ॥ पहले योजनाएं कागज पर ही बनती थी , कागज पर ही लागू होती थी और कागज पर ही पूरी हों जाती थी । आज जनता यह देख रही है की जिस योजना का शिलान्यास होता है , वह योजना उसी कार्यालय में पूरी भी होती है । बीते 8वर्ष कागज से क्रियान्वयन और अमलीकरण की यात्रा के रहे है । मोदी जी की हर योजना अंतिम लाभार्थी तक पहुंचने के परिणाम यह रहे है कि :- - 8वर्षों में देश की प्रति व्यक्ति आय दोगुनी हुई है । 2014में 79हजार रुपये सालाना अब डेढ़ लाख रुपये हों गया है । - विदेशी मुद्रा भंडार भी लगभग दोगुना हूआ है । 2014में 300अरब डॉलर , अब लगभग 600अरब डॉलर - आजादी के 70साल में देश में केवल 6.37लाख प्राइमरी स्कूल बने जबकि मोदी जी की सरकार के केवल 8वर्षों में 6.53लाख प्राइमरी स्कूल बने । - विगत 8 वर्षों में देश में 15 नए एम्स का निर्माण हूआ जबकि आजादी से 2014तक देश में केवल 7 एम्स थे , उसमें से भी 6 श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में बने । - डॉक्टरों की संख्या भी पिछले 8 साल में 12 लाख से ज्यादा बढ़ि है । 8 साल में लगभग 170 नए मेडिकल कॉलेज बने । - 8साल में भारत का सड़क नेटवर्क दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुंच गया । पिछले 8 साल में मोदी जी की सरकार ने लगभग तीन लाख 25 हजार किमी सड़क निर्माण को मंजूरी दी है - सौर और पवन ऊर्जा में भारत की क्षमता बीते पांच सालों में दोगुनी हुई । - 2012 -13 में देश में खाद्यान्न का उत्पादन 255 मिलियन टन था जो 2021- 22में बढ़ कर 316.06 मिलियन टन हो गया है । यह आजादी के बाद अब तक का रिकार्ड उत्पादन है । - कोविड के कारण उत्पन्न मंदी के बावजूद पिछले वित्त वर्ष में 418 अरब डॉलर का रिकार्ड निर्यात । - वित्तीय वर्ष 2021- 22 के दस महीने में भारत के कृषि निर्यात में 23प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई । - 2009से 2014 ( मनमोहन सरकार ) के पांच सालों में कृषि बजट में 8.5% की वृद्धि हुई थी , वही 2014से 2019 के बीच कृषि बजट में 38.8%की वृद्धि हुई । - 2009 - 10 में मनमोहन सरकार में जो कृषि बजट था , अब वह 10 गुना बढ़ गया है ।डीबीटी योजना,गरीब कल्याण अन्न योजना,किसान सम्मान निधि,आयुष्मान भारत,सौभाग्य योजना,उज्ज्वला योजना,प्रधानमंत्री आवास योजना,स्वच्छ भारत अभियान,खाद्य सुरक्षा, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जैसे योजनाओं से देश को सशक्त बनाने की दिशा में राष्ट्र आगे बढ़ रहा है।आज इस अवसर पर प्रदेश कार्यसमिति सदस्य गुरूपाल सिंह भल्ला,प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जग्गनाथ पाणिग्रही,प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सत्यानंद राठिया,प्रदेश कार्यसमिति सदस्य विवेक रंजन सिन्हा, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बृजेश गुप्ता ,अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य श्रीकांत सोमावार,जिला भाजपा के उपाध्यक्ष कौशलेश मिश्रा,आई टी सेल प्रदेश कार्यसमिति सदस्य आलोक सिंह,वरिष्ठ भाजपा नेता सुभाष पांडे, मुकेश जैन,रत्थु गुप्ता, चंद्रप्रकाश पांडे,बिलिस गुप्ता, अनुपम पाल,अरुण कातोरे,अंशु टुटेजा,विनायक पटनायक,सुरेश गोयल,ज्ञानेश्वर सिंह गौतम,कैलाश पंडा, मनोज प्रधान,खुलू सारथी, गोपिका गुप्ता,प्रमोद गुप्ता,सुभाष चौहान उपस्थित रहे।उक्त प्रेस विज्ञप्ति मनीष शर्मा ने जारी की है।
जब राजपाट छिना, प्रिवी पर्स बंद हुए तब भी कांग्रेसी थे : टीएस सिंहदेव
दो दिवसीय दौरे पर स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, कार्यकताओं और समाज को दिया पूरा समय
27% कम गिरा पानी, अब रफ्तार पकड़ भरपाई की आशा
कल भी बने बारिश के आसार
उमस से लोग हलाकान, मॉनसून आने की परिस्थितियां अनूकूल
अधिकतम तापमान में गिरावट का दौर होगा शुरू
गर्मी का बुझता दिया, मॉनसून के पहले लू की चेतावनी
पिछले दो दिनों से रायगढ़ भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं मौसम विज्ञान विभाग रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर एच पी चंद्रा के अनुसार एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती घेरा पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है। एक द्रोणिका पूर्वी उत्तर प्रदेश से नागालैण्ड तक 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है। प्रदेश में कल दिनांक 4 जून को अधिकतम तापमान में विशेष परिवर्तन होने की संभावना नहीं है परंतु अधिकतम तापमान में गिरावट की संभावना नहीं है। प्रदेश में एक दो पैकेट में ग्रीष्म लहर चलने अथवा ग्रीष्म लहर जैसे स्थिति रहने की सम्भावना है। प्रदेश में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने की सम्भावना है।इस हेतु विभाग ने एक विशेष चेतावनी बुलेटिन भी जारी किया है। आने वाले दो दिनों में अधिकतम तापमान अपने अधिकतम स्तर पर पहुँचने की आशंका है। शुष्क गर्मी से हीट स्ट्रोक की संभावना सेहत का रखें ध्यान बच्चों, वृद्धों को यथासंभव घर पर रहने की सलाह है देर शाम के पहले अपरिहार्य स्थिति में ही निकलें । बाहर निकलने वाले जूते पहने, पूरी बांह के कपड़े पहने, पानी या अन्य द्रव पदार्थ लेते रहें । बिना पानी पिये और बाहर लिए बिना घर से ना निकलें।
धूप में रखें अपनी आंखों का ख्याल
सावधानी ही बचाव है : डॉ मेजर नीलम भगत
बच्चों ने सीखा सांसों को नियंत्रित करना
किंडर वैली स्कूल में मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
शुरुआत से ही बच्चों में योग की आदत डालना बेहतर : जागृति प्रभाकर
साल के सबसे बड़े दिन, योग को लेकर होंगे विविध आयोजन
भारतीय बास्केटबॉल टीम से खेलेगा रायगढ़ का संजू
पहली बार भारतीय टीम में रायगढ़ के खिलाड़ी का हुआ चयन, कतर में आयोजित एशियन बास्केटबॉल चैंपियनशिप अंडर-16 में भारतीय बास्केटबॉल टीम का हिस्सा
वायरोलॉजी लैब टेक्निशियन भर्ती पर उठे सवाल
एनएमसी के सलाह को राज्य सरकार ने किया साइड
सेठ पालूराम और सेठ किरोड़ीमल ने ऐसे बदली रायगढ़ की तस्वीर
रायगढ़ के उद्योगनगरी बनने की कहानी
पंडित सिद्धेश्वर गुरू : एक था ग्रामीण गांधी
शहरनामा : आजादी की लड़ाई के झंडाबरदार और स्टेट कांग्रेस के संस्थापक गुरू बाबा कितने याद हैं रायगढ़ियों को
चक्रधर समारोह : 5 लाख का बजट और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग
प्रशासन ने शुरू की तैयारी, कलाकारों के रिकॉर्डिंग आना शुरू
एमसीएच : कोरोना मरीजों को दे रहा जीवनदान
ठीक हुए मरीज पत्र लिखकर जता रहे एमसीएच का आभार, पत्र हुए वायरल
मुस्कुराइये.... आप क्राइमगढ़ में हैं !
क्या अपराधियों में पुलिस का डर हुआ खत्म?
रायगढ़ जहां डीजीपी के आदेश का नहीं होता पालन
ट्रांसफर के बाद भी नहीं जा रहे पुलिसकर्मी
स्त्रियों के महिमामंडन की सीमा सिर्फ हाशिये तक क्यों?
मेरे इस शीर्षक पर कुछ दबे विरोध के स्वर मुखर हो सकते हों पर अपनी सत्तर साल की उम्र तक इर्द गिर्द पसरे इस समाज मे मैनें यही महसूस किया है। उंगलियों पर गिनी जाने वाली चंद महिलाओं को छोड़कर शेष बची स्त्रियों की नियती यही होती है। दरअसल पूरी जिन्दगी को किश्तों मे जीने वाली स्त्री घर की छत की तरह होती है। घास फूस और पुआल से लेकर सीमेन्ट की छत तक की शक्ल अख्तियार कर आधुनिक युग मे सीलिंग तक के सौन्दर्यीकरण का सफर तय कर चुकी स्त्रियां आज भी उसी सीलिंग की तरह हैं जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। आज भी दिवारों की कमजोरी या बेईमानी उस छत को कभी भी ढहा सकती है। ऐसा नहीं की स्त्री को बोलना नहीं आता या वह इस कला मे पारंगत नहीं लेकिन वह जानती है कि जिस दिन वह खुलकर सच बोलेगी घर की बुनियादें हिल जाऐगी। बस इसीलिए वह चुप रहकर संतुलन बना लेती है। स्त्रियों के इसी संस्कारगत कमजोरी का फायदा समाज उठाता है। वह बखूबी जानता है कि स्त्रियां टूटने की बजाय जोडऩे मे जादा यकीन रखती हैं और इसी समझौतावादी नजरिए को उसकी कमजोरी मान बैठने की भूल कर बैठता है। एक जाने या अनजाने व्यक्ति के साथ अपरिचित परिवेश मे सामन्जस्य स्थापित करना भारतीय स्त्री का मौलिक गुण है। प्रश्न यह है कि क्या उसे उसी अनुपात मे मौलिक अधिकार भी दिया जाता है समाज द्वारा? यहां मैं महज दो स्त्रियों का उल्लेख करना चाहूंगी। पहली मधुलिका रावत और दूसरी अनुजा शुक्ला और भी हो सकती हैं जिनका उल्लेख फिलहाल मै नही कर रही हूँ।महिला दिवस पर इन दोनों का उल्लेख करना इसलिए भी जरूरी है कि उन दोनों ने अपने पति के साथ आखिरी वक्त और आखिरी साँस तक संघर्ष करते हुए इस दुनिया को अलविदा कहा। संभवत: भारतीय सैन्य इतिहास में यह पहली घटना है। दोनों फौजी पत्नियों की संस्था(Army Wives Welfare Association)की प्रमुख रही। अपने घर परिवार के अलावा फौजी पत्नियां और उनके परिवार का सामाजिक प्रबंधन का दायित्व निभाती थी। ओहदे के चलते एक के दायित्व का दायरा बड़ा रहा और दूसरी का तुलनात्मक रूप से कम लेकिन दोनों ने कुशलता से इसे सँभाल रखा था। मेरी नजरों मे वे भी शहीद का सम्मान पाने की बराबर की हकदार थी लेकिन अखबार और न्यूज चैनलों ने एक तरह से उन्हें हाशिये पर डाल दिया जिन परिवारों की वे बेटियां थी उन्हें उतनी तवज्जो नहीं दी गई जिसके वे भी हकदार थे। स्व.विपिन रावतजी को उनके इस सर्वोच्च बलिदान पर राष्ट्र द्वारा अलंकृत भी किया गया पर उनकी पत्नी स्व.मधुलिकाजी भी उनके साथ ही शहीद हुई थी। क्या ऐसी स्त्री के सम्मान के लिए देश के पास कोई अन्य विकल्प नहीं था। यदि नहीं तो विकल्प तलाशे जा सकते थे।कम से कम राज्य सरकारें जो बेटियों को लेकर कागजी संवेदनशीलता और नारेबाजी दिखाती है उनका तो यह प्रथम कर्तव्य था। बगैर किसी रणकौशल या उसकी विधाओं से अनभिज्ञ दो दो मोर्चों पर जूझती ऐसी स्त्रियां क्या सम्मान की हकदार नहीं? क्या आखें मूँदकर अपनी बेटी को ऐसे परिवारों को सौप देने वाले परिवार सम्मान के हकदार नहीं??? गहराई से सोचना होगा देश,राज्यों और भारतीय रक्षा विभाग के सर्वोच्च पदों पर बैठे लोगों को। सेना मे तो फिर भी वीर नारी,वीर माता का दर्जा दिये जाने की परंपरा रही है पर ऐसी बेटियों का सम्मान राष्ट्रीय पर्वों पर राज्य सरकारों द्वारा किया जाना भी बेहद जरूरी है। सरकारें इस विषय पर गंभीरता से सोचे। ऐसा नहीं कि हमारे देश मे स्त्रियों का गौरवशाली इतिहास न रहा हो।दुख इस बात का है कि उनका महिमामंडन सिर्फ हाशिये तक रहा। हम भले ही गर्व से यह कह ले कि आज किस क्षेत्र मे स्त्रियों की पैठ नहीं है। राजनीति, खेल, युद्ध क्षेत्र या कला के सभी क्षेत्रों मे उसकी भागेदारी हो चुकी है और वह सफलता के कीर्तिमान भी स्थापित कर रही है। यह एक हद तक सच भी है पर जब बात स्वीकारोक्ति की हो तो तुलनात्मक रूप से देश की आबादी की लगभग आधी फीसदी हिस्सा रही ये स्त्रियां क्या आधे फीसदी सम्मान की हकदार भी नहीं हैं? (अंत मे मैं उल्लेख जरूर करूगीं कि अनुजा शुक्ला मेरी बहू थी जो अपने पति विप्लव और सात वर्षीय बेटे अबीर के साथ आतंकी हमले मे शहीद हो गई और अबीर शायद इस देश का सबसे नन्हा शहीद होगा जिसे फौजी परिवार का होने की सजा मिली।)
नारी तुम श्रद्धा हो
अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष के आगमन पर न जाने क्यों वेदना तथा उत्साह दोनों भर जाता है । वेदना इसलिए कि मुझे इस दिवस पर बड़े-बड़े नारे लगाते, परिचर्चाओं का आयोजन करते ,तस्वीरें खिंचवा कर बुके देकर, एहसास दिलाते माहौल का कि आज महिला दिवस है और महिलाएं ही हैं जो सक्षम हैं ,जो हर काम कर सकती हैं आदि का तमाम दिखावा व्यर्थ लगता है। रही बात उत्साह की तो महसूस होता है कि हमें कम से कम याद तो किया जाता है महिला दिवस मना कर । महिला दिवस का मनाने की शुरुआत 8 मार्च 1914 को हुई।क्लारा जेटकिन ने 1910 में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत की। इस का आयोजन एक श्रम आंदोलन के रूप में था जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने सालाना आयोजन के तौर पर स्वीकृति दी थी। इसकी शुरुआत का 'बीज' 1908 में पड़ा ,जब न्यूयार्क शहर में 15 हज़ार महिलाओं ने काम के घंटे कम करने, और बेहतर वेतन और वोट देने की मांग के साथ विरोध प्रदर्शन करके निकाला था। एक साल बाद अमेरिकी सोशलिस्ट पार्टी ने पहली बार राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत की।इस कॉन्फ्रेंस में 17 देशों की 100 महिला प्रतिनिधि हिस्सा ले रही थी। सब ने क्लारा का स्वागत किया ।उसके बाद अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पहली बार 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क ,जर्मनी ,स्विट्जरलैंड में मनाया गया। आधिकारिक तौर पर इसे मनाने की शुरुआत 1975 से प्रारंभ हुई ।संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1996 में पहली बार इसके आयोजन में थीम को अपनाया। अतीत का जश्न मनाओ ,भविष्य की योजना बनाओ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को प्रदर्शित करने वाले रंग हैं बैंगनी,हराऔर सफेद। इसमें बैगनी रंग न्याय और गरिमा का प्रतीक है। हरा रंग उम्मीद का प्रतीक है ।और सफेद रंग शुद्धता का सूचक होता है। रूस सहित दुनिया के कई देशों में इस दिन राष्ट्रीय अवकाश भी रहता है। महिलाओं को लैंगिक भेदभाव से ऊपर रखना चाहिए। परंतु ऐसा नहीं हो पाता महिलाएं सबसे अधिक इसका शिकार होती हैं। अभी कोरोना काल में हमने देखा कि किस तरह से लॉक डाउन की स्थिति में सभी घर में बैठे थे ।परंतु महिलाओं को खाली नहीं बैठने दिया गया। उसे नौकरी के साथ-साथ घर का काम भी करना पड़ा और थोड़ी बहुत जो मदद घरेलू नौकरों से मिलती थी, वह भी बंद थी। चकरघिन्नी बनी वह क्या खाक महिला वर्ष मनाएगी?यद्यपि पुरुष वर्ग मदद करते हैं, परंतु मुझे लगता है इसका प्रतिशत 30 या 40 से ज्यादा नहीं रहता। आज की नारी में छटपटाहट है आगे बढ़ने की ,जीवन और समाज के हर क्षेत्र में कुछ करिश्मा कर दिखाने की। उसे अविराम, अथक परिश्रम से नया सवेरा लाने की ,तथा ऐसी सशक्त इबारत लिखने की जिसमें महिला अबला न रहकर सबला बन जाए ।आज स्थिति यह है कि कानून और संविधान में दिए गएअधिकारों का संबल लेकर नारी अधिकारिता के लंबे सफर में 'मील के पत्थर' पार कर चुकी है ,फिर भी उसके लिए अभी कई और मंजिलों को छूना बाकी है। महिलाओं के सामाजिक सशक्तिकरण में शिक्षा की अहम भूमिका है।इससे महिलाएं न केवल लाभान्वित होती हैं वरन उसके शिक्षित होने से भावी पीढ़ी भी लाभान्वित होती है । भारत में लिंगानुपात व साक्षरता में महिलाएं पुरुषों से पीछे हैं । एक नागरिक होने के नाते हम सबको एक सकारात्मक सोच के साथ मिलजुल कर सामाजिक तस्वीर को बदलने का प्रयास करना चाहिए। महिलाओं को समझना होगा कि आज समाज में उनकी दयनीय स्थिति भगवान की देन न हो कर ,समाज में चली आ रही परंपराओं का परिणाम है ।स्थिति को बदलने का बीड़ा महिलाओं को स्वयं उठाना होगा। जब तक वह स्वयं अपनी सामाजिक स्तर पर आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं करेगी तब तक समाज में उसका स्थान गौण ही रहेगा। आज भी हमारी बहुसंख्यक आबादी गांव में है, इसलिए महिलाओं की बेहतरी के लिए गांव में पहल की जानी चाहिए। आज महिलाएं घर की चारदीवारी से बाहर निकल रूढ़िवादी प्रवृत्तियों को पार कर विभिन्न व्यवसायों में,सेवाओं में कार्यरत हैं। जिसमें निर्भरता भी आ रही है। बैंकिंग ,आईटी, मेडिकल, इंजीनियरिंग बिजनेस और उद्यमिता हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी योग्यता का लोहा मनवाया है। खेलों, फिल्म और सौंदर्य प्रतियोगिताओं ,पत्रकारिता ,लेखन आदि में भी महिलाओं ने अपने आप को स्थापित किया है। राजनीति में तो हर वार्ड, पंच ,सरपंच ,प्रधान प्रमुख, विधानसभा सदस्य, लोकसभा सदस्य, राज्यसभा सदस्य, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति जैसे पदों पर अपना दमखम दिखाने में पीछे नहीं है। देश के संविधान में महिलाओं को सदियों पुरानी दास्तां एवं गुलामी की जंजीरों से मुक्ति दिलाने के प्रावधान किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सबसे उत्तम तरीका यही है कि हम हर महिलाओं का सम्मान करें उनके हक के लिए बात करें ,बेटियों का सम्मान करें ,तथा उनके उज्जवल भविष्य के लिए काम करें , इसके लिए राष्ट्र निमार्ण की पॉलिसी निमार्ण में जब तक महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित नही होती तब तक अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की सार्थकता सिद्ध नही होगी।
कलेक्टर भीम सिंह ने भारी बारिश के बीच संभाला मोर्चा, देखें तस्वीरें
निगम अमला बीती रात से आयुक्त के साथ पूरे शहर में डटा हुआ है
तस्वीरों में देखें रायगढ़ में जनता कर्फ्यू का असर
22 मार्च यानी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर जिले में भी जनता कर्फ्यू का असर देखने को मिला। दोपहर तक पूरा शहर स्वस्फूर्त बंद था। हर मुख्य मार्ग और बाजार बंद मिले। गली-कूचे तक कोई व्यक्ति बाहर नहीं निकला।
हरि बोल, जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ निकली रथयात्रा, देखें गैलरी
रायगढ़ में दो दिनों की रथयात्रा आयोजित होती रही है। इसी क्रम में आज रथ द्वितिया के दिन शहर के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भगवान श्री को विधिविधान पूर्वक पूजा अर्चना पश्चात मंदिर के गर्भगृह तथा मंदिर परिसर से जय जगन्नाथ के जयघोष और घंट शंख ध्वनि के बीच ससम्मान बाहर निकाला गया। राजापारा स्थित प्रांगढ़ में मेले सा माहौल था और हजारो की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण भगवान श्री के दर्शन करने के लिए पहुंचे हुए थे। इससे पहले कल भगवान जगन्नाथ की विधि विधान से पूजा की गई जिसे फोटोग्राफर वेदव्यास गुप्ता ने अपने कैमरे में कैद किया।
इप्टा रायगढ़ के 25वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की झलकियां
27 से 31 जनवरी तक पॉलिटेक्निक ऑडिटोरिम में इप्टा रायगढ़ द्वारा 25वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जिसमें चार नाटक एवं दो फीचर फिल्में दिखाई गईं। समारोह की शुरुआत रायपुर के मशहूर रंगकर्मी मिर्जा मसूद को 10वां शरदचंद्र वैरागकर अवार्ड देकर की गई। यह कूवत सिर्फ रंगमंच रखता है जो वर्तमान सत्ता के मठाधीशों पर अजब मदारी गजब तमाशा नाटक के माध्यम से सीधे कटाक्ष कर सकता है। जहां एक मदारी को राजा बना दिया जाता है, शब्दों के अस्तित्व को खत्म कर दिया जाता है। बंदर राष्ट्रीय पशु बन जाता है। गांधी चौक नाटक में गांधीजी की प्रतिमा स्वयं यह चलकर वहां से हट जाती है कि जब रक्षक की भक्षक बन गए तो कोई क्या कर सकता है। नोटबंदी और जीएसटी पर गांव वाले सीधे प्रहार करते हैं। सुबह होने वाली है की लेखी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध होने के बाद लोगों को जागरूक करने को किताब लिखती और किताब को ही फांसी हो जाती है। बोल की लब आजाद हैं तेरे लोगों को दर्शकदीर्घा में झकघोर के रख देती है। तुरूप और भूलन जैसी फिल्में लोगों के मनोरंजन के अलावा दमदार संदेश भी देती है। तो देखें इस शानदार नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की कुछ झलकियां
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