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Raigarh Express, news of raigarh chhattisgarh

Tuesday, July 23, 2019
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चक्रधर नगर थाना परिसर में धर्म विशेष के धर्मस्थल का निर्माण आखिर किसकी अनुमति से?
संवैधानिक संस्था, सरकारी महकमा एवं उससे जुड़े व्यक्ति किसी धर्म विशेष के नाम पर प्रचार नहीं कर सकते। ऐसा करना भारतीय संविधान के बुनियादी तत्वों का उल्लंघन कहलाएगा। राज्य सरकार इस बात को सुनिश्चित करे कि कोई भी संवैधानिक संस्था, सरकारी महकमा एवं उससे जुड़े व्यक्ति इन बुनियादी तत्वों का उल्लंघन न करे। - सुप्रीम कोर्ट का फैसला ( एसआर बोममाई व अन्य विरुद्ध भारत सरकार व अन्य, सिविल अपील नंबर 3645/1989) भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। कानून के अनुसार यहां की कोई भी सरकारी संस्था लोगों के समक्ष किसी धर्म विशेष के प्रति अपनी आस्था नहीं जता सकती। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला और भारत का कानून को ताक पर रखकर हमारे यहां धर्म विशेष को महत्व दिया जाता है। इसका ताजा सुबूत है सीएसपी कार्यालय और चक्रधर नगर थाना के मध्य में नए धर्मस्थल का निर्माण है। करीब 1988 में अस्तित्व में आया चक्रधर नगर थाना उससे पहले चक्रधर नगर बस स्टैंड में चौकी था। जब थाना बना तो कोई धर्मस्थल नहीं था। कुछ साल बाद वहां स्थित बरगद के पेड़ के नीचे पत्थर रखे गए। फिर कुछ साल बाद एक एएसआई ने छोटा सा धर्मस्थल बनाया और अभी वर्तमान में पदस्थ नए थानेदार, थाने से भी ऊंचा धर्मस्थल बनवा रहा है। इस निर्माण को सही साबित करने में पूरा पुलिस महकमा जुट गया है। ठीक वैसे ही जैसे कलेक्टोरेट के मध्य में बना धर्मस्थल और गर्ल्स कॉलेज कैंपस में बना धर्मस्थल। इनका निर्माण गैरकानूनी है क्योंकि सरकारी जमीन यानी राज्य और राज्य धर्मनिरपेक्ष हैं। फिर सवाल आता है कि इन सरकारी जगहों पर धर्म विशेष के धर्मस्थल क्यों बन जाते हैं। जिसका जवाब यह मिलता है कि धर्मस्थल बनाए जाने से किसी को क्या आपत्ति होगी? प्रशासन की मौन स्वीकृति में सब चलता है। विख्यात व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई के किरदार इंस्पेक्टर मातादीन के जैसे रायगढ़ पुलिस हो गई है। चांद पर बढ़ रहे अपराधों को नियंत्रित करने के लिए इंस्पेक्टर मातादीन को चांद पर डेपुटेशन पर भेजा जाता है। जहां वह चांद के पुलिस अधिकारियों को ज्ञान देता है कि क्राइम रोकना है तो हर थाने में हनुमानजी का मंदिर होना अनिवार्य है। qqq कौन बनवा रहा है धर्मस्थल रायगढ़ ज़िला आदिवासी बाहुल्य है। रायगढ़ संसदीय क्षेत्र भी आदिवासी है। ऐसे में यहां के बड़े थानों में से एक में धर्म विशेष को प्रोत्साहन देना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। जब हमने धर्मस्थल निर्माण पर थाने और सीएसपी कार्यालय के लोगों से बात की तो पता चला कि यहां पदस्थ नए थानेदार बजरंजबली के भक्त हैं और वो ही अपने खर्चे पर इस धर्मस्थल का निर्माण कर रहे हैं। हालांकि कुछ लोग दबीं जुबां यह भी कह रहे हैं कि चक्रधर नगर के नए थाने को बनाने वाला ठेकेदार ही धर्मस्थल बनाकर दे रहा है। अगर ऐसा है तो आप नए थाने के गुणवत्ता का अंदाजा लगा सकते हैं कि उसी के पैसे से लाखों का धर्मस्थल गिफ्ट किया जा रहा है। स्थानीय निवासी अभिनव कुमार कहते हैं कि जब पुलिस ही एक ही धर्म का समर्थन करेगी तो शुरुआती न्याय की उम्मीद करना बेमानी है। कल कोई दूसरे धर्म का प्रभारी आएगा तो वह भी अपने धर्म का धर्मस्थल बनाएगा। ऐसे में पुलिस धर्मनिरपेक्ष कहां रही? धर्मस्थल के निर्माण पर हमें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन जो नियम विपरीत हो और जहां धर्मनिरपेक्षता की उम्मीद की जाती है वहीं के लोग धर्म विशेष को महत्व देंगे तो हम विरोध करेंगे। भले ही हमारी आवाज पुलिस प्रशासन दबा ही क्यों न दे। qqq थानों में धर्मस्थल का क्या है इतिहास कुछ पुलिसकर्मी सालों से थाने में धर्मस्थल होने की तरफदारी कर रहे हैं। पुलिस, थाना और धर्मस्थल के इतिहास के संदर्भ में इतिहास के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार अभिमन्यु सिंह कहते हैं 1861 में ब्रिटिश शासन में पुलिस की स्थापना की गई। इससे पहले न्याय व्यवस्था पूरी तरह से पंच-सरपंचो के हाथ में थी। गांव के मध्य में या फिर बाहर बैठने की व्यवस्था होती थी, पेड़ लगे होते थे और भगवान का डर दिखाने/शपथ दिलाने के लिए छोटे-छोटे धर्मस्थल होते थे। इसी व्यवस्था को आगे बढ़ाया गया। थानों की स्थापना हुई, थाना वहीं बने जहां पंच-सरपंचो की बैठक लगती तो अपने आप छोटे-छोटे धर्मस्थल थाने में आ गए। पुराने शहरों के थानों में या उसके आसपास आप धर्मस्थल देख सकते हैं। लेकिन थाने में धर्मस्थल होना अनिवार्य नहीं। आजादी के बाद से बने थानों में धर्मस्थल बनाने का शगल सा चल गया है। थाना परिसर में धर्मस्थल बनाना गैरकानूनी है, संविधान की मूलभावना का उल्लंघन है। जिसमें कहा गया है कि सरकारी कर्मचारी के आचरण और व्यवहार कहीं से भी उसके धर्म विशेष को समर्थन करना परिलक्षित नहीं होना चाहिए। qqq धर्मस्थल पुलिस नहीं बना सकती : डीआईजी मनहर पुलिस विभाग के योजना एवं प्रबंध के डीआईजी हेतराम मनहर कहते हैं कि धर्म विशेष का धर्मस्थल पुलिस नहीं बना सकती। ना ही इसके लिए पुलिस महकमे में बजट की व्यवस्था है। हां अगर किसी की धार्मिक भावनाएं आहत ना हो तो एसपी के लिखित सहमति के बाद धर्मस्थल का निर्माण हो सकता है लेकिन इसका खर्चा विभाग नहीं देता और चंदे की राशि से उसका निर्माण होता है। रायगढ़ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल ने धर्मस्थल निर्माण की बात को टाल दिया। वो अंत तक धर्मस्थल के पुर्ननिर्माण की बात रट रहे थे। धर्मस्थल निर्माण या पुनर्निर्माण के लिखित आदेश या अनुमति पर अधीक्षक महोदय पुनर्निर्माण की बात ही करते रहे। आदेश या सहमति पर कुछ नहीं कहा। धर्मस्थल निर्माण के खर्चे से संबंधित सवाल से वो बचते रहे।
आसपास
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अलनीनो गॉन तो बारिश फुल ऑन, सावन की शुरुआत में लगेगी बारिश की झड़ी
मौसम
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बीएसपी बना 18वीं सब जूनियर राज्य स्तरीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता का सिरमौर
हमारे बच्चे
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बीमारी या अंधविश्वास, इस गांव के हर घर में एक शख्स बीमार
आसपास
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किराना दुकान में मिल रही हर ब्रांड की शराब तो स्टेडियम के सामने चल रहा खुलेआम सट्टा
आसपास
चक्रधर नगर थाना परिसर में धर्म विशेष के धर्मस्थल का निर्माण आखिर किसकी अनुमति से?
संवैधानिक संस्था, सरकारी महकमा एवं उससे जुड़े व्यक्ति किसी धर्म विशेष के नाम पर प्रचार नहीं कर सकते। ऐसा करना भारतीय संविधान के बुनियादी तत्वों का उल्लंघन कहलाएगा। राज्य सरकार इस बात को सुनिश्चित करे कि कोई भी संवैधानिक संस्था, सरकारी महकमा एवं उससे जुड़े व्यक्ति इन बुनियादी तत्वों का उल्लंघन न करे। - सुप्रीम कोर्ट का फैसला ( एसआर बोममाई व अन्य विरुद्ध भारत सरकार व अन्य, सिविल अपील नंबर 3645/1989) भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। कानून के अनुसार यहां की कोई भी सरकारी संस्था लोगों के समक्ष किसी धर्म विशेष के प्रति अपनी आस्था नहीं जता सकती। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला और भारत का कानून को ताक पर रखकर हमारे यहां धर्म विशेष को महत्व दिया जाता है। इसका ताजा सुबूत है सीएसपी कार्यालय और चक्रधर नगर थाना के मध्य में नए धर्मस्थल का निर्माण है। करीब 1988 में अस्तित्व में आया चक्रधर नगर थाना उससे पहले चक्रधर नगर बस स्टैंड में चौकी था। जब थाना बना तो कोई धर्मस्थल नहीं था। कुछ साल बाद वहां स्थित बरगद के पेड़ के नीचे पत्थर रखे गए। फिर कुछ साल बाद एक एएसआई ने छोटा सा धर्मस्थल बनाया और अभी वर्तमान में पदस्थ नए थानेदार, थाने से भी ऊंचा धर्मस्थल बनवा रहा है। इस निर्माण को सही साबित करने में पूरा पुलिस महकमा जुट गया है। ठीक वैसे ही जैसे कलेक्टोरेट के मध्य में बना धर्मस्थल और गर्ल्स कॉलेज कैंपस में बना धर्मस्थल। इनका निर्माण गैरकानूनी है क्योंकि सरकारी जमीन यानी राज्य और राज्य धर्मनिरपेक्ष हैं। फिर सवाल आता है कि इन सरकारी जगहों पर धर्म विशेष के धर्मस्थल क्यों बन जाते हैं। जिसका जवाब यह मिलता है कि धर्मस्थल बनाए जाने से किसी को क्या आपत्ति होगी? प्रशासन की मौन स्वीकृति में सब चलता है। विख्यात व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई के किरदार इंस्पेक्टर मातादीन के जैसे रायगढ़ पुलिस हो गई है। चांद पर बढ़ रहे अपराधों को नियंत्रित करने के लिए इंस्पेक्टर मातादीन को चांद पर डेपुटेशन पर भेजा जाता है। जहां वह चांद के पुलिस अधिकारियों को ज्ञान देता है कि क्राइम रोकना है तो हर थाने में हनुमानजी का मंदिर होना अनिवार्य है। qqq कौन बनवा रहा है धर्मस्थल रायगढ़ ज़िला आदिवासी बाहुल्य है। रायगढ़ संसदीय क्षेत्र भी आदिवासी है। ऐसे में यहां के बड़े थानों में से एक में धर्म विशेष को प्रोत्साहन देना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। जब हमने धर्मस्थल निर्माण पर थाने और सीएसपी कार्यालय के लोगों से बात की तो पता चला कि यहां पदस्थ नए थानेदार बजरंजबली के भक्त हैं और वो ही अपने खर्चे पर इस धर्मस्थल का निर्माण कर रहे हैं। हालांकि कुछ लोग दबीं जुबां यह भी कह रहे हैं कि चक्रधर नगर के नए थाने को बनाने वाला ठेकेदार ही धर्मस्थल बनाकर दे रहा है। अगर ऐसा है तो आप नए थाने के गुणवत्ता का अंदाजा लगा सकते हैं कि उसी के पैसे से लाखों का धर्मस्थल गिफ्ट किया जा रहा है। स्थानीय निवासी अभिनव कुमार कहते हैं कि जब पुलिस ही एक ही धर्म का समर्थन करेगी तो शुरुआती न्याय की उम्मीद करना बेमानी है। कल कोई दूसरे धर्म का प्रभारी आएगा तो वह भी अपने धर्म का धर्मस्थल बनाएगा। ऐसे में पुलिस धर्मनिरपेक्ष कहां रही? धर्मस्थल के निर्माण पर हमें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन जो नियम विपरीत हो और जहां धर्मनिरपेक्षता की उम्मीद की जाती है वहीं के लोग धर्म विशेष को महत्व देंगे तो हम विरोध करेंगे। भले ही हमारी आवाज पुलिस प्रशासन दबा ही क्यों न दे। qqq थानों में धर्मस्थल का क्या है इतिहास कुछ पुलिसकर्मी सालों से थाने में धर्मस्थल होने की तरफदारी कर रहे हैं। पुलिस, थाना और धर्मस्थल के इतिहास के संदर्भ में इतिहास के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार अभिमन्यु सिंह कहते हैं 1861 में ब्रिटिश शासन में पुलिस की स्थापना की गई। इससे पहले न्याय व्यवस्था पूरी तरह से पंच-सरपंचो के हाथ में थी। गांव के मध्य में या फिर बाहर बैठने की व्यवस्था होती थी, पेड़ लगे होते थे और भगवान का डर दिखाने/शपथ दिलाने के लिए छोटे-छोटे धर्मस्थल होते थे। इसी व्यवस्था को आगे बढ़ाया गया। थानों की स्थापना हुई, थाना वहीं बने जहां पंच-सरपंचो की बैठक लगती तो अपने आप छोटे-छोटे धर्मस्थल थाने में आ गए। पुराने शहरों के थानों में या उसके आसपास आप धर्मस्थल देख सकते हैं। लेकिन थाने में धर्मस्थल होना अनिवार्य नहीं। आजादी के बाद से बने थानों में धर्मस्थल बनाने का शगल सा चल गया है। थाना परिसर में धर्मस्थल बनाना गैरकानूनी है, संविधान की मूलभावना का उल्लंघन है। जिसमें कहा गया है कि सरकारी कर्मचारी के आचरण और व्यवहार कहीं से भी उसके धर्म विशेष को समर्थन करना परिलक्षित नहीं होना चाहिए। qqq धर्मस्थल पुलिस नहीं बना सकती : डीआईजी मनहर पुलिस विभाग के योजना एवं प्रबंध के डीआईजी हेतराम मनहर कहते हैं कि धर्म विशेष का धर्मस्थल पुलिस नहीं बना सकती। ना ही इसके लिए पुलिस महकमे में बजट की व्यवस्था है। हां अगर किसी की धार्मिक भावनाएं आहत ना हो तो एसपी के लिखित सहमति के बाद धर्मस्थल का निर्माण हो सकता है लेकिन इसका खर्चा विभाग नहीं देता और चंदे की राशि से उसका निर्माण होता है। रायगढ़ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल ने धर्मस्थल निर्माण की बात को टाल दिया। वो अंत तक धर्मस्थल के पुर्ननिर्माण की बात रट रहे थे। धर्मस्थल निर्माण या पुनर्निर्माण के लिखित आदेश या अनुमति पर अधीक्षक महोदय पुनर्निर्माण की बात ही करते रहे। आदेश या सहमति पर कुछ नहीं कहा। धर्मस्थल निर्माण के खर्चे से संबंधित सवाल से वो बचते रहे।
बीमारी या अंधविश्वास, इस गांव के हर घर में एक शख्स बीमार
बिहार के चमकी बुखार के बारे में तो आपने सुना होगा। लेकिन क्या आपने जिले के एक ऐसे गांव के बारे में सुना है जहां हर घर में एक व्यक्ति बीमार है। यह बीमारी है कूबड़पन की। कूबड़पन जन्मजात होता है लेकिन यहां इस गांव में जन्म के साथ ही जन्म के बाद भी लोग कूबड़पन का शिकार हो रहे हैं। इस बीमारी के बारे में ब्लाक मुख्यालय तक खबर है लेकिन स्वास्थ्य महकमे और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के कारण आज तक यहां बीमारी का इलाज नहीं खोजा जा सका है। बीमारी की वजह से बूढ़े, बच्चे, जवान सभी के दांत काले हो रहे हैं लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि आखिर हो क्या रहा है? वहीं कुछ लोग इसे भूत-प्रेत का प्रकोप मान रहे हैं तो कुछ हैंडपंप की दूषित पानी को वजह बता रहे है । केराकोना ग्राम धरमजयगढ़ से चंद किलोमीटर की दूरी पर मांड नदी के तट पर बसा हुआ है जहां आदिवासी समुदाय के 10 परिवार के लोग निवासरत है। जिसमें लगभग सभी घरों में एक से दो लोग इस विचित्र कुबड़पन के बीमारी के शिकार है वहीं कुछ लोग तो घसीट- घसीट कर जीवन काट रहे हैं इस दयनीय जीवन के पीछे गांववासी भूत-प्रेत का काला साया गांव में पड़ने को मानने लगे है, उनकी माने तो ये बीमारी उनकी नज़र से लाइलाज है। इस बीमारी से निजात पाने वे बैगा से झाड़फूक के साथ-साथ देवक्टरी इलाज कराकर थक चुके है। इन सब के बाद भी उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा है कि आखिर गांव में इस बीमारी का प्रकोप कैसे पड़ गया है। qqq गांव छोड़कर जा रहे लोग पीड़ित ग्रामीण देवमति, बलिंदरबाई, सुनीता ,आसमोती बाई , सोनामती ,लीलावती ,पेनियासो, सोनसाय, रंजीत राठिया के चेहरे पर चिंता की गंभीर लकीरे इस बीमारी की भयावहपन को बताने के लिए काफी है। अब उन्हें इस बात की चिंता सताने लगी है कि हमारे बच्चे भी इस कुबड़ेपन का शिकार न हो जाएं कुल मिलाकर उन्हें अपना भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। यहां इस कुबड़ेपन की बीमारी से घबराकर कुछ लोग गांव से अन्यत्र पलायन कर चुके हैं, वहीं दूसरी ओर संबंधित विभाग और प्रशासन को इस अति संवेदनशील मामले से मतलब नहीं है । अगर बात करें पीएचई विभाग की तो उन्हें जानकारी तक नहीं है कि केराकोना ग्राम में कितने बोरिंग और उनकी क्या दशा है। ग्रमीण जिस बोरिंग का पानी पी रहे हैं वो दूषित और बदबूदार है। इसके अलावा उनके पास दूसरा कोई विकल्प भी नहीं है। दूसरी ओर स्वास्थ्य शिविर कभी कभार औपचरिकता स्वरुप लगाकर स्वास्थ्य विभाग महज खानापूरी कर लेता है। ऐसी व्यवस्था में कूबड़ेपन की बीमारी से निजात पाने के लिए ग्रामीणों को कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा है । qqq बीमारी गंभीर लेकिन कैंप के भरोसे बैठा स्वास्थ्य महकमा धरमजयगढ़ सेक्टर प्रभारी डॉक्टर खुर्शीद खान कहते हैं कि पानी में एक विशेष तत्व फ्लोराइड की अधिकता से दांतों में कालापन ,पीलापन ,कमर दर्द कुबड़ेपन की बीमारी होती है। लंबे समय तक इस तरह के दूषित जल के प्रयोग से इस प्रकार के लक्षण देखे जाते हैं। समय रहते बीमारी की रोकथाम नहीं होने से स्पाइनल कॉड में नसों में दबाव, कमज़ोरी व पैरालिसिस की गंभीर समस्या हो सकती है। बकौल डॉ. खान अस्पताल प्रबंधन से चर्चा कर केराकोना में स्वास्थ्य कैंप लगवाने की बात कही है ।
किराना दुकान में मिल रही हर ब्रांड की शराब तो स्टेडियम के सामने चल रहा खुलेआम सट्टा
एक दशक से अधिक समय से अवैध शराब दुकान चले, खुलेआम सट्टा खेला जाए, कबाड़ी बेलगाम हो जाएं तो समझो शहर में पुलिस की हनक नहीं है।
क्या आपको दिखता है 23 एकड़ का बाघ तालाब !
130 साल पुराने बाघ तालाब को जानबूझकर विलुप्त किया जा रहा
धनकुबेरों का लोकतंत्र
संदर्भ : भारतीय लोकतंत्र की नई परिभाषा धनकुबेरों की, धनकुबेरों द्वारा, धनकुबेरों के लिये
सुरुज ले आंखी मिला के मनिस लोकतंत्र के जब्बर तिहार
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सरकार चुनने के लिए लोगों ने दिखाया उत्साह। बैसाख की भरी दोपहरी में भी लंबी कतारों में खड़े रहे मतदाता। लोकसभा क्षेत्र में 74.76 फीसदी वोटिंग हुई।
दिलचस्प आंकड़ों के आईने में रायगढ़ लोकसभा सीट
लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के मतदान के एक दिन पहले जिले में सन्नाटा फैला हुआ था। चुनाव काम में लगी गाड़ियां ही सड़कों पर आती-जाती दिखीं। इसके पहले प्रचार के अंतिम दिन दोनों दलों ने शहर मे रैली कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। कांग्रेस के तरफ से एनएसयूआई के अगुवाई में जहां रैली निकाली गई वहीं भाजपा ने अलग अलग क्षेत्रों में स्थानीय चेहरों के साथ रैली निकाली। हालांकि आम लोगों पर किसी भी रैली का असर नहीं दिखा। मतदाता अभी ख़ामोश है और 23 अप्रैल के इंताजर कर रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों पर गौर करें तो भाजपा प्रत्याशी विष्णुदेव साय को 6,62,478 वोट मिले थे वहीं कांग्रेस प्रत्याशी आरती सिंह को 4,45,728 वोट मिले थे और भाजपा ने 216450 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी लेकिन इस वर्ष चुनावी समीकरण बदल गए और रायगढ़ लोकसभा के सभी आठों विधानसभा में कांग्रेस के विधायक जीत कर आए हैं और इन सभी विधायकों के जीत का अंतर 1,97,527 है। वहीं भाजपा ने वर्तमान सांसद विष्णु देव साय की टिकट काटकर नए प्रत्याशी गोमती साय को मैदान में उतारा है ऐसे में देखना होगा कि क्या भाजपा नए और महिला प्रत्याशी के बल पर इस आंकड़े को पाटने में सक्षम हो पाती है? रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र में करीब 17 लाख मतदाता 14 प्रत्याशियों के भविष्य तय करेंगे। जिसमें 10 लाख 99 हजार मतदाता रायगढ़ जिले के हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में 8 विधानसभा क्षेत्र हैं रायगढ़, सारंगढ़, धरमजयगढ़, खरसिया, लैलूंगा, पत्थलगांव, कुनकुरी, जशपुर। इन सभी सीटों पर फिलहाल कांग्रेस काबिज है। पिछले चार बार से लगातार भाजपा ने यहां जीत दर्ज की है। पिछले विधानसभा चुनाव में जशपुर जिले की तीनों सीट भाजपा से कांग्रेस ने छीन ली। जशपुर और कुनकुरी लगातार 35 वर्षों से भाजपा के कब्जे में थी। यहां सांसद ने एक बार भाजपा की टिकट से विधानसभा चुनाव लड़ा और कांग्रेस ने दो बार अपने विधायकों को लोकसभा का टिकट दिया लेकिन न तो सांसद विधायक बन पाए और न ही विधायक कभी सांसद। इस बार फिर कांग्रेस ने धरमजयगढ़ विधायक को टिकट दी है। लालजीत राठिया के नाना उमेद सिंह राठिया यहां से सांसद रह चुके है और पिता संयुक्त मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के सरकारों में मंत्री लेकिन गोमती साय की कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है। वे वर्तमान में जशपुर जिले पंचायत अध्यक्ष हैं। रायगढ़ सीट से कांग्रेस ने वर्ष 1967, 1980, 1985, 1989, 1991, 1996, 1999 एवं 2014 में महिला प्रत्याशियों को मौका दिया था। इसमें चार बार महिलाएं सफल हुई है जबकि भाजपा ने इस सीट से पहली बार किसी महिला प्रत्याशी को मौका दिया है। qqq उम्मीदवार घर-घर जाकर कर रहे संपर्क लोकसभा निर्वाचन के तीसरे और प्रदेश में अंतिम चरण में सात लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए प्रचार का काम रविवार शाम पाँच बजे समाप्त हो गया था। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुब्रत साहू ने रायगढ़ एक्सप्रेस से हुई खास बातचीत में बताया कि तीसरे चरण में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जांजगीर, कोरबा, रायगढ़ तथा सरगुजा लोकसभा क्षेत्रों के लिए 23 अप्रैल को मतदान होगा। लोकसभा क्षेत्रों के लिए कुल 123 अभ्यर्थी निर्वाचन में हिस्सा ले रहें हैं। प्रचार का शोर थमने के बाद अभ्यर्थी घर-घर जाकर और व्यक्तिगत संपर्क कर अपना प्रचार कर सकेंगे। सुब्रत साहू ने बताया कि लोकसभा निर्वाचन के तीसरे चरण में 123 अभ्यर्थियों (रायपुर और बिलासपुर में 25, दुर्ग में 21, कोरबा में 13, रायगढ़ में 14, जांजगीर में 15 तथा सरगुजा में 10 अभ्यर्थी के निर्वाचन के लिए एक करोड़ 27 लाख 13 हजार 816 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। शत प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने के लिए 15 हजार 408 मतदान केन्द्र बनाए गए हैं। छत्तीसगढ़ में लोकसभा निर्वाचन के दो चरणों में 4 लोकसभा क्षेत्रों के लिए 11 तथा 18 अप्रैल को मतदान हो चुका है। उन्होंने बताया कि तृतीय चरण के मतदान के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। लोकसभा निर्वाचन के दौरान तृतीय चरण में सबसे अधिक बिलासपुर और रायपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में 25 अभ्यर्थी वहीं सरगुजा लोकसभा क्षेत्र के लिए सबसे कम 10 अभ्यर्थी हैं। साहू ने बताया कि कुल मतदाताओं में 64 लाख 16 हजार 252 पुरूष, 62 लाख 96 हजार 992 महिला तथा 572 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं। qqq मीडिया पर चुनाव आयोग की पैनी नज़र निर्वाचन के दौरान मीडिया के गलत उपयोग को रोकने भारत निर्वाचन आयोग ने व्यापक तैयारियां की हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि मतदान दिवस तथा उसके पहले दिन कोई भी प्रत्याशी, राजनीतिक दल अथवा अन्य कोई संगठन राजनीतिक विज्ञापन प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित करने के पूर्व मीडिया प्रमाणन समिति से पूर्व प्रमाणन सुनिश्चित करेंगे। इसके लिए भारत निर्वाचन आयोग ने जिला तथा राज्य मीडिया प्रमाणन समिति को प्रमाणन हेतु प्राप्त आवेदन पर त्वरित निर्णय लेने के निर्देश पहले ही दे दिए हैं। भारत निर्वाचन आयोग के परिपत्र के अनुसार प्रदेश में तृतीय चरण के निर्वाचन के लिए 23 अप्रैल तथा उसके एक दिवस पहले 22 अप्रैल 2019 को प्रिंट मीडिया में राजनीतिक विज्ञापन जारी करने से पहले मीडिया प्रमाणन समिति से विज्ञापन का पूर्व प्रमाणन कराना आवश्यक है। इसी प्रकार लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1951 के प्रावधानों के तहत लोकसभा निर्वाचन के लिए पहले चरण का मतदान शुरू होने के 48 घंटे पहले से लेकर लोकसभा तथा विधानसभा निर्वाचन वाले सभी राज्यों में मतदान की समाप्ति के आधा घंटा बाद तक तक मीडिया द्वारा एक्जिट पोल और इसके परिणाम का प्रकाशन-प्रसारण प्रतिबंधित किया गया है। इस अवधि में कोई भी व्यक्ति किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में एक्जिट पोल सर्वेक्षण नहीं कर सकेगा और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, चलचित्र, टेलीविजन या किसी अन्य माध्यम पर इसके परिणाम का प्रकाशन-प्रसारण नहीं कर सकेगा। इसके अतिरिक्त इस अवधि में किसी भी प्रकार के जनमत सर्वेक्षण की रिपोर्ट का प्रकाशन अथवा प्रसारण भी प्रतिबंधित होगा।
न तो शाह माहौल बना पाए न ही भूपेश
दिग्गज नेताओं की सभा में नहीं जुट रहे लोग
अलनीनो गॉन तो बारिश फुल ऑन, सावन की शुरुआत में लगेगी बारिश की झड़ी
कमज़ोर हुआ अलनीनो, खरीफ फसल बचाने मज़बूत होगा मानसून
अगले 48 घंटे में रायगढ़ पहुंचेगा मॉनसून
शुक्रवार सुबह जगदलपुर पार कर चुका है मॉनसून, अगले तूफान का नाम होगा छत्तीसगढ़ी शब्द गर्रा
15 जून तक आएगा मानसून, 1100 एमएम बारिश की संभावना
2017 में 940 एमएम और 2018 में 942 एमएम बारिश हुई थी
पारा पहुंचा 38 डिग्री, मौसम बदलने के आसार
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस फिर लाएगी आंधी और गरज के साथ बारिश
बीएसपी बना 18वीं सब जूनियर राज्य स्तरीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता का सिरमौर
एक्ट्रा टाइम में रायगढ़ डिस्ट्रिक को 1 प्वाइंट से हराया
पारा 40 पार, बच्चे निजी स्कूलों में हो रहे बेहोश, फिर भी लग रही हैं कक्षाएं
राज्य सरकार के आदेश को ताक पर रख भीषण गर्मी में भी चल रहे निजी स्कूल
रायगढ़ की प्रगति ने सीबीएसई 10वीं बोर्ड में किया स्टेट टॉप, देशभर में पाया तीसरा स्थान
पहली बार रायगढ़ के किसी छात्र ने किया सीबीएसई में स्टेट टॉप
ऐ भगत सिंह तू जिंदा है, हर एक लहू के कतरे में..
शहीद दिवस पर युवा परिसंवाद, हमारी नज़रों में भगत सिंह
खबरों की बहती बयार के 50 बरस
शहरनामा : मौलिक पत्रकारिता करते हुए रायगढ़ के पहले अखबार बयार की गोल्डन जुबली
अ डॉग डाइस, विस्थापन के मर्म को बताती रायगढ़ की पहली फीचर फिल्म
विशेष : रिलायंस की नौकरी छोड़कर रायगढ़िया ने बनाई रायगढ़ पर फिल्म
रायगढ़ के असल शिल्पी श्यामजी सावरिया और जयराम वालजी
शहरनामा : 130 साल से भी अधिक समय से रायगढ़ में बसे गुजरातियों की कहानी
लोक कलाओं को जीवित रखने कर रहे नित-नए प्रयोग
साक्षात्कार : रायपुर के रंगकर्मी निसार अली के नाचा-थियेटर का सफर
सरकार को यह तय करना होगा कि जीवन चाहिए या उद्योग?
रायगढ़ जिले में खतरनाक स्तर पर पहुंचा प्रदूषण
देश चाहे जिसको सौंप दिया, घर बचा लीजिये। आख़िर बच्चे तो आपके हैं न !
एक पीढ़ी की उम्र 30 साल होती है। आजादी के दौरान की पीढ़ी का समय आप 1960 तक मान सकते है। उस पीढ़ी ने आजादी की लड़ाई , बंटवारा और हिंसा का नंगा नाच देखा। वो पीढ़ी इस उथल-पुथल के दौर से दग्ध थी। अपने बच्चों को भाईचारे , एकता और धर्मनिरपेक्षता का संदेश दिया। विज्ञान, नए दौर और सहिष्णुता की घुट्टी दी। उसने गरीबी देखी थी, शिक्षा और परिश्रम से गरीबी से उबरने की राहें खोजने की समझ अपने बच्चो को दी। दूसरी पीढ़ी कोई 1990-95 तक समझिये। इस दौरान शिक्षित, सहिष्णु, परिश्रमी वर्ग में देश को मजबूत बनाने में समय लगाया। खाक से शुरू कर एक सामान्य मध्यम, कंफर्टेबल जीवन अपने बच्चो को दिया। उसे हर तकलीफ़ से बचाया। रिलेटव इज के साथ बढ़ी यह पीढ़ी, गढ़े हुए मन्दिर मस्जिद विवाद, मुम्बई, गोधरा, कश्मीर अहमदाबाद की गवाह हुई। नई सदी में इनका वक्त आया, तो दबे छिपे रूप में ही सही, कंम्यूनलिज्म दिमाग के एक हिस्से बैठा हुआ था। निजी बातचीत में "उनको" ठीक करने की बाते करता था। मौका मिले तो निपटा देने की सोच थी। देश की राजनीति में इस भावना का दोहन करने वाले मजबूत हो रहे थे। qqq इतिहास बोध पर प्रोपेगेंडा हावी आज 2020 के आते आते अगली पीढ़ी पूरी तरह इस रंग में रंग चुकी है। सत्ता इस भावना को भड़का रही है। इस पीढ़ी ने न युद्ध देखे है,न हिंसा, और न उस स्तर की गरीबी। फ्री डेटा और बकने की आजादी इसमे घी का काम कर रही है। नफरती बातों के लिए कोई लोक लाज नही है।अगर किसी को कुछ इतिहास बोध हो भी, तो उसे प्रोपेगेंडा से ध्वस्त किया जा रहा है। धर्मनिपेक्षता और लिब्रलिज्ज्म गाली है। नेहरू, गांधी मख़ौल के पात्र हैं। कोई आश्चर्य नही की जिन्ना स्टाईल का डायरेक्ट एक्शन यहां वहां देखने को मिल रहा है। लिंचिंग को स्वीकार्यता मिल चुकी है। जल्द ही ये अनकहा सिविल राइट हो जायेगा। विघटित समाज देश का निर्माण नहीं करता इसे रिवर्स करने का मौका हम खो चुके हैं। 2019 , पुरानी पीढ़ी के बचे लोगों के पास आखरी मौका था। अब तो 30 साल हमे यह सब बढ़ते क्रम में देखना है। कांग्रेस हमारा डीएनए थी। अब भाजपा होगी। और ये गांधीवादी समाजवाद की भाजपा नही। ये गोडसे, सावरकर, बाबू बजरंगी की भाजपा है। इतिहास में ऐसे शासन तबाही के रास्ते पर ले जाते देखे गए हैं। विघटित समाज कभी एक देश का निर्माण नहीं करता। सत्ता के अतिकेंद्रीकरण और धर्म के मिश्रण से औरंगजेब ने 150 साल से जमे मुगलिया सलतनत की जड़ें खोद दी थी। हमें तो अभी 75 नहीं हुए। ख़ैर, देश का जो होगा, सो होगा। वो राजनैतिक लड़ाई हारी जा चुकी है। 10 वर्ष की लगातार सत्ता किसी भी विचारधारा को गहरा आधार देने के लिए पर्याप्त है। इससे मोहभंग किसी बड़ी राष्ट्रीय क्षति के बाद ही होगा। आप इसका इंतजार ही कर सकते है, और इसके टलने की प्रार्थना कर सकते है। qqq सक्रिय लड़ाई अब घर पर मगर सक्रिय लड़ाई अब घर पर है। अपने बच्चों को इस जॉम्बीवाद से बचाने की। उनको टीवी से बचाना है, मोबाइल से बचाना है, उसके दोस्तों से बचाना है। सिनेमा हाल से बचाना है। किसी दल, संगठन से जुड़ने से बचाना है। नहीं बचाया, किसी दिन अपने , या किसी और के खून से लथपथ होकर घर आएगा। हम उसकी लाश से बातें कर रहे होंगे, या वो हमें किसी और लाश का जस्टिफिकेशन दे रहा होगा। देश चाहे जिसको सौंप दिया। घर बचा लीजिये। आख़िर बच्चे तो आपके हैं न ... (लेखक शिक्षाविद होने के साथ-साथ अंचल के मशहूर समाजसेवी हैं लेख में उनके निजी विचार हैं। )
गिद्ध... यह तस्वीर याद है आपको?
संदर्भ : मुजफ्फरपुर अस्पताल में मीडिया का तांडव
बेटे-बेटियों को समझाइये डाक्टर नहीं बने !
ख़ासतौर पर प्रतिभाशाली हैं तो पापड़ बनाना सीखें । मगर डाक्टर बिल्कुल न बनें।
हरि बोल, जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ निकली रथयात्रा, देखें गैलरी
रायगढ़ में दो दिनों की रथयात्रा आयोजित होती रही है। इसी क्रम में आज रथ द्वितिया के दिन शहर के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भगवान श्री को विधिविधान पूर्वक पूजा अर्चना पश्चात मंदिर के गर्भगृह तथा मंदिर परिसर से जय जगन्नाथ के जयघोष और घंट शंख ध्वनि के बीच ससम्मान बाहर निकाला गया। राजापारा स्थित प्रांगढ़ में मेले सा माहौल था और हजारो की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण भगवान श्री के दर्शन करने के लिए पहुंचे हुए थे। इससे पहले कल भगवान जगन्नाथ की विधि विधान से पूजा की गई जिसे फोटोग्राफर वेदव्यास गुप्ता ने अपने कैमरे में कैद किया।
इप्टा रायगढ़ के 25वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की झलकियां
27 से 31 जनवरी तक पॉलिटेक्निक ऑडिटोरिम में इप्टा रायगढ़ द्वारा 25वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जिसमें चार नाटक एवं दो फीचर फिल्में दिखाई गईं। समारोह की शुरुआत रायपुर के मशहूर रंगकर्मी मिर्जा मसूद को 10वां शरदचंद्र वैरागकर अवार्ड देकर की गई। यह कूवत सिर्फ रंगमंच रखता है जो वर्तमान सत्ता के मठाधीशों पर अजब मदारी गजब तमाशा नाटक के माध्यम से सीधे कटाक्ष कर सकता है। जहां एक मदारी को राजा बना दिया जाता है, शब्दों के अस्तित्व को खत्म कर दिया जाता है। बंदर राष्ट्रीय पशु बन जाता है। गांधी चौक नाटक में गांधीजी की प्रतिमा स्वयं यह चलकर वहां से हट जाती है कि जब रक्षक की भक्षक बन गए तो कोई क्या कर सकता है। नोटबंदी और जीएसटी पर गांव वाले सीधे प्रहार करते हैं। सुबह होने वाली है की लेखी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध होने के बाद लोगों को जागरूक करने को किताब लिखती और किताब को ही फांसी हो जाती है। बोल की लब आजाद हैं तेरे लोगों को दर्शकदीर्घा में झकघोर के रख देती है। तुरूप और भूलन जैसी फिल्में लोगों के मनोरंजन के अलावा दमदार संदेश भी देती है। तो देखें इस शानदार नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की कुछ झलकियां
70 वें गणतंत्र दिवस के फुल ड्रेस रिहर्सल की मनमोहक तस्वीरें
जिले में 70वां गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। गणतंत्र दिवस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल दो दिन पहले की जाती है। महीने भर से चल रही तैयारी को 25 जनवरी के दिन आराम दिया जाता है। इस गणतंत्र दिवस समारोह के रंग को देखिए इन तस्वारों से...
तस्वीरों में देखें 19वें युवा महोत्सव के रंग
खेल एवं युवा कल्याण विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा रायगढ़ स्टेडियम, पॉलीटेक्निक ऑडिटोरिम और न्यू ऑडिटोरियम में तीन दिवसीय 19 वां राज्य स्तरीय उत्सव संपन्न हुआ। जिसमें सूबे के 27 जिलों के युवाओं ने भाग लिया। तीन दिन तक शहर के लोगों को प्रदेश के लोकरंग, लोक संस्कृति, लोक नृत्य की झलक देखने को मिली। तीन दिन चले इस युवा उत्सव की चुनिंदा फोटो को हमने अपनी गैलरी में शामिल किया है।
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