raigarh express

Raigarh Express, news of raigarh chhattisgarh

Friday, July 03, 2020
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बाघ तालाब की दुर्दशा देखकर भड़के कलेक्टर और निगम आयुक्त
अब बाघ तालाब के संवरने की उम्मीद जगी
आसपास
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अभी तक 78 फीसद अधिक बारिश, खरीफ के लिए खरा उतरा मॉनसून
मौसम
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फादर्स डे : पिता मां भी बन जाते हैं
मनरंजन
raigarh express
मॉनसून : जिले में कल परसो भारी बारिश की संभावना
मौसम
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जिले में आयुर्वेद औषधालयों की दुर्दशा
आसपास
बाघ तालाब की दुर्दशा देखकर भड़के कलेक्टर और निगम आयुक्त
अब बाघ तालाब के संवरने की उम्मीद जगी
जिले में आयुर्वेद औषधालयों की दुर्दशा
जुगाड़ या जिम्मेदारी : ५ औषधालयों के प्रभार वाले डॉ.संतोष गुप्ता हफ्ते के पूरे ७ दिन करते है ड्यूटी
केआईटी में रहने से इंकार करने वाले प्रवासियों को आखिर भेजना पड़ा उनके गांव
किरोड़ीमल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को क्वारंटाइन सेंटर के तौर पर इस्तेमाल करने की प्रशासन की मंशा उस वक्त फेल हो गई जब वहां ठहराये जाने वाले प्रवासी लोगों ने वहां ठहरने से मना कर दिया। मजबूरन जिला प्रशासन को कुल १५४ लोगों को उनके गांव रवाना करना पड़ा। केआईटी की नई बिल्डिंग के प्रथम तल के कुछ कमरों को जिला प्रशासन द्वारा लेने की खबर दोपहर तक आती रहीं। पुसौर तहसीलदार माया अंचल ने इसकी बकायदा पुष्टि भी की लेकिन दोपहर भर चले हंगामे के बाद केआईटी को अंतत: अभी तक क्वारंटाईन सेंटर नहीं बनाया जा सका। आज दोपहर 2 बजे ओडिशा रोड स्थित किरोड़ीमल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (केआईटी) में 154 मज़दूर (जो जम्मू कश्मीर से आये थे) से भरी 3 बस पहुँची। जहां उनको संस्था की नई बिल्डिंग में शिफ्ट करने का प्रयास किया गया लेकिन जिन्हें यहां क्वारंटाइन करना था वो सेंटर जाने से मना करने लगे। वे अपने घर जाने की बात पर अड़ गए और नेशनल हाइवे पर आ गये। जूटमिल चौकी की पुलिस इनको लगातार समझाइश देती रही। मौके पर आला अधिकारी पहुँचे लेकिन बात नहीं बनी। जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी एसएन केसरी ने बताया कि क्वारंटाइन सेंटर के लिए जगहों की तलाश की जा रही है किसी को अभी फाइनल नहीं किया गया है। सीईओ जिला पंचायत ऋचा प्रकाश चौधरी ने बताया कि प्रवासियों द्वारा विरोध किये जाने पर उन्हें हमारे द्वारा समझाईश दी गई वे नहीं माने तो सभी को अपने-अपने गांव भेजना पड़ा। विदित हो कि केआईटी अपने अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। जहां की नई बिल्डिंग में बीते ढाई महीने से बिजली नहीं है। केआईटी को सिर्फ इसी महीने चलाने के लिये पैसे बचे हैं। जादू से आई बिजली नवम्बर 2018 से मार्च 2020 तक केआईटी ने विधानसभा, लोकसभा और नगरीय निकाय चुनावों में बहुत बड़ी भूमिका निभाई और लोकसभा निर्वाचन 2019 की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन्स तो मार्च 2020 के दूसरे हफ्ते तक लॉकडाऊन के पहले तक संस्था की नई बिल्डिंग में थी। तब तक बिजली थी उनके जाने के बाद बिजली काट दी गयी जो आज दोपहर को जोड़ी गई। अब यह बिजली रहेगी या फिर चले जायेगी यह जिला प्रशासन पर निर्भर करता है। परीक्षा की चिंता यूजीसी द्वारा अप्रैल माह के अंत मे जारी गाइडलाइन के अनुसार माह जुलाई में छात्रों की एन्ड सेमेस्टर परीक्षाएं आयोजित की जानी हैं जिसमे मात्र 25 दिन शेष हैं। यदि केआईटी को क्वारंटाइन सेंटर बनाया जाता है तो वहां परीक्षाएं आयोजित किया जाना बहुत मुश्किल होगा। पुरानी बिल्डिंग में हो चाहे नई बिल्डिंग में संक्रमण का खतरा पूरे कैम्पस में रहेगा और संस्था का पूरा कार्यालय और क्लासरूम्स अभी भी नई बिल्डिंग में हैं। जहां आज दोपहर तक बिजली नही थी। अब अगर जुलाई में परीक्षाएं करवानी पड़ी तो फर्नीचर शिफ्टिंग या नई बिल्डिंग का सैनिटाइजेशन मुश्किल होगा और उसके बाद भी स्टाफ शायद ही निश्चिंत हों। qqq फिर गहराता आर्थिक संकट दीवाली के पहले अक्टूबर 2019 में केआईटी को तकनीकी शिक्षा मंत्री उमेश पटेल के प्रयास से 6 महीने का जिला खनिज संस्थान न्यास से वेतन एवं अन्य खर्चों के लिए 75 लाख की दो किश्तों में कुल 1 डेढ़ करोड़ मिला जो मार्च तक के लिए था। संस्था के वर्तमान डायरेक्टर जी के अग्रवाल (जो कि शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय बिलासपुर के एक प्रोफेसर हैं) से मिली जानकारी के अनुसार संस्था के पास इस माह के वेतन के बाद अत्यावश्यक खर्चों के लिए ही कुछ पैसा शेष है। इस हेतु जिला कलेक्टर और तकनीकी शिक्षा मंत्री उमेश पटेल को भी पत्र द्वारा निवेदन किया जा चुका है और संस्था के कर्मचारी इसके लिए आशान्वित हैं। सौतेला रवैया विदित हो कि जिला प्रशासन ने केआईटी के साथ सौतेला बर्ताव किया है, जब तक जिला प्रशासन को आवश्यकता थी तब नया ट्रांसफार्मर लगवाया गया और उसका भुगतान जिला प्रशासन द्वारा किया जाना संस्था की बीओजी मीटिंग में निर्धारित किया गया था, लेकिन ना ही उसका भुगतान किया गया। और तो और ईवीएम जाने के बाद बिजली काटने पर भी सुध नही ली, शिक्षा शायद उतनी जरूरी नही है। कोरोना पॉजिटिव पाये 5 व्यक्ति स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए कोविड अस्पताल रायगढ़ से इलाजरत कोरोना पॉजिटिव मरीजों में से 5 व्यक्ति सफल उपचार के पश्चात स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए। जिनमें से 4 पुरूष एवं 01 महिला शामिल है। डिस्चार्ज हुए व्यक्तियों में चार रायगढ़ जिले तथा एक जशपुर जिले का निवासी है। स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार नियमित अंतराल में लगातार दो टेस्ट नेगेटिव पाये जाने के पश्चात स्वस्थ व्यक्तियों को अस्पताल से डिस्चार्ज किया जाता है। डिस्चार्ज होने के पश्चात सभी को 7 दिनों के लिए आईसोलेशन में रखा जाएगा। अब रायगढ़ जिले से 11 एक्टिव केसेस शेष है, जिनका उपचार जारी है।
सिंधी कॉलोनी : अवैध शराब से लेकर पान मसाला सब मौजूद, लॉकडाउन का यहां नहीं होता पालन
सिंधी कॉलोनी में दो जगह पकड़ाया जुआ
पूर्व महापौर चौहथा के बेटों ने गरीब का घर तोड़वाया, प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल
तहसीलदार की कार्रवाई या रसूखदारों का दबाव !
निगम में ठेकेदारी का खेल, 12 कार्य में 6 कामों का ठेका शौर्य कंस्ट्रक्शन को
नेता के चहेते ठेकेदार को मिल रहा काम, अन्य ठेकेदार ताक रहे मुंह, निर्माण कार्यो की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिन्ह
सांसद की प्रेसवार्ता में अपनी पोल खुलते देख स्थानीय भाजपा नेताओं ने खोया आपा
गोमती साय से पूछे गए सवालों का जवाब भाजपा के स्थानीय नेता देने लगे, प्रेस पर भी दागे सवाल
रायगढ़ में अवैध शराब बिकने की खबर मिली तो खुद जांच के लिए पहुंचा : आबकारी मंत्री लखमा
खबर का असर-लॉकडाउन तोड़ने के बाद विवादों में घिरने के बाद आबकारी मंत्री ने आबकारी विभाग पर फोड़ा ठिकरा
अभी तक 78 फीसद अधिक बारिश, खरीफ के लिए खरा उतरा मॉनसून
कल से कम होगी बारिश की तीव्रता, 33 डिग्री तक जाएगा तापमान
मॉनसून : जिले में कल परसो भारी बारिश की संभावना
दो दिनों से हो रही उमस से राहत मिलने की संभावना है। गुरुवार दोपहर से मौसम ने करवट बदलना शुरू कर दिया और शाम 5 बजे से शहर समेत जिले के कई हिस्सों में गरज के साथ झमाझम बारिश हुई। आज दक्षिण पश्चिम मानसून आगे बढ़कर मध्य अरेबियन सागर के कुछ और भाग पूरा गोवा कोंकण के कुछ भाग मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा कर्नाटक के शेष हिस्से पूरा रायलसीमा और तटीय आंध्र प्रदेश तेलंगाना के अधिकांश भाग दक्षिण छत्तीसगढ़ के कुछ भाग और दक्षिण उड़ीसा तक कुछ पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी और उत्तर बंगाल की खाड़ी नागालैंड के शेष भाग मणिपुर मिजोरम और त्रिपुरा अरुणाचल प्रदेश के अधिकांश भाग और कुछ असम और मेघालय के भाग में मानसून सक्रिय हो गया है। इस की उत्तरी सीमा हरनई, सोलापुर, रामगुंडम, जगदलपुर गोपालपुर, अगरतला ,तेजपुर से होकर जा रही है। मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई है अगले 48 घंटे में मानसून मध्य अरब सागर के कुछ और भाग, महाराष्ट्र, तेलंगाना के शेष भाग, पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी और उत्तर बंगाल की खाड़ी, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, पूरा सिक्किम, उड़ीसा के कुछ और भाग, पश्चिम बंगाल के कुछ भाग और छत्तीसगढ़ के कुछ और भागों तक तक पहुंचने की संभावना है। qqq भारी बारिश की संभावना छत्तीसगढ़ मौसम विज्ञान विभाग रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक निम्न दाब का क्षेत्र पश्चिम मध्य और उत्तर मध्य बंगाल की खाड़ी में स्थित है जिसके साथ ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती घेरा 7.6 किलोमीटर ऊंचाई तक स्थित है। एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती घेरा दक्षिण छत्तीसगढ़ में 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक स्थित है। एक द्रोणिका पाकिस्तान से पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी तक 0.9 किलोमीटर ऊंचाई पर उत्तर राजस्थान, उत्तर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा होते हुए गुजर रही है । इन मौसमी तंत्र को देखते हुए प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने अथवा गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। एक-दो स्थानों पर गरज चमक के साथ भारी वर्षा होने की भी संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान के गिरने और लगभग 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान लगभग 25 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। पिछले 24 घंटों में जिले के लैलूंगा ब्लॉक में 9 मिमी वर्षा दर्ज की गई है
मॉनsoon
10 से 15 जून के बीच मानसून के रायगढ़ पहुँचने की संभावना
नौतपा में तपता रायगढ़
45 डिग्री के आसपास रहेगा आने वाले कुछ दिन का तापमान
कोरोना फाइटर्स : 45 डॉक्टरों को दो माह से नहीं मिली तनख्वाह
कोरोना से जंग में बीते दो महीनों से ज़िंदगी दांव पर लगा कर रहे दिन रात काम
बेजुबानों की भूख मिटाती शहर की चार युवतियां
बिना किसी के मदद के यथासंभव शहर के जानवरों की कर रही सेवा
रायगढ़ चैंप्स लगातार तीसरी बार बना कार्डिनल कप विजेता
रोमांचक मैच में ब्वॉयज क्लब को हराया, राजा गोरख बने मैन ऑफ द सिरीज
कार्डिनल कप का तीसरा सीजन कल से, 32 टीमों के बीच होगा धमासान
संभाग का सबसे बड़ा राज्य स्तरीय फ्लड लाइट टेनिस बॉल क्रिकेट टूर्नामेंट
फादर्स डे : पिता मां भी बन जाते हैं
विशेष : सेल्फ मेड पिताओं की संघर्षपूर्ण कहानी और उनका पितृत्व
युद्ध ख्याली हैं । मौतें असली और जिंदगियों की बर्बादी भी
वे लड़ रहे हैं, समय काल से परे, एक ख्याली युद्ध।
एखर का भरोसा, चोला माटी के हे राम...
रंगकर्मी पूनम तिवारी को दिया गया 11वां शरदचंद्र वैरागकर स्मृति रंगकर्मी सम्मान
विश्व की महान शिक्षक मदर टेरेसा को रायगढ़ से था खास लगाव
शिक्षक दिवस विशेष : संत मदर टेरेसा की पुण्यतिथि भी आज, नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद रायगढ़ ने किया था उनका भव्य स्वागत
कोरोना की विभीषिका से जूझते कर्मवीरों को सलाम तो हम कर ही सकते हैं
जो बसे हैं वे उजड़ते हैं प्रकृति के जड़ नियम से पर किसी उजड़े हुए को फिर बसाना कब मना है -(हरिबंशराय बच्चन)
आत्मनुशासन व धैर्य ही हमारी सबसे बड़ी ताकत
वैश्विक महामारी कोरोना Covid- 19 के अप्रत्याशित हमले ने एकबारगी पूरे मानव जगत को विषम परिस्थिति में ला खड़ा किया है। भावनात्मक स्तर पर आपस में अधिक नजदीकी से गूंथा हुआ भारतीय समाज लॉकडाउन के बाद एक साथ कई मोर्चों से जूझने पर विवश है। सभी गतिविधियां ठप्प हैं। पारिवारिक, आर्थिक व सामाजिक जीवन अस्त-व्यस्त हो जाने के कारण लोग मानसिक दवाब झेल रहे हैं। इन सबके बावजूद संतोषजनक बात यह है कि छिटपुट घटनाओं व बहुत थोड़े से लोगों की उद्दंडताओं के अतिरिक्त पूरा देश एकजुटता के साथ सहयोग कर रहा है। यही कारण है कि देश कम्युनिटी संक्रमण के स्टेज से अब तक बचा हुआ है। हालांकि यह खतरा अभी टला नहीं है। हमारे देश में जनसंख्या का घनत्व अधिक है और स्वास्थ्य सुविधाएं उन्नत देशों की तुलना में कम है। अतः यदि यह वायरस कम्युनिटी संक्रमण तक पहुंच गया तो हमारे यहां इसके बेहद भयावह परिणाम सामने आयेंगे। इसीलिये यह और भी अधिक जरूरी हो गया है कि हम तमाम कठिनाइयों के बाद भी लॉकडाउन 2 में पूरे धैर्य व संयम के साथ सरकार के सभी निर्देशों का पालन करें। इस संकट का दुर्भाग्यजनक पहलू यह है कि कोरोना का कोई प्रामाणिक इलाज अभी तक नहीं मिल पाया है। इस परिस्थिति में खुद को घर में छिपाकर सोशल डिस्टेनसिंग के जरिये इस वायरस के आक्रमण से बचे रहना ही एकमात्र कारगर विकल्प है। यही कारण है कि केंद्र व राज्य सरकारें लॉकडाउन के अमल पर सख्त हैं। सरकार द्वारा अनेक राहत योजनायें चलायी जा रही है। सरकारें अंतिम व्यक्ति तक उसके बुनियादी जरूरतों का सामान पहुँचाने हेतु सीमित विकल्पों के बीच दिन-रात जुटी हुई हैं। सरकारी मशीनरी, जिला व पुलिस प्रशासन, डॉक्टर्स, नर्सिंग व स्वास्थ्य कर्मी, सफाईकर्मी, म्युनिसिपल व पंचायत अमला सहित सामाजिक संगठन व मीडियाकर्मी सभी जोखिम उठाकर व्यवस्था बनाये रखने के चुनौतीपूर्ण काम में तन्मयता के साथ लगे हुये हैं। इस समय यह हम सबका नागरिक कर्तव्य है कि हम न केवल उनकी सेवाओं का सम्मान करें वरन सोशल डिस्टेनसिंग का पालन करके उनका सहयोग भी करें। qqq धैर्य से पूरा विश्व आश्चर्यचकित यह सही है कि तमाम प्रयासों के बावजूद कुछ समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। कुछ मामलों में सरकार की स्थिति सरोते के दो पाटों के बीच फंसी हुई सुपारी की तरह है। उसके पास दो विपरीत उपायों में से किसी एक विकल्प को चुनने की मजबूरी है। हर स्थिति में आलोचना की गुंजाइश तलाशी जा सकती हैं। लेकिन संकटकालीन परिस्थिति में प्रत्येक सभ्य समाज अपने जागरूक तबके से इस जिम्मेदारीपूर्ण रवैये की उम्मीद रखता है कि वह सभी दायरों से ऊपर उठकर सरकार को हरसंभव सहयोग करे। यह वक्त अपनी चिंताओं व भावनाओं के सार्वजनिक प्रकटीकरण पर उचित नियंत्रण रखने का समय है। समाज के जागरूक तबके को अपनी अभिव्यक्ति के प्रभाव का आंकलन स्वयं करना चाहिये। उसे आत्मनुशासन में रहकर निर्धारित फोरम तक अपनी चिंता व सुझाव पंहुचाने चाहिये ताकि ध्यानाकर्षण भी हो जाये और लोगों में अनावश्यक असंतोष उपजने तथा अव्यवस्था फैलने से बचा जा सके । अपने देशभक्त नागरिकों की सामूहिक एकता, त्याग, आत्मनियंत्रण व परस्पर सहयोग के बलबूते पर भारत विषम से विषम परिस्थितियों से लड़कर विजय हासिल करना जानता है। कोरोना से यह लड़ाई एक प्रकार से हमारी दृढ़ता, धैर्य व संयम की अग्नि परीक्षा है। अब तक भारतीय नागरिकों द्वारा प्रदर्शित परिपक्वता व धैर्य से पूरा विश्व आश्चर्यचकित है। qqq लेकिन हमें स्वछंद नहीं होना है हमारा सौभाग्य है कि हमारा रायगढ़ जिला कोरोना मुक्त जिला है। यह भी उत्साहवर्धक बात है कि हमारे छत्तीसगढ़ के एम्स का रिकवरी स्कोर बहुत अच्छा है। विश्व के कई देशों ने हमारी तरफ सहायता के लिए हाथ पसारे हैं। ये देश एक वेबिनार के जरिये हमारे अनुभवों से लाभान्वित हो रहे हैं। आरंभिक सफलताओं के बाद लॉकडाउन को कुछ शिथिल किया गया है लेकिन हमें स्वछंद नहीं होना है। पूरी सावधानी रखते इस छूट का बहुत सीमित उपयोग करना है। इस निर्णायक मोड़ पर हमारी एक छोटी सी चूक भी पूरे किये कराये पर पानी फेर सकती है। अतः हमें लॉकडाउन के पूर्णतः पालन के लिए मन, वचन व कर्म से संकल्पित होना होगा। हम कोरोना से आत्मविश्वास के साथ लड़ रहे हैं और हम अवश्य जीतेंगे। सभी कोरोना वारियर्स व जरूरतमन्दों को सहयोग करने वाली संस्थाओं व व्यक्तियों का अभिनंदन। मनोबल ऊंचा रखें, अनुशासित रहें, प्रसन्न रहें और सबका सहयोग करें।
कोरोना का भय सुनियोजित साजिश ?
कारोना को लेकर भारत सहित विश्व भर में डर का माहौल बनाया जा रहा है। इसमें सरकारें भी शामिल हैं, विश्व स्वास्थ्य संगठन भी शामिल है और फायदा उठाने वाली फार्मा व टेस्ट किट निर्माता कंपनियां भी शामिल हैं। इन सभी को अमेरिका-चीन जैसी वैश्विक ताकतें संचालित कर रही हैं। कोरोना का भय सुनियोजित साजिश है। यह डर का बाजार है। आतंकवाद, धर्म के बाद अब वायरस खौफ के अंतराष्ट्रीय बाजार के सफल खिलाड़ी हैं। इसे सफल बनाने के लिए मीडिया का भरपूर सहारा लिया जा रहा है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन भी जानता है कि किसी भी वायरस की कोई दवा नहीं हो सकती और मुंह पर मास्क लगाने से वायरस अटैक को रोका नहीं जा सकता। यह बात एलोपैथी चिकित्सक और बाजारपरस्त चिकित्सा प्रणाली के चिकित्सा विज्ञानी भी जानते हैं। कोरोना के खौफ में पीसीआर टेस्ट व मास्क आदि के व्यापार तो फल-फूल रहे हैं, पर दूसरे सभी सेक्टर का भट्ठा बैठ रहा है। खासकर भारत जैसे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को अरबों की चपत लग रही है। 1983 में आविष्कृत जिस पीसीआर (Polymerase chain reaction PCR) टेस्ट के बल पर कोरोना संक्रमण को डिटेक्ट करने का दावा किया जा रहा है, उसके आविष्कारक कैरी मुलिस (Kary Mullis) ने खुद कहा था कि इससे किसी पर्टिकुलर वायरस या बैक्टिया के संक्रमण को 100 फीसदी डिटेक्ट नहीं किया जा सकता। यूट्यूब पर उनके वीडियो उपलब्ध हैं। आप कोई भी सुन सकते हैं। सभी चिकित्सक व चिकित्सा वैज्ञानिक जानते हैं कि ब्रह्मांड में करीब 3.5 लाख के करीब वायरस हैं, कम-ज्यादा भी हो सकते हैं, जिनमें से अब तक करीब 200 के आस-पास वायरस का नाम रखा गया है। इनमें कोरोना भी शामिल है। आज जैसे कोरोना का हौव्वा खड़ा किया गया है, ठीक वैसे ही कभी स्वाइन फ्लू-एच1एन1, जीका, इबोला, निपाह, एचआईवी आदि वायरस का खौफ पैदा किया गया था। आज न इन वायरस का कहीं प्रकोप है, न इनकी दवा बनाई गई। न इनकी कोई चर्चा है। गौर करने वाले तथ्य ये हैं कि सभी वायरस के लक्षण लगभग समान हैं। बुखार, जुकाम, बदन में दर्द, नाक बहना आदि। सारे फलू के लक्षण। एचआईवी तो 20वीं सदी का सबसे बड़ा झूठ है। एचआईवी वायरस किसी भी मानव शरीर में प्रवेश कर ही नहीं सकता। कोरोना को देखें तो पहले उसने चीन में तबाही मचाई, अब वहां शांत हो गया। असल में वहां डर के बाजार का दोहन हो गया। अब कोरोना इटली, ईरान, अमेरिका व भारत में तांडव मचा रहा है। चूंकि गर्मी आने के बाद वायरस का असर कहीं नहीं दिखेगा, इसलिए इसे तेजी से चीन से बाहर शिफ्ट कराया जा रहा है, ताकि डर के बाजार का अधिक से अधिक दोहन हो सके। भारत में सरकारों ने स्कूल,कालेज, सिनेमा हॉल, पब, रेस्तभरां आदि बिजनेस एक्टिविटी रोककर अपने ही पैर में कुल्हााड़ी मारी है, जबकि भारत में एक भी केस नहीं है, जो भी केस डिटेक्टे हुए है, वे चीन, इटली, यूएई जैसे जगहों से बाहर से आए लोग हैं। फिर भी हमारी सरकारें कोरोना के भय में आवाम को झोंक रही हैं। पता नहीं हमारी सरकारें डब्यूें एचओ के आगे क्यों नतमस्तक हैं। सभी चिकित्सा विज्ञान में मान्य फैक्ट्स हैं कि जब शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता घटती है तभी शरीर पर वायरस या बैक्टिरिया का अटैक होता है। वातावरण में हमारे आस-पास हमेशा लाखों वायरस-बैक्टिरिया मौजूद रहते हैं और वे हमारे शरीर के अंदर जाते रहते हैं। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता, श्वेत रक्तकण यानी डब्ल्यूबीसी, शरीर के अंदर बनने वाले अम्ल और जीवनरक्षक वायरस व बैक्टिरिया आदि उनको मारते रहते हैं। यह प्रकिया अनवरत चलती रहती है। जब शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है या मौसम परिवर्तन होता है या दूषित खान-पान के शिकार होते हैं या शरीर में अत्यधिक टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं तो वायरस या बैक्टिरिया का हमला होता है। जुकाम, कफ, सिर दर्द, बुखार, बदन दर्द, कंपकपी, उल्टी, दस्त आदि लक्षण संकेत देते हैं कि शरीर में वायरस या बैक्टिरिया का अटैक हो गया है। ये रोग शत्रु नहीं मित्र होते हैं जो मानव को सावधान करने के लिए होते हैं कि आप खुद के खान-पान को ठीक करें। शरीर में इन्हें ठीक करने का इनबिल्ट मैकेनिज्म होता है। तीन से सात दिन में ये ठीक हो जाते हैं। बस आप अपना आहार-विहार ठीक कर लें। जिस आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग व आध्यात्म को भारत अपना गर्व मानता है, जिस भारत में इन वैकल्पिक चिकित्सा की जड़ें मजबूत हैं, वही भारत आज कोरोना के अंतरराष्ट्रीय खेल का प्यादा बना हुआ है। यह समझ से परे नहीं है। भारत भी विश्व स्वाबस्य्यह संगठन से जुडा हुआ है और अंतरराष्री शंय डर की कारोबारी शक्तियों का मोहरा है। जिस चीन से कारोना (कोविड-19) की शुरूआत हुई, उसी चीन व सिंगापुर के चिकित्सकों की टीम ने डा. टी. कॉलिन कैंपबेल के नेतृत्व में 1973-75 के बीच 65 देशों में एक अध्ययन किया, जिसे चाइना स्टडी नाम दिया गया। यह लगभग 25 वर्ष तक चला। 2005 में चाइना सटडी प्रकाशित हुआ। यह स्टडी एनिमल फूड (डेयरी उतपाद समेत), रिफाइनरी फूड प्रोडक्ट्स, इंडस्ट्रियल फूड, जंक फूड और क्रोनिक बीमारियों-डायबिटीज, कैंसर, कोलेस्ट्राल, हाईबीपी, प्रोस्टेट, हर्ट ब्लॉकेज, थायराइड आदि के बीच संबंध का पता लगाने के लिए की गई। यह स्टडी अंग्रेजी दवा व उसके नुकसान, खान-पान का बीमारी से संबंध आदि विषयों को भी केंद्र में रखकर की गई। इस विश्वव्यापी स्टडी का निष्कर्ष निकला कि एनिमल फूड, इंडस्ट्रियल फूड, डब्बाबंद फूड, रिफाइंड फूड आदि के क्रोनिक रोगों से गहरे संबंध हैं। ये खाद्य सामग्री लोगों को बीमार बना रहे हैं, दवा-इंजेक्शन बीमारी ठीक नहीं करते, बल्कि रोगों को ठीक करने की ताकत खुद शरीर में है और प्लांट फूड में है। दुनिया के स्वास्थ्य की चिंता का दावा करने वाले विश्व स्वायस्थ्य संगठन ने कभी भी विश्व के देशों को एनिमल फूड (डेयरी उत्पाद समेत), रिफाइनरी फूड प्रोडक्ट्स, इंडस्ट्रियल फूड, जंक फूड, जहरीले कोल्डन ड्रिंक्सस के सेहत पर पडने वाले कुप्रभावों के प्रति सचेत नहीं किया, जबकि कोरोना को महामारी घोषित करने में अत्यंकत शीघ्रता दिखाई। डब्यूो महएचओ ने बैन हो चुकी कई दवाओं के इस्तेरमाल व उनके खतरों को लेकर भी विकासशील देशों को कभी नहीं रोका। वह फार्मा लॉबी व फास्ट फूड इंडस्ट्री के सामने घुटने टेकता रहा है। चाइना स्टूडी के निष्क र्ष के मुताबिक मानव शरीर के लिए केवल प्रकृति प्रदत्त प्लांट खाद्य सामग्री ही उपयोगी है, किसी भी पके हुए भोजन में शरीर की हीलिंग की क्षमता नहीं होती, इंडस्ट्रियल व रिफाइंड फूड में तो बिल्कुमल नहीं। उससे ऊर्जा मिल सकती है, पर हीलिंग नहीं हो सकती। कच्चा खाने योग्य फल, सब्जियां व कंद-मूल, स्टीम किए हुए अनाज व सब्जियां, फल-सब्जियों के रस आदि में ही शरीर की हीलिंग की ताकत है, इन्हीं में रोग ठीक करने की क्षमता है। यही बात भारत के आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग आदि में प्राचीन काल से वर्णित है। फिर भी भारत सरकार अपनी ताकत का इस्तेमाल कोरोना के खौफ को खत्म करने के लिए नहीं कर रही है। आखिर क्यों? आज भारत के पास अपनी प्राचीन चिकित्साक पद्धत्तियों की ताकत से विश्वर को अवगत कराने का भरपूर मौका है। जैसे भारत ने विश्वर से योग का लोहा मनवाया, ठीक वैसे ही कोरोना को रोकने में आयुर्वेद व प्राकृतिक चिकित्सा की क्षमता से विश्व को परिचित करवा सकता है। इससे भारतीय चिकित्साश पद्धत्तियों का वैश्विक बाजार भी बढता। प्राकृतिक चिकित्सा के मुताबिक मनुष्य अगर प्रतिदिन अपने खान-पान में 80 फीसदी कच्चा-स्टीम तथा केवल 20 फीसदी पके हुए खाद्य सामग्री शामिल करे तो वह जीवन पर्यंत बीमार नहीं पड़ेगा। बीमार पड़ेगा भी तो जल्द ही ठीक हो जाएगा। उन्हें किसी दवा की आवश्यकता नहीं है। इस खान-पान से पीएच 7.5 पर संतुलित रहता है। दरअसल, शरीर के अंदर एंजियोजेनेसिस सिस्टम है जो हीलिंग मैकेनिज्म है। इस खोज के लिए चार बार नोबेल प्राइज मिल चुका है। चाइना स्टडी के मुताबिक कोरोना जैसे वायरस तीन से सात दिन में ठीक हो सकते हैं। बस मरीज को आप लिक्विड डाइट पर रखें, स्वच्छ प्राकृतिक वातावरण में रखें, उनकी इम्यूनिटी को बढ़ा दें। एक दिन में 6 से 7 ग्लास सिट्रिक जूस जैसे मौसमी, संतरा, अनानास आदि के व 6 से 7 ग्लास नारियल पानी दें, दूसरे दिन 3 ग्लास खीरा व टमाटर का जूस भी एड कर दें व तीसरे दिन भी दूसरे दिन वाले डाइट अपनाएं तो कोरोना समेत कोई भी वायरस का संक्रमण ठीक हो जाएगा। लेकिन चीन अपनी इस स्टडी के ज्ञान का इस्तेमान नहीं कर रहा है, क्योंकि इसमें बाजार नहीं है। आख्रिर चीन किसका हित साध रहा है? qqq भारत को खुद पर नहीं भरोसा आज भारत सरकार को अपने सभी आयुर्वेदिक, प्राकृतिक, मेडिकल न्यूट्रिशनिस्ट चिकित्सक का इस्तेमाल करना चाहिए। यदि कारोना के संदिग्धों को इनकी देखरेख में रखा जाय तो किसी न जान जाएगी, न पैनिक क्रिएट होगा और न ही अर्थव्यजवस्था का नुकसान होगा। बल्कि भारत अपने आयुर्वेदिक, प्राकृतिक, मेडिकल न्यूट्रिशनिस्ट चिकित्सकों की मदद से विश्व को राह दिखा सकता है। वह दुनिया को कोरोना मुक्त कर अपने लिए बाजार तैयार कर सकता है। हमें अपने ज्ञान पर भरोसा होना चाहिए और उसका व्याापारिक इस्तेजमाल करना आना चाहिए। ब्रिटिश जर्नल ऑफ मेडिसिन 2016 में ही एंड ऑफ मॉडर्न मेडिसिन की घोषणा कर चुकी है। वैश्विक मेडिसिन शोध संस्थाि कोक्रेन व मेछिकल जर्नल लांसेट की अनेक रिपोर्ट में पुष्ट‍ हो चुका है क‍ि 85 फीसदी लाइफ स्टा इल जनित बीमारियां खान-पान में सुधार लाकर, योग अपना कर ठीक हो सकती हैं। केवल 15 फीसदी रोगों, सर्जरी, ट्रामा आदि के लिए मॉडर्न मेडिकल सिस्टाम बेहद उपयोगी है। इसलिए भारत सरकार को चाहिए कि वह एलोपैथी पर अपनी निर्भरता कम करे और आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्साप को बढावा देकर न केवल अपने स्व,स्य्ृति के बजट को कम कर सकता है, बल्ि न कृषि क्षेत्र में नई क्रांति कर सकता है। भारत को पश्चिमी अंग्रेजी चिकित्साि की गुलामी से मुक्त होने की दिशा में आगे बढना चाहिए। (लेखक शिक्षाविद होने के साथ-साथ देश के मशहूर पत्रकार हैं, लेख में उनके निजी विचार हैं। )
स्त्री पैदा नहीं होती बना दी जाती है
एक और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
तस्वीरों में देखें रायगढ़ में जनता कर्फ्यू का असर
22 मार्च यानी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर जिले में भी जनता कर्फ्यू का असर देखने को मिला। दोपहर तक पूरा शहर स्वस्फूर्त बंद था। हर मुख्य मार्ग और बाजार बंद मिले। गली-कूचे तक कोई व्यक्ति बाहर नहीं निकला।
हरि बोल, जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ निकली रथयात्रा, देखें गैलरी
रायगढ़ में दो दिनों की रथयात्रा आयोजित होती रही है। इसी क्रम में आज रथ द्वितिया के दिन शहर के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भगवान श्री को विधिविधान पूर्वक पूजा अर्चना पश्चात मंदिर के गर्भगृह तथा मंदिर परिसर से जय जगन्नाथ के जयघोष और घंट शंख ध्वनि के बीच ससम्मान बाहर निकाला गया। राजापारा स्थित प्रांगढ़ में मेले सा माहौल था और हजारो की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण भगवान श्री के दर्शन करने के लिए पहुंचे हुए थे। इससे पहले कल भगवान जगन्नाथ की विधि विधान से पूजा की गई जिसे फोटोग्राफर वेदव्यास गुप्ता ने अपने कैमरे में कैद किया।
इप्टा रायगढ़ के 25वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की झलकियां
27 से 31 जनवरी तक पॉलिटेक्निक ऑडिटोरिम में इप्टा रायगढ़ द्वारा 25वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जिसमें चार नाटक एवं दो फीचर फिल्में दिखाई गईं। समारोह की शुरुआत रायपुर के मशहूर रंगकर्मी मिर्जा मसूद को 10वां शरदचंद्र वैरागकर अवार्ड देकर की गई। यह कूवत सिर्फ रंगमंच रखता है जो वर्तमान सत्ता के मठाधीशों पर अजब मदारी गजब तमाशा नाटक के माध्यम से सीधे कटाक्ष कर सकता है। जहां एक मदारी को राजा बना दिया जाता है, शब्दों के अस्तित्व को खत्म कर दिया जाता है। बंदर राष्ट्रीय पशु बन जाता है। गांधी चौक नाटक में गांधीजी की प्रतिमा स्वयं यह चलकर वहां से हट जाती है कि जब रक्षक की भक्षक बन गए तो कोई क्या कर सकता है। नोटबंदी और जीएसटी पर गांव वाले सीधे प्रहार करते हैं। सुबह होने वाली है की लेखी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध होने के बाद लोगों को जागरूक करने को किताब लिखती और किताब को ही फांसी हो जाती है। बोल की लब आजाद हैं तेरे लोगों को दर्शकदीर्घा में झकघोर के रख देती है। तुरूप और भूलन जैसी फिल्में लोगों के मनोरंजन के अलावा दमदार संदेश भी देती है। तो देखें इस शानदार नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की कुछ झलकियां
70 वें गणतंत्र दिवस के फुल ड्रेस रिहर्सल की मनमोहक तस्वीरें
जिले में 70वां गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। गणतंत्र दिवस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल दो दिन पहले की जाती है। महीने भर से चल रही तैयारी को 25 जनवरी के दिन आराम दिया जाता है। इस गणतंत्र दिवस समारोह के रंग को देखिए इन तस्वारों से...
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