raigarh express

Raigarh Express, news of raigarh chhattisgarh

Friday, May 20, 2022
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केरल में 27 मई तक दस्तक दे सकता है मानसून
तय समय से 5 दिन पहले ही झूमके बरसेंगे बादल
मौसम
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नर्सिंग पेशे को लेकर लोगों के नजरिए में आया बदलाव
हमारे बच्चे
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शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी को गैलेंट्री अवार्ड के लिए शुरू हुई मुहिम
हमारे बच्चे
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खरसिया सिविल अस्पताल में सुरक्षित मातृत्व पर जोर
हमारे बच्चे
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फर्जी आवेदन मामला : हाईकोर्ट ने दिए अधिवक्ता आशीष मिश्रा और प्रशांत शर्मा को नोटिस के आदेश
राजनीति
अनदेखा न करें पोस्ट-कोविड के लक्षणों को
डेढ़ साल बाद भी पोस्ट-कोविड के लक्षणों वाले मरीज आ रहे हैं: डॉ. गणेश पटेल
विश्व स्वास्थ्य दिवस: संगोष्ठी और बच्चों के लिए स्वास्थ्य शिविर हुए आयोजित
जिले में स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार हो रहे नए पहल: सीएमएचओ डॉ. केसरी
टीबी को जल्दी पहचान पाएं निजात
लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें : डॉ. गणेश पटेल
लोग अपनी आंखों के लिए नहीं हैं जागरूक : मेजर डॉ. नीलम भगत
इंटरनेट के ज्ञान से न करें उपचार, तुरंत करें डॉक्टर से संपर्क
फर्जी आवेदन मामला : हाईकोर्ट ने दिए अधिवक्ता आशीष मिश्रा और प्रशांत शर्मा को नोटिस के आदेश
तमनार के किसान के नाम पर की गई थी झूठी शिकायत
हमारा प्लांट बंद तो जिंदल का प्लाट भी बंद कर देंगे
रायगढ़ इस्पात औद्योगिक संघ ने जिंदल कंपनी पर लगाए गंभीर आरोप, जेएसपीएल ने कहा पूर्व के समझौते के अनुरूप की जा रही विद्युत आपूर्ति
आरक्षक-ट्रक ड्राइवर से मारपीट मामले में रितिक नायक का साथी गिरफ्तार
विधायक पुत्र की दादागिरी शहर के अमन चैन के लिए बड़ा खतरा: सत्यानंद राठिया
जिला भाजपा उपाध्यक्ष आशीष ताम्रकार पार्टी से निलंबित
खैरागढ़ उपचुनाव के बाद भाजपा संगठन ने लिया बड़ा फैसला, पार्टी विरोधियों को स्पष्ट संदेश
केरल में 27 मई तक दस्तक दे सकता है मानसून
तय समय से 5 दिन पहले ही झूमके बरसेंगे बादल
पश्चिमी विक्षोभ सीज़न एन फिर बारिश की संभावना
एक दो स्थानों पर गरज चमक के आकाशीय बिजली गिरने की सम्भावना
मौसम अलर्ट : फिर बने बारिश के आसार
प्रदेश में हवाओं की दिशा में परिवर्तन हो गया है। उत्तर छग में उत्तर-पूर्व तथा दक्षिण छग में दक्षिण-पश्चिम से हवाओं का आगमन प्रारंभ हो गया है। इसके कारण प्रदेश में दिनांक 21 जनवरी से 23 जनवरी न्यूनतम तापमान में 3-4 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने की सम्भावना है। जबकि अधिकतम तापमान में 22 जनवरी तक 1-2 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने की सम्भावना है, उसके बाद प्रदेश में बादल छाने तथा वर्षा का दौर प्रारंभ होने के कारण अधिकतम तापमान में सार्थक गिरावट होने की सम्भावना है। प्रदेश में कल मौसम शुष्क रहने की संभावना दिनांक 22 जनवरी को शाम/रात्रि में सरगुजा संभाग और उससे लगे बिलासपुर संभाग के जिलों में एक दो स्थानों पर हल्की वर्षा होने की सम्भावना है। साथ ही गरज चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की सम्भावना है। दिनांक 23 जनवरी को प्रदेश के सरगुजा और बिलासपुर सम्भाग के जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा अनेक स्थानों पर होने की सम्भावना है। एक दो स्थानों में गरज चमक के साथ ओला वृष्टि होने की सम्भावना है। दुर्ग और रायपुर संभाग के उत्तर में स्थित जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की सम्भावना है । दुर्ग और रायपुर संभाग के शेष भाग और बस्तर संभाग के उत्तर भाग में एक दो स्थानों पर गरज चमक के साथ हल्की वर्षा होने की सम्भावना है। दिनांक 24 जनवरी को प्रदेश के सरगुजा संभाग और उससे लगे जिलों में तथा बस्तर संभाग और उससे लगे जिलों में हल्की वर्षा होने की सम्भावना है।
8 से 10 जनवरी के बीच बारिश की संभावना
बैक टू बैक दो वेस्टर्न डिस्टर्बेंस, बदलेगी हवा बदलेगा मौसम
नर्सिंग पेशे को लेकर लोगों के नजरिए में आया बदलाव
अंतर्राष्टीय नर्स दिवस पर विशेष
शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी को गैलेंट्री अवार्ड के लिए शुरू हुई मुहिम
सोशल मीडिया में ट्रेंड कर रही शहीद के पिता की पाती
खरसिया सिविल अस्पताल में सुरक्षित मातृत्व पर जोर
गर्भवती महिलाएं बिना झिझक ले रहीं डॉक्टरी परामर्श : डॉ. संजय अग्रवाल
किंडर वैली में बच्चों की छई-छप्पा-छई
खिलखिलाते बच्चे एक दूजे को ठंडे जल की छींटाकशी करते हुए इधर से उधर दौड़ लगा रहे थे तो कोई छई–छप्पा में मस्त, कुछ बच्चों को फिसल पट्टी भाया तो कुछ बच्चे डीजे के मधुर धुन संग थिरकते नजर आए। वहीं कुछ बच्चों ने अपनी रचनात्मक कला से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया तो कुछ बच्चे पूरी पार्टी के दौरान थकते नजर नहीं आए। बस हर तरफ हंसी, खुशी और मस्ती के आलम में सभी मगन नजर आए। ऐसा हसीन मंजर किण्डर वैली स्कूल के शानदार पूल पार्टी में देखने को मिला। जहां बच्चों की खुशी ने बड़ों को भी बचपन की याद दिला दी और सभी ने मिलकर स्कूल वेकेशन के आने वाले पल को भी बच्चों के लिए बेहद यादगार बना दिया। शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षण संस्थान किण्डर वैली के डायरेक्टर मिसेज रीनू के विशेष मार्गदर्शन में समाज के बच्चों के भविष्य को एक नयी दिशा मिल रही है और सदैव संस्था के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विविध कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है, जिससे बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। वहीं अभिभावक भी स्कूल की अच्छी गतिविधियों से खुश हैं। स्कूल समर छुट्टी की शुरुआत के पूर्व डायरेक्टर मिसेज रीनू ने बच्चों को भरपूर खुशी देने के लिए और उनके पल को यादगार व खुशनुमा बनाने के लिए गोवा की तर्ज पर शानदार पूल पार्टी का आयोजन किया। जहां बच्चों ने खूब मस्ती व खुशी के साथ पूल पार्टी का भरपूर आनंद लिया। qqq मनोरंजन भी जरुरी है : डायरेक्टर समर छुट्टी सत्र के पूर्व बच्चों की खुशी के लिए विविध ड्राइंग, गेम्स, डांस, सिंगिग सहित अनेक मनोरंजन का कार्यक्रम भी किया गया जिसमें बच्चों ने भाग लिया और अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन भी किया। कुछ बच्चों ने अपनी ड्राइंग कला के माध्यम से अपने मन के भावों को तस्वीरों के माध्यम से अभिव्यक्त कर समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। वहीं पूल पार्टी के मनभावन आयोजन में भी स्कूल के सभी बच्चे पीछे नहीं रहें और अपने दोस्तों के साथ मिलकर उन्होंने खूब मस्ती किए और मधुर गीत संग जमकर थिरके। मिसेज रीनू ने कहा कि हमारा उद्देश्य ही है कि पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के स्वस्थ मनोरंजन के लिए विविध आयोजन को भी पहली प्राथमिकता देना। यही वजह है कि स्कूल में हर गतिविधियों को सभी मिलकर भव्यता और नव्यता देने में भरपूर योगदान देते हैं ताकि बच्चों का बौद्धिक विकास हो। वहीं पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के लिए मनोरंजन भी बेहद मायने रखता है। इसीलिए हमने समर छुट्टी के पूर्व बच्चों की खुशी के लिए यादगार पूल पार्टी का आयोजन किए जिसमें बच्चों के साथ स्कूल स्टॉफ और अभिभावकों की भी सहभागिता रही।
सेठ पालूराम और सेठ किरोड़ीमल ने ऐसे बदली रायगढ़ की तस्वीर
रायगढ़ के उद्योगनगरी बनने की कहानी
पंडित सिद्धेश्वर गुरू : एक था ग्रामीण गांधी
शहरनामा : आजादी की लड़ाई के झंडाबरदार और स्टेट कांग्रेस के संस्थापक गुरू बाबा कितने याद हैं रायगढ़ियों को
चक्रधर समारोह : 5 लाख का बजट और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग
प्रशासन ने शुरू की तैयारी, कलाकारों के रिकॉर्डिंग आना शुरू
एमसीएच : कोरोना मरीजों को दे रहा जीवनदान
ठीक हुए मरीज पत्र लिखकर जता रहे एमसीएच का आभार, पत्र हुए वायरल
स्त्रियों के महिमामंडन की सीमा सिर्फ हाशिये तक क्यों?
मेरे इस शीर्षक पर कुछ दबे विरोध के स्वर मुखर हो सकते हों पर अपनी सत्तर साल की उम्र तक इर्द गिर्द पसरे इस समाज मे मैनें यही महसूस किया है। उंगलियों पर गिनी जाने वाली चंद महिलाओं को छोड़कर शेष बची स्त्रियों की नियती यही होती है। दरअसल पूरी जिन्दगी को किश्तों मे जीने वाली स्त्री घर की छत की तरह होती है। घास फूस और पुआल से लेकर सीमेन्ट की छत तक की शक्ल अख्तियार कर आधुनिक युग मे सीलिंग तक के सौन्दर्यीकरण का सफर तय कर चुकी स्त्रियां आज भी उसी सीलिंग की तरह हैं जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। आज भी दिवारों की कमजोरी या बेईमानी उस छत को कभी भी ढहा सकती है। ऐसा नहीं की स्त्री को बोलना नहीं आता या वह इस कला मे पारंगत नहीं लेकिन वह जानती है कि जिस दिन वह खुलकर सच बोलेगी घर की बुनियादें हिल जाऐगी। बस इसीलिए वह चुप रहकर संतुलन बना लेती है। स्त्रियों के इसी संस्कारगत कमजोरी का फायदा समाज उठाता है। वह बखूबी जानता है कि स्त्रियां टूटने की बजाय जोडऩे मे जादा यकीन रखती हैं और इसी समझौतावादी नजरिए को उसकी कमजोरी मान बैठने की भूल कर बैठता है। एक जाने या अनजाने व्यक्ति के साथ अपरिचित परिवेश मे सामन्जस्य स्थापित करना भारतीय स्त्री का मौलिक गुण है। प्रश्न यह है कि क्या उसे उसी अनुपात मे मौलिक अधिकार भी दिया जाता है समाज द्वारा? यहां मैं महज दो स्त्रियों का उल्लेख करना चाहूंगी। पहली मधुलिका रावत और दूसरी अनुजा शुक्ला और भी हो सकती हैं जिनका उल्लेख फिलहाल मै नही कर रही हूँ।महिला दिवस पर इन दोनों का उल्लेख करना इसलिए भी जरूरी है कि उन दोनों ने अपने पति के साथ आखिरी वक्त और आखिरी साँस तक संघर्ष करते हुए इस दुनिया को अलविदा कहा। संभवत: भारतीय सैन्य इतिहास में यह पहली घटना है। दोनों फौजी पत्नियों की संस्था(Army Wives Welfare Association)की प्रमुख रही। अपने घर परिवार के अलावा फौजी पत्नियां और उनके परिवार का सामाजिक प्रबंधन का दायित्व निभाती थी। ओहदे के चलते एक के दायित्व का दायरा बड़ा रहा और दूसरी का तुलनात्मक रूप से कम लेकिन दोनों ने कुशलता से इसे सँभाल रखा था। मेरी नजरों मे वे भी शहीद का सम्मान पाने की बराबर की हकदार थी लेकिन अखबार और न्यूज चैनलों ने एक तरह से उन्हें हाशिये पर डाल दिया जिन परिवारों की वे बेटियां थी उन्हें उतनी तवज्जो नहीं दी गई जिसके वे भी हकदार थे। स्व.विपिन रावतजी को उनके इस सर्वोच्च बलिदान पर राष्ट्र द्वारा अलंकृत भी किया गया पर उनकी पत्नी स्व.मधुलिकाजी भी उनके साथ ही शहीद हुई थी। क्या ऐसी स्त्री के सम्मान के लिए देश के पास कोई अन्य विकल्प नहीं था। यदि नहीं तो विकल्प तलाशे जा सकते थे।कम से कम राज्य सरकारें जो बेटियों को लेकर कागजी संवेदनशीलता और नारेबाजी दिखाती है उनका तो यह प्रथम कर्तव्य था। बगैर किसी रणकौशल या उसकी विधाओं से अनभिज्ञ दो दो मोर्चों पर जूझती ऐसी स्त्रियां क्या सम्मान की हकदार नहीं? क्या आखें मूँदकर अपनी बेटी को ऐसे परिवारों को सौप देने वाले परिवार सम्मान के हकदार नहीं??? गहराई से सोचना होगा देश,राज्यों और भारतीय रक्षा विभाग के सर्वोच्च पदों पर बैठे लोगों को। सेना मे तो फिर भी वीर नारी,वीर माता का दर्जा दिये जाने की परंपरा रही है पर ऐसी बेटियों का सम्मान राष्ट्रीय पर्वों पर राज्य सरकारों द्वारा किया जाना भी बेहद जरूरी है। सरकारें इस विषय पर गंभीरता से सोचे। ऐसा नहीं कि हमारे देश मे स्त्रियों का गौरवशाली इतिहास न रहा हो।दुख इस बात का है कि उनका महिमामंडन सिर्फ हाशिये तक रहा। हम भले ही गर्व से यह कह ले कि आज किस क्षेत्र मे स्त्रियों की पैठ नहीं है। राजनीति, खेल, युद्ध क्षेत्र या कला के सभी क्षेत्रों मे उसकी भागेदारी हो चुकी है और वह सफलता के कीर्तिमान भी स्थापित कर रही है। यह एक हद तक सच भी है पर जब बात स्वीकारोक्ति की हो तो तुलनात्मक रूप से देश की आबादी की लगभग आधी फीसदी हिस्सा रही ये स्त्रियां क्या आधे फीसदी सम्मान की हकदार भी नहीं हैं? (अंत मे मैं उल्लेख जरूर करूगीं कि अनुजा शुक्ला मेरी बहू थी जो अपने पति विप्लव और सात वर्षीय बेटे अबीर के साथ आतंकी हमले मे शहीद हो गई और अबीर शायद इस देश का सबसे नन्हा शहीद होगा जिसे फौजी परिवार का होने की सजा मिली।)
नारी तुम श्रद्धा हो
अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष के आगमन पर न जाने क्यों वेदना तथा उत्साह दोनों भर जाता है । वेदना इसलिए कि मुझे इस दिवस पर बड़े-बड़े नारे लगाते, परिचर्चाओं का आयोजन करते ,तस्वीरें खिंचवा कर बुके देकर, एहसास दिलाते माहौल का कि आज महिला दिवस है और महिलाएं ही हैं जो सक्षम हैं ,जो हर काम कर सकती हैं आदि का तमाम दिखावा व्यर्थ लगता है। रही बात उत्साह की तो महसूस होता है कि हमें कम से कम याद तो किया जाता है महिला दिवस मना कर । महिला दिवस का मनाने की शुरुआत 8 मार्च 1914 को हुई।क्लारा जेटकिन ने 1910 में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत की। इस का आयोजन एक श्रम आंदोलन के रूप में था जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने सालाना आयोजन के तौर पर स्वीकृति दी थी। इसकी शुरुआत का 'बीज' 1908 में पड़ा ,जब न्यूयार्क शहर में 15 हज़ार महिलाओं ने काम के घंटे कम करने, और बेहतर वेतन और वोट देने की मांग के साथ विरोध प्रदर्शन करके निकाला था। एक साल बाद अमेरिकी सोशलिस्ट पार्टी ने पहली बार राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत की।इस कॉन्फ्रेंस में 17 देशों की 100 महिला प्रतिनिधि हिस्सा ले रही थी। सब ने क्लारा का स्वागत किया ।उसके बाद अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पहली बार 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क ,जर्मनी ,स्विट्जरलैंड में मनाया गया। आधिकारिक तौर पर इसे मनाने की शुरुआत 1975 से प्रारंभ हुई ।संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1996 में पहली बार इसके आयोजन में थीम को अपनाया। अतीत का जश्न मनाओ ,भविष्य की योजना बनाओ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को प्रदर्शित करने वाले रंग हैं बैंगनी,हराऔर सफेद। इसमें बैगनी रंग न्याय और गरिमा का प्रतीक है। हरा रंग उम्मीद का प्रतीक है ।और सफेद रंग शुद्धता का सूचक होता है। रूस सहित दुनिया के कई देशों में इस दिन राष्ट्रीय अवकाश भी रहता है। महिलाओं को लैंगिक भेदभाव से ऊपर रखना चाहिए। परंतु ऐसा नहीं हो पाता महिलाएं सबसे अधिक इसका शिकार होती हैं। अभी कोरोना काल में हमने देखा कि किस तरह से लॉक डाउन की स्थिति में सभी घर में बैठे थे ।परंतु महिलाओं को खाली नहीं बैठने दिया गया। उसे नौकरी के साथ-साथ घर का काम भी करना पड़ा और थोड़ी बहुत जो मदद घरेलू नौकरों से मिलती थी, वह भी बंद थी। चकरघिन्नी बनी वह क्या खाक महिला वर्ष मनाएगी?यद्यपि पुरुष वर्ग मदद करते हैं, परंतु मुझे लगता है इसका प्रतिशत 30 या 40 से ज्यादा नहीं रहता। आज की नारी में छटपटाहट है आगे बढ़ने की ,जीवन और समाज के हर क्षेत्र में कुछ करिश्मा कर दिखाने की। उसे अविराम, अथक परिश्रम से नया सवेरा लाने की ,तथा ऐसी सशक्त इबारत लिखने की जिसमें महिला अबला न रहकर सबला बन जाए ।आज स्थिति यह है कि कानून और संविधान में दिए गएअधिकारों का संबल लेकर नारी अधिकारिता के लंबे सफर में 'मील के पत्थर' पार कर चुकी है ,फिर भी उसके लिए अभी कई और मंजिलों को छूना बाकी है। महिलाओं के सामाजिक सशक्तिकरण में शिक्षा की अहम भूमिका है।इससे महिलाएं न केवल लाभान्वित होती हैं वरन उसके शिक्षित होने से भावी पीढ़ी भी लाभान्वित होती है । भारत में लिंगानुपात व साक्षरता में महिलाएं पुरुषों से पीछे हैं । एक नागरिक होने के नाते हम सबको एक सकारात्मक सोच के साथ मिलजुल कर सामाजिक तस्वीर को बदलने का प्रयास करना चाहिए। महिलाओं को समझना होगा कि आज समाज में उनकी दयनीय स्थिति भगवान की देन न हो कर ,समाज में चली आ रही परंपराओं का परिणाम है ।स्थिति को बदलने का बीड़ा महिलाओं को स्वयं उठाना होगा। जब तक वह स्वयं अपनी सामाजिक स्तर पर आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं करेगी तब तक समाज में उसका स्थान गौण ही रहेगा। आज भी हमारी बहुसंख्यक आबादी गांव में है, इसलिए महिलाओं की बेहतरी के लिए गांव में पहल की जानी चाहिए। आज महिलाएं घर की चारदीवारी से बाहर निकल रूढ़िवादी प्रवृत्तियों को पार कर विभिन्न व्यवसायों में,सेवाओं में कार्यरत हैं। जिसमें निर्भरता भी आ रही है। बैंकिंग ,आईटी, मेडिकल, इंजीनियरिंग बिजनेस और उद्यमिता हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी योग्यता का लोहा मनवाया है। खेलों, फिल्म और सौंदर्य प्रतियोगिताओं ,पत्रकारिता ,लेखन आदि में भी महिलाओं ने अपने आप को स्थापित किया है। राजनीति में तो हर वार्ड, पंच ,सरपंच ,प्रधान प्रमुख, विधानसभा सदस्य, लोकसभा सदस्य, राज्यसभा सदस्य, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति जैसे पदों पर अपना दमखम दिखाने में पीछे नहीं है। देश के संविधान में महिलाओं को सदियों पुरानी दास्तां एवं गुलामी की जंजीरों से मुक्ति दिलाने के प्रावधान किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सबसे उत्तम तरीका यही है कि हम हर महिलाओं का सम्मान करें उनके हक के लिए बात करें ,बेटियों का सम्मान करें ,तथा उनके उज्जवल भविष्य के लिए काम करें , इसके लिए राष्ट्र निमार्ण की पॉलिसी निमार्ण में जब तक महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित नही होती तब तक अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की सार्थकता सिद्ध नही होगी।
बेटियां साझा होती है भूपेश बघेल जी, अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है
एक पीड़ादायक मौन : सन्दर्भ मणिपुर आतंकी हमला
A New Threshold for Retribution
The truth is they had the intention of killing, they came in, fired mercilessly on vehicle knowing that there was a six year old sitting in that, escaped and openly claimed that they did it and we are
कलेक्टर भीम सिंह ने भारी बारिश के बीच संभाला मोर्चा, देखें तस्वीरें
निगम अमला बीती रात से आयुक्त के साथ पूरे शहर में डटा हुआ है
तस्वीरों में देखें रायगढ़ में जनता कर्फ्यू का असर
22 मार्च यानी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर जिले में भी जनता कर्फ्यू का असर देखने को मिला। दोपहर तक पूरा शहर स्वस्फूर्त बंद था। हर मुख्य मार्ग और बाजार बंद मिले। गली-कूचे तक कोई व्यक्ति बाहर नहीं निकला।
हरि बोल, जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ निकली रथयात्रा, देखें गैलरी
रायगढ़ में दो दिनों की रथयात्रा आयोजित होती रही है। इसी क्रम में आज रथ द्वितिया के दिन शहर के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भगवान श्री को विधिविधान पूर्वक पूजा अर्चना पश्चात मंदिर के गर्भगृह तथा मंदिर परिसर से जय जगन्नाथ के जयघोष और घंट शंख ध्वनि के बीच ससम्मान बाहर निकाला गया। राजापारा स्थित प्रांगढ़ में मेले सा माहौल था और हजारो की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण भगवान श्री के दर्शन करने के लिए पहुंचे हुए थे। इससे पहले कल भगवान जगन्नाथ की विधि विधान से पूजा की गई जिसे फोटोग्राफर वेदव्यास गुप्ता ने अपने कैमरे में कैद किया।
इप्टा रायगढ़ के 25वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की झलकियां
27 से 31 जनवरी तक पॉलिटेक्निक ऑडिटोरिम में इप्टा रायगढ़ द्वारा 25वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जिसमें चार नाटक एवं दो फीचर फिल्में दिखाई गईं। समारोह की शुरुआत रायपुर के मशहूर रंगकर्मी मिर्जा मसूद को 10वां शरदचंद्र वैरागकर अवार्ड देकर की गई। यह कूवत सिर्फ रंगमंच रखता है जो वर्तमान सत्ता के मठाधीशों पर अजब मदारी गजब तमाशा नाटक के माध्यम से सीधे कटाक्ष कर सकता है। जहां एक मदारी को राजा बना दिया जाता है, शब्दों के अस्तित्व को खत्म कर दिया जाता है। बंदर राष्ट्रीय पशु बन जाता है। गांधी चौक नाटक में गांधीजी की प्रतिमा स्वयं यह चलकर वहां से हट जाती है कि जब रक्षक की भक्षक बन गए तो कोई क्या कर सकता है। नोटबंदी और जीएसटी पर गांव वाले सीधे प्रहार करते हैं। सुबह होने वाली है की लेखी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध होने के बाद लोगों को जागरूक करने को किताब लिखती और किताब को ही फांसी हो जाती है। बोल की लब आजाद हैं तेरे लोगों को दर्शकदीर्घा में झकघोर के रख देती है। तुरूप और भूलन जैसी फिल्में लोगों के मनोरंजन के अलावा दमदार संदेश भी देती है। तो देखें इस शानदार नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की कुछ झलकियां
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