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Raigarh Express, news of raigarh chhattisgarh

Monday, September 28, 2020
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अजय आठले को अन्तिम लाल सलाम
तुम्हारे सपने को मंज़िल तक पहुंचाएंगे। तुम नहीं रहे इसका गम तो है लेकिन लाल झंडा लेकर कामरेड आगे बढ़ते जाएंगे।
ओपिनियन
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प्रेमशिला मिश्रा : 38 साल से जिले की पोषण वारियर
हमारे बच्चे
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निगम का बस टर्मिनल : फिर 45 लाख रुपये डूबाने की तैयारी
राजनीति
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फिर बुरे फंसे पूर्व रेंजर यादव, तैयार किया कूटरचित देयक
आसपास
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रायगढ़ है इनकी वजह से सुरक्षित
आसपास
फिर बुरे फंसे पूर्व रेंजर यादव, तैयार किया कूटरचित देयक
डीएफओ ने रेंजर क्वार्टर में चस्पा करवाया नोटिस, काम कराया किसी से और किसी को किया भुगतान,, भेलवाटिकरा में वृक्षारोपण के नाम पर फिर हुआ कैम्पा निधि की राशि का बंदरबाट
रायगढ़ है इनकी वजह से सुरक्षित
संक्रमण झेलते, पीपीई किट पहन बेहोश होते, दिन-रात सेवा में लगे कोरोना वारियर्स
24 से 30 सितम्बर तक जिले के सभी नगरीय निकाय कंटेनमेंट जोन घोषित
कलेक्टर भीम सिंह ने दिशा-निर्देशों के साथ जारी किया आदेश
जैमूरा व बसनाझर सेवा सहकारी समिति में 1 करोड़ 29 लाख का घोटाला !
समिति के प्रबंधक, संचालक मंडल समेत 16 के विरुद्ध खरसिया पुलिस ने दर्ज की एफआईआर, वर्ष 2019-20 में समिति में आए धान और बारदाना का किया गबन, खाद्य विभाग की जांच में हुआ खुलासा
निगम का बस टर्मिनल : फिर 45 लाख रुपये डूबाने की तैयारी
पूर्व में 40 लाख की राशि की जा चुकी है खर्च, अब तक किसी काम नहीं आया टर्मिनल
एल्डर मैन मनोनयन : कांग्रेस को मंथन की जरूरत
अभी नगर निगम मे एल्डरमैन की नियुक्ति की गई है। जिस पर राजनैतिक समीक्षकों ,सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों सहित आम जनता में चर्चा - परिचर्चा,बहस,बातचीत और तीखी प्रतिक्रियाएं हो रही है। कांग्रेस को हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि वह राष्ट्रीय स्तर पर अपने अस्तित्व को बचाए रखने की लड़ाई लड़ रही है। जिसके लिए कांग्रेस को विचारधारा,सिद्धांत आदर्श ,गांधी दर्शन , राजनैतिक सूझबूझ , आचरण व चरित्र को देश के परिदृश्य में नए सिरे से स्थापित करने के कठिन संघर्ष और अग्निपथ से गुजरना पड़ रहा है। ऐसी जटिल व कठिन परिस्थितियों में पूरे देश में ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक विशेष कर जिन जिन राज्यो में कांग्रेस की सरकार है कम से कम वहां पर तो एक एक कदम फूंक फूंक कर, सोच समझकर उठाने की जरूरत है। इस दिशा में राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सकारात्मक सराहनीय कोशिश और पहल दिखाई पड़ रही है। 15 साल बाद छत्तीसगढ़ राज्य में कांग्रेस,सरकार बना पाने में सफल हुई है। कांग्रेस ने कोई बहुत बड़े जनआंदोलन , सामाजिक , राजनैतिक विमर्श या कोई ठोस भावी दृष्टिकोण व दिशा के कारण यह उपलब्धि प्राप्त नहीं की है।बल्कि भाजपा के 15 साल के कुशासन व गलत नीतियों से त्रस्त,पीड़ित, परेशान जनता ने अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए अनायास ही यह अवसर प्रदान किया है।रायगढ़ विधान सभा की तो एक अलग अजब कहानी है।कुल वोटर की संख्या बढ़ने के बाद भी हारे हुए पूर्व विधायक से कम वोट पाकर भी विजयी हुए हैं और आज रायगढ़ के विधायक हैं।इसीलिए इन्हे लोग एक्सिडेंटल विधायक की संज्ञा से भी विभूषित करते हैं। ऐसी परिस्थितियों में कांग्रेस को अपने चाल,चलन,चरित्र,नियत और नीति पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।ताकि जनता के मन में एक सिद्धांत निष्ठ ईमानदार और आदर्श छवि स्थापित हो सके। qqq क्या कर रही है कांग्रेस न तो विधायक और न ही रायगढ़ नगर निगम ने अभी तक कोई विशेष उपलब्धि दर्ज की है । और न ही भावी कोई आगामी कार्य योजना या दृष्टि दिखलाई पड़ती है।कोई स्पष्ट विज़न भी नहीं है।बल्कि कुछ ऐसे कार्य हैं जो निगम जैसी शासकीय संस्था ही नहीं बल्कि मानवता व समानता की संवैधानिक व्यवस्था , गांधी दर्शन व कांग्रेस की विचारधारा पर ही गंभीर सवाल खड़े करते हैं। कोरोना लॉक डाउन के समय भिखारियों,वंचितों, सबसे गरीब अन्तिम पंक्ति में खड़े व्यक्तियों को छोड़ केवल 31 पंडितों को आर्थिक मदद करना, ऑडिटोरियम होने के बावजूद लाखो रुपए फूंक कर मुख्यमंत्री को राजशाही ठाठ बाठ दिखावे में शामिल करने की होड़ में सरकारी चक्रधर समारोह खुले मैदान में आयोजित करने प्रशासन की घिनौनी लामबंदी में शामिल होना,बिना किसी स्पष्ट कार्य योजना विषय वस्तु के विशेष सम्मेलन का आयोजन, बाढ़ या डूब से बचाव के लिए जनता के आवेदन,शिकायत व प्रार्थना किए जाने के बावजूद बरसात के पूर्व नालों, डबरी,जलकुंभी मलवों आदि की उचित साफ सफाई की व्यवस्था न कर जनता को मुसीबत में डालना, फुटकर सब्जी विक्रेताओं के संजय कॉम्प्लेक्स की समस्या का सब्जी विक्रेताओं के हितों में सही समाधान न निकालना, रायगढ़ के पांच महान विभूतियों की मूर्ति स्थापना, अमृत जल मिशन योजना,टॉयलेट घोटाला, सड़कों एवं अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का सवाल,पर्यावरण,शिक्षा, स्वास्थ्य,आदि बहुत से जनसरोकार के मुद्दें हैं जिस पर नगर निगम की कोई स्पष्ट दिशा ,नियत और नीति स्पष्ट नहीं है। एल्डर मैन की नियुक्ति ने भी कई सवाल खड़े किए हैं। बड़े बुजुर्गो का मानना है कि "एक छोटी सी गलती खुशहाल जीवन को बर्बाद कर देती है।" राजनैतिक दलों को यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि एल्डर मैन का मुख्य उद्देश्य है कि समाज के विभिन्न वर्गों समाज,शिक्षा,विज्ञान,चिकित्सा,कानून विद,सांस्कृतिक, रचनात्मक एवं मानवता के क्षेत्र में कार्यरत प्रतिष्ठित सामाजिक शख्शियत को शामिल कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी व प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए अपनी पार्टी के प्रति जन स्वीकार और विश्वास अर्जित करते हुए उसका विस्तार करना। लोकतंत्र में जनता बहुत जागरूक होती है।प्रत्येक घटना कर्मों को मौन हो कर बड़े ध्यान से देखते और समझते रहती है। जनता सबका लेखा जोखा अपने पास रखती है।यही कारण है कि 15 साल तक शासन करने एवं युवाओं को मोबाइल ,लैपटॉप बांटने के बावजूद सत्ता पक्ष भाजपा हार जाती है। इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति, संस्था और सरकार को केवल अपने स्वार्थ की नहीं बल्कि जनता व समाज के हितों को ध्यान में रखकर कार्य करना चाहिए। संपूर्ण कार्य,आचरण,चरित्र, नियतऔर नीतियां समाज हित के लिए ही समर्पित होना चाहिए।तभी हम एक आदर्श,खुशहाल और बेहतर समाज व राष्ट्र का निर्माण करने में सफल हो सकते हैं।
एल्डरमेन की नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस में मचा बवाल
लैलूंगा विधानसभा के कांग्रेसी कार्यकर्ता हुए नाराज, नियुक्ति को लेकर कांग्रेस में दो फाड़
सिंडिकेट के कब्जे में रायगढ नगर निगम !
एक उच्च तकनीकी अधिकारी और एक ठेकेदार के गठबंधन ने कमिशनखोरी के सारे रिकार्ड तोड़े। हर बिल पर साईन के लिए होने वाली वसूली से ठेकेदार हलाकान, अफसर की शिकायत की तैयारी
अधिक मास में कुछ तरावट की उम्मीद
उमस से राहत की आशा, आज और कल बारिश की संभावना
मानसून फिर होगा एक्टिव हल्की बारिश की संभावना
लगभग 10 दिन से इनएक्टिव मॉनसून फिर से एक्टिव होने की संभावना है
बारिश के बाद अब आएगी उमस, फिर इससे भी मिलेगी राहत
वीकेंड से अच्छी बारिश के आसार
एक दिन में 202 मिमी बरसा पानी, फिर बने बारिश के आसार
माइनस 3 से प्लस 8 प्रतिशत पर पहुँचा बारिश का आंकड़ा
प्रेमशिला मिश्रा : 38 साल से जिले की पोषण वारियर
पोषण माह के तहत पूरे जिले में हो रहे विविध आयोजन
अब बुजुर्गों की सेहत का रखें विशेष ध्यान
समय रहते लोग कराएं कोविड टेस्ट, घबराएं नहीं
फिजिकल डिस्टेंसिंग के साथ मनाया जा रहा पोषण माह
आंंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर मास्क की उपयोगिता, हाथ धोने के तरीके के साथ पोषक आहार की दे रहीं जानकारी
आप बात जरूर करें, हर समस्या का है हल
विश्व आत्महत्या निरोधक दिवस आज : अगर संतुष्ट होगे तो कभी अवसाद नहीं होगा
और जब सारंगढ़ हाईकोर्ट का फैसला वायसरॉय भी नहीं पलट सके
कहानी स्वतंत्र प्रिंसली स्टेट सारंगढ़ की
विश्वगुरु भारत और गोमर्डा अभयारण्य बनने की कहानी
यूं तो विश्वगुरु नाम की कोई ऑफिशियल पोजिशन नही है। यूनेस्को भी भारत को विश्वगुरु बनाने का कोई मैसेज, आप तक भेजा नही है। मगर 1972 की स्टॉकहोम कांफ्रेंस में भारत ने वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण के मामले में विश्वगुरु जरूर बना दिया। किस्सा शुरू होता है 1968 से। तब यूनाइटेड नेशंस ने दुनिया की बढ़ती मानवीय आबादी, और उसके द्वारा वन्य जीवों के क्षेत्र तथा प्राकृतिक संसाधनों के अतिक्रमण पर स्टडी की। एक कन्वेंशन बुलाने का निर्णय हुआ। विश्वसभा बुलाते बुलाते 1972 आ गया। 5 जून 1972 से यह कांफ्रेंस स्टॉकहोम में आयोजित हुई। नया विषय था, देशों की रुचि कम थी। दुनिया के देशों ने छोटे छोटे अफसरों, मंत्रियों को भेजकर अपना कोरम पूरा किया। यह भारत ही अकेला था, जिसकी हेड ऑफ गवर्मेन्ट, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी खुद पहुंची। दिन था 14 जून 1972, इंदिरा ने पर्यावरण, वन्यजीवन और गरीबी उन्मूलन को अन्तर्सम्बन्ध जोड़ते हुए, एक स्पीच दी। उस जानदार स्पीच को स्टैंडिंग ओवेशन मिला और इसके साथ इस मुद्दे पर लीडरशिप और निगाहें भारत की ओर आ गयी। कोई और दौर होता तो अगले दिन अखबारों की सुर्ख़ियों में नेता की तारीफ के फोटो आने के बाद मामला भुला दिया जाता। मगर, इंदिरा नेता जरा दूजे किस्म की थी। जो बीड़ा उठाया वह तीन माह के भीतर पूरा किया। सितंबर में भारत पहला देश था, जिसने वन्यजीव संरक्षण एक्ट ( Wildlife protection act of 1972) पास किया। -- इस एक्ट को आप शायद सलमान खान के चिंकारा केस की वजह से याद करें। मगर इसका असल योगदान भारत मे नेशनल पार्क और अभयारण्यों की स्थापना से हुआ। पहली बार दुनिया मे मनुष्य के लिए हद निर्धारित हुई। जिससे आगे प्रकृति का कानून, उसका नियम चले और उसके दूसरे बच्चों को मानव से अभय मिले। इस कानून ने आगे चलकर प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलिफेंट, प्रोजेक्ट क्रोकोडाइल, और तमाम दूसरे काम हुए। जिससे जानवरों के जीवन के अधिकार को मानव के जीवन के अधिकार की तरह तवज्जो मिली। किसी भी तरह का शिकार, एवम उससे जुड़ा व्यापार पनिशेबल ऑफेंस हुआ। भारत का यह कानून बहुतेरे देशो ने अध्ययन किया, और अफ्रीका से यूएस तक इस तरह के कानून बने। -- कानून बनाना एक बात है, और उसे जमीन पर लागू करना दूसरा। आसान नही है, वनों में रहने वाले लोगो को समझाना, उनके पारम्परिक अधिकारों मान्यताओं के विरुद्ध समझाना और किसी जंगल को सिर्फ पशु पक्षियों के लिए छोड़ने को प्रेरित करना। राज्य सरकारें इस ओर हाथ डालने को तैयार नही थी। इंदिरा ने एक लाख का इनाम रखा, उन सरकारों के लिए जो इस एक्ट में पहले काम करके दिखाएं। तमाम सरकारों पर चौतरफा दबाव भी था, और मध्यप्रदेश सरकार पर भी। जेजे दत्ता, भारत के नामचीन पर्यावरणविद, वन्यजीव विशेषज्ञ और वन सेवा के अधिकारी इस दौर में छत्तीसगढ़ के रायगढ़ पहुंचे। सारंगढ़ के राजा और पूर्व मुख्यमंत्री नरेशचंद्र सिंह से मिले। वनों से घिरे इस जिले के कुछ उम्मीद थी। राजा साहब ने रियासत का नक्शा मंगाया। कुछ लकीरें खींच दी। भारत की पहली वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी जमीन पर तय हो गयी थी। 1972 में ही नोटिफिकेशन भी आ गया, और मध्यप्रदेश सरकार को एक लाख का इनाम भी। यही गोमर्डा अभयारण्य बना। जेजे दत्ता साहब जो बाद में, मध्यप्रदेश के पीसीसीएफ, वाइल्डलाइफ वार्डेन और देश के बड़े-बड़े राष्ट्रीय उद्यानों के प्रमुख बनने वाले थे, इस पहली सेंक्चुरी में जमीन पर उतरकर काम किया। टमटोरा का वह गेस्ट हाउस, वह मैना और मोर कक्ष, उनके दौर के बने है। असल मे उस हट का नाम जेजे दत्ता हट था। छत्तीसगढ़ बनने पर किसी अज्ञानी अहमक अफसर ने उसका नाम बदल दिया। --- इंदिरा की उस स्पीच के कोई 48 साल बाद, उससे उपजे अभ्यारण्य मैंने कुछ लम्हे गुजारे। मुझ जैसे लाखों लोग आज भारत के राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों में थोड़ा वक्त गुजारने की ख्वाहिश रखते है। अगणित जीव यहां मानवीय दखल से दूर कलरव करते हैं। अभय अरण्य में स्वच्छन्द, निर्भीक जीते हैं। क्या आप उस कलरव में बजते भारत के डंके को सुन पा रहे हैं। शायद नही, क्योकि आपकी टीवी का वॉल्यूम हाई है। जिसने आपको नहीं बताया कि हाल ही में पर्यावरणीय अनुमति के कानून ढीले कर दिए गए है। अब फैक्ट्रियां और खदानें वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में अतिक्रमण कर सकेंगे। तब उनका घर उजाड़ने वाले, ऊंची आवाज में, बेघर हो चुके बेजुबान जंगली जीवों से अवश्य पूछेंगे बताओ, सत्तर सालों में तुम्हारे लिए क्या किया गया...?
मैं एक ऐसे जिले का एसपी बनने जा रहा हूँ जो अब तक अस्तित्व में नहीं था : रुस्तमजी
रायगढ़ के पहले एसपी की यात्रा और उनका कद
एक रक्षासूत्र मास्क का : रक्षाबंधन के दिन इतिहास रचेगा रायगढ़
पुलिस अधीक्षक ने मुहिम को दिखाई हरी झंडी
अजय आठले को अन्तिम लाल सलाम
तुम्हारे सपने को मंज़िल तक पहुंचाएंगे। तुम नहीं रहे इसका गम तो है लेकिन लाल झंडा लेकर कामरेड आगे बढ़ते जाएंगे।
पर्यावरण और मीडिया
पर्यावरण आज पूरे विश्व की चिन्ता के केन्द्र में है। पूरी दुनिया मे जिस तरह पर्यावरण के संतुलन का क्षरण हो रहा है उसके परिणाम हमें तरह तरह की प्राकृतिक आपदाओं के रूप में देखने को मिल रहा है। ताजा उदाहरण विश्वव्यापी कोरोना है। बाढ़,अल्पवृष्टि, अतिवृष्टि, भूस्खलन तो छोटे लेकिन गंभीर उदाहरण हैं। दरअसल हमारा पर्यावरणीय परिवेश हवा, जल ,जंगल, जमीन, और जैवविविधता के आनुपातिक सामंजस्य से बना हुआ है। प्रकृति ने इसी सामंजस्य को बनाए रखा है वह मनुष्य को उसकी जरूरत का सब कुछ देती है लेकिन उसके लालच और स्वार्थ की पूर्ति नहीं कर पाती। दुख इस बात का है कि सब कुछ जानते हुए भी इसे समझ क्यों नहीं पाता। पर्यावरण मे यदि मीडिया के योगदान की बात करें तो पहले हमें मीडिया के चरित्र को समझना जरूरी है। यह जानी सी बात है कि पूरी दुनिया मे कथित मुख्य की मीडिया उन्हीं कॉरपोरेट घरानों की गोद मे बैठी है जो सबसे ज्यादा पर्यावरण को क्षति पहुंचाते हैं। विकास के नाम पर अन्धाधुन्ध औद्योगिकरण के लिए जिस तरह जंगलों को नष्ट किया गया उसका असर जैवविविधता पर स्वाभाविक रुप से पड़ा। नतीजे में पृथ्वी का पारिस्थितिकी संतुलन इस हद तक बिगड़ा कि ओजोन परत तक उसका प्रतिकूल प्रभाव देखा जा सकता है। इस स्थिति को लेकर मीडिया एक अहम भूमिका निभा सकती थी और अभी भी निभा सकती है लेकिन मुख्यधारा की मीडिया की प्राथमिकताओं मे पर्यावरण का क्रम बहुत नीचे है। बावजूद इसके मीडिया का एक ऐसा हिस्सा भी है जो जिले और आन्चलिक स्तरों मे प्रकाशित होते हैं। मीडिया का यह हिस्सा पर्यावरण को लेकर सजग रहा है और पर्यावरण संरक्षण की दिशा मे होने वाले छोटे-छोटे प्रयासों को प्रमुखता से प्रकाशित कर आमजन को जागरूक करने की सजग भूमिका निभा रहा है। अब तो इन मायनों में सोशल मीडिया की भी काफी अहम भूमिका होती जा रही है। सोशल मीडिया में भी बिगड़ते पर्यावरण को लेकर चर्चाओं के माध्यम से चिन्ता व्यक्त की जा रही है। यहां यह बताना होगा कि खासतौर पर भारत के गांवों मे रहने वाले लोग अपनी सहज जीवनशैली मे भी पर्यावरण को लेकर जीतने सहज रहते हैं शहर के लोगो मे यह सहजता नहीं पाई जाती। उल्टे पर्यावरण को लेकर उनमें एक आत्मघाती लापरवाही होती है। इस संन्दर्भ मे यदि अपने ही शहर की बात करें तो पिछले दिनों लगातार वन्यजीव और जलचरों की हत्या का मामला सुर्खियों मे रहा। अवैध कटाई के मामले भी खबर बनी। ये सब पर्यावरणीय दृष्टि से घातक हैं और इंसान के लालच को दर्शाते भी हैं। अन्चल के पत्रकारों ने इसे छापा भी और फौरी तौर पर कार्यवाही भी हुई लेकिन क्या इसके पुनरावृत्ति होने की संभावना नही है? इसपर गंभीरता से विचार कर ठोस कार्यवाही हेतु कड़े कदम उठाने और निर्णय लेने की आवश्यकता है। निष्कर्ष यह कि ऐसा नहीं कि मीडिया इन मुद्दों पर मौन है लेकिन इस विषय पर उसे और मुखर होने की जरूरत है। बेशक टीआरपी और न्यूज वेल्यू के उनके अपने बंधन होते है। फिर भी जनहित के मुद्दों को लेकर वह जवाबदेही से अपना पल्ला झाड नहीं सकते। अमूमन यह देखा जाता है कि बड़े-बड़े अखबार के मुखपृष्ठ विज्ञापन के होर्डिंग बन चुके हैं जिसे मीडिया की भाषा मे जैकेट कहा जाता है। राजनीति से जुड़ी छोटी से छोटी खबर उनकी प्राथमिकता में शीर्ष पर होती है और पर्यावरण जैसे अहम मुद्दे गौण। इसे मीडिया ही नहीं आमजन को भी समझना होगा खासतौर पर शिक्षित वर्ग को। उनसे यह अपेक्षा तो की जा सकती है कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए इसके संरक्षण और संवर्धन के उपायों पर न केवल सोचना शुरू करें बल्कि वास्तव मे कुछ करें भी क्योंकि यह महज एक शहर,एक देश की नहीं बल्कि पूरे विश्व और मानवजाति की समस्या. बन चुकी है। (लेखिका सांध्य दैनिक समाचार पत्र बयार की प्रबंध संपादक,शिक्षाविद और पर्यावरण संरक्षण समिति की जिला प्रमुख हैं। )
सुशांत का तो हो चुका, पर आपका श्राद्ध सम्भव नहीं है
सोशल डिस्टेंस कोरोना ने नहीं दिया, डिस्टेंट तो आप कब के हो चुके हो
तिब्बत आखिर क्या है, किसकी गलती ?
दुनिया की छत कहे जाने वाले को हर समय हर किसी ने स्वार्थ के लिए प्रयोग ही किया
कलेक्टर भीम सिंह ने भारी बारिश के बीच संभाला मोर्चा, देखें तस्वीरें
निगम अमला बीती रात से आयुक्त के साथ पूरे शहर में डटा हुआ है
तस्वीरों में देखें रायगढ़ में जनता कर्फ्यू का असर
22 मार्च यानी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर जिले में भी जनता कर्फ्यू का असर देखने को मिला। दोपहर तक पूरा शहर स्वस्फूर्त बंद था। हर मुख्य मार्ग और बाजार बंद मिले। गली-कूचे तक कोई व्यक्ति बाहर नहीं निकला।
हरि बोल, जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ निकली रथयात्रा, देखें गैलरी
रायगढ़ में दो दिनों की रथयात्रा आयोजित होती रही है। इसी क्रम में आज रथ द्वितिया के दिन शहर के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भगवान श्री को विधिविधान पूर्वक पूजा अर्चना पश्चात मंदिर के गर्भगृह तथा मंदिर परिसर से जय जगन्नाथ के जयघोष और घंट शंख ध्वनि के बीच ससम्मान बाहर निकाला गया। राजापारा स्थित प्रांगढ़ में मेले सा माहौल था और हजारो की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण भगवान श्री के दर्शन करने के लिए पहुंचे हुए थे। इससे पहले कल भगवान जगन्नाथ की विधि विधान से पूजा की गई जिसे फोटोग्राफर वेदव्यास गुप्ता ने अपने कैमरे में कैद किया।
इप्टा रायगढ़ के 25वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की झलकियां
27 से 31 जनवरी तक पॉलिटेक्निक ऑडिटोरिम में इप्टा रायगढ़ द्वारा 25वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जिसमें चार नाटक एवं दो फीचर फिल्में दिखाई गईं। समारोह की शुरुआत रायपुर के मशहूर रंगकर्मी मिर्जा मसूद को 10वां शरदचंद्र वैरागकर अवार्ड देकर की गई। यह कूवत सिर्फ रंगमंच रखता है जो वर्तमान सत्ता के मठाधीशों पर अजब मदारी गजब तमाशा नाटक के माध्यम से सीधे कटाक्ष कर सकता है। जहां एक मदारी को राजा बना दिया जाता है, शब्दों के अस्तित्व को खत्म कर दिया जाता है। बंदर राष्ट्रीय पशु बन जाता है। गांधी चौक नाटक में गांधीजी की प्रतिमा स्वयं यह चलकर वहां से हट जाती है कि जब रक्षक की भक्षक बन गए तो कोई क्या कर सकता है। नोटबंदी और जीएसटी पर गांव वाले सीधे प्रहार करते हैं। सुबह होने वाली है की लेखी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध होने के बाद लोगों को जागरूक करने को किताब लिखती और किताब को ही फांसी हो जाती है। बोल की लब आजाद हैं तेरे लोगों को दर्शकदीर्घा में झकघोर के रख देती है। तुरूप और भूलन जैसी फिल्में लोगों के मनोरंजन के अलावा दमदार संदेश भी देती है। तो देखें इस शानदार नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की कुछ झलकियां
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