raigarh express

Raigarh Express, news of raigarh chhattisgarh

Tuesday, March 31, 2020
raigarh express
सब्जी बनी जान का खतरा, नहीं सुधर रहे लोग, संक्रमण फैला तो कौन होगा जिम्मेदार?
लालच और अधिक संग्रहण के कारण लोग हुए लापरवाह
आसपास
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लोगों के लालच और प्रशासन का खराब प्रबंधन कहीं कोरोना वायरस को और ज्यादा ना फैला दे
आसपास
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लॉकडाउन बना मजाक, अब बेवजह घर से बाहर निकले तो दर्ज होगी एफआईआर
आसपास
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यह रायगढ़ के लिए कोई पहला कर्फ्यू नहीं है, कोरोना के प्रतिकार में कल जनता कर्फ्यू
आसपास
raigarh express
कोरोना का भय सुनियोजित साजिश ?
ओपिनियन
सब्जी बनी जान का खतरा, नहीं सुधर रहे लोग, संक्रमण फैला तो कौन होगा जिम्मेदार?
लालच और अधिक संग्रहण के कारण लोग हुए लापरवाह
लोगों के लालच और प्रशासन का खराब प्रबंधन कहीं कोरोना वायरस को और ज्यादा ना फैला दे
लॉक डाउन के पहले दिन खुली प्रशासनिक व्यवस्था की पोल, दर्जनभर चिन्हित सब्जी वाले ही आए बेचने
लॉकडाउन बना मजाक, अब बेवजह घर से बाहर निकले तो दर्ज होगी एफआईआर
तफरी करने निकल रहे लोग, बल प्रयोग करने पर मजबूर हुआ पुलिस-प्रशासन
यह रायगढ़ के लिए कोई पहला कर्फ्यू नहीं है, कोरोना के प्रतिकार में कल जनता कर्फ्यू
सब कुछ स्थगित है पर कब तक
पुलिस पर दबाव बनाने कांग्रेसियों ने किया कोतवाली का घेराव
एनएसयूआई नेता के लिए कांग्रेस हुई एकजुट, युवा कांग्रेसियों के लिए कोई जगह नहीं
स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद पहली बार रायगढ़ आए टीएस बाबा
युवा कांग्रेसियों ने दिखाया अपना दम, बाबा ने एक बार भी नहीं किया विधायक प्रकाश नायक का जिक्र
2 युवकों पर जानलेवा हमला,अपहरण, विधायक के करीबी बिज्जू ठाकुर समेत कई लोगों पर गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज
और गहराता जा रहा विधायक पुत्र रितिक नायक मारपीट मामला
शहर सरकार म एदारी कांग्रेस के बारी, भाजपा के लहुट गिस डोंगा
जानकी बनीं महापौर, जयंत बने सभापति, भाजपा के लिए सबसे बुरा वक्त
बारिश से फिलहाल राहत नहीं, कल-परसों बारिश की प्रबल संभावना
जिले के कई स्थानों पर गिर सकते हैं ओले, गर्जन के साथ बारिश गुरूवार देर रात से होगी शुरू
आगामी दो दिनों में बने बारिश के आसार, फिर लौटेगी ठंड
बीते सप्ताह भर से दिन में गर्मी और रात में ठंड लग रही है। दिन और रात के तापमान में दोगुने का अंतर है जिसके कारण लोगों को सर्दी-जुकाम हो रहे हैं। इस बदलते मौसम से फिलहाल रायगढ़वासियों को अभी राहत नहीं मिलने वाली है। मौसम विभाग ने आगामी दो दिनों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना बताई है। विदित हो कि पश्चिमी विक्षोभ के असर से पिछले 50 दिनों में कई बार बारिश हो चुकी है। इसी क्रम में बंगाल की खाड़ी में एक एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है जिसके आने वाले 24 घंटों में मजबूती के साथ पूर्वी भारत मे असर करने की संभावना है। इसी के साथ एक विंड कन्फ्लुएंस ज़ोन भी छत्तीसगढ़ में बना हुआ है जिसमे पश्चिम और पूर्व दिशा से आने वाली हवाएं एक दूसरे को प्रभावित करके बारिश लाएंगी। आने वाले 3 दिनों में इस कारण से हल्की गरज चमक के साथ बारिश होने की उम्मीद है जो संभवतया जाड़े की आखिरी बारिश होगी। इस दौरान आने वाले समय मे अधिकतम तापमान लगभग 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तामपान 14 डिग्री सेल्सियस तक गिरने की उम्मीद है। मंगलवार के बाद तापमान संभवतया आखिरी बार कम होगा। सूबे में कल से बदलेगा मौसम छत्तीसगढ़ का कल से मौसम बदलने की उम्मीद है। प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की चेतावनी और गरज-चमक के साथ आसमान में बादल छाये रहने की उम्मीद है। रायपुर मौसम विभाग ने बताया है कि उत्तर छत्तीसगढ़ के हिस्सों में औसत बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने तीन दिन 22, 23 और 24 फरवरी के लिए ये अलर्ट जारी किया है। उत्तरी राजस्थान से उत्तर पूर्वी मध्य प्रदेश तक 22 फरवरी को एक ट्रफ रेखा बनेगी। इसके चलते बंगाल की खाड़ी से दक्षिण-पूर्वी आर्द्र हवाएं मध्य प्रदेश और आसपास के इलाकों पर पहुँचेंगी। qqq गरज के साथ हो सकती है बारिश मौसम विभाग की वेबसाइट के अनुसार जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तेलंगाना, केरल और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में बादल छाए हुए हैं। अगले कुछ दिनों में यहां मध्यम से हल्की बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर से ठंड और दक्षिण से गर्म हवाओं के साथ बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाएं आपस में टकराएंगी। इसके असर से कहीं-कहीं पर बूंदाबांदी होने की संभावना है। ऐसे में एक बार फिर न्यूनतम तापमान में गिरावट और अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है। संभाग में बारिश की चेतावनी विभाग की तरफ से जारी की गयी है। वहीं रायगढ़ और अन्य सुदूर इलाकों में भी गरज-चमक के साथ बारिश की चेतावनी दी गयी है।
आगामी दो दिनों तक बारिश की संभावना, मौसम विभाग का यलो अलर्ट
उत्तर भारत में चल रही शीत लहर के कारण जिले समेत कई जगह में रहा कोल्ड डे
पश्चिमी विक्षोभ का रहा जनवरी महीना, अब आएगा पतझड़
इस साल पड़ेगी भीषण गर्मी, फरवरी के पहले सप्ताह बारिश के आसार
रायगढ़ चैंप्स लगातार तीसरी बार बना कार्डिनल कप विजेता
रोमांचक मैच में ब्वॉयज क्लब को हराया, राजा गोरख बने मैन ऑफ द सिरीज
कार्डिनल कप का तीसरा सीजन कल से, 32 टीमों के बीच होगा धमासान
संभाग का सबसे बड़ा राज्य स्तरीय फ्लड लाइट टेनिस बॉल क्रिकेट टूर्नामेंट
विधायक पुत्र मारपीट मामला : एक युवक ने किया आत्महत्या का प्रयास
विधायक पक्ष की ओर से धमकी देने और दबाव बनाने का आरोप, युवा कांग्रेस के एक धड़े ने विधायक के खिलाफ खोला मोर्चा
अराजक औद्योगिकीकरण की आंधी में कहां खो गया मेरा शहर
21वीं सदी के तीसरे दशक में दाखिल हो रहा मरता हुआ रायगढ़
एखर का भरोसा, चोला माटी के हे राम...
रंगकर्मी पूनम तिवारी को दिया गया 11वां शरदचंद्र वैरागकर स्मृति रंगकर्मी सम्मान
विश्व की महान शिक्षक मदर टेरेसा को रायगढ़ से था खास लगाव
शिक्षक दिवस विशेष : संत मदर टेरेसा की पुण्यतिथि भी आज, नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद रायगढ़ ने किया था उनका भव्य स्वागत
विवादों से घिरा चक्रधर समारोह, आयोजन और स्थल को लेकर जिला प्रशासन का अड़ियल रवैया
11 दिन बाद चक्रधर समारोह होना है। आयोजन स्थल की ऊहापोह को खत्म करते हुए कलेक्टर यशवंत कुमार ने रामलीला मैदान में कल टेंट लगाने का पूजन भी कर दिया। विरोध करने लोग आए पर कलेक्टर ने दो टूक कहा कि 14 दिन के लिए अंदर कर दूंगा। फिर भी कुछ लोग मैदान में आयोजन का विरोध कर रहे हैं। रामलीला मैदान बचाओ समिति और भाजपा युवा मोर्चा ने गुरुवार रामलीला मैदान में चक्रधर समारोह के आयोजन के विरोध में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। गुरू शिष्य परंपरा के अनुसार कलाकारों के चयन करने पर नोडल अधिकारी ने रायगढ़ के कुछ नाम गिनाए और कुछ को सीधे रायपुर से रेफर होना बताया। लेकिन इस बार कितनी पारदर्शिता बरती जाएगी वो पेमेंट के वक्त पता चलेगा। विदित हो कि कुछ खास लोगों को बारंबार चक्रधर समारोह में बुलाने और मोटी रकम देने से जिला प्रशासन की किरकिरी कई दफे हुई है। इस भ्रष्टाचार में जिला प्रशासन, चयन समिति और समन्वय समिति की मिलीभगत थी। जिसने चक्रधर समारोह जैसे बड़े आयोजन की साख पर बट्टा लगाया। प्रशासन से उम्मीद थी कि इस बार भी चयन समिति में पारदर्शिता बरती जाएगी लेकिन ऐसा हो ना सका। भले ही जिला प्रशासन कितना भी राग आलापे इस बार भी चयन समिति में कुछ ऐसे लोग शामिल थे जिनका कला और संस्कृति से कोई सरोकार नहीं है। qqq उप संचालक जनसंपर्क ने कलेक्टर की बात काटी चक्रधर समारोह के संदर्भ में कलेक्टर ने गुरुवार शाम 4 बजे कलेक्टोरेट सभाकक्ष में पत्रकार वार्ता रखी। रायगढ़ एक्सप्रेस के प्रतिनिधि ने कलेक्टर से यह सवाल किया कि चक्रधर समारोह कुछ लोगों के लिए 9 दिन का मौज बन जाता है और जिला प्रशासन उनका पूरा सहयोग करता है, कलेक्टर जवाब दे ही रहे थे कि खुद को फंसता हुआ देख उप संचालक जनसंपर्क उषा किरण बड़ाईक ने कलेक्टर की बात काट दी और सारे सवालों को वहीं खत्म कर दिया। यह सब कलेक्टर के सामने हो रहा था और वो मौन थे। जनसंपर्क के सूत्रों की मानें तो उपसंचालक की भूमिका भी आयोजन को लेकर संदिग्ध रही है। इस कारण खुद को फंसता हुआ देख उन्होंने कलेक्टर का ध्यान भटकाया। विदित हो कि करीब 3 साल से अधिक वर्ष से पदस्थ उषा किरण का अक्सर किसी न किसी से विवाद होता रहा है। बात चाहे साप्ताहिक समाचार पत्रों को विज्ञापन देने की हो या आम चुनाव के दौरान उन्हें पास जारी करने की हो। कुछ खास लोगों से हमेशा घिरी रहने वाली उपसंचालक ने हाल ही में एसडीएम रायगढ़ और डिप्टी कलेक्टर से संबंधित विवादित खबर को भी वाट्स-अप ग्रुप में शेयर किया था। जिसे आधिकारिक पुष्टि माना जाने लगा। विवाद बढ़ने पर सफाई दी कि उनके बच्चे ने गलती से खबर डाल दिया। इस मामले में उन पर कार्रवाई अब तक नहीं हुई है। मजे की बात यह है कि इनका सालभर पहले रायपुर ट्रांसफर हो गया और अभी तक अटैच में जिला जनसंपर्क विभाग में हैं। कौन है नटवर सिंघानिया 9 दिन के चक्रधर समारोह में आपको नटवर सिंघानिया हमेशा एक बड़े रोल में दिखेंगे। अब ये किस हैसियत से आते हैं इसे जिला प्रशासन जाने क्योंकि रायगढ़ की जनता जानती है कि वो कौन है। चक्रधर समारोह को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बताने वाले कलेक्टर यशवंत कुमार भी नटवर सिंघानिया की पहेली नहीं बूझ पाए। रायगढ़ एक्सप्रेस के सवाल पर उन्होंने बताया कि वो राजपरिवार के प्रतिनिधि हैं। इसी हैसियत से वो चयन समिति में है। जबकि चक्रधर समारोह पूर्णत: शासकीय आयोजन है। जिसमें राजपरिवार के शामिल होने की बात ही नहीं है। देश लोकतांत्रिक गणराज्य है ऐसे में राजपरिवार और उसके प्रतिनिधि को जिला प्रशासन कैसे इतनी तवज्जो दे सकता है। qqq अपर कलेक्टर को लगाई फटकार पहले तो राजपरिवार को चक्रधर समारोह में शामिल करना जिला प्रशासन के लिए विवाद का कारण बना हुआ है। कई लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं। उसके बाद राजपरिवार के नाम पर राजनीतिक शरण पाए हुए लोगों को चयन समिति में शामिल करना उसके बाद राजपरिवार के प्रतिनिधि को शामिल करना जिला प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। बल्कि रायगढ़ के राजा विशाल बहादुर सिंह को चयन समिति से लेकर हर समिति से दूर रखा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात को लेकर काफी तू-तू मैं-मैं हुई। कलेक्टर राजा विशाल बहादुर को समन्वय समिति में शामिल करने की बात कर रहे थे लेकिन समन्वय समिति की बैठक नहीं हुई थी। इस पर कलेक्टर ने अपर कलेक्टर सुखनाथ अहिरवार को फटकार लगाई। राजा विशाल बहादुर ने रायगढ़ एक्सप्रेस को बताया कि वो 10 साल से रायगढ़ के राजा हैं लेकिन आज तक किसी भी चक्रधर समारोह में उन्हें शामिल नहीं किया गया है। राजा और राजपरिवार के नाम पर जिला प्रशासन हमेशा से पक्षपात करती है। राजनीतिक दल से जुड़े परिवार के कुछ सदस्यों पर जिला प्रशासन हमेशा मेहरबान रहती है जबकि आधिकारिक रूप से राजा मैं हूं और मेरे से कभी कोई संपर्क नहीं करता। qqq सांस्कृतिक भवन एक छलावा राज्य के मुख्यमंत्री हमेशा से कहते आए हैं कि जब सांस्कृतिक भवन बनेगा तब चक्रधर समारोह वहीं होगा। अब जब सांस्कृतिक भवन बन गया है तो समारोह के आयोजन के लिए तरह-तरह की बातें हो रही हैं। जगह कम है लोग कैसे बैठेंगे। क्या ये सवाल सांस्कृतिक भवन बनाने से पहले जिला प्रशासन के जेहन में नहीं आया था। अगर जानकर इसे छोटा बनाया गया है तो फिर यहां चक्रधर समारोह के आयोजन की बात करना भी बेमानी है। रामलीला मैदान में चक्रधर समारोह नहीं होगा इसी चुनावी वायदे से विधायक प्रकाश चुनावी मैदान में उतरे और जीते लेकिन आयोजन वहीं हो रहा है। विधायक झूठे साबित हुए। लोग हमेशा से समारोह के टेंट पर सवाल उठाते रहे हैं। लोगों का आरोप है कि एक टेंट हाउस विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन यह पूरा षड़यंत्र रचता है। ऐसे में सांस्कृतिक भवन रायगढ़ के लोगों के लिए छलावा है।
इंदिरा गांधी की इस फोटो ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई पर अमेरिका जाने को किया मना
वर्ल्ड फोटोग्राफी डे पर विशेष : शिवशरण पाण्डेय, जिन्होंने बदल दी रायगढ़ के फोटोग्राफी की परिभाषा
कोरोना का भय सुनियोजित साजिश ?
कारोना को लेकर भारत सहित विश्व भर में डर का माहौल बनाया जा रहा है। इसमें सरकारें भी शामिल हैं, विश्व स्वास्थ्य संगठन भी शामिल है और फायदा उठाने वाली फार्मा व टेस्ट किट निर्माता कंपनियां भी शामिल हैं। इन सभी को अमेरिका-चीन जैसी वैश्विक ताकतें संचालित कर रही हैं। कोरोना का भय सुनियोजित साजिश है। यह डर का बाजार है। आतंकवाद, धर्म के बाद अब वायरस खौफ के अंतराष्ट्रीय बाजार के सफल खिलाड़ी हैं। इसे सफल बनाने के लिए मीडिया का भरपूर सहारा लिया जा रहा है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन भी जानता है कि किसी भी वायरस की कोई दवा नहीं हो सकती और मुंह पर मास्क लगाने से वायरस अटैक को रोका नहीं जा सकता। यह बात एलोपैथी चिकित्सक और बाजारपरस्त चिकित्सा प्रणाली के चिकित्सा विज्ञानी भी जानते हैं। कोरोना के खौफ में पीसीआर टेस्ट व मास्क आदि के व्यापार तो फल-फूल रहे हैं, पर दूसरे सभी सेक्टर का भट्ठा बैठ रहा है। खासकर भारत जैसे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को अरबों की चपत लग रही है। 1983 में आविष्कृत जिस पीसीआर (Polymerase chain reaction PCR) टेस्ट के बल पर कोरोना संक्रमण को डिटेक्ट करने का दावा किया जा रहा है, उसके आविष्कारक कैरी मुलिस (Kary Mullis) ने खुद कहा था कि इससे किसी पर्टिकुलर वायरस या बैक्टिया के संक्रमण को 100 फीसदी डिटेक्ट नहीं किया जा सकता। यूट्यूब पर उनके वीडियो उपलब्ध हैं। आप कोई भी सुन सकते हैं। सभी चिकित्सक व चिकित्सा वैज्ञानिक जानते हैं कि ब्रह्मांड में करीब 3.5 लाख के करीब वायरस हैं, कम-ज्यादा भी हो सकते हैं, जिनमें से अब तक करीब 200 के आस-पास वायरस का नाम रखा गया है। इनमें कोरोना भी शामिल है। आज जैसे कोरोना का हौव्वा खड़ा किया गया है, ठीक वैसे ही कभी स्वाइन फ्लू-एच1एन1, जीका, इबोला, निपाह, एचआईवी आदि वायरस का खौफ पैदा किया गया था। आज न इन वायरस का कहीं प्रकोप है, न इनकी दवा बनाई गई। न इनकी कोई चर्चा है। गौर करने वाले तथ्य ये हैं कि सभी वायरस के लक्षण लगभग समान हैं। बुखार, जुकाम, बदन में दर्द, नाक बहना आदि। सारे फलू के लक्षण। एचआईवी तो 20वीं सदी का सबसे बड़ा झूठ है। एचआईवी वायरस किसी भी मानव शरीर में प्रवेश कर ही नहीं सकता। कोरोना को देखें तो पहले उसने चीन में तबाही मचाई, अब वहां शांत हो गया। असल में वहां डर के बाजार का दोहन हो गया। अब कोरोना इटली, ईरान, अमेरिका व भारत में तांडव मचा रहा है। चूंकि गर्मी आने के बाद वायरस का असर कहीं नहीं दिखेगा, इसलिए इसे तेजी से चीन से बाहर शिफ्ट कराया जा रहा है, ताकि डर के बाजार का अधिक से अधिक दोहन हो सके। भारत में सरकारों ने स्कूल,कालेज, सिनेमा हॉल, पब, रेस्तभरां आदि बिजनेस एक्टिविटी रोककर अपने ही पैर में कुल्हााड़ी मारी है, जबकि भारत में एक भी केस नहीं है, जो भी केस डिटेक्टे हुए है, वे चीन, इटली, यूएई जैसे जगहों से बाहर से आए लोग हैं। फिर भी हमारी सरकारें कोरोना के भय में आवाम को झोंक रही हैं। पता नहीं हमारी सरकारें डब्यूें एचओ के आगे क्यों नतमस्तक हैं। सभी चिकित्सा विज्ञान में मान्य फैक्ट्स हैं कि जब शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता घटती है तभी शरीर पर वायरस या बैक्टिरिया का अटैक होता है। वातावरण में हमारे आस-पास हमेशा लाखों वायरस-बैक्टिरिया मौजूद रहते हैं और वे हमारे शरीर के अंदर जाते रहते हैं। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता, श्वेत रक्तकण यानी डब्ल्यूबीसी, शरीर के अंदर बनने वाले अम्ल और जीवनरक्षक वायरस व बैक्टिरिया आदि उनको मारते रहते हैं। यह प्रकिया अनवरत चलती रहती है। जब शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है या मौसम परिवर्तन होता है या दूषित खान-पान के शिकार होते हैं या शरीर में अत्यधिक टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं तो वायरस या बैक्टिरिया का हमला होता है। जुकाम, कफ, सिर दर्द, बुखार, बदन दर्द, कंपकपी, उल्टी, दस्त आदि लक्षण संकेत देते हैं कि शरीर में वायरस या बैक्टिरिया का अटैक हो गया है। ये रोग शत्रु नहीं मित्र होते हैं जो मानव को सावधान करने के लिए होते हैं कि आप खुद के खान-पान को ठीक करें। शरीर में इन्हें ठीक करने का इनबिल्ट मैकेनिज्म होता है। तीन से सात दिन में ये ठीक हो जाते हैं। बस आप अपना आहार-विहार ठीक कर लें। जिस आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग व आध्यात्म को भारत अपना गर्व मानता है, जिस भारत में इन वैकल्पिक चिकित्सा की जड़ें मजबूत हैं, वही भारत आज कोरोना के अंतरराष्ट्रीय खेल का प्यादा बना हुआ है। यह समझ से परे नहीं है। भारत भी विश्व स्वाबस्य्यह संगठन से जुडा हुआ है और अंतरराष्री शंय डर की कारोबारी शक्तियों का मोहरा है। जिस चीन से कारोना (कोविड-19) की शुरूआत हुई, उसी चीन व सिंगापुर के चिकित्सकों की टीम ने डा. टी. कॉलिन कैंपबेल के नेतृत्व में 1973-75 के बीच 65 देशों में एक अध्ययन किया, जिसे चाइना स्टडी नाम दिया गया। यह लगभग 25 वर्ष तक चला। 2005 में चाइना सटडी प्रकाशित हुआ। यह स्टडी एनिमल फूड (डेयरी उतपाद समेत), रिफाइनरी फूड प्रोडक्ट्स, इंडस्ट्रियल फूड, जंक फूड और क्रोनिक बीमारियों-डायबिटीज, कैंसर, कोलेस्ट्राल, हाईबीपी, प्रोस्टेट, हर्ट ब्लॉकेज, थायराइड आदि के बीच संबंध का पता लगाने के लिए की गई। यह स्टडी अंग्रेजी दवा व उसके नुकसान, खान-पान का बीमारी से संबंध आदि विषयों को भी केंद्र में रखकर की गई। इस विश्वव्यापी स्टडी का निष्कर्ष निकला कि एनिमल फूड, इंडस्ट्रियल फूड, डब्बाबंद फूड, रिफाइंड फूड आदि के क्रोनिक रोगों से गहरे संबंध हैं। ये खाद्य सामग्री लोगों को बीमार बना रहे हैं, दवा-इंजेक्शन बीमारी ठीक नहीं करते, बल्कि रोगों को ठीक करने की ताकत खुद शरीर में है और प्लांट फूड में है। दुनिया के स्वास्थ्य की चिंता का दावा करने वाले विश्व स्वायस्थ्य संगठन ने कभी भी विश्व के देशों को एनिमल फूड (डेयरी उत्पाद समेत), रिफाइनरी फूड प्रोडक्ट्स, इंडस्ट्रियल फूड, जंक फूड, जहरीले कोल्डन ड्रिंक्सस के सेहत पर पडने वाले कुप्रभावों के प्रति सचेत नहीं किया, जबकि कोरोना को महामारी घोषित करने में अत्यंकत शीघ्रता दिखाई। डब्यूो महएचओ ने बैन हो चुकी कई दवाओं के इस्तेरमाल व उनके खतरों को लेकर भी विकासशील देशों को कभी नहीं रोका। वह फार्मा लॉबी व फास्ट फूड इंडस्ट्री के सामने घुटने टेकता रहा है। चाइना स्टूडी के निष्क र्ष के मुताबिक मानव शरीर के लिए केवल प्रकृति प्रदत्त प्लांट खाद्य सामग्री ही उपयोगी है, किसी भी पके हुए भोजन में शरीर की हीलिंग की क्षमता नहीं होती, इंडस्ट्रियल व रिफाइंड फूड में तो बिल्कुमल नहीं। उससे ऊर्जा मिल सकती है, पर हीलिंग नहीं हो सकती। कच्चा खाने योग्य फल, सब्जियां व कंद-मूल, स्टीम किए हुए अनाज व सब्जियां, फल-सब्जियों के रस आदि में ही शरीर की हीलिंग की ताकत है, इन्हीं में रोग ठीक करने की क्षमता है। यही बात भारत के आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग आदि में प्राचीन काल से वर्णित है। फिर भी भारत सरकार अपनी ताकत का इस्तेमाल कोरोना के खौफ को खत्म करने के लिए नहीं कर रही है। आखिर क्यों? आज भारत के पास अपनी प्राचीन चिकित्साक पद्धत्तियों की ताकत से विश्वर को अवगत कराने का भरपूर मौका है। जैसे भारत ने विश्वर से योग का लोहा मनवाया, ठीक वैसे ही कोरोना को रोकने में आयुर्वेद व प्राकृतिक चिकित्सा की क्षमता से विश्व को परिचित करवा सकता है। इससे भारतीय चिकित्साश पद्धत्तियों का वैश्विक बाजार भी बढता। प्राकृतिक चिकित्सा के मुताबिक मनुष्य अगर प्रतिदिन अपने खान-पान में 80 फीसदी कच्चा-स्टीम तथा केवल 20 फीसदी पके हुए खाद्य सामग्री शामिल करे तो वह जीवन पर्यंत बीमार नहीं पड़ेगा। बीमार पड़ेगा भी तो जल्द ही ठीक हो जाएगा। उन्हें किसी दवा की आवश्यकता नहीं है। इस खान-पान से पीएच 7.5 पर संतुलित रहता है। दरअसल, शरीर के अंदर एंजियोजेनेसिस सिस्टम है जो हीलिंग मैकेनिज्म है। इस खोज के लिए चार बार नोबेल प्राइज मिल चुका है। चाइना स्टडी के मुताबिक कोरोना जैसे वायरस तीन से सात दिन में ठीक हो सकते हैं। बस मरीज को आप लिक्विड डाइट पर रखें, स्वच्छ प्राकृतिक वातावरण में रखें, उनकी इम्यूनिटी को बढ़ा दें। एक दिन में 6 से 7 ग्लास सिट्रिक जूस जैसे मौसमी, संतरा, अनानास आदि के व 6 से 7 ग्लास नारियल पानी दें, दूसरे दिन 3 ग्लास खीरा व टमाटर का जूस भी एड कर दें व तीसरे दिन भी दूसरे दिन वाले डाइट अपनाएं तो कोरोना समेत कोई भी वायरस का संक्रमण ठीक हो जाएगा। लेकिन चीन अपनी इस स्टडी के ज्ञान का इस्तेमान नहीं कर रहा है, क्योंकि इसमें बाजार नहीं है। आख्रिर चीन किसका हित साध रहा है? qqq भारत को खुद पर नहीं भरोसा आज भारत सरकार को अपने सभी आयुर्वेदिक, प्राकृतिक, मेडिकल न्यूट्रिशनिस्ट चिकित्सक का इस्तेमाल करना चाहिए। यदि कारोना के संदिग्धों को इनकी देखरेख में रखा जाय तो किसी न जान जाएगी, न पैनिक क्रिएट होगा और न ही अर्थव्यजवस्था का नुकसान होगा। बल्कि भारत अपने आयुर्वेदिक, प्राकृतिक, मेडिकल न्यूट्रिशनिस्ट चिकित्सकों की मदद से विश्व को राह दिखा सकता है। वह दुनिया को कोरोना मुक्त कर अपने लिए बाजार तैयार कर सकता है। हमें अपने ज्ञान पर भरोसा होना चाहिए और उसका व्याापारिक इस्तेजमाल करना आना चाहिए। ब्रिटिश जर्नल ऑफ मेडिसिन 2016 में ही एंड ऑफ मॉडर्न मेडिसिन की घोषणा कर चुकी है। वैश्विक मेडिसिन शोध संस्थाि कोक्रेन व मेछिकल जर्नल लांसेट की अनेक रिपोर्ट में पुष्ट‍ हो चुका है क‍ि 85 फीसदी लाइफ स्टा इल जनित बीमारियां खान-पान में सुधार लाकर, योग अपना कर ठीक हो सकती हैं। केवल 15 फीसदी रोगों, सर्जरी, ट्रामा आदि के लिए मॉडर्न मेडिकल सिस्टाम बेहद उपयोगी है। इसलिए भारत सरकार को चाहिए कि वह एलोपैथी पर अपनी निर्भरता कम करे और आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्साप को बढावा देकर न केवल अपने स्व,स्य्ृति के बजट को कम कर सकता है, बल्ि न कृषि क्षेत्र में नई क्रांति कर सकता है। भारत को पश्चिमी अंग्रेजी चिकित्साि की गुलामी से मुक्त होने की दिशा में आगे बढना चाहिए। (लेखक शिक्षाविद होने के साथ-साथ देश के मशहूर पत्रकार हैं, लेख में उनके निजी विचार हैं। )
स्त्री पैदा नहीं होती बना दी जाती है
एक और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
तुम आओगे.. तुम कल फिर आओगे
शीश नवाने, फूल चढ़ाने.. दुनिया को यह बताने की बापू का नाम, बापू के आदर्श तुम्हारे देश में जिंदा है। तुम होंगे, कैमरे होंगे, तुम्हारा राज पाट और चकाचौंध होगी। मगर मैं तुम्हारी ओर आंख उठाकर नही देखूंगा। नहीं, मैं नाराज नहीं। बापू हूँ, नाराज भी तो नहीं हो सकता। मैं तो बस तुम्हें नजर की शर्मिंदगी से बचाना चाहता हूँ। मैं नजर उठाऊं .. और तुम झुका लो, यह मुझे भी अच्छा नहीं लगेगा। कैसे नजर मिला पाओगे? एक ही तो जंतर दिया था मैंने। तुम्हें.. तुम्हारी जमात को । उन सबको जो सत्ता की सीढ़ी पर सवार होकर मेरी समाधि पर आएंगे। कहा था न मैंने.. जब अपना स्वाहर्थ तुम पर हावी हो, उस सबसे गरीब और दुर्बल का चेहरा स्मरण करो, जिसे तुमने कभी देखा हो, और खुद से पूछो- जो कदम मैं उठाने जा रहा हूँ, वह क्यास उस गरीब के कोई काम आएगा? क्याह उसे इस कदम से कोई लाभ होगा? क्याग इससे उसे अपने जीवन और नियति पर कोई काबू मिलेगा? क्याि तुम्हारा कदम लाखों भूखों और दरिद्रों को स्वनराज देगा? तुम्हें राजपाट और सर्वस्व सौपने वाली जनता को भय और नफरत में झोंकने के बाद, तुम्हारा दिल क्या उत्तर दे रहा है, मुझे पता है। भीतर चीखते उस जवाब के साथ तुम कैसे मुझसे नजरें मिलाओगे। मगर तुम्हारी मजबूरी है। तुम आओगे... तुम कल फिर आओगे। तुम होगे, कैमरे होंगे, तुम्हारा राज पाट और चकाचौंध होगी। ... मगर मैं तुम्हारी ओर आंख उठाकर नही देखूंगा। (लेखक शिक्षाविद होने के साथ-साथ अंचल के मशहूर समाजसेवी हैं, लेख में उनके निजी विचार हैं। )
एक बार फिर लगेगा केलो की महाआरती का मेगा शो
लगभग एक वर्ष पूर्व मैंने नमामी केलो : महाआरती नहीं महाभियान की जरूरत, शीर्षक से लेख लिखा था। आज फिर लिखने का मन हुआ क्योंकि एक वर्ष पश्चात भी केलो जस की तस ही रही। इस बार आपको परिवर्तन 15 जनवरी 2020 को नजर आएगा। वह यह कि पुन:महाआरती अभियान संपन्न होगा। बड़े-बड़े दानदाता, कॉरपोरेट कंपनियां, पर्यावरणविद और शहर की नामचीन हस्तियां पूरी श्रद्धा और भक्ति से इस अभियान को एकजुट होगीं। स्थानीय चैनल इस कार्यक्रम की स्टोरी कवर करेंगे और आगामी कुछ दिनों के बाद केलो मईया को फिर से भुला देगें। सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से होगा और रायगढ़वासी एक बार फिर छले जाएंगे। दरअसल, हम बेवकूफ ही नहीं बेशर्म हो भी हो चुके हैं आधुनिक संस्कारों ने हम से हमारी अस्मिता छीन ली। नतीजतन, नदियां जो हमारे धर्मों में पूजनीय थीं अब पूरी तरह औद्योगिकीकरण के चलते बिकाऊ बन चुकी हैं। उद्योग से लेकर उसे अब बोतलों और पाऊचों में बेचा जा रहा है। qqq महाआरती, नदी के नाम पर सालाना जलसा केलो नदी, महानदी की सहायक नदी है उसे रायगढ़वासी महानदी के समकक्ष मानते हैं और महानदी को हम छत्तीसगढ़िया गंगा के समतुल्य समझते हैं। केलो के प्रति यह हमारी अब तक की आस्था रही है पर विगत दिनों संपन्न हुए निगम चुनाव के दौरान हर पार्टी के उम्मीदवारों ने वार्डवासियों को तरह-तरह के सब्जबाग दिखाए लेकिन दुख के साथ कहना पड़ता है कि शहर की जीवन रेखा कही जाने वाली केलो के लिए किसी ने भी एक शब्द कहनी जरूरी नहीं समझा। इसी चुनाव के दौरान यह पता चला कि निगम के विगत कार्यकाल में 1200 करोड़ का बजट था यदि यह सच है तो औसतन प्रति वार्ड 25 करोड़ रुपये की रकम आती है। यदि निगम प्रशासन और शहर सरकार सभी मिलकर 50 करोड़ की राशि भी केलो के जीर्णोद्धार के लिए एकमत होते तो शायद धीरे-धीरे मौत के आगोश में समाती केलो को जीवन दान मिलने की एक आस नजर आ सकती थी लेकिन आम जनता न इसे समझी और न ही इसे समझने का प्रयास करेगी। वह तो महाआरती का ड्रामा, तामझाम, नयनाभियान लाईटिंग, पंडाल, जसगीत, दिव्य आरती, सैकड़ों थाल, महाभोग में ही मस्त हो जाती है। महाआरती की भव्यता की सप्ताहभर चर्चा कर खुश हो जाएगी, आरती से केलो को प्रदूषण मुक्त करने के सपने संजो लेगी। हमें दशकों से घिसे-पिटे डेली सोप (सीरियल) देखने की आदत है। यह तो साल में एक बार होने वाला मेगा-शो है। qqq हर कोई करता है केलो का दोहन केलो को प्रदूषित करने में सबसे बड़ी भूमिका उन उद्योगों की ही रही है जिनके लिए नदी का अर्थ महज पानी का स्त्रोत है। जिसका दोहन वे अपने उद्योगों को चलाने के लिए कर सकें। इनके लिए नदी का और कोई अर्थ नहीं है। इन उद्योगों का अपशिष्ट पदार्थ और दूषित जल की निकासी केलो में होती आ रही है। इसे रोकने हेतु समय-समय पर कई ढपोल और कोरी योजनाएं भी बनाई गईं। जिन पर अमल की बात तो छोड़िये चर्चा भी नहीं होती क्योंकि इन सब के पीछे शासन-प्रशासन की मौन सहमति और जनता की उदासीनता है। जिन किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए केलो बांध का निर्माण हुआ था उस बांध का कितना पानी किसानों तक पहुंचा यह एक विचारणीय प्रश्न है। महाबेशर्म नगर निगम और जिला प्रशासन जिसे केवल अपने राजस्व से ही मतलब है वो केलो के लिए आज तक गंभीर नहीं है। निगम ने पानी सप्लाई के लिए पानी तो ले लिया पर नदी की सफाई के लिए सदैव पीछे हट जाती है। केलो के पानी से अपनी झोली भरने वाला जिला प्रशासन आज पर्यंत केलो को बचाने, संवर्धन के लिए ठोस कदम नहीं उठा पाया है। जहां तक मुझे पता है कि जिला प्रशासन के लिए केलो को बचाना या फिर उसकी साफ-सफाई कभी किसी ऐजेंडे में नहीं रहा है। महाआरती के दिन तमाम बड़े लोग, उद्योगों के प्रतिनिधि और जनता जनार्दन आएगी। जो तामझाम में बीच सेल्फी और अखबारी सुर्खियां बटोर कर अपना इतिश्री कर लेगीं। क्या इन बड़े लोगों ने कभी केलो के लिए कुछ किया या करेंगे ? एक आम जन केलो को लेकर कितना संवेदनशील है या गंदा नहीं करने को लेकर कितना दृढ़ संकल्पित है यह तो 192 किलोमीटर की केलो नदी के कहीं के भी 100 मीटर का हिस्सा ही बता देता है। कई जलचर प्राणियों की प्रजातियां विलुप्त हो गईं और किसी को हवा तक नहीं लगी। केलो का पानी इतना संक्रमित है कि अब यह सीधे पीने लायक नहीं बचा। इसके जलचर खाने से आपकी जान भी जा सकती है। qqq केलो को आरती नहीं उपचार चाहिए अंत में महाआरती धार्मिक आस्था की अभिव्यक्ति का माध्यम हो सकता है उसे ठेस पहुंचाने का कोई मकसद नहीं है लेकिन इस तरह एकदिवसीय आरती का वैभवपूर्ण प्रदर्शन कर शेष दिनों के लिए उसे विस्मृत कर दिया जाना यह उचित नहीं। सच्चा धर्म है यह कि हम केलो नदी की पवित्रता और निर्मलता को बनाए रखने के लिए अपने स्तर पर प्रयास करें। यह प्रयास भले ही छोटे हों पर इससे फर्क पड़ेगा और यही केलो मईया की सार्थक आरती होगी क्योंकि हमारी केलो बहुत बीमार है इसे आरती नहीं उपचार चाहिए। qqq (लेखिका वरिष्ठ शिक्षाविद और समाजसेवी हैं, लेख में उनके निजी विचार हैं)
तस्वीरों में देखें रायगढ़ में जनता कर्फ्यू का असर
22 मार्च यानी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर जिले में भी जनता कर्फ्यू का असर देखने को मिला। दोपहर तक पूरा शहर स्वस्फूर्त बंद था। हर मुख्य मार्ग और बाजार बंद मिले। गली-कूचे तक कोई व्यक्ति बाहर नहीं निकला।
हरि बोल, जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ निकली रथयात्रा, देखें गैलरी
रायगढ़ में दो दिनों की रथयात्रा आयोजित होती रही है। इसी क्रम में आज रथ द्वितिया के दिन शहर के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भगवान श्री को विधिविधान पूर्वक पूजा अर्चना पश्चात मंदिर के गर्भगृह तथा मंदिर परिसर से जय जगन्नाथ के जयघोष और घंट शंख ध्वनि के बीच ससम्मान बाहर निकाला गया। राजापारा स्थित प्रांगढ़ में मेले सा माहौल था और हजारो की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण भगवान श्री के दर्शन करने के लिए पहुंचे हुए थे। इससे पहले कल भगवान जगन्नाथ की विधि विधान से पूजा की गई जिसे फोटोग्राफर वेदव्यास गुप्ता ने अपने कैमरे में कैद किया।
इप्टा रायगढ़ के 25वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की झलकियां
27 से 31 जनवरी तक पॉलिटेक्निक ऑडिटोरिम में इप्टा रायगढ़ द्वारा 25वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जिसमें चार नाटक एवं दो फीचर फिल्में दिखाई गईं। समारोह की शुरुआत रायपुर के मशहूर रंगकर्मी मिर्जा मसूद को 10वां शरदचंद्र वैरागकर अवार्ड देकर की गई। यह कूवत सिर्फ रंगमंच रखता है जो वर्तमान सत्ता के मठाधीशों पर अजब मदारी गजब तमाशा नाटक के माध्यम से सीधे कटाक्ष कर सकता है। जहां एक मदारी को राजा बना दिया जाता है, शब्दों के अस्तित्व को खत्म कर दिया जाता है। बंदर राष्ट्रीय पशु बन जाता है। गांधी चौक नाटक में गांधीजी की प्रतिमा स्वयं यह चलकर वहां से हट जाती है कि जब रक्षक की भक्षक बन गए तो कोई क्या कर सकता है। नोटबंदी और जीएसटी पर गांव वाले सीधे प्रहार करते हैं। सुबह होने वाली है की लेखी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध होने के बाद लोगों को जागरूक करने को किताब लिखती और किताब को ही फांसी हो जाती है। बोल की लब आजाद हैं तेरे लोगों को दर्शकदीर्घा में झकघोर के रख देती है। तुरूप और भूलन जैसी फिल्में लोगों के मनोरंजन के अलावा दमदार संदेश भी देती है। तो देखें इस शानदार नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की कुछ झलकियां
70 वें गणतंत्र दिवस के फुल ड्रेस रिहर्सल की मनमोहक तस्वीरें
जिले में 70वां गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। गणतंत्र दिवस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल दो दिन पहले की जाती है। महीने भर से चल रही तैयारी को 25 जनवरी के दिन आराम दिया जाता है। इस गणतंत्र दिवस समारोह के रंग को देखिए इन तस्वारों से...
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