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Raigarh Express, news of raigarh chhattisgarh

Monday, June 01, 2020
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कोरोना फाइटर्स : 45 डॉक्टरों को दो माह से नहीं मिली तनख्वाह
कोरोना से जंग में बीते दो महीनों से ज़िंदगी दांव पर लगा कर रहे दिन रात काम
हमारे बच्चे
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नौतपा में तपता रायगढ़
मौसम
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कोरोना की विभीषिका से जूझते कर्मवीरों को सलाम तो हम कर ही सकते हैं
ओपिनियन
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खाड़ी में एमफन तूफान की हलचल, रायगढ़ में भी दिखेगा असर
मौसम
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पूर्व महापौर चौहथा के बेटों ने गरीब का घर तोड़वाया, प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल
राजनीति
सिंधी कॉलोनी : अवैध शराब से लेकर पान मसाला सब मौजूद, लॉकडाउन का यहां नहीं होता पालन
सिंधी कॉलोनी में दो जगह पकड़ाया जुआ
लॉकडाउन में आवागमन पास के लिए लोग परेशान, जिला प्रशासन की कलई खुली
पूरा दिन लग रहा एक पास बनवाने में, न सेनेटाइजर की व्यवस्था और न ही फिजिकल डिस्टेन्स का पालन
रायगढ़ जिले में व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के संचालन व अन्य गतिविधियों के लिए दिशा-निर्देश जारी
कलेक्टर यशवंत कुमार ने रायगढ़ जिले को कोरोना वायरस के संक्रमण व प्रसार के रोकथाम के संदर्भ मंर ग्रीन जोन में वर्गीकृत किए जाने के बाद जिले में व्यवसायिक प्रतिष्ठानों व अन्य गतिविधियों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए है। जिला रायगढ़ में अनुमति प्राप्त दुकानों का संचालन सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक सोशल डिस्टेंसिंग, फिजिकल डिस्टेसिंग का पालन करते हुये एवं 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति (मॉस्क पहनने के निर्देश) के साथ दुकान संचालित होंगी। परन्तु सब्जी दुकानों का संचालन प्रात: 7 बजे से प्रात: 10 बजे तक सोशल डिस्टेंसिंग/फिजिकल डिस्टेसिंग का पालन करते हुये 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति (मॉस्क पहनने के निर्देश) के साथ दुकान संचालित होंगी। परन्तु आगामी आदेश पर्यन्त निम्न गतिविधियां जिले में प्रतिबंधित रहेगीं। जिले में सार्वजनिक परिवहन यान, यात्री बस, सिटी बस, टैक्सी, आटो, ई-रिक्शा की सेवाएं। व्यक्तियों का अंतर्राज्यीय परिवहन, छुट-चिकित्सकीय कारण से, गृह मंत्रालय से अनुमति प्राप्त गतिविधियॉं। सभी विद्यालय, सभी महाविद्यालय, शैक्षणिक, ट्रेनिंग, कोचिंग संस्थान इत्यादि बंद रहेंगे परन्तु ऑनलाईन, डिस्टेंस लर्निंग की अनुमति होगी। सभी हास्पिटिलिटी सेवाएं बंद रहेंगी, अपवाद-स्वास्थ्य, पुलिस, शासकीय सेवक,स्वास्थ्यकर्मी श्रमिक, पर्यटक सहित फंसे हुये लोग एवं क्वारेंटाईन सुविधा में उपयोग में लाये जाने वालो को छोड़कर। सभी सिनेमा हॉल, शॉपिंग मॉल, जिम, खेल परिसर (स्पोटर्स काम्पलेक्स), स्वीमिंग पुल, मनोरंजन उद्यान, थियेटर, बॉर तथा ऑडिटोरियम, सभागृह और इस प्रकार के स्थान, साप्ताहिक, हॉट बाजार, मेला। पान ठेले पूर्णत: प्रतिबंध रहेंगे तथा पान, गुटखा, तम्बाकू, सिगरेट, बीड़ी इत्यादि की बिक्री, उपभोग,सेवन प्रतिबंधित रहेगा। सभी नाई, सेलून, ब्यूटी पार्लर, स्पॉ आदि सेवाएं भी बंद रहेगी। रेस्त्रां, मिठाई की दुकान, होटल, चाय की दुकान, नास्ता दुकान, कैफे, चाट, गुपचुप ठेला, जूस एवं आइस्क्रीम के ठेले एवं फॉस्ट फुड ठेला का संचालन प्रतिबंधित रहेगी। सभी सामाजिक,राजनैतिक,खेलकूद, मनोरंजन,शैक्षणिक,सांस्कृतिक,धार्मिक गतिविधियां एवं अन्य सामाजिक आयोजन। सभी धार्मिक स्थान, पूजा के स्थान आम जन के लिए बंद रहेगे। धार्मिक सभाएं कड़ाई से प्रतिबंधित रहेगी। व्यक्तियों की सुरक्षा और उनकी सुरक्षा के उपाय के तहत-सभी गैर आवश्यक गतिविधियों के लिए व्यक्तिगत आवाजाही सायं 7 बजे से प्रात: 7 बजे तक पूर्णत: प्रतिबधित रहेगी। आवश्यक आवश्यकताओं एवं स्वास्थ्य उद्देश्यों को छोड़कर सभी क्षेत्रों में 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति, सह-रूग्णता वाले व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं और 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चे घर पर ही रहेंगे। ओपीडी और मेडिकल क्लीनिक खुले रहेंगे। सार्वजनिक स्थलों हेतु कोरोना वायरस से बचाव एवं सुरक्षा के निर्देश/शर्ते-दुकान में एक समय में पांच से ज्यादा व्यक्तियों को इकट्ठा न होने दिया जाये। दुकान को प्रतिदिन खोलने के पूर्व सेनेटाईज किया जाये। दुकान के बाहर साबुन एवं स्वच्छ पानी अथवा सेनेटाईजर की व्यवस्था की जाये तथा प्रत्येक क्रेता हाथ धोने के उपरांत ही दुकान में प्रवेश करें। दुकान परिसर एवं सार्वजनिक क्षेत्र में थूकना पूर्णतया प्रतिबंधित होगा। दुकान परिसर एवं सार्वजनिक क्षेत्र में मदिरा, पान, गुटका, तम्बाखु इत्यादि का सेवन पूर्णतया प्रतिबंधित होगा। दुकान परिसर में 01-01 मीटर की दूरी पर दुकान मालिक द्वारा व्यक्तियों के फिजिकल डिस्टेंसिंग पालन कराने हेतु निशान लगाया जाये। विवाह संबंधी कार्यक्रम में सोशल डिस्टेसिंग का पालन किया जाना अनिवार्य होगा तथा इसमें सम्मिलित व्यक्तियों की अधिकतम संख्या 05 (पांच) होगी। इसकी अनुमति संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी से प्राप्त की जा सकेगी। अंतिम संस्कार/अन्त्येष्ठि जैसे आयोजनों में सोशल डिस्टेसिंग का पालन किया जाना अनिवार्य होगा तथा इसमें सम्मिलित व्यक्तियों की अधिकतम संख्या 20 (बीस) होगी। इसकी अनुमति संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी से प्राप्त की जा सकेगी। दाण्डिक प्रावधान:- उपरोक्त लॉकडाउन आदेशों एवं दिशा-निर्देशों के उल्लंघन करते हुये पाये जाने पर संबंधित व्यक्ति के विरूद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 से 60, भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 188 तथा अन्य सुसंगत विधिक प्रावधानों जैसे लागू हो, के अन्तर्गत कार्यवाही के भागी होंगे।
यूरिन पाईप टांग बीमार पत्नी से मिलने साइकिल द्वारा यूपी से रायगढ़ आए अखिलेश
ये हैं अखिलेश बाजपेयी जिनके 3 बच्चे हैं और रायगढ़ नगर के मध्य हंडी चौक में रहते हैं। 90 के दशक में एसटीडी-पीसीओ की इनकी दुकान फेमस थी। एसटीडी-पीसीओ का दौर खत्म हो जाने के बाद कोई व्यापार स्थापित करने में असमर्थ अखिलेश छोटी-मोटी नौकरी और श्रमिक बनकर अपना और परिवार का गुजर बसर कर रहे हैं। कुछ साल पहले यूरिनरी सिस्टम में तकलीफ होने के बाद जांच करवाने पे पता चला की प्रोस्ट्रेट ग्लैंड खराब है तथा सूजन होने पर समय-समय पर यूरिन पाइप लगवानी पड़ती है। गरीबी इतनी की दवाओं का खर्च तो दूर घर के राशन तक का खर्च मुश्किल से जुगाड़ हो रहा था ऊपर से सवर्ण होने के कारण सरकारी लाभों से भी वंचित ये शक्स लॉकडॉउन के कुछ महीने पहले ही उत्तरप्रदेश के ओबरा में किसी निजी संस्थान में नौकरी करने गए थे। लॉकडॉउन हो जाने के कारण तनख्वा रुक गई और खर्च चलाना मुश्किल हो गया और उसी वक़्त तबीयत भी खराब हो गई तो सारे पैसे उसी में खर्च हो गए। अकेले यूरिन पाइप लगाए रह रहा था तभी रक्त चाप और ह्दय की समस्याओं से घिरी अखिलेश की पत्नी की तबीयत खराब हो गई। जिसकी सूचना 26 अप्रैल को उन्हें मिली। फिर बीमारी की हालत में ही वे सायकल से 380 किलोमीटर चल कर अपने निवास शहर रायगढ़ आना तय किया। 30 अप्रैल को सारे नगर में पता चला कि रायगढ़ आते समय रास्ते में प्रतापपुर में वे रुके हैं। उन्होंने 2 दिन से खाना नहीं खाया है और लगातार साइकल चला कर रायगढ़ जा रहे हैं और जेब में यूरिन पाइप ले कर चल रहे है। हालांकि प्रतापपुर में स्थानीय मदद के बाद वह वहां से रवाना हुए और 1 मई की रात 10 बजे उर्दना बेरियर के पास पहुंचे जहां से उन्हें मातृ शिशु अस्पताल प्रारंभिक निरीक्षण के बाद जलसा में क्वारंटाइन किया गया। qqq अर्श से फर्श तक हंडी चौक के युवा बताते हैं कि 1 करोड़ से अधिक की संपत्ति के घर में रहने के बावजूद उनके पास स्वयं का कुछ नहीं है और बड़ी बहनों के दबाव में उन्हें परिवार चलाने तक का खर्च नहीं मिलता है। जिसके कारण उसे उत्तर प्रदेश के ओबरा में एक फर्म में काम करना पड़ रहा है। गरीबी और भुखमरी घर-मकान और नाम देख कर नहीं आती न मोहल्ला/सोसाइटी देख कर पैर पसारती है।
पूर्व महापौर चौहथा के बेटों ने गरीब का घर तोड़वाया, प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल
तहसीलदार की कार्रवाई या रसूखदारों का दबाव !
निगम में ठेकेदारी का खेल, 12 कार्य में 6 कामों का ठेका शौर्य कंस्ट्रक्शन को
नेता के चहेते ठेकेदार को मिल रहा काम, अन्य ठेकेदार ताक रहे मुंह, निर्माण कार्यो की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिन्ह
सांसद की प्रेसवार्ता में अपनी पोल खुलते देख स्थानीय भाजपा नेताओं ने खोया आपा
गोमती साय से पूछे गए सवालों का जवाब भाजपा के स्थानीय नेता देने लगे, प्रेस पर भी दागे सवाल
रायगढ़ में अवैध शराब बिकने की खबर मिली तो खुद जांच के लिए पहुंचा : आबकारी मंत्री लखमा
खबर का असर-लॉकडाउन तोड़ने के बाद विवादों में घिरने के बाद आबकारी मंत्री ने आबकारी विभाग पर फोड़ा ठिकरा
नौतपा में तपता रायगढ़
45 डिग्री के आसपास रहेगा आने वाले कुछ दिन का तापमान
खाड़ी में एमफन तूफान की हलचल, रायगढ़ में भी दिखेगा असर
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में चक्रवाती तूफान (Cyclone Amphan)आने की आशंका जताई है. इसके चलते पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी दी है. इस तूफान के कारण ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मेघालय समेत 8 राज्यों में अलर्ट है. इस तूफान को एमफन (Cyclone Amphan,) नाम दिया गया है. बंगाल की खाड़ी के दक्षिण पूर्व में सुबह 5 बजकर 30 मिनट पर कम दबाव का एक क्षेत्र देखा गया. ये अगले 24 घंटों में तूफान का रूप ले सकता है। इसका असर रायगढ़ में भी दिखेगा। क्या कहा मौसम विभाग ने मौसम विभाग के मुताबिक संभावित कम दबाव का क्षेत्र उत्तर-उत्तर पूर्व दिशा में घूमते हुए अपने रास्ते पर लौटेगा और बंगाल की खाड़ी की ओर मुड़ेगा। कम दबाव वाले क्षेत्र की गति अभी पता नहीं चल पाई है और संभावित तूफान तट पर कहां टकराएगा इसकी जानकारी मौसम विभाग की ओर से दी जाएगी. तूफान उत्तर ओडिशा, दक्षिणी बंगाल या बांग्लादेश से भी टकरा सकता है. हालांकि मौसम विभाग ने अभी कोई सटीक जानकारी नहीं दी है, लेकिन विभाग ने ये स्पष्ट किया है कि कम दबाव का क्षेत्र और बढ़ जाएगा और बाद में ये तूफान का रूप ले लेगा। ओडिशा में अलर्ट ओडिशा में तूफान के संभावित खतरे से निपटने की तैयारियों के तहत शुक्रवार को 12 तटीय जिलों में चेतावनी जारी की गई. साथ ही कलेक्टरों से लोगों के लिए वैकल्पिक आश्रय गृहों की व्यवस्था करने को कहा गया है।ओडिशा के राहत आयुक्त पी के जेना ने बताया कि उन्होंने मुख्य सचिव असित त्रिपाठी के साथ तूफान की स्थिति और राज्य पर पड़ने वाले उसके प्रभाव की समीक्षा की। qqq ऐसा रहेगा रायगढ़ में असर जैसा कि आप देख सकते हैं कि तूफान के साइक्लोनिक सर्कुलेशन का प्रभाव कल से ही रायगढ़ (चित्र के ऊपरी बाएं कोने में लाल रंग में) में दिख रहा और लगातार बादल छाए हुए हैं तूफान के आगे बढ़ने से रायगढ़ में बादल छाए रहने के स्थानों में हल्की बारिश और हवाएं चलने की आशा है। आगे आने वाले 2-4 दिन तापमान में बढ़ोत्तरी नही होने का अनुमान है।
अजब मौसम की गजब कहानी
मई माह का दूसरा हफ्ता चल रहा है, कैलेंडर से दिन और वार लॉक डाउन के बाद से गायब हो चले हैं, अगर मौसम देखें तो आप इसको आप मई से किसी भी तरह रिलेट नही कर सकते । लगभग रोज़ बादल, बढ़ ना पाता तापमान, ओले -आंधी की खबरें, आपको किसी और महीने में ले जा रही हैं । भारतीय उपमहाद्वीप में मानसून एक्टिव होने में बस अब लगभग 15 रोज ही बाकी है और इस दौरान गर्मी बढ़ती है और बेचैन करने वाली आर्द्रता (उमस)भी लोगों और पशुओं को परेशान करती है। गर्मी को आप अपनी त्वचा से महसूस करते हैं और इसका अंदाज़ा लगा सकते हैं । बाहर का तापमान शरीर के सामान्य तापमान (37 डिग्री सेल्सियस/ 98 फेरेनहाइट) से उपर जाने से गर्मी का एहसास ज्यादा होता है और शरीर अपनी ऊष्मा पसीने के माध्यम से छोड़ता है । और आर्द्रता को आप पसीने के ना सूख पाने, ठंडे पानी से भरे स्टील के ग्लास के बाहर की पानी की बूंदों और एसी की इंडोर यूनिट से निकलने वाले पानी की दर (बहाव) से ऑब्जर्व कर सकते हैं । हल्की बारिश के आसार मौसम विभाग के वैज्ञानिक एच पी चंद्रा के अनुसार अभी प्रदेश को प्रभावित करने वाले दो मौसमी तंत्र स्थित है एक उत्तर राजस्थान से उत्तर छत्तीसगढ़ तक द्रोणी का 0.9 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित है दूसरा द्रोणिका दक्षिण विदर्भ से दक्षिण तमिलनाडु तक 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक स्थित है। प्रदेश में बहुत अधिक मात्रा में बंगाल की खाड़ी से नमी आ रही है जिसके कारण प्रदेश के सरगुजा संभाग में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है प्रदेश के मध्य पश्चिमी भाग में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। बस्तर संभाग में एक-दो स्थानों पर हल्की वर्षा होने अथवा गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। प्रदेश के एक-दो स्थानों पर मेघ गर्जन के साथ तेज हवाएं चलने तथा आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है । अधिकतम तापमान में प्रदेश में विशेष परिवर्तन होने की संभावना नहीं है। अधिकतम तापमान प्रदेश में सामान्य से नीचे ही रहने की संभावना है।
तापमान नहीं बढ़ेगा, फिर हो सकती है बारिश
मौसम अनियमित है और सारे पूर्वानुमानों को झुठला रहा है। साल की शुरुआत में फरवरी-मार्च में अप्रैल से ही भीषण गर्मी की चेतावनी सुनाई देने लगी थी लेकिन मौसम अप्रैल माह में भी तापमान को बढ़ने नही दे रहा है। बीच-बीच मे बारिश हो रही है। आज दोपहर जशपुर में तेज आंधी के साथ बारिश की खबर आई है और हां अप्रैल माह में ओले बरसने को आश्चर्यजनक ही कहेंगे। कुल मिलाकर आने वाले 2-3 दिनों में हवा-बारिश की संभावना के कारण मौसम अच्छा रहेगा और शायद तेज़ गर्मी अप्रैल अंत या मई की शुरुआत में ही देखने को मिलेगी। मौसम विभाग रायपुर के वैज्ञानिक डॉक्टर एचपी चंद्रा से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक चक्रीय चक्रवाती घेरा पश्चिम विदर्भ और उसके आसपास के ऊपर 0.9 किलोमीटर पर स्थित है यहां से एक द्रोणिका मराठवाड़ा अंदरूनी कर्नाटक और तमिलनाडु होते हुए कोमोरिन क्षेत्र तक स्थित है। कल दिनांक 24 अप्रैल को कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा होने की अथवा गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। एक दो स्थानों पर गरज चमक के साथ अकाशी बिजली ओला और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इस तरह अधिकतम तापमान के आने वाले कुछ दिनों में बढ़ने की संभावना कम ही है। तापमान 23 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा।
कोरोना फाइटर्स : 45 डॉक्टरों को दो माह से नहीं मिली तनख्वाह
कोरोना से जंग में बीते दो महीनों से ज़िंदगी दांव पर लगा कर रहे दिन रात काम
बेजुबानों की भूख मिटाती शहर की चार युवतियां
बिना किसी के मदद के यथासंभव शहर के जानवरों की कर रही सेवा
रायगढ़ चैंप्स लगातार तीसरी बार बना कार्डिनल कप विजेता
रोमांचक मैच में ब्वॉयज क्लब को हराया, राजा गोरख बने मैन ऑफ द सिरीज
कार्डिनल कप का तीसरा सीजन कल से, 32 टीमों के बीच होगा धमासान
संभाग का सबसे बड़ा राज्य स्तरीय फ्लड लाइट टेनिस बॉल क्रिकेट टूर्नामेंट
युद्ध ख्याली हैं । मौतें असली और जिंदगियों की बर्बादी भी
वे लड़ रहे हैं, समय काल से परे, एक ख्याली युद्ध।
एखर का भरोसा, चोला माटी के हे राम...
रंगकर्मी पूनम तिवारी को दिया गया 11वां शरदचंद्र वैरागकर स्मृति रंगकर्मी सम्मान
विश्व की महान शिक्षक मदर टेरेसा को रायगढ़ से था खास लगाव
शिक्षक दिवस विशेष : संत मदर टेरेसा की पुण्यतिथि भी आज, नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद रायगढ़ ने किया था उनका भव्य स्वागत
विवादों से घिरा चक्रधर समारोह, आयोजन और स्थल को लेकर जिला प्रशासन का अड़ियल रवैया
11 दिन बाद चक्रधर समारोह होना है। आयोजन स्थल की ऊहापोह को खत्म करते हुए कलेक्टर यशवंत कुमार ने रामलीला मैदान में कल टेंट लगाने का पूजन भी कर दिया। विरोध करने लोग आए पर कलेक्टर ने दो टूक कहा कि 14 दिन के लिए अंदर कर दूंगा। फिर भी कुछ लोग मैदान में आयोजन का विरोध कर रहे हैं। रामलीला मैदान बचाओ समिति और भाजपा युवा मोर्चा ने गुरुवार रामलीला मैदान में चक्रधर समारोह के आयोजन के विरोध में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। गुरू शिष्य परंपरा के अनुसार कलाकारों के चयन करने पर नोडल अधिकारी ने रायगढ़ के कुछ नाम गिनाए और कुछ को सीधे रायपुर से रेफर होना बताया। लेकिन इस बार कितनी पारदर्शिता बरती जाएगी वो पेमेंट के वक्त पता चलेगा। विदित हो कि कुछ खास लोगों को बारंबार चक्रधर समारोह में बुलाने और मोटी रकम देने से जिला प्रशासन की किरकिरी कई दफे हुई है। इस भ्रष्टाचार में जिला प्रशासन, चयन समिति और समन्वय समिति की मिलीभगत थी। जिसने चक्रधर समारोह जैसे बड़े आयोजन की साख पर बट्टा लगाया। प्रशासन से उम्मीद थी कि इस बार भी चयन समिति में पारदर्शिता बरती जाएगी लेकिन ऐसा हो ना सका। भले ही जिला प्रशासन कितना भी राग आलापे इस बार भी चयन समिति में कुछ ऐसे लोग शामिल थे जिनका कला और संस्कृति से कोई सरोकार नहीं है। qqq उप संचालक जनसंपर्क ने कलेक्टर की बात काटी चक्रधर समारोह के संदर्भ में कलेक्टर ने गुरुवार शाम 4 बजे कलेक्टोरेट सभाकक्ष में पत्रकार वार्ता रखी। रायगढ़ एक्सप्रेस के प्रतिनिधि ने कलेक्टर से यह सवाल किया कि चक्रधर समारोह कुछ लोगों के लिए 9 दिन का मौज बन जाता है और जिला प्रशासन उनका पूरा सहयोग करता है, कलेक्टर जवाब दे ही रहे थे कि खुद को फंसता हुआ देख उप संचालक जनसंपर्क उषा किरण बड़ाईक ने कलेक्टर की बात काट दी और सारे सवालों को वहीं खत्म कर दिया। यह सब कलेक्टर के सामने हो रहा था और वो मौन थे। जनसंपर्क के सूत्रों की मानें तो उपसंचालक की भूमिका भी आयोजन को लेकर संदिग्ध रही है। इस कारण खुद को फंसता हुआ देख उन्होंने कलेक्टर का ध्यान भटकाया। विदित हो कि करीब 3 साल से अधिक वर्ष से पदस्थ उषा किरण का अक्सर किसी न किसी से विवाद होता रहा है। बात चाहे साप्ताहिक समाचार पत्रों को विज्ञापन देने की हो या आम चुनाव के दौरान उन्हें पास जारी करने की हो। कुछ खास लोगों से हमेशा घिरी रहने वाली उपसंचालक ने हाल ही में एसडीएम रायगढ़ और डिप्टी कलेक्टर से संबंधित विवादित खबर को भी वाट्स-अप ग्रुप में शेयर किया था। जिसे आधिकारिक पुष्टि माना जाने लगा। विवाद बढ़ने पर सफाई दी कि उनके बच्चे ने गलती से खबर डाल दिया। इस मामले में उन पर कार्रवाई अब तक नहीं हुई है। मजे की बात यह है कि इनका सालभर पहले रायपुर ट्रांसफर हो गया और अभी तक अटैच में जिला जनसंपर्क विभाग में हैं। कौन है नटवर सिंघानिया 9 दिन के चक्रधर समारोह में आपको नटवर सिंघानिया हमेशा एक बड़े रोल में दिखेंगे। अब ये किस हैसियत से आते हैं इसे जिला प्रशासन जाने क्योंकि रायगढ़ की जनता जानती है कि वो कौन है। चक्रधर समारोह को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बताने वाले कलेक्टर यशवंत कुमार भी नटवर सिंघानिया की पहेली नहीं बूझ पाए। रायगढ़ एक्सप्रेस के सवाल पर उन्होंने बताया कि वो राजपरिवार के प्रतिनिधि हैं। इसी हैसियत से वो चयन समिति में है। जबकि चक्रधर समारोह पूर्णत: शासकीय आयोजन है। जिसमें राजपरिवार के शामिल होने की बात ही नहीं है। देश लोकतांत्रिक गणराज्य है ऐसे में राजपरिवार और उसके प्रतिनिधि को जिला प्रशासन कैसे इतनी तवज्जो दे सकता है। qqq अपर कलेक्टर को लगाई फटकार पहले तो राजपरिवार को चक्रधर समारोह में शामिल करना जिला प्रशासन के लिए विवाद का कारण बना हुआ है। कई लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं। उसके बाद राजपरिवार के नाम पर राजनीतिक शरण पाए हुए लोगों को चयन समिति में शामिल करना उसके बाद राजपरिवार के प्रतिनिधि को शामिल करना जिला प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। बल्कि रायगढ़ के राजा विशाल बहादुर सिंह को चयन समिति से लेकर हर समिति से दूर रखा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात को लेकर काफी तू-तू मैं-मैं हुई। कलेक्टर राजा विशाल बहादुर को समन्वय समिति में शामिल करने की बात कर रहे थे लेकिन समन्वय समिति की बैठक नहीं हुई थी। इस पर कलेक्टर ने अपर कलेक्टर सुखनाथ अहिरवार को फटकार लगाई। राजा विशाल बहादुर ने रायगढ़ एक्सप्रेस को बताया कि वो 10 साल से रायगढ़ के राजा हैं लेकिन आज तक किसी भी चक्रधर समारोह में उन्हें शामिल नहीं किया गया है। राजा और राजपरिवार के नाम पर जिला प्रशासन हमेशा से पक्षपात करती है। राजनीतिक दल से जुड़े परिवार के कुछ सदस्यों पर जिला प्रशासन हमेशा मेहरबान रहती है जबकि आधिकारिक रूप से राजा मैं हूं और मेरे से कभी कोई संपर्क नहीं करता। qqq सांस्कृतिक भवन एक छलावा राज्य के मुख्यमंत्री हमेशा से कहते आए हैं कि जब सांस्कृतिक भवन बनेगा तब चक्रधर समारोह वहीं होगा। अब जब सांस्कृतिक भवन बन गया है तो समारोह के आयोजन के लिए तरह-तरह की बातें हो रही हैं। जगह कम है लोग कैसे बैठेंगे। क्या ये सवाल सांस्कृतिक भवन बनाने से पहले जिला प्रशासन के जेहन में नहीं आया था। अगर जानकर इसे छोटा बनाया गया है तो फिर यहां चक्रधर समारोह के आयोजन की बात करना भी बेमानी है। रामलीला मैदान में चक्रधर समारोह नहीं होगा इसी चुनावी वायदे से विधायक प्रकाश चुनावी मैदान में उतरे और जीते लेकिन आयोजन वहीं हो रहा है। विधायक झूठे साबित हुए। लोग हमेशा से समारोह के टेंट पर सवाल उठाते रहे हैं। लोगों का आरोप है कि एक टेंट हाउस विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन यह पूरा षड़यंत्र रचता है। ऐसे में सांस्कृतिक भवन रायगढ़ के लोगों के लिए छलावा है।
कोरोना की विभीषिका से जूझते कर्मवीरों को सलाम तो हम कर ही सकते हैं
जो बसे हैं वे उजड़ते हैं प्रकृति के जड़ नियम से पर किसी उजड़े हुए को फिर बसाना कब मना है -(हरिबंशराय बच्चन)
आत्मनुशासन व धैर्य ही हमारी सबसे बड़ी ताकत
वैश्विक महामारी कोरोना Covid- 19 के अप्रत्याशित हमले ने एकबारगी पूरे मानव जगत को विषम परिस्थिति में ला खड़ा किया है। भावनात्मक स्तर पर आपस में अधिक नजदीकी से गूंथा हुआ भारतीय समाज लॉकडाउन के बाद एक साथ कई मोर्चों से जूझने पर विवश है। सभी गतिविधियां ठप्प हैं। पारिवारिक, आर्थिक व सामाजिक जीवन अस्त-व्यस्त हो जाने के कारण लोग मानसिक दवाब झेल रहे हैं। इन सबके बावजूद संतोषजनक बात यह है कि छिटपुट घटनाओं व बहुत थोड़े से लोगों की उद्दंडताओं के अतिरिक्त पूरा देश एकजुटता के साथ सहयोग कर रहा है। यही कारण है कि देश कम्युनिटी संक्रमण के स्टेज से अब तक बचा हुआ है। हालांकि यह खतरा अभी टला नहीं है। हमारे देश में जनसंख्या का घनत्व अधिक है और स्वास्थ्य सुविधाएं उन्नत देशों की तुलना में कम है। अतः यदि यह वायरस कम्युनिटी संक्रमण तक पहुंच गया तो हमारे यहां इसके बेहद भयावह परिणाम सामने आयेंगे। इसीलिये यह और भी अधिक जरूरी हो गया है कि हम तमाम कठिनाइयों के बाद भी लॉकडाउन 2 में पूरे धैर्य व संयम के साथ सरकार के सभी निर्देशों का पालन करें। इस संकट का दुर्भाग्यजनक पहलू यह है कि कोरोना का कोई प्रामाणिक इलाज अभी तक नहीं मिल पाया है। इस परिस्थिति में खुद को घर में छिपाकर सोशल डिस्टेनसिंग के जरिये इस वायरस के आक्रमण से बचे रहना ही एकमात्र कारगर विकल्प है। यही कारण है कि केंद्र व राज्य सरकारें लॉकडाउन के अमल पर सख्त हैं। सरकार द्वारा अनेक राहत योजनायें चलायी जा रही है। सरकारें अंतिम व्यक्ति तक उसके बुनियादी जरूरतों का सामान पहुँचाने हेतु सीमित विकल्पों के बीच दिन-रात जुटी हुई हैं। सरकारी मशीनरी, जिला व पुलिस प्रशासन, डॉक्टर्स, नर्सिंग व स्वास्थ्य कर्मी, सफाईकर्मी, म्युनिसिपल व पंचायत अमला सहित सामाजिक संगठन व मीडियाकर्मी सभी जोखिम उठाकर व्यवस्था बनाये रखने के चुनौतीपूर्ण काम में तन्मयता के साथ लगे हुये हैं। इस समय यह हम सबका नागरिक कर्तव्य है कि हम न केवल उनकी सेवाओं का सम्मान करें वरन सोशल डिस्टेनसिंग का पालन करके उनका सहयोग भी करें। qqq धैर्य से पूरा विश्व आश्चर्यचकित यह सही है कि तमाम प्रयासों के बावजूद कुछ समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। कुछ मामलों में सरकार की स्थिति सरोते के दो पाटों के बीच फंसी हुई सुपारी की तरह है। उसके पास दो विपरीत उपायों में से किसी एक विकल्प को चुनने की मजबूरी है। हर स्थिति में आलोचना की गुंजाइश तलाशी जा सकती हैं। लेकिन संकटकालीन परिस्थिति में प्रत्येक सभ्य समाज अपने जागरूक तबके से इस जिम्मेदारीपूर्ण रवैये की उम्मीद रखता है कि वह सभी दायरों से ऊपर उठकर सरकार को हरसंभव सहयोग करे। यह वक्त अपनी चिंताओं व भावनाओं के सार्वजनिक प्रकटीकरण पर उचित नियंत्रण रखने का समय है। समाज के जागरूक तबके को अपनी अभिव्यक्ति के प्रभाव का आंकलन स्वयं करना चाहिये। उसे आत्मनुशासन में रहकर निर्धारित फोरम तक अपनी चिंता व सुझाव पंहुचाने चाहिये ताकि ध्यानाकर्षण भी हो जाये और लोगों में अनावश्यक असंतोष उपजने तथा अव्यवस्था फैलने से बचा जा सके । अपने देशभक्त नागरिकों की सामूहिक एकता, त्याग, आत्मनियंत्रण व परस्पर सहयोग के बलबूते पर भारत विषम से विषम परिस्थितियों से लड़कर विजय हासिल करना जानता है। कोरोना से यह लड़ाई एक प्रकार से हमारी दृढ़ता, धैर्य व संयम की अग्नि परीक्षा है। अब तक भारतीय नागरिकों द्वारा प्रदर्शित परिपक्वता व धैर्य से पूरा विश्व आश्चर्यचकित है। qqq लेकिन हमें स्वछंद नहीं होना है हमारा सौभाग्य है कि हमारा रायगढ़ जिला कोरोना मुक्त जिला है। यह भी उत्साहवर्धक बात है कि हमारे छत्तीसगढ़ के एम्स का रिकवरी स्कोर बहुत अच्छा है। विश्व के कई देशों ने हमारी तरफ सहायता के लिए हाथ पसारे हैं। ये देश एक वेबिनार के जरिये हमारे अनुभवों से लाभान्वित हो रहे हैं। आरंभिक सफलताओं के बाद लॉकडाउन को कुछ शिथिल किया गया है लेकिन हमें स्वछंद नहीं होना है। पूरी सावधानी रखते इस छूट का बहुत सीमित उपयोग करना है। इस निर्णायक मोड़ पर हमारी एक छोटी सी चूक भी पूरे किये कराये पर पानी फेर सकती है। अतः हमें लॉकडाउन के पूर्णतः पालन के लिए मन, वचन व कर्म से संकल्पित होना होगा। हम कोरोना से आत्मविश्वास के साथ लड़ रहे हैं और हम अवश्य जीतेंगे। सभी कोरोना वारियर्स व जरूरतमन्दों को सहयोग करने वाली संस्थाओं व व्यक्तियों का अभिनंदन। मनोबल ऊंचा रखें, अनुशासित रहें, प्रसन्न रहें और सबका सहयोग करें।
कोरोना का भय सुनियोजित साजिश ?
कारोना को लेकर भारत सहित विश्व भर में डर का माहौल बनाया जा रहा है। इसमें सरकारें भी शामिल हैं, विश्व स्वास्थ्य संगठन भी शामिल है और फायदा उठाने वाली फार्मा व टेस्ट किट निर्माता कंपनियां भी शामिल हैं। इन सभी को अमेरिका-चीन जैसी वैश्विक ताकतें संचालित कर रही हैं। कोरोना का भय सुनियोजित साजिश है। यह डर का बाजार है। आतंकवाद, धर्म के बाद अब वायरस खौफ के अंतराष्ट्रीय बाजार के सफल खिलाड़ी हैं। इसे सफल बनाने के लिए मीडिया का भरपूर सहारा लिया जा रहा है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन भी जानता है कि किसी भी वायरस की कोई दवा नहीं हो सकती और मुंह पर मास्क लगाने से वायरस अटैक को रोका नहीं जा सकता। यह बात एलोपैथी चिकित्सक और बाजारपरस्त चिकित्सा प्रणाली के चिकित्सा विज्ञानी भी जानते हैं। कोरोना के खौफ में पीसीआर टेस्ट व मास्क आदि के व्यापार तो फल-फूल रहे हैं, पर दूसरे सभी सेक्टर का भट्ठा बैठ रहा है। खासकर भारत जैसे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को अरबों की चपत लग रही है। 1983 में आविष्कृत जिस पीसीआर (Polymerase chain reaction PCR) टेस्ट के बल पर कोरोना संक्रमण को डिटेक्ट करने का दावा किया जा रहा है, उसके आविष्कारक कैरी मुलिस (Kary Mullis) ने खुद कहा था कि इससे किसी पर्टिकुलर वायरस या बैक्टिया के संक्रमण को 100 फीसदी डिटेक्ट नहीं किया जा सकता। यूट्यूब पर उनके वीडियो उपलब्ध हैं। आप कोई भी सुन सकते हैं। सभी चिकित्सक व चिकित्सा वैज्ञानिक जानते हैं कि ब्रह्मांड में करीब 3.5 लाख के करीब वायरस हैं, कम-ज्यादा भी हो सकते हैं, जिनमें से अब तक करीब 200 के आस-पास वायरस का नाम रखा गया है। इनमें कोरोना भी शामिल है। आज जैसे कोरोना का हौव्वा खड़ा किया गया है, ठीक वैसे ही कभी स्वाइन फ्लू-एच1एन1, जीका, इबोला, निपाह, एचआईवी आदि वायरस का खौफ पैदा किया गया था। आज न इन वायरस का कहीं प्रकोप है, न इनकी दवा बनाई गई। न इनकी कोई चर्चा है। गौर करने वाले तथ्य ये हैं कि सभी वायरस के लक्षण लगभग समान हैं। बुखार, जुकाम, बदन में दर्द, नाक बहना आदि। सारे फलू के लक्षण। एचआईवी तो 20वीं सदी का सबसे बड़ा झूठ है। एचआईवी वायरस किसी भी मानव शरीर में प्रवेश कर ही नहीं सकता। कोरोना को देखें तो पहले उसने चीन में तबाही मचाई, अब वहां शांत हो गया। असल में वहां डर के बाजार का दोहन हो गया। अब कोरोना इटली, ईरान, अमेरिका व भारत में तांडव मचा रहा है। चूंकि गर्मी आने के बाद वायरस का असर कहीं नहीं दिखेगा, इसलिए इसे तेजी से चीन से बाहर शिफ्ट कराया जा रहा है, ताकि डर के बाजार का अधिक से अधिक दोहन हो सके। भारत में सरकारों ने स्कूल,कालेज, सिनेमा हॉल, पब, रेस्तभरां आदि बिजनेस एक्टिविटी रोककर अपने ही पैर में कुल्हााड़ी मारी है, जबकि भारत में एक भी केस नहीं है, जो भी केस डिटेक्टे हुए है, वे चीन, इटली, यूएई जैसे जगहों से बाहर से आए लोग हैं। फिर भी हमारी सरकारें कोरोना के भय में आवाम को झोंक रही हैं। पता नहीं हमारी सरकारें डब्यूें एचओ के आगे क्यों नतमस्तक हैं। सभी चिकित्सा विज्ञान में मान्य फैक्ट्स हैं कि जब शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता घटती है तभी शरीर पर वायरस या बैक्टिरिया का अटैक होता है। वातावरण में हमारे आस-पास हमेशा लाखों वायरस-बैक्टिरिया मौजूद रहते हैं और वे हमारे शरीर के अंदर जाते रहते हैं। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता, श्वेत रक्तकण यानी डब्ल्यूबीसी, शरीर के अंदर बनने वाले अम्ल और जीवनरक्षक वायरस व बैक्टिरिया आदि उनको मारते रहते हैं। यह प्रकिया अनवरत चलती रहती है। जब शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है या मौसम परिवर्तन होता है या दूषित खान-पान के शिकार होते हैं या शरीर में अत्यधिक टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं तो वायरस या बैक्टिरिया का हमला होता है। जुकाम, कफ, सिर दर्द, बुखार, बदन दर्द, कंपकपी, उल्टी, दस्त आदि लक्षण संकेत देते हैं कि शरीर में वायरस या बैक्टिरिया का अटैक हो गया है। ये रोग शत्रु नहीं मित्र होते हैं जो मानव को सावधान करने के लिए होते हैं कि आप खुद के खान-पान को ठीक करें। शरीर में इन्हें ठीक करने का इनबिल्ट मैकेनिज्म होता है। तीन से सात दिन में ये ठीक हो जाते हैं। बस आप अपना आहार-विहार ठीक कर लें। जिस आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग व आध्यात्म को भारत अपना गर्व मानता है, जिस भारत में इन वैकल्पिक चिकित्सा की जड़ें मजबूत हैं, वही भारत आज कोरोना के अंतरराष्ट्रीय खेल का प्यादा बना हुआ है। यह समझ से परे नहीं है। भारत भी विश्व स्वाबस्य्यह संगठन से जुडा हुआ है और अंतरराष्री शंय डर की कारोबारी शक्तियों का मोहरा है। जिस चीन से कारोना (कोविड-19) की शुरूआत हुई, उसी चीन व सिंगापुर के चिकित्सकों की टीम ने डा. टी. कॉलिन कैंपबेल के नेतृत्व में 1973-75 के बीच 65 देशों में एक अध्ययन किया, जिसे चाइना स्टडी नाम दिया गया। यह लगभग 25 वर्ष तक चला। 2005 में चाइना सटडी प्रकाशित हुआ। यह स्टडी एनिमल फूड (डेयरी उतपाद समेत), रिफाइनरी फूड प्रोडक्ट्स, इंडस्ट्रियल फूड, जंक फूड और क्रोनिक बीमारियों-डायबिटीज, कैंसर, कोलेस्ट्राल, हाईबीपी, प्रोस्टेट, हर्ट ब्लॉकेज, थायराइड आदि के बीच संबंध का पता लगाने के लिए की गई। यह स्टडी अंग्रेजी दवा व उसके नुकसान, खान-पान का बीमारी से संबंध आदि विषयों को भी केंद्र में रखकर की गई। इस विश्वव्यापी स्टडी का निष्कर्ष निकला कि एनिमल फूड, इंडस्ट्रियल फूड, डब्बाबंद फूड, रिफाइंड फूड आदि के क्रोनिक रोगों से गहरे संबंध हैं। ये खाद्य सामग्री लोगों को बीमार बना रहे हैं, दवा-इंजेक्शन बीमारी ठीक नहीं करते, बल्कि रोगों को ठीक करने की ताकत खुद शरीर में है और प्लांट फूड में है। दुनिया के स्वास्थ्य की चिंता का दावा करने वाले विश्व स्वायस्थ्य संगठन ने कभी भी विश्व के देशों को एनिमल फूड (डेयरी उत्पाद समेत), रिफाइनरी फूड प्रोडक्ट्स, इंडस्ट्रियल फूड, जंक फूड, जहरीले कोल्डन ड्रिंक्सस के सेहत पर पडने वाले कुप्रभावों के प्रति सचेत नहीं किया, जबकि कोरोना को महामारी घोषित करने में अत्यंकत शीघ्रता दिखाई। डब्यूो महएचओ ने बैन हो चुकी कई दवाओं के इस्तेरमाल व उनके खतरों को लेकर भी विकासशील देशों को कभी नहीं रोका। वह फार्मा लॉबी व फास्ट फूड इंडस्ट्री के सामने घुटने टेकता रहा है। चाइना स्टूडी के निष्क र्ष के मुताबिक मानव शरीर के लिए केवल प्रकृति प्रदत्त प्लांट खाद्य सामग्री ही उपयोगी है, किसी भी पके हुए भोजन में शरीर की हीलिंग की क्षमता नहीं होती, इंडस्ट्रियल व रिफाइंड फूड में तो बिल्कुमल नहीं। उससे ऊर्जा मिल सकती है, पर हीलिंग नहीं हो सकती। कच्चा खाने योग्य फल, सब्जियां व कंद-मूल, स्टीम किए हुए अनाज व सब्जियां, फल-सब्जियों के रस आदि में ही शरीर की हीलिंग की ताकत है, इन्हीं में रोग ठीक करने की क्षमता है। यही बात भारत के आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग आदि में प्राचीन काल से वर्णित है। फिर भी भारत सरकार अपनी ताकत का इस्तेमाल कोरोना के खौफ को खत्म करने के लिए नहीं कर रही है। आखिर क्यों? आज भारत के पास अपनी प्राचीन चिकित्साक पद्धत्तियों की ताकत से विश्वर को अवगत कराने का भरपूर मौका है। जैसे भारत ने विश्वर से योग का लोहा मनवाया, ठीक वैसे ही कोरोना को रोकने में आयुर्वेद व प्राकृतिक चिकित्सा की क्षमता से विश्व को परिचित करवा सकता है। इससे भारतीय चिकित्साश पद्धत्तियों का वैश्विक बाजार भी बढता। प्राकृतिक चिकित्सा के मुताबिक मनुष्य अगर प्रतिदिन अपने खान-पान में 80 फीसदी कच्चा-स्टीम तथा केवल 20 फीसदी पके हुए खाद्य सामग्री शामिल करे तो वह जीवन पर्यंत बीमार नहीं पड़ेगा। बीमार पड़ेगा भी तो जल्द ही ठीक हो जाएगा। उन्हें किसी दवा की आवश्यकता नहीं है। इस खान-पान से पीएच 7.5 पर संतुलित रहता है। दरअसल, शरीर के अंदर एंजियोजेनेसिस सिस्टम है जो हीलिंग मैकेनिज्म है। इस खोज के लिए चार बार नोबेल प्राइज मिल चुका है। चाइना स्टडी के मुताबिक कोरोना जैसे वायरस तीन से सात दिन में ठीक हो सकते हैं। बस मरीज को आप लिक्विड डाइट पर रखें, स्वच्छ प्राकृतिक वातावरण में रखें, उनकी इम्यूनिटी को बढ़ा दें। एक दिन में 6 से 7 ग्लास सिट्रिक जूस जैसे मौसमी, संतरा, अनानास आदि के व 6 से 7 ग्लास नारियल पानी दें, दूसरे दिन 3 ग्लास खीरा व टमाटर का जूस भी एड कर दें व तीसरे दिन भी दूसरे दिन वाले डाइट अपनाएं तो कोरोना समेत कोई भी वायरस का संक्रमण ठीक हो जाएगा। लेकिन चीन अपनी इस स्टडी के ज्ञान का इस्तेमान नहीं कर रहा है, क्योंकि इसमें बाजार नहीं है। आख्रिर चीन किसका हित साध रहा है? qqq भारत को खुद पर नहीं भरोसा आज भारत सरकार को अपने सभी आयुर्वेदिक, प्राकृतिक, मेडिकल न्यूट्रिशनिस्ट चिकित्सक का इस्तेमाल करना चाहिए। यदि कारोना के संदिग्धों को इनकी देखरेख में रखा जाय तो किसी न जान जाएगी, न पैनिक क्रिएट होगा और न ही अर्थव्यजवस्था का नुकसान होगा। बल्कि भारत अपने आयुर्वेदिक, प्राकृतिक, मेडिकल न्यूट्रिशनिस्ट चिकित्सकों की मदद से विश्व को राह दिखा सकता है। वह दुनिया को कोरोना मुक्त कर अपने लिए बाजार तैयार कर सकता है। हमें अपने ज्ञान पर भरोसा होना चाहिए और उसका व्याापारिक इस्तेजमाल करना आना चाहिए। ब्रिटिश जर्नल ऑफ मेडिसिन 2016 में ही एंड ऑफ मॉडर्न मेडिसिन की घोषणा कर चुकी है। वैश्विक मेडिसिन शोध संस्थाि कोक्रेन व मेछिकल जर्नल लांसेट की अनेक रिपोर्ट में पुष्ट‍ हो चुका है क‍ि 85 फीसदी लाइफ स्टा इल जनित बीमारियां खान-पान में सुधार लाकर, योग अपना कर ठीक हो सकती हैं। केवल 15 फीसदी रोगों, सर्जरी, ट्रामा आदि के लिए मॉडर्न मेडिकल सिस्टाम बेहद उपयोगी है। इसलिए भारत सरकार को चाहिए कि वह एलोपैथी पर अपनी निर्भरता कम करे और आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्साप को बढावा देकर न केवल अपने स्व,स्य्ृति के बजट को कम कर सकता है, बल्ि न कृषि क्षेत्र में नई क्रांति कर सकता है। भारत को पश्चिमी अंग्रेजी चिकित्साि की गुलामी से मुक्त होने की दिशा में आगे बढना चाहिए। (लेखक शिक्षाविद होने के साथ-साथ देश के मशहूर पत्रकार हैं, लेख में उनके निजी विचार हैं। )
स्त्री पैदा नहीं होती बना दी जाती है
एक और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
तस्वीरों में देखें रायगढ़ में जनता कर्फ्यू का असर
22 मार्च यानी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर जिले में भी जनता कर्फ्यू का असर देखने को मिला। दोपहर तक पूरा शहर स्वस्फूर्त बंद था। हर मुख्य मार्ग और बाजार बंद मिले। गली-कूचे तक कोई व्यक्ति बाहर नहीं निकला।
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रायगढ़ में दो दिनों की रथयात्रा आयोजित होती रही है। इसी क्रम में आज रथ द्वितिया के दिन शहर के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भगवान श्री को विधिविधान पूर्वक पूजा अर्चना पश्चात मंदिर के गर्भगृह तथा मंदिर परिसर से जय जगन्नाथ के जयघोष और घंट शंख ध्वनि के बीच ससम्मान बाहर निकाला गया। राजापारा स्थित प्रांगढ़ में मेले सा माहौल था और हजारो की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण भगवान श्री के दर्शन करने के लिए पहुंचे हुए थे। इससे पहले कल भगवान जगन्नाथ की विधि विधान से पूजा की गई जिसे फोटोग्राफर वेदव्यास गुप्ता ने अपने कैमरे में कैद किया।
इप्टा रायगढ़ के 25वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की झलकियां
27 से 31 जनवरी तक पॉलिटेक्निक ऑडिटोरिम में इप्टा रायगढ़ द्वारा 25वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जिसमें चार नाटक एवं दो फीचर फिल्में दिखाई गईं। समारोह की शुरुआत रायपुर के मशहूर रंगकर्मी मिर्जा मसूद को 10वां शरदचंद्र वैरागकर अवार्ड देकर की गई। यह कूवत सिर्फ रंगमंच रखता है जो वर्तमान सत्ता के मठाधीशों पर अजब मदारी गजब तमाशा नाटक के माध्यम से सीधे कटाक्ष कर सकता है। जहां एक मदारी को राजा बना दिया जाता है, शब्दों के अस्तित्व को खत्म कर दिया जाता है। बंदर राष्ट्रीय पशु बन जाता है। गांधी चौक नाटक में गांधीजी की प्रतिमा स्वयं यह चलकर वहां से हट जाती है कि जब रक्षक की भक्षक बन गए तो कोई क्या कर सकता है। नोटबंदी और जीएसटी पर गांव वाले सीधे प्रहार करते हैं। सुबह होने वाली है की लेखी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध होने के बाद लोगों को जागरूक करने को किताब लिखती और किताब को ही फांसी हो जाती है। बोल की लब आजाद हैं तेरे लोगों को दर्शकदीर्घा में झकघोर के रख देती है। तुरूप और भूलन जैसी फिल्में लोगों के मनोरंजन के अलावा दमदार संदेश भी देती है। तो देखें इस शानदार नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की कुछ झलकियां
70 वें गणतंत्र दिवस के फुल ड्रेस रिहर्सल की मनमोहक तस्वीरें
जिले में 70वां गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। गणतंत्र दिवस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल दो दिन पहले की जाती है। महीने भर से चल रही तैयारी को 25 जनवरी के दिन आराम दिया जाता है। इस गणतंत्र दिवस समारोह के रंग को देखिए इन तस्वारों से...
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