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Raigarh Express, news of raigarh chhattisgarh

Thursday, April 03, 2025
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शुरू से ठगा जाता रहा है रायगढ़-आखिर कब तक?
छत्तीसगढ़ एक नये राज्य के तौर पर बनने से पहले रायगढ़ संभावनाओं के बड़े केन्द्रों में से एक था, लेकिन जब छत्तीसगढ़ बना तो रायगढ़ को एक तरह से ठेंगा दिखा दिया गया। नये बने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने हथिया ली और खुद को न्यायधानी बताते हुए बिलासपुर में हाईकोर्ट और रेवेन्यू बोर्ड जैसे न्यायिक संस्थाओं को अपने हिस्से में शामिल कर लिया। अलावे इसके और भी ढेर सारे राज्य स्तरीय संस्थान रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे जिलों ने झटक लिये। <b>रायगढ़ से छल</b> दरअसल रायगढ़ शुरू से ही ठगा जाता रहा है। वास्तव में छत्तीसगढ़ बनने से पहले मध्यप्रदेश में छत्तीसगढ़ की जो स्थिति थी छत्तीसगढ़ बनने के बाद छत्तीसगढ़ में वहीं हाल रायगढ़ का है। बीते 25 वर्षों में रायगढ़ को ऐसा कुछ भी नहीं मिला जिस पर रायगढ़ के लोग गर्व कर सके। इसी बीच छत्तीसगढ़ के मौजूदा मुख्यमंत्री माननीय विष्णुदेव जी साय जब भारत सरकार के मंत्री थे तब उनके प्रयासों से ही रायगढ़ की झोली में रेल्वे टर्मिनल का सौगात डाला गया था जिसके लिये उनकी उपस्थिति में ही पूरे विधि-विधान के साथ भूमि पूजन भी हुआ था लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी वह टर्मिनल रायगढ़ की झोली से धरातल पर अभी तक नहीं दिखलाई पड़ा है। कह सकते है कि रायगढ़ की झोली के किसी छेद से टर्मिनल का वह सौगात बाहर निकल गया होगा। <b>गौरवशाली अतीत</b> रायगढ़ का एक गौरवशाली अतीत रहा है जहां रियासती दौर में ही 14 देशी राज्यों (रियासतों) का एक अपना हाईकोर्ट हुआ करता था जिसमें भारत के ख्यातिलब्ध न्यायाधीश हिदायत उल्लाह अपनी सेवाएं दे चुके थे, यहीं नहीं रायगढ़ में तात्कालीन १४ पूर्वी रियासतों की राजधानी भी थी और अब वहीं रायगढ़ इन मायनों में आजादी के पहले जहां खड़ा था वहीं खड़ा है। इस बीच अभी हाल के दिनों में यह बात भी सामने आई थी कि रायगढ़ को आने वाले दिनों में राजस्व संभाग का दर्जा दिया जायेगा। अलावे इसके पुलिस का रेंज कार्यालय भी रायगढ़ में ही होगा। ये दोनों बातें अचानक कहां गुम हो गई पता ही नहीं चला जबकि इसी बीच सरगुजा याने अंबिकापुर को संभाग का दर्जा दिया जा चुका है। अलावे इसके कुछ और भी है जिसमें रायगढ़ के जिला जेल को सेन्ट्रल जेल का दर्जा दिये जाने की बात सामने आई थी जिसकी अनुशंसा छ.ग. हाईकोर्ट की एक कमेटी ने की थी पर अभी तक न तो रायगढ़ को संभाग का दर्जा दिया गया न पुलिस का रेंज कार्यालय यहां आया और न ही रायगढ़ जेल को सेन्ट्रल जेल का दर्जा दिया गया। रायगढ़ के साथ किये गये इस सौतेले सलूक के पीछे कुछ भी कारण हो सकते हैं लेकिन इतना तय है कि रायगढ़ को जो मिलना था वह नहीं मिला। ऐसे कई मिसाल है जैसे रायगढ़ में हवाई अड्डे की बात थी वह भी विवादों में उलझकर अकाल मौत का शिकार हो चुका है जबकि इसी बीच बिलासपुर और अंबिकापुर को हवाई अड्डे की सौगात दी जा चुकी है। कुछ यही हाल यहां के केलो बांध का भी है जिसके लोकार्पण के दशक बीत चुके हैं लेकिन बांध से आज तक किसानों के खेतों में पानी का एक बूंद नहीं पहुंचा है। अलबत्ता इसी बीच ९० के दशक में टिड्डी दल की तरह यहां आये उद्योगोंपतियों ने अपने उद्योगों के लिये केलो डेम से पानी लेने की व्यवस्था बेरहमी से कर ली। दरअसल ९० के दशक में जिले के एक बड़े भू-भाग में कोयले के अकूत खजाने का पता चल गया था जिसके चलते देश के कोने-कोने से उद्योगपति यहां पहुंच गये, उन्होंने हजारों एकड़ खेती की जमीन हथिया ली। बड़े पैमाने पर जंगलों को रौंद डाला नतीजा यह हुआ कि रायगढ़ जिला अराजक औद्योगिककरण की चपेट में आ गया परिणाम स्वरूप जिले में औद्योगिक परिवहन से जुड़े भारी भरकम वाहनों की भीड़ लग गई जो जिले के खस्ताहाल सडक़ों पर दौड़ते हुए हादसों को अंजाम देने लगे। वहीं दूसरी ओर बेलगाम उद्योगपतियों ने जिले के पर्यावरण को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। आज रायगढ़ छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से एक है। आलम यह है कि समूचे छत्तीसगढ़ में फेफड़ों के लिये दवा की जितनी खपत होती है उन सब में सबसे ज्यादा रायगढ़ में होती है। यहां मृत्यु दर में खासा इजाफा हो चुका है। यह भी उल्लेखनीय है कि जिले में हुए औद्योगिकरण के मद्देनजर रायगढ़ में किरोड़ीमल इंस्ट्रीयूट ऑफ टेक्नोलॉजी की स्थापना उद्योगों की तकनीकी आवश्यकता पूरी करने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन यह संस्था बमुश्किल दस साल के बाद भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। अब स्थिति यह है कि संस्था बंद हो चुकी है इसके कर्मचारी वेतन नहीं मिलने के कारण भूखमरी के कगार में पहुंच चुके हैं और संस्था मौत की हिचकियों के साथ जिंदा है। स्थानीय जन तथा इस संस्था के कर्मचारी संस्था को राज्य शासन द्वारा सरकार के अधीन लिये जाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अलग-अलग पार्टियों के सरकार ने इस मांग की पूरी तरह अनदेखी कर दी और इसके विपरीत दुर्ग में कर्ज से डूबे चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज को शासनाधीन कर लिया गया। qqq <b>अब ऊंची छलांग के लिये तैयार है रायगढ़</b> इन परिस्थितियों के लिये अगर किसी को जवाबदेह ठहराया जा सकता है तो वह सिर्फ रायगढ़ की जनता और उसके राजनैतिक नेतृत्व ही है। बहरहाल अब इन बातों को लेकर गिला-शिकवा का कोई अर्थ नहीं है, अब तो बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले के अनुसार आगे ही जाना होगा। इन मायनों में दो राय नहीं की विधानसभा के पिछले चुनाव में रायगढ़ से पूर्व आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी का चुना जाना रायगढ़ के लिये भाग्योदय जैसा ही है। अपने एक साल के कार्यकाल में ही ओपी चौधरी ने रायगढ़ में विकास के लिये जो खाका खिंचा है उसी में विकास को लेकर उनकी सुलझी हुई समझ और अवधारणा की झलक मिल जाती है। उन्होंने इन एक वर्ष में विकास के हर क्षेत्र में योजनाओं की मंजूरी देकर यह जता दिया है कि उनके पास रायगढ़ के विकास की ठोस रूप-रेखा है। जिसके तहत रायगढ़ में चौतरफा फोरलेन सडक़ों का जाल बिछाया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बेहतर पहलकदमी हुई है। खासतौर पर शिक्षा के क्षेत्र में नालंदा परिसर जैसे ज्ञान के संस्थान की स्थापना इन मायनों में बेहद पिछड़े रायगढ़ के लिये एक क्रांतिकारी शुरूआत है। इस संस्थान के शुरू हो जाने से रायगढ़ के युवाओं को जरूरी पुस्तकों के लिये भटकना नहीं पड़ेगा और वे इस संस्थान का लाभ लेते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी जगह बनाने में निश्चित तौर पर कामयाब होंगे और यहीं वास्तविक विकास है। ओपी चौधरी का विजन अभी अपने समग्र रूप में नहीं दिखलाई पड़ा है लेकिन आने वाले दो-तीन वर्षों में रायगढ़ को एक नई पहचान के साथ देखा जा सकेगा। कह सकते हैं कि तब रायगढ़ विकास के मायनों में एक ऊंची छलांग लगाने के लिये तैयार हो चुका होगा।
ओपिनियन
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भगवान झूलेलाल की छत्रछाया में मेहनतकश सिंधी समाज का शून्य से लेकर शिखर तक का सफर
मनरंजन
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बिजली विभाग के संभागीय कार्यालय की लापरवाही में लाखोंं के ट्रांसफार्मर स्वाहा
आसपास
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घरघोड़ा में सिल्लू चौधरी का नहीं कोई तोड़, तीसरी बार ली अध्यक्ष पद की शपथ
राजनीति
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जिला पंचायत अध्यक्ष और घरघोड़ा उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर भाजपा में मचा रार
राजनीति
बिजली विभाग के संभागीय कार्यालय की लापरवाही में लाखोंं के ट्रांसफार्मर स्वाहा
दर्जनों पत्राचार के बावजूद कोतरा रोड भंडार गृह में सुरक्षा इंतजामात के कार्य नहीं हुए स्वीकृत
सारंगढ़ के जंगल में मिली तेंदुआ की लाश
करंट तार की चपेट में आने की आशंका, मामले की जांच में जुटा अमला
सरस मेले से महिला समूहों के आत्मविश्वास को मिला बल : रामविचार नेताम
सरस मेले ने प्रदेश के हस्तशिल्प व संस्कृति से जन-जन को जोड़ने का किया है काम-वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी
पत्नी-बेटी को जलाकर मारने के बाद पति ने की खुदकुशी
घरघोड़ा के कमतरा गांव में एक ही परिवार के ३ लोगों की मौत, शराब को लेकर पति-पत्नी में हुआ था विवाद
घरघोड़ा में सिल्लू चौधरी का नहीं कोई तोड़, तीसरी बार ली अध्यक्ष पद की शपथ
पेड़ की छांव तले सिल्लू का होगा ‘जनता का कार्यालय’, हर समस्या का मिलेगा समाधान
जिला पंचायत अध्यक्ष और घरघोड़ा उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर भाजपा में मचा रार
सोशल मीडिया पर एक दूसरे पर खूब बरस रहे भाजपाई
युथ आइकन छोटू कृष्णा सुरेश जायसवाल लैलूंगा नगर उपाध्यक्ष निर्विरोध निर्वाचित
नगर पंचायत चुनाव में कृष्णा की टीम ने बदला नतीजों का रुख
विधायक उमेश पटेल ने विधानसभा में बजट भाषण पर सरकार को जमकर घेरा
पीएम आवास के हितग्राहियों की राशि बढ़ाने का किया मांग
चक्रधर नगर पोल्ट्री फार्म में मिला बर्ड फ्लू का केस
कलेक्टर ने देर रात अधिकारियों की आपातकालीन बैठक लेकर स्थिति नियंत्रित करने बनाई रणनीति
किसी भी आपात स्थिति से निबटने स्वास्थ्य अमला पूरी तरह से तैयार: सीएमएचओ डॉ. केशरी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन का स्वास्थ्य सेवाएँ पहुंचाने पर जोर*
रायगढ़ में मूसलाधार बारिश की संभावना
बारिश से महानदी में बढ़ा जलस्तर, रायगढ़ जिला प्रशासन अलर्ट
आने वाले तीन दिनों में भारी बारिश की चेतावनी
मॉनसून का पहला ऑरेंज अलर्ट
हिंडाल्को सीएसआर की मुहिम टिंकरहैट स्टेम शाला परियोजना का उद्घाटन, स्कूली बच्चों को मिलेगा लाभ
हिंडाल्को सीएसआर एवं टिंकरहैट इनोवेशन फाउंडेशन (टीआईएफ) के सहयोग से कोडकेल के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में टिंकरहैट स्टेम शाला कार्यक्रम का शुभारंभ जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. के व्ही राव, ब्लाक शिक्षा अधिकारी श्रीमती मोनिका गुप्ता, ग्राम सरपंच श्रीमती रमिला रोहित सिदार, शाला समिति के अध्यक्ष सुरेश सिदार, हिंडाल्को मानव संसाधन प्रमुख प्रेम कुमार सिंग, एवं कोंडकेल गाँव के वरिष्ठ नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। इस पहल के माध्यम से प्राथमिक शाला के बच्चे खेल-खेल में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, कला और गणित के सिद्धांतों को भली भांति सीख पाएंगे। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. के व्ही राव ने इस परियोजना की सराहना करते हुए हिंडाल्को प्रबंधन का धन्यवाद किया एवं बच्चों एवं उनके अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के विषय में बताया और साथ – साथ बच्चों को निजी साफ सफाई रखने व प्रतिदिन स्कूल आने के लिए प्रोत्साहित किया। टिंकरहैट स्टेम शाला कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, कला और गणित के सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर देना है। इसका मुख्य उद्देश्य उन्हें इन विषयों में रुचि जगाना और उन्हें ऐसे कौशल सिखाना है जो उनके सोचने और निर्णय लेने की क्षमता को सुधारने व बेहतर करने में मदद करेगा । इस प्रयोगात्मक शिक्षा के माध्यम से बच्चों में नवाचार और रचनात्मकता का विकास होगा और बच्चों को अपने विचारों को दृश्य रूप में प्रस्तुत करने और उन्हें वास्तविक दुनिया की समस्याओं के समाधान में लागू करने का अवसर मिलेगा।
बच्चों की प्रतिभा के नूर से रौशन हुआ ट्रिनिटी हॉल
किण्डर वैली स्कूल का हुआ यादगार वार्षिकोत्सव का मनभावन आयोजन
कार्डिनल रोटी बैंक की हर घर मुस्कान वाली दिवाली मुहिम शुरू
कलेक्टर और एसपी भी जुड़े इस मुहिम से, लोगों से सहयोग की अपील की
एनटीपीसी ने लिया जमीन, 16 साल से बोनस देने में कर रहा आनाकानी
मामला हाईकोर्ट में, एसडीएम के पत्रों को कचरे में फेंक रही एनटीपीसी लारा
भगवान झूलेलाल की छत्रछाया में मेहनतकश सिंधी समाज का शून्य से लेकर शिखर तक का सफर
सिंधी समाज : संघर्ष, मेहनत और विकास की गाथा , विभाजन से विकास तक
असमंजस बाबू की आत्मकथा के मंचन से शुरू हो रहा है रायगढ़ इप्टा का 30 वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह
17 से 19 जनवरी तक पॉलीटेक्निक ऑडिटोरियम में होगा आयोजन
ढाई लाख लोगों की आस्था का केंद्र बनी चक्रधर नगर की मां की कुटिया
चक्रधरनगर चौक में 37 वें दुर्गोत्सव का शुभारंभ, 15 साल बाद आए शुभ मुहूर्त में मां होंगी विराजमान
भारत शिक्षा रत्न अवार्ड फॉर बेस्ट प्रिंसीपल के राष्ट्रीय पुरस्कार से दिलीप अम्ब्रेला सम्मानित
दिल्ली में हुआ सम्मान, शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट सेवा एवं विशेष सहयोग के लिए दिया जाता है यह सम्मान
शुरू से ठगा जाता रहा है रायगढ़-आखिर कब तक?
छत्तीसगढ़ एक नये राज्य के तौर पर बनने से पहले रायगढ़ संभावनाओं के बड़े केन्द्रों में से एक था, लेकिन जब छत्तीसगढ़ बना तो रायगढ़ को एक तरह से ठेंगा दिखा दिया गया। नये बने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने हथिया ली और खुद को न्यायधानी बताते हुए बिलासपुर में हाईकोर्ट और रेवेन्यू बोर्ड जैसे न्यायिक संस्थाओं को अपने हिस्से में शामिल कर लिया। अलावे इसके और भी ढेर सारे राज्य स्तरीय संस्थान रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे जिलों ने झटक लिये। <b>रायगढ़ से छल</b> दरअसल रायगढ़ शुरू से ही ठगा जाता रहा है। वास्तव में छत्तीसगढ़ बनने से पहले मध्यप्रदेश में छत्तीसगढ़ की जो स्थिति थी छत्तीसगढ़ बनने के बाद छत्तीसगढ़ में वहीं हाल रायगढ़ का है। बीते 25 वर्षों में रायगढ़ को ऐसा कुछ भी नहीं मिला जिस पर रायगढ़ के लोग गर्व कर सके। इसी बीच छत्तीसगढ़ के मौजूदा मुख्यमंत्री माननीय विष्णुदेव जी साय जब भारत सरकार के मंत्री थे तब उनके प्रयासों से ही रायगढ़ की झोली में रेल्वे टर्मिनल का सौगात डाला गया था जिसके लिये उनकी उपस्थिति में ही पूरे विधि-विधान के साथ भूमि पूजन भी हुआ था लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी वह टर्मिनल रायगढ़ की झोली से धरातल पर अभी तक नहीं दिखलाई पड़ा है। कह सकते है कि रायगढ़ की झोली के किसी छेद से टर्मिनल का वह सौगात बाहर निकल गया होगा। <b>गौरवशाली अतीत</b> रायगढ़ का एक गौरवशाली अतीत रहा है जहां रियासती दौर में ही 14 देशी राज्यों (रियासतों) का एक अपना हाईकोर्ट हुआ करता था जिसमें भारत के ख्यातिलब्ध न्यायाधीश हिदायत उल्लाह अपनी सेवाएं दे चुके थे, यहीं नहीं रायगढ़ में तात्कालीन १४ पूर्वी रियासतों की राजधानी भी थी और अब वहीं रायगढ़ इन मायनों में आजादी के पहले जहां खड़ा था वहीं खड़ा है। इस बीच अभी हाल के दिनों में यह बात भी सामने आई थी कि रायगढ़ को आने वाले दिनों में राजस्व संभाग का दर्जा दिया जायेगा। अलावे इसके पुलिस का रेंज कार्यालय भी रायगढ़ में ही होगा। ये दोनों बातें अचानक कहां गुम हो गई पता ही नहीं चला जबकि इसी बीच सरगुजा याने अंबिकापुर को संभाग का दर्जा दिया जा चुका है। अलावे इसके कुछ और भी है जिसमें रायगढ़ के जिला जेल को सेन्ट्रल जेल का दर्जा दिये जाने की बात सामने आई थी जिसकी अनुशंसा छ.ग. हाईकोर्ट की एक कमेटी ने की थी पर अभी तक न तो रायगढ़ को संभाग का दर्जा दिया गया न पुलिस का रेंज कार्यालय यहां आया और न ही रायगढ़ जेल को सेन्ट्रल जेल का दर्जा दिया गया। रायगढ़ के साथ किये गये इस सौतेले सलूक के पीछे कुछ भी कारण हो सकते हैं लेकिन इतना तय है कि रायगढ़ को जो मिलना था वह नहीं मिला। ऐसे कई मिसाल है जैसे रायगढ़ में हवाई अड्डे की बात थी वह भी विवादों में उलझकर अकाल मौत का शिकार हो चुका है जबकि इसी बीच बिलासपुर और अंबिकापुर को हवाई अड्डे की सौगात दी जा चुकी है। कुछ यही हाल यहां के केलो बांध का भी है जिसके लोकार्पण के दशक बीत चुके हैं लेकिन बांध से आज तक किसानों के खेतों में पानी का एक बूंद नहीं पहुंचा है। अलबत्ता इसी बीच ९० के दशक में टिड्डी दल की तरह यहां आये उद्योगोंपतियों ने अपने उद्योगों के लिये केलो डेम से पानी लेने की व्यवस्था बेरहमी से कर ली। दरअसल ९० के दशक में जिले के एक बड़े भू-भाग में कोयले के अकूत खजाने का पता चल गया था जिसके चलते देश के कोने-कोने से उद्योगपति यहां पहुंच गये, उन्होंने हजारों एकड़ खेती की जमीन हथिया ली। बड़े पैमाने पर जंगलों को रौंद डाला नतीजा यह हुआ कि रायगढ़ जिला अराजक औद्योगिककरण की चपेट में आ गया परिणाम स्वरूप जिले में औद्योगिक परिवहन से जुड़े भारी भरकम वाहनों की भीड़ लग गई जो जिले के खस्ताहाल सडक़ों पर दौड़ते हुए हादसों को अंजाम देने लगे। वहीं दूसरी ओर बेलगाम उद्योगपतियों ने जिले के पर्यावरण को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। आज रायगढ़ छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से एक है। आलम यह है कि समूचे छत्तीसगढ़ में फेफड़ों के लिये दवा की जितनी खपत होती है उन सब में सबसे ज्यादा रायगढ़ में होती है। यहां मृत्यु दर में खासा इजाफा हो चुका है। यह भी उल्लेखनीय है कि जिले में हुए औद्योगिकरण के मद्देनजर रायगढ़ में किरोड़ीमल इंस्ट्रीयूट ऑफ टेक्नोलॉजी की स्थापना उद्योगों की तकनीकी आवश्यकता पूरी करने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन यह संस्था बमुश्किल दस साल के बाद भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। अब स्थिति यह है कि संस्था बंद हो चुकी है इसके कर्मचारी वेतन नहीं मिलने के कारण भूखमरी के कगार में पहुंच चुके हैं और संस्था मौत की हिचकियों के साथ जिंदा है। स्थानीय जन तथा इस संस्था के कर्मचारी संस्था को राज्य शासन द्वारा सरकार के अधीन लिये जाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अलग-अलग पार्टियों के सरकार ने इस मांग की पूरी तरह अनदेखी कर दी और इसके विपरीत दुर्ग में कर्ज से डूबे चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज को शासनाधीन कर लिया गया। qqq <b>अब ऊंची छलांग के लिये तैयार है रायगढ़</b> इन परिस्थितियों के लिये अगर किसी को जवाबदेह ठहराया जा सकता है तो वह सिर्फ रायगढ़ की जनता और उसके राजनैतिक नेतृत्व ही है। बहरहाल अब इन बातों को लेकर गिला-शिकवा का कोई अर्थ नहीं है, अब तो बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले के अनुसार आगे ही जाना होगा। इन मायनों में दो राय नहीं की विधानसभा के पिछले चुनाव में रायगढ़ से पूर्व आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी का चुना जाना रायगढ़ के लिये भाग्योदय जैसा ही है। अपने एक साल के कार्यकाल में ही ओपी चौधरी ने रायगढ़ में विकास के लिये जो खाका खिंचा है उसी में विकास को लेकर उनकी सुलझी हुई समझ और अवधारणा की झलक मिल जाती है। उन्होंने इन एक वर्ष में विकास के हर क्षेत्र में योजनाओं की मंजूरी देकर यह जता दिया है कि उनके पास रायगढ़ के विकास की ठोस रूप-रेखा है। जिसके तहत रायगढ़ में चौतरफा फोरलेन सडक़ों का जाल बिछाया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बेहतर पहलकदमी हुई है। खासतौर पर शिक्षा के क्षेत्र में नालंदा परिसर जैसे ज्ञान के संस्थान की स्थापना इन मायनों में बेहद पिछड़े रायगढ़ के लिये एक क्रांतिकारी शुरूआत है। इस संस्थान के शुरू हो जाने से रायगढ़ के युवाओं को जरूरी पुस्तकों के लिये भटकना नहीं पड़ेगा और वे इस संस्थान का लाभ लेते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी जगह बनाने में निश्चित तौर पर कामयाब होंगे और यहीं वास्तविक विकास है। ओपी चौधरी का विजन अभी अपने समग्र रूप में नहीं दिखलाई पड़ा है लेकिन आने वाले दो-तीन वर्षों में रायगढ़ को एक नई पहचान के साथ देखा जा सकेगा। कह सकते हैं कि तब रायगढ़ विकास के मायनों में एक ऊंची छलांग लगाने के लिये तैयार हो चुका होगा।
अग्निवीर, अग्निपथ और सियासत....
योजना से सेना कमजोर होगी या नहीं यह वक्त बताएगा लेकिन इस योजना के बंद होने से देश जरुर कमजोर होगा
रायगढ़ स्वास्थ्य विभाग का दामाद तिलेश दीवान !
आयुष्मान घोटाले से हर बार बचा, बहुमंजिला निजी आवास होने के बाद अब विभाग ने दिया आलीशान आवास का तोहफा
फैला रहा विनाश का फन , घरघोड़ा का स्टील इंडस्ट्री सन
लोगों के विरोध की कोई सुनवाई नहीं, जन नहीं धन सुनवाई कर रहे उद्योगपति
शुरू से ठगा जाता रहा है रायगढ़-आखिर कब तक?
छत्तीसगढ़ एक नये राज्य के तौर पर बनने से पहले रायगढ़ संभावनाओं के बड़े केन्द्रों में से एक था, लेकिन जब छत्तीसगढ़ बना तो रायगढ़ को एक तरह से ठेंगा दिखा दिया गया। नये बने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने हथिया ली और खुद को न्यायधानी बताते हुए बिलासपुर में हाईकोर्ट और रेवेन्यू बोर्ड जैसे न्यायिक संस्थाओं को अपने हिस्से में शामिल कर लिया। अलावे इसके और भी ढेर सारे राज्य स्तरीय संस्थान रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे जिलों ने झटक लिये। <b>रायगढ़ से छल</b> दरअसल रायगढ़ शुरू से ही ठगा जाता रहा है। वास्तव में छत्तीसगढ़ बनने से पहले मध्यप्रदेश में छत्तीसगढ़ की जो स्थिति थी छत्तीसगढ़ बनने के बाद छत्तीसगढ़ में वहीं हाल रायगढ़ का है। बीते 25 वर्षों में रायगढ़ को ऐसा कुछ भी नहीं मिला जिस पर रायगढ़ के लोग गर्व कर सके। इसी बीच छत्तीसगढ़ के मौजूदा मुख्यमंत्री माननीय विष्णुदेव जी साय जब भारत सरकार के मंत्री थे तब उनके प्रयासों से ही रायगढ़ की झोली में रेल्वे टर्मिनल का सौगात डाला गया था जिसके लिये उनकी उपस्थिति में ही पूरे विधि-विधान के साथ भूमि पूजन भी हुआ था लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी वह टर्मिनल रायगढ़ की झोली से धरातल पर अभी तक नहीं दिखलाई पड़ा है। कह सकते है कि रायगढ़ की झोली के किसी छेद से टर्मिनल का वह सौगात बाहर निकल गया होगा। <b>गौरवशाली अतीत</b> रायगढ़ का एक गौरवशाली अतीत रहा है जहां रियासती दौर में ही 14 देशी राज्यों (रियासतों) का एक अपना हाईकोर्ट हुआ करता था जिसमें भारत के ख्यातिलब्ध न्यायाधीश हिदायत उल्लाह अपनी सेवाएं दे चुके थे, यहीं नहीं रायगढ़ में तात्कालीन १४ पूर्वी रियासतों की राजधानी भी थी और अब वहीं रायगढ़ इन मायनों में आजादी के पहले जहां खड़ा था वहीं खड़ा है। इस बीच अभी हाल के दिनों में यह बात भी सामने आई थी कि रायगढ़ को आने वाले दिनों में राजस्व संभाग का दर्जा दिया जायेगा। अलावे इसके पुलिस का रेंज कार्यालय भी रायगढ़ में ही होगा। ये दोनों बातें अचानक कहां गुम हो गई पता ही नहीं चला जबकि इसी बीच सरगुजा याने अंबिकापुर को संभाग का दर्जा दिया जा चुका है। अलावे इसके कुछ और भी है जिसमें रायगढ़ के जिला जेल को सेन्ट्रल जेल का दर्जा दिये जाने की बात सामने आई थी जिसकी अनुशंसा छ.ग. हाईकोर्ट की एक कमेटी ने की थी पर अभी तक न तो रायगढ़ को संभाग का दर्जा दिया गया न पुलिस का रेंज कार्यालय यहां आया और न ही रायगढ़ जेल को सेन्ट्रल जेल का दर्जा दिया गया। रायगढ़ के साथ किये गये इस सौतेले सलूक के पीछे कुछ भी कारण हो सकते हैं लेकिन इतना तय है कि रायगढ़ को जो मिलना था वह नहीं मिला। ऐसे कई मिसाल है जैसे रायगढ़ में हवाई अड्डे की बात थी वह भी विवादों में उलझकर अकाल मौत का शिकार हो चुका है जबकि इसी बीच बिलासपुर और अंबिकापुर को हवाई अड्डे की सौगात दी जा चुकी है। कुछ यही हाल यहां के केलो बांध का भी है जिसके लोकार्पण के दशक बीत चुके हैं लेकिन बांध से आज तक किसानों के खेतों में पानी का एक बूंद नहीं पहुंचा है। अलबत्ता इसी बीच ९० के दशक में टिड्डी दल की तरह यहां आये उद्योगोंपतियों ने अपने उद्योगों के लिये केलो डेम से पानी लेने की व्यवस्था बेरहमी से कर ली। दरअसल ९० के दशक में जिले के एक बड़े भू-भाग में कोयले के अकूत खजाने का पता चल गया था जिसके चलते देश के कोने-कोने से उद्योगपति यहां पहुंच गये, उन्होंने हजारों एकड़ खेती की जमीन हथिया ली। बड़े पैमाने पर जंगलों को रौंद डाला नतीजा यह हुआ कि रायगढ़ जिला अराजक औद्योगिककरण की चपेट में आ गया परिणाम स्वरूप जिले में औद्योगिक परिवहन से जुड़े भारी भरकम वाहनों की भीड़ लग गई जो जिले के खस्ताहाल सडक़ों पर दौड़ते हुए हादसों को अंजाम देने लगे। वहीं दूसरी ओर बेलगाम उद्योगपतियों ने जिले के पर्यावरण को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। आज रायगढ़ छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से एक है। आलम यह है कि समूचे छत्तीसगढ़ में फेफड़ों के लिये दवा की जितनी खपत होती है उन सब में सबसे ज्यादा रायगढ़ में होती है। यहां मृत्यु दर में खासा इजाफा हो चुका है। यह भी उल्लेखनीय है कि जिले में हुए औद्योगिकरण के मद्देनजर रायगढ़ में किरोड़ीमल इंस्ट्रीयूट ऑफ टेक्नोलॉजी की स्थापना उद्योगों की तकनीकी आवश्यकता पूरी करने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन यह संस्था बमुश्किल दस साल के बाद भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। अब स्थिति यह है कि संस्था बंद हो चुकी है इसके कर्मचारी वेतन नहीं मिलने के कारण भूखमरी के कगार में पहुंच चुके हैं और संस्था मौत की हिचकियों के साथ जिंदा है। स्थानीय जन तथा इस संस्था के कर्मचारी संस्था को राज्य शासन द्वारा सरकार के अधीन लिये जाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अलग-अलग पार्टियों के सरकार ने इस मांग की पूरी तरह अनदेखी कर दी और इसके विपरीत दुर्ग में कर्ज से डूबे चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज को शासनाधीन कर लिया गया। qqq <b>अब ऊंची छलांग के लिये तैयार है रायगढ़</b> इन परिस्थितियों के लिये अगर किसी को जवाबदेह ठहराया जा सकता है तो वह सिर्फ रायगढ़ की जनता और उसके राजनैतिक नेतृत्व ही है। बहरहाल अब इन बातों को लेकर गिला-शिकवा का कोई अर्थ नहीं है, अब तो बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले के अनुसार आगे ही जाना होगा। इन मायनों में दो राय नहीं की विधानसभा के पिछले चुनाव में रायगढ़ से पूर्व आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी का चुना जाना रायगढ़ के लिये भाग्योदय जैसा ही है। अपने एक साल के कार्यकाल में ही ओपी चौधरी ने रायगढ़ में विकास के लिये जो खाका खिंचा है उसी में विकास को लेकर उनकी सुलझी हुई समझ और अवधारणा की झलक मिल जाती है। उन्होंने इन एक वर्ष में विकास के हर क्षेत्र में योजनाओं की मंजूरी देकर यह जता दिया है कि उनके पास रायगढ़ के विकास की ठोस रूप-रेखा है। जिसके तहत रायगढ़ में चौतरफा फोरलेन सडक़ों का जाल बिछाया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बेहतर पहलकदमी हुई है। खासतौर पर शिक्षा के क्षेत्र में नालंदा परिसर जैसे ज्ञान के संस्थान की स्थापना इन मायनों में बेहद पिछड़े रायगढ़ के लिये एक क्रांतिकारी शुरूआत है। इस संस्थान के शुरू हो जाने से रायगढ़ के युवाओं को जरूरी पुस्तकों के लिये भटकना नहीं पड़ेगा और वे इस संस्थान का लाभ लेते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी जगह बनाने में निश्चित तौर पर कामयाब होंगे और यहीं वास्तविक विकास है। ओपी चौधरी का विजन अभी अपने समग्र रूप में नहीं दिखलाई पड़ा है लेकिन आने वाले दो-तीन वर्षों में रायगढ़ को एक नई पहचान के साथ देखा जा सकेगा। कह सकते हैं कि तब रायगढ़ विकास के मायनों में एक ऊंची छलांग लगाने के लिये तैयार हो चुका होगा।
अग्निवीर, अग्निपथ और सियासत....
योजना से सेना कमजोर होगी या नहीं यह वक्त बताएगा लेकिन इस योजना के बंद होने से देश जरुर कमजोर होगा
रायगढ़ स्वास्थ्य विभाग का दामाद तिलेश दीवान !
आयुष्मान घोटाले से हर बार बचा, बहुमंजिला निजी आवास होने के बाद अब विभाग ने दिया आलीशान आवास का तोहफा
फैला रहा विनाश का फन , घरघोड़ा का स्टील इंडस्ट्री सन
लोगों के विरोध की कोई सुनवाई नहीं, जन नहीं धन सुनवाई कर रहे उद्योगपति
कलेक्टर भीम सिंह ने भारी बारिश के बीच संभाला मोर्चा, देखें तस्वीरें
निगम अमला बीती रात से आयुक्त के साथ पूरे शहर में डटा हुआ है
तस्वीरों में देखें रायगढ़ में जनता कर्फ्यू का असर
22 मार्च यानी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर जिले में भी जनता कर्फ्यू का असर देखने को मिला। दोपहर तक पूरा शहर स्वस्फूर्त बंद था। हर मुख्य मार्ग और बाजार बंद मिले। गली-कूचे तक कोई व्यक्ति बाहर नहीं निकला।
हरि बोल, जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ निकली रथयात्रा, देखें गैलरी
रायगढ़ में दो दिनों की रथयात्रा आयोजित होती रही है। इसी क्रम में आज रथ द्वितिया के दिन शहर के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भगवान श्री को विधिविधान पूर्वक पूजा अर्चना पश्चात मंदिर के गर्भगृह तथा मंदिर परिसर से जय जगन्नाथ के जयघोष और घंट शंख ध्वनि के बीच ससम्मान बाहर निकाला गया। राजापारा स्थित प्रांगढ़ में मेले सा माहौल था और हजारो की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण भगवान श्री के दर्शन करने के लिए पहुंचे हुए थे। इससे पहले कल भगवान जगन्नाथ की विधि विधान से पूजा की गई जिसे फोटोग्राफर वेदव्यास गुप्ता ने अपने कैमरे में कैद किया।
इप्टा रायगढ़ के 25वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की झलकियां
27 से 31 जनवरी तक पॉलिटेक्निक ऑडिटोरिम में इप्टा रायगढ़ द्वारा 25वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जिसमें चार नाटक एवं दो फीचर फिल्में दिखाई गईं। समारोह की शुरुआत रायपुर के मशहूर रंगकर्मी मिर्जा मसूद को 10वां शरदचंद्र वैरागकर अवार्ड देकर की गई। यह कूवत सिर्फ रंगमंच रखता है जो वर्तमान सत्ता के मठाधीशों पर अजब मदारी गजब तमाशा नाटक के माध्यम से सीधे कटाक्ष कर सकता है। जहां एक मदारी को राजा बना दिया जाता है, शब्दों के अस्तित्व को खत्म कर दिया जाता है। बंदर राष्ट्रीय पशु बन जाता है। गांधी चौक नाटक में गांधीजी की प्रतिमा स्वयं यह चलकर वहां से हट जाती है कि जब रक्षक की भक्षक बन गए तो कोई क्या कर सकता है। नोटबंदी और जीएसटी पर गांव वाले सीधे प्रहार करते हैं। सुबह होने वाली है की लेखी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध होने के बाद लोगों को जागरूक करने को किताब लिखती और किताब को ही फांसी हो जाती है। बोल की लब आजाद हैं तेरे लोगों को दर्शकदीर्घा में झकघोर के रख देती है। तुरूप और भूलन जैसी फिल्में लोगों के मनोरंजन के अलावा दमदार संदेश भी देती है। तो देखें इस शानदार नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की कुछ झलकियां

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