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Raigarh Express, news of raigarh chhattisgarh

Tuesday, May 26, 2026
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नवतपा में बच्चों का रखें बेहद ख्याल, लापरवाही पड़ सकती है भारी: डॉ. अंशुल श्रीवास्तव
भीषण गर्मी में नौनिहालों को सुरक्षित रखने के लिए शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीवास्तव ने बताए कई अहम तरीके
हमारे बच्चे
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टूटते सपने और खामोश चीखें—क्यों हार मान रहा है युवा मन?
हमारे बच्चे
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श्रीकृष्ण भावनामृत में सराबोर हुए श्रद्धालु
आसपास
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बड़े भंडार के ​अदाणी पावर प्लांट में श्रमिकों का भारी विरोध
आसपास
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केआईटी : उलझा सरकारीकरण और राजनीति की भेंट चढ़ा वेतन
हमारे बच्चे
श्रीकृष्ण भावनामृत में सराबोर हुए श्रद्धालु
रायगढ़,बलौदाबाजार और दुर्ग के भक्तों ने की ब्रज मंडल की दिव्य यात्रा
बड़े भंडार के ​अदाणी पावर प्लांट में श्रमिकों का भारी विरोध
ओवरटाइम और बकाया वेतन को लेकर हंगामा, प्रशासन का प्रबंधन को 25 मार्च तक का अल्टीमेटम
इस्कॉन प्रचार केंद्र रायगढ़ का तीन दिवसीय भागवतम कथा का आयोजन
रायगढ़ में पहली बार हुआ भागवतम कथा, सैकड़ों लोगों ने किया ज्ञान अर्जित
नीरज जलोटा ने एनटीपीसी के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (पश्चिमी क्षेत्र-II) का पदभार संभाला
एनटीपीसी में 37 साल से ज़्यादा के करियर में कई अहम पदों पर किया है काम
जिला प्रशासन ने राज्योत्सव में महापौर जीवर्धन चौहान को नहीं बुलाया !
स्थापना दिवस के निमंत्रण पत्र में महापौर का नाम पर उन्हें नहीं मिला निमंत्रण, तीन दिवसीय जिला स्तरीय राज्य स्थापना दिवस समारोह से दूरी बनाकर रखा महापौर ने
रद्द हो सकती है जेपीएल की जनसुनवाई !
पर्यावरण विभाग ने भी झाड़ा पल्ला, जनसुनवाई के दो दिन पहले ही होगा ठोस निर्णय ,सारंगढ़ में लाइमस्टोन खदान की जनसुनवाई के रद्द होने से विरोध में बैठे ग्रामीणों का बड़ा हौसला
रायगढ़ में सफल वोट अधिकार यात्रा से घबराए विरोधी, सोशल मीडिया पर फैलाया झूठ
भाजपा के खिलाफ जनता का गुस्सा सड़कों पर दिखा : कांग्रेस
उमेश पटेल ने दिया अल्टीमेटम, खाद नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन
उमेश पटेल के नेतृत्व में खाद संकट पर खरसिया कांग्रेस का हल्ला बोल, हजारों किसानों के साथ घेरा तहसील
नाली पर गिट्टी-बालू रखने से हुआ जलभराव, निगम की कड़ी कार्रवाई
संस्कार फ्लेक्स पर ₹20,000 का जुर्माना, गिट्टी-बालू जप्त , अब स्थिति सामान्य
चक्रधर नगर पोल्ट्री फार्म में मिला बर्ड फ्लू का केस
कलेक्टर ने देर रात अधिकारियों की आपातकालीन बैठक लेकर स्थिति नियंत्रित करने बनाई रणनीति
किसी भी आपात स्थिति से निबटने स्वास्थ्य अमला पूरी तरह से तैयार: सीएमएचओ डॉ. केशरी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन का स्वास्थ्य सेवाएँ पहुंचाने पर जोर*
रायगढ़ में मूसलाधार बारिश की संभावना
बारिश से महानदी में बढ़ा जलस्तर, रायगढ़ जिला प्रशासन अलर्ट
नवतपा में बच्चों का रखें बेहद ख्याल, लापरवाही पड़ सकती है भारी: डॉ. अंशुल श्रीवास्तव
भीषण गर्मी में नौनिहालों को सुरक्षित रखने के लिए शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीवास्तव ने बताए कई अहम तरीके
टूटते सपने और खामोश चीखें—क्यों हार मान रहा है युवा मन?
हादसे या बीमारी पर संवेदना और आत्महत्या पर अफवाह क्यों?
केआईटी : उलझा सरकारीकरण और राजनीति की भेंट चढ़ा वेतन
केआईटी परिसर को नवगुरुकुल परिसर बनाने और कोडिंग क्लास पर खड़े हुए सवाल ? , सीआईटी को केआईटी की जगह पॉलीटेक्निक में क्यों खोला गया?
अडानी की बड़ी परेशानी : पुरंगा कोल ब्लॉक जनसुनवाई रद्द करने ग्रामीण के किया कलेक्ट्रेट का घेराव
पेशा कानून के तहत ग्रामीणों ने मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड पुरुंगा अडानी की जनसुनवाई को पहले ही किया निरस्त
ऐतिहासिक होगा इस्कॉन रायगढ़ का जन्माष्टमी महामहोत्सव
एनआईटी रायपुर और खैरागढ़ से भजन करने आयेगा युवाओं का ग्रुप , स्वस्तिवाचन, हरिनाम जप और भगवान का पुष्प अभिषेक रहेगा विशेष आयोजन
11 साल में 10 गुना बढ़ गई श्रीराम शोभायात्रा की भव्यता
पहली बार श्री रामजन्म के अवसर पर पूरे नगर को सजाया जा रहा, 70 झांकियों और दर्जनों दल होंगे शोभायात्रा में शामिल
भगवान झूलेलाल की छत्रछाया में मेहनतकश सिंधी समाज का शून्य से लेकर शिखर तक का सफर
सिंधी समाज : संघर्ष, मेहनत और विकास की गाथा , विभाजन से विकास तक
असमंजस बाबू की आत्मकथा के मंचन से शुरू हो रहा है रायगढ़ इप्टा का 30 वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह
17 से 19 जनवरी तक पॉलीटेक्निक ऑडिटोरियम में होगा आयोजन
कैद हो जाएं घरों में रायगढ़ की सड़कें अब चलने लायक नहीं रही !
निगम और जिला प्रशासन अतिक्रमण हटाने तो यातायात विभाग जिम्मेदारी में हुआ फेल, औद्योगिक नगरी में अधिकारियों का फोकस जनसुविधा नहीं धनसुविधा पर
शुरू से ठगा जाता रहा है रायगढ़-आखिर कब तक?
छत्तीसगढ़ एक नये राज्य के तौर पर बनने से पहले रायगढ़ संभावनाओं के बड़े केन्द्रों में से एक था, लेकिन जब छत्तीसगढ़ बना तो रायगढ़ को एक तरह से ठेंगा दिखा दिया गया। नये बने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने हथिया ली और खुद को न्यायधानी बताते हुए बिलासपुर में हाईकोर्ट और रेवेन्यू बोर्ड जैसे न्यायिक संस्थाओं को अपने हिस्से में शामिल कर लिया। अलावे इसके और भी ढेर सारे राज्य स्तरीय संस्थान रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे जिलों ने झटक लिये। <b>रायगढ़ से छल</b> दरअसल रायगढ़ शुरू से ही ठगा जाता रहा है। वास्तव में छत्तीसगढ़ बनने से पहले मध्यप्रदेश में छत्तीसगढ़ की जो स्थिति थी छत्तीसगढ़ बनने के बाद छत्तीसगढ़ में वहीं हाल रायगढ़ का है। बीते 25 वर्षों में रायगढ़ को ऐसा कुछ भी नहीं मिला जिस पर रायगढ़ के लोग गर्व कर सके। इसी बीच छत्तीसगढ़ के मौजूदा मुख्यमंत्री माननीय विष्णुदेव जी साय जब भारत सरकार के मंत्री थे तब उनके प्रयासों से ही रायगढ़ की झोली में रेल्वे टर्मिनल का सौगात डाला गया था जिसके लिये उनकी उपस्थिति में ही पूरे विधि-विधान के साथ भूमि पूजन भी हुआ था लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी वह टर्मिनल रायगढ़ की झोली से धरातल पर अभी तक नहीं दिखलाई पड़ा है। कह सकते है कि रायगढ़ की झोली के किसी छेद से टर्मिनल का वह सौगात बाहर निकल गया होगा। <b>गौरवशाली अतीत</b> रायगढ़ का एक गौरवशाली अतीत रहा है जहां रियासती दौर में ही 14 देशी राज्यों (रियासतों) का एक अपना हाईकोर्ट हुआ करता था जिसमें भारत के ख्यातिलब्ध न्यायाधीश हिदायत उल्लाह अपनी सेवाएं दे चुके थे, यहीं नहीं रायगढ़ में तात्कालीन १४ पूर्वी रियासतों की राजधानी भी थी और अब वहीं रायगढ़ इन मायनों में आजादी के पहले जहां खड़ा था वहीं खड़ा है। इस बीच अभी हाल के दिनों में यह बात भी सामने आई थी कि रायगढ़ को आने वाले दिनों में राजस्व संभाग का दर्जा दिया जायेगा। अलावे इसके पुलिस का रेंज कार्यालय भी रायगढ़ में ही होगा। ये दोनों बातें अचानक कहां गुम हो गई पता ही नहीं चला जबकि इसी बीच सरगुजा याने अंबिकापुर को संभाग का दर्जा दिया जा चुका है। अलावे इसके कुछ और भी है जिसमें रायगढ़ के जिला जेल को सेन्ट्रल जेल का दर्जा दिये जाने की बात सामने आई थी जिसकी अनुशंसा छ.ग. हाईकोर्ट की एक कमेटी ने की थी पर अभी तक न तो रायगढ़ को संभाग का दर्जा दिया गया न पुलिस का रेंज कार्यालय यहां आया और न ही रायगढ़ जेल को सेन्ट्रल जेल का दर्जा दिया गया। रायगढ़ के साथ किये गये इस सौतेले सलूक के पीछे कुछ भी कारण हो सकते हैं लेकिन इतना तय है कि रायगढ़ को जो मिलना था वह नहीं मिला। ऐसे कई मिसाल है जैसे रायगढ़ में हवाई अड्डे की बात थी वह भी विवादों में उलझकर अकाल मौत का शिकार हो चुका है जबकि इसी बीच बिलासपुर और अंबिकापुर को हवाई अड्डे की सौगात दी जा चुकी है। कुछ यही हाल यहां के केलो बांध का भी है जिसके लोकार्पण के दशक बीत चुके हैं लेकिन बांध से आज तक किसानों के खेतों में पानी का एक बूंद नहीं पहुंचा है। अलबत्ता इसी बीच ९० के दशक में टिड्डी दल की तरह यहां आये उद्योगोंपतियों ने अपने उद्योगों के लिये केलो डेम से पानी लेने की व्यवस्था बेरहमी से कर ली। दरअसल ९० के दशक में जिले के एक बड़े भू-भाग में कोयले के अकूत खजाने का पता चल गया था जिसके चलते देश के कोने-कोने से उद्योगपति यहां पहुंच गये, उन्होंने हजारों एकड़ खेती की जमीन हथिया ली। बड़े पैमाने पर जंगलों को रौंद डाला नतीजा यह हुआ कि रायगढ़ जिला अराजक औद्योगिककरण की चपेट में आ गया परिणाम स्वरूप जिले में औद्योगिक परिवहन से जुड़े भारी भरकम वाहनों की भीड़ लग गई जो जिले के खस्ताहाल सडक़ों पर दौड़ते हुए हादसों को अंजाम देने लगे। वहीं दूसरी ओर बेलगाम उद्योगपतियों ने जिले के पर्यावरण को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। आज रायगढ़ छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से एक है। आलम यह है कि समूचे छत्तीसगढ़ में फेफड़ों के लिये दवा की जितनी खपत होती है उन सब में सबसे ज्यादा रायगढ़ में होती है। यहां मृत्यु दर में खासा इजाफा हो चुका है। यह भी उल्लेखनीय है कि जिले में हुए औद्योगिकरण के मद्देनजर रायगढ़ में किरोड़ीमल इंस्ट्रीयूट ऑफ टेक्नोलॉजी की स्थापना उद्योगों की तकनीकी आवश्यकता पूरी करने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन यह संस्था बमुश्किल दस साल के बाद भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। अब स्थिति यह है कि संस्था बंद हो चुकी है इसके कर्मचारी वेतन नहीं मिलने के कारण भूखमरी के कगार में पहुंच चुके हैं और संस्था मौत की हिचकियों के साथ जिंदा है। स्थानीय जन तथा इस संस्था के कर्मचारी संस्था को राज्य शासन द्वारा सरकार के अधीन लिये जाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अलग-अलग पार्टियों के सरकार ने इस मांग की पूरी तरह अनदेखी कर दी और इसके विपरीत दुर्ग में कर्ज से डूबे चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज को शासनाधीन कर लिया गया। qqq <b>अब ऊंची छलांग के लिये तैयार है रायगढ़</b> इन परिस्थितियों के लिये अगर किसी को जवाबदेह ठहराया जा सकता है तो वह सिर्फ रायगढ़ की जनता और उसके राजनैतिक नेतृत्व ही है। बहरहाल अब इन बातों को लेकर गिला-शिकवा का कोई अर्थ नहीं है, अब तो बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले के अनुसार आगे ही जाना होगा। इन मायनों में दो राय नहीं की विधानसभा के पिछले चुनाव में रायगढ़ से पूर्व आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी का चुना जाना रायगढ़ के लिये भाग्योदय जैसा ही है। अपने एक साल के कार्यकाल में ही ओपी चौधरी ने रायगढ़ में विकास के लिये जो खाका खिंचा है उसी में विकास को लेकर उनकी सुलझी हुई समझ और अवधारणा की झलक मिल जाती है। उन्होंने इन एक वर्ष में विकास के हर क्षेत्र में योजनाओं की मंजूरी देकर यह जता दिया है कि उनके पास रायगढ़ के विकास की ठोस रूप-रेखा है। जिसके तहत रायगढ़ में चौतरफा फोरलेन सडक़ों का जाल बिछाया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बेहतर पहलकदमी हुई है। खासतौर पर शिक्षा के क्षेत्र में नालंदा परिसर जैसे ज्ञान के संस्थान की स्थापना इन मायनों में बेहद पिछड़े रायगढ़ के लिये एक क्रांतिकारी शुरूआत है। इस संस्थान के शुरू हो जाने से रायगढ़ के युवाओं को जरूरी पुस्तकों के लिये भटकना नहीं पड़ेगा और वे इस संस्थान का लाभ लेते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी जगह बनाने में निश्चित तौर पर कामयाब होंगे और यहीं वास्तविक विकास है। ओपी चौधरी का विजन अभी अपने समग्र रूप में नहीं दिखलाई पड़ा है लेकिन आने वाले दो-तीन वर्षों में रायगढ़ को एक नई पहचान के साथ देखा जा सकेगा। कह सकते हैं कि तब रायगढ़ विकास के मायनों में एक ऊंची छलांग लगाने के लिये तैयार हो चुका होगा।
अग्निवीर, अग्निपथ और सियासत....
योजना से सेना कमजोर होगी या नहीं यह वक्त बताएगा लेकिन इस योजना के बंद होने से देश जरुर कमजोर होगा
रायगढ़ स्वास्थ्य विभाग का दामाद तिलेश दीवान !
आयुष्मान घोटाले से हर बार बचा, बहुमंजिला निजी आवास होने के बाद अब विभाग ने दिया आलीशान आवास का तोहफा
कैद हो जाएं घरों में रायगढ़ की सड़कें अब चलने लायक नहीं रही !
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शुरू से ठगा जाता रहा है रायगढ़-आखिर कब तक?
छत्तीसगढ़ एक नये राज्य के तौर पर बनने से पहले रायगढ़ संभावनाओं के बड़े केन्द्रों में से एक था, लेकिन जब छत्तीसगढ़ बना तो रायगढ़ को एक तरह से ठेंगा दिखा दिया गया। नये बने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने हथिया ली और खुद को न्यायधानी बताते हुए बिलासपुर में हाईकोर्ट और रेवेन्यू बोर्ड जैसे न्यायिक संस्थाओं को अपने हिस्से में शामिल कर लिया। अलावे इसके और भी ढेर सारे राज्य स्तरीय संस्थान रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे जिलों ने झटक लिये। <b>रायगढ़ से छल</b> दरअसल रायगढ़ शुरू से ही ठगा जाता रहा है। वास्तव में छत्तीसगढ़ बनने से पहले मध्यप्रदेश में छत्तीसगढ़ की जो स्थिति थी छत्तीसगढ़ बनने के बाद छत्तीसगढ़ में वहीं हाल रायगढ़ का है। बीते 25 वर्षों में रायगढ़ को ऐसा कुछ भी नहीं मिला जिस पर रायगढ़ के लोग गर्व कर सके। इसी बीच छत्तीसगढ़ के मौजूदा मुख्यमंत्री माननीय विष्णुदेव जी साय जब भारत सरकार के मंत्री थे तब उनके प्रयासों से ही रायगढ़ की झोली में रेल्वे टर्मिनल का सौगात डाला गया था जिसके लिये उनकी उपस्थिति में ही पूरे विधि-विधान के साथ भूमि पूजन भी हुआ था लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी वह टर्मिनल रायगढ़ की झोली से धरातल पर अभी तक नहीं दिखलाई पड़ा है। कह सकते है कि रायगढ़ की झोली के किसी छेद से टर्मिनल का वह सौगात बाहर निकल गया होगा। <b>गौरवशाली अतीत</b> रायगढ़ का एक गौरवशाली अतीत रहा है जहां रियासती दौर में ही 14 देशी राज्यों (रियासतों) का एक अपना हाईकोर्ट हुआ करता था जिसमें भारत के ख्यातिलब्ध न्यायाधीश हिदायत उल्लाह अपनी सेवाएं दे चुके थे, यहीं नहीं रायगढ़ में तात्कालीन १४ पूर्वी रियासतों की राजधानी भी थी और अब वहीं रायगढ़ इन मायनों में आजादी के पहले जहां खड़ा था वहीं खड़ा है। इस बीच अभी हाल के दिनों में यह बात भी सामने आई थी कि रायगढ़ को आने वाले दिनों में राजस्व संभाग का दर्जा दिया जायेगा। अलावे इसके पुलिस का रेंज कार्यालय भी रायगढ़ में ही होगा। ये दोनों बातें अचानक कहां गुम हो गई पता ही नहीं चला जबकि इसी बीच सरगुजा याने अंबिकापुर को संभाग का दर्जा दिया जा चुका है। अलावे इसके कुछ और भी है जिसमें रायगढ़ के जिला जेल को सेन्ट्रल जेल का दर्जा दिये जाने की बात सामने आई थी जिसकी अनुशंसा छ.ग. हाईकोर्ट की एक कमेटी ने की थी पर अभी तक न तो रायगढ़ को संभाग का दर्जा दिया गया न पुलिस का रेंज कार्यालय यहां आया और न ही रायगढ़ जेल को सेन्ट्रल जेल का दर्जा दिया गया। रायगढ़ के साथ किये गये इस सौतेले सलूक के पीछे कुछ भी कारण हो सकते हैं लेकिन इतना तय है कि रायगढ़ को जो मिलना था वह नहीं मिला। ऐसे कई मिसाल है जैसे रायगढ़ में हवाई अड्डे की बात थी वह भी विवादों में उलझकर अकाल मौत का शिकार हो चुका है जबकि इसी बीच बिलासपुर और अंबिकापुर को हवाई अड्डे की सौगात दी जा चुकी है। कुछ यही हाल यहां के केलो बांध का भी है जिसके लोकार्पण के दशक बीत चुके हैं लेकिन बांध से आज तक किसानों के खेतों में पानी का एक बूंद नहीं पहुंचा है। अलबत्ता इसी बीच ९० के दशक में टिड्डी दल की तरह यहां आये उद्योगोंपतियों ने अपने उद्योगों के लिये केलो डेम से पानी लेने की व्यवस्था बेरहमी से कर ली। दरअसल ९० के दशक में जिले के एक बड़े भू-भाग में कोयले के अकूत खजाने का पता चल गया था जिसके चलते देश के कोने-कोने से उद्योगपति यहां पहुंच गये, उन्होंने हजारों एकड़ खेती की जमीन हथिया ली। बड़े पैमाने पर जंगलों को रौंद डाला नतीजा यह हुआ कि रायगढ़ जिला अराजक औद्योगिककरण की चपेट में आ गया परिणाम स्वरूप जिले में औद्योगिक परिवहन से जुड़े भारी भरकम वाहनों की भीड़ लग गई जो जिले के खस्ताहाल सडक़ों पर दौड़ते हुए हादसों को अंजाम देने लगे। वहीं दूसरी ओर बेलगाम उद्योगपतियों ने जिले के पर्यावरण को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। आज रायगढ़ छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से एक है। आलम यह है कि समूचे छत्तीसगढ़ में फेफड़ों के लिये दवा की जितनी खपत होती है उन सब में सबसे ज्यादा रायगढ़ में होती है। यहां मृत्यु दर में खासा इजाफा हो चुका है। यह भी उल्लेखनीय है कि जिले में हुए औद्योगिकरण के मद्देनजर रायगढ़ में किरोड़ीमल इंस्ट्रीयूट ऑफ टेक्नोलॉजी की स्थापना उद्योगों की तकनीकी आवश्यकता पूरी करने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन यह संस्था बमुश्किल दस साल के बाद भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। अब स्थिति यह है कि संस्था बंद हो चुकी है इसके कर्मचारी वेतन नहीं मिलने के कारण भूखमरी के कगार में पहुंच चुके हैं और संस्था मौत की हिचकियों के साथ जिंदा है। स्थानीय जन तथा इस संस्था के कर्मचारी संस्था को राज्य शासन द्वारा सरकार के अधीन लिये जाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अलग-अलग पार्टियों के सरकार ने इस मांग की पूरी तरह अनदेखी कर दी और इसके विपरीत दुर्ग में कर्ज से डूबे चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज को शासनाधीन कर लिया गया। qqq <b>अब ऊंची छलांग के लिये तैयार है रायगढ़</b> इन परिस्थितियों के लिये अगर किसी को जवाबदेह ठहराया जा सकता है तो वह सिर्फ रायगढ़ की जनता और उसके राजनैतिक नेतृत्व ही है। बहरहाल अब इन बातों को लेकर गिला-शिकवा का कोई अर्थ नहीं है, अब तो बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले के अनुसार आगे ही जाना होगा। इन मायनों में दो राय नहीं की विधानसभा के पिछले चुनाव में रायगढ़ से पूर्व आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी का चुना जाना रायगढ़ के लिये भाग्योदय जैसा ही है। अपने एक साल के कार्यकाल में ही ओपी चौधरी ने रायगढ़ में विकास के लिये जो खाका खिंचा है उसी में विकास को लेकर उनकी सुलझी हुई समझ और अवधारणा की झलक मिल जाती है। उन्होंने इन एक वर्ष में विकास के हर क्षेत्र में योजनाओं की मंजूरी देकर यह जता दिया है कि उनके पास रायगढ़ के विकास की ठोस रूप-रेखा है। जिसके तहत रायगढ़ में चौतरफा फोरलेन सडक़ों का जाल बिछाया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बेहतर पहलकदमी हुई है। खासतौर पर शिक्षा के क्षेत्र में नालंदा परिसर जैसे ज्ञान के संस्थान की स्थापना इन मायनों में बेहद पिछड़े रायगढ़ के लिये एक क्रांतिकारी शुरूआत है। इस संस्थान के शुरू हो जाने से रायगढ़ के युवाओं को जरूरी पुस्तकों के लिये भटकना नहीं पड़ेगा और वे इस संस्थान का लाभ लेते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी जगह बनाने में निश्चित तौर पर कामयाब होंगे और यहीं वास्तविक विकास है। ओपी चौधरी का विजन अभी अपने समग्र रूप में नहीं दिखलाई पड़ा है लेकिन आने वाले दो-तीन वर्षों में रायगढ़ को एक नई पहचान के साथ देखा जा सकेगा। कह सकते हैं कि तब रायगढ़ विकास के मायनों में एक ऊंची छलांग लगाने के लिये तैयार हो चुका होगा।
अग्निवीर, अग्निपथ और सियासत....
योजना से सेना कमजोर होगी या नहीं यह वक्त बताएगा लेकिन इस योजना के बंद होने से देश जरुर कमजोर होगा
रायगढ़ स्वास्थ्य विभाग का दामाद तिलेश दीवान !
आयुष्मान घोटाले से हर बार बचा, बहुमंजिला निजी आवास होने के बाद अब विभाग ने दिया आलीशान आवास का तोहफा
कलेक्टर भीम सिंह ने भारी बारिश के बीच संभाला मोर्चा, देखें तस्वीरें
निगम अमला बीती रात से आयुक्त के साथ पूरे शहर में डटा हुआ है
तस्वीरों में देखें रायगढ़ में जनता कर्फ्यू का असर
22 मार्च यानी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर जिले में भी जनता कर्फ्यू का असर देखने को मिला। दोपहर तक पूरा शहर स्वस्फूर्त बंद था। हर मुख्य मार्ग और बाजार बंद मिले। गली-कूचे तक कोई व्यक्ति बाहर नहीं निकला।
हरि बोल, जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ निकली रथयात्रा, देखें गैलरी
रायगढ़ में दो दिनों की रथयात्रा आयोजित होती रही है। इसी क्रम में आज रथ द्वितिया के दिन शहर के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भगवान श्री को विधिविधान पूर्वक पूजा अर्चना पश्चात मंदिर के गर्भगृह तथा मंदिर परिसर से जय जगन्नाथ के जयघोष और घंट शंख ध्वनि के बीच ससम्मान बाहर निकाला गया। राजापारा स्थित प्रांगढ़ में मेले सा माहौल था और हजारो की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण भगवान श्री के दर्शन करने के लिए पहुंचे हुए थे। इससे पहले कल भगवान जगन्नाथ की विधि विधान से पूजा की गई जिसे फोटोग्राफर वेदव्यास गुप्ता ने अपने कैमरे में कैद किया।
इप्टा रायगढ़ के 25वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की झलकियां
27 से 31 जनवरी तक पॉलिटेक्निक ऑडिटोरिम में इप्टा रायगढ़ द्वारा 25वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जिसमें चार नाटक एवं दो फीचर फिल्में दिखाई गईं। समारोह की शुरुआत रायपुर के मशहूर रंगकर्मी मिर्जा मसूद को 10वां शरदचंद्र वैरागकर अवार्ड देकर की गई। यह कूवत सिर्फ रंगमंच रखता है जो वर्तमान सत्ता के मठाधीशों पर अजब मदारी गजब तमाशा नाटक के माध्यम से सीधे कटाक्ष कर सकता है। जहां एक मदारी को राजा बना दिया जाता है, शब्दों के अस्तित्व को खत्म कर दिया जाता है। बंदर राष्ट्रीय पशु बन जाता है। गांधी चौक नाटक में गांधीजी की प्रतिमा स्वयं यह चलकर वहां से हट जाती है कि जब रक्षक की भक्षक बन गए तो कोई क्या कर सकता है। नोटबंदी और जीएसटी पर गांव वाले सीधे प्रहार करते हैं। सुबह होने वाली है की लेखी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध होने के बाद लोगों को जागरूक करने को किताब लिखती और किताब को ही फांसी हो जाती है। बोल की लब आजाद हैं तेरे लोगों को दर्शकदीर्घा में झकघोर के रख देती है। तुरूप और भूलन जैसी फिल्में लोगों के मनोरंजन के अलावा दमदार संदेश भी देती है। तो देखें इस शानदार नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की कुछ झलकियां
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