raigarh express

Raigarh Express, news of raigarh chhattisgarh

Tuesday, October 20, 2026
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भंग कर दीजिए शांति समिति ! जब सड़क पर मनमानी ही चलनी है तो बैठकों का प्रहसन क्यों?
त्योहारों के नाम पर सार्वजनिक सड़कों की घेराबंदी, निर्देशों की फाइलें भारी और अमल शून्य; जनता जाम में कैद, व्यवस्था के जिम्मेदार मौन
ओपिनियन
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दम तोड़ती ट्रैफिक व्यवस्था : रायगढ़ की सड़कों पर आजादी भी मुश्किल
ओपिनियन
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ओपी जिंदल क्रिकेट एकेडमी के राहुल प्रधान का रणजी ट्रॉफी में चयन
हमारे बच्चे
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रीलबाजों का राजतिलक: ₹2 करोड़ का स्टूडियो, जवाबदेही का पता नहीं
ओपिनियन
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नाबालिग भांजी से दुष्कर्म के आरोपी पुष्पेंद्र गोयल ने कोर्ट में किया सरेंडर
आसपास
नाबालिग भांजी से दुष्कर्म के आरोपी पुष्पेंद्र गोयल ने कोर्ट में किया सरेंडर
हाईकोर्ट तक से झटका मिलने के बाद घुटने टेकने पर हुआ मजबूर, छाल पुलिस ने लिया रिमांड पर
बरसात में रखें बच्चों का बेहद ख्याल : डॉ. अंशुल श्रीवास्तव
बच्चों की सेहत पर पांच बीमारियों का खतरा, थोड़ी सावधानी से बचाव संभव
हिंडाल्को ने देश का पहला सुपरफाइन PPT ATH प्लांट किया शुरू
30,000 टन सालाना उत्पादन क्षमता वाला संयंत्र 100% हरित ऊर्जा से संचालित होगा
अमित उर्फ पुष्पेंद्र गोयल को हाई कोर्ट से राहत नहीं, अग्रिम जमानत याचिका खारिज
नाबालिग भांजी से दुष्कर्म के आरोप में फरार चल रहा आरोपी अब भी छाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर
सुशासन तिहार के नाम पर साय सरकार का छलावा: तारेन्द्र डनसेना
खरसिया की स्वीकृत सड़कें बजट से विलोपित होने का कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस के लिए कुछ लड़ रहे, बाकी अपने लिए लड़ने की तैयारी में
दावेदारी की दौड़: जमीन पर कार्यकर्ता नहीं, नेताओं के दरबार में हाजिरी पूरी
भाजपा का सबसे बड़ा विपक्ष अब भाजपा ही है
अफसरशाही, जनसुनवाई विवाद,आयातित नेतृत्व और नाराज़ कार्यकर्ता—क्या भाजपा अपनी सबसे बड़ी चुनौती को पहचान पाएगी
रवि भगत : भाजपा का भविष्य क्यों बन रहा भाजपा के लिए चुनौती?
रवि के बढ़ते कद से कौन डरा , जहां समझाईश से बात बन सकती थी तो मामले को क्यों बड़ा बनाया?
नाली पर गिट्टी-बालू रखने से हुआ जलभराव, निगम की कड़ी कार्रवाई
संस्कार फ्लेक्स पर ₹20,000 का जुर्माना, गिट्टी-बालू जप्त , अब स्थिति सामान्य
चक्रधर नगर पोल्ट्री फार्म में मिला बर्ड फ्लू का केस
कलेक्टर ने देर रात अधिकारियों की आपातकालीन बैठक लेकर स्थिति नियंत्रित करने बनाई रणनीति
किसी भी आपात स्थिति से निबटने स्वास्थ्य अमला पूरी तरह से तैयार: सीएमएचओ डॉ. केशरी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन का स्वास्थ्य सेवाएँ पहुंचाने पर जोर*
रायगढ़ में मूसलाधार बारिश की संभावना
बारिश से महानदी में बढ़ा जलस्तर, रायगढ़ जिला प्रशासन अलर्ट
ओपी जिंदल क्रिकेट एकेडमी के राहुल प्रधान का रणजी ट्रॉफी में चयन
सौराष्ट्र के खिलाफ छत्तीसगढ़ की ओर से खेल रहे राहुल ने रविंद्र जडेजा जैसे गेंदबाजों का किया सामना, सक्षम चौबे का वीनू मांकड़ ट्रॉफी के लिए चयन
हरे कृष्ण-हरे राम से गूंजा रायगढ़, इस्कॉन महामहोत्सव में उमड़ा 10 हजार भक्तों का सैलाब
पालकी में झूमते नाचते भक्तों ने निकाली यात्रा, महाभिषेक के बाद हुआ पुष्पाभिषेक
10 हजार श्रद्धालुओं के बीच गूंजेगा हरे कृष्ण महामंत्र
इस्कॉन का तीन दिवसीय महोत्सव, ओडिशा समेत कई राज्यों से पहुंचेंगे भक्त; प्रदेशभर के कलाकार देंगे प्रस्तुतियां
पांच साल बाद कर्नल विप्लव त्रिपाठी हत्याकांड का अहम आरोपी गिरफ्तार
एनआईए के 4 लाख के इनामी पीएलए कैप्टन को मणिपुर में दबोचा
इस्कॉन प्रचार केंद्र रायगढ़ का जन्माष्टमी महामहोत्सव 4 से
भक्ति के रंग में रंगेगा रायगढ़, तीन दिन गूंजेगा हरे कृष्ण-हरे राम का महामंत्र
गुपचुप के ठेले से सपने तक: एक-एक सिक्का जोड़कर अक्षय ने खरीदा अपना ड्रीम फोन
​​विरासत से मिला स्वाद, मेहनत से आया आईफोन
सुनील रामदास : व्यापार विरासत में नहीं मिला, पिता के संस्कार मिले
59 वर्षीय सुनील रामदास अग्रवाल एक सफल उद्योगपति होने के साथ-साथ समाजसेवा का पर्याय माने जाते हैं। लेकिन उनकी कहानी किसी बड़े कारोबारी घराने से शुरू नहीं होती। यह कहानी शुरू होती है खरसिया के एक साधारण परिवार से, जहां उनके पिता रामदास अग्रवाल ने संघर्ष, मेहनत और ईमानदारी की पूंजी से अपने परिवार और व्यवसाय की नींव रखी। खरसिया से शुरू हुआ सफर सारंगढ़ पहुंचा, फिर पत्थलगांव तक गया। चूड़ियों के छोटे से कारोबार के बीच रामदास अग्रवाल अपने तीनों बेटों—सुनील, अनिल और सुशील—को साथ बैठाकर व्यापार की बारीकियां सिखाते थे। उनके लिए कारोबार केवल कमाई का जरिया नहीं था, बल्कि जीवन जीने की एक पाठशाला थी। वर्ष 2002 में सुनील अग्रवाल पत्थलगांव से रायगढ़ आए और ठेकेदारी का काम शुरू किया। मेहनत, दूरदृष्टि और जोखिम उठाने के साहस ने उन्हें जल्द ही छत्तीसगढ़, ओडिशा और महाराष्ट्र के बड़े ठेकेदारों की कतार में ला खड़ा किया। इसके बाद उन्होंने एसकेए ग्रुप की स्थापना कि जिसमें रायगढ़ और रायपुर में स्टील एंड पावर उद्योग और कंस्ट्रक्शन की 4 कंपनी है। लेकिन सफलता के इस शिखर पर पहुंचने के बाद भी वे अपनी जड़ों को नहीं भूले। अपने माता-पिता की शादी की 50वीं वर्षगांठ पर उन्होंने रामदास-द्रौपदी फाउंडेशन की स्थापना की। इस फाउंडेशन के माध्यम से वे वर्षों से समाजसेवा के अनेक कार्य कर रहे हैं। इनमें हर वर्ष लगभग 50 हजार पौधे लगाने का अभियान प्रमुख है। पिछले 11 वर्षों से यह अभियान लगातार जारी है। सुनील अग्रवाल कहते हैं, "हमारे पिता स्वभाव से कड़क थे। वे हमें डांटते भी थे और अनुशासन में रखते थे, ताकि हम व्यापार को अच्छी तरह समझ सकें। लेकिन उनके कठोर व्यक्तित्व के भीतर एक बेहद संवेदनशील और समाजसेवी इंसान छिपा था। उन्हें हमेशा सर्वसमाज की चिंता रहती थी।" वे बताते हैं कि जब भी व्यापार में नुकसान होता, पिता डांटने के बजाय समझाते थे—"घबराना मत, यह नुकसान नहीं, आने वाले समय की सीख है। लेकिन व्यापार कभी मत छोड़ना। ईमानदार रहना, समय का पाबंद रहना और लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहना।" रामदास अग्रवाल को इस दुनिया से गए छह वर्ष हो चुके हैं, लेकिन सुनील कहते हैं कि आज भी उन्हें ऐसा लगता है मानो पिता उनके आसपास ही हों। सुबह भगवान की पूजा करने से पहले मैं पिताजी को प्रणाम करता हूं। मेरे लिए वही भगवान हैं। उनकी तस्वीर के सामने खड़े होकर उनसे बात करता हूं, उनसे क्षमा मांगता हूं और अपने हर फैसले की जानकारी देता हूं। मुझे लगता है कि वे आज भी मुझे देख रहे हैं। जहां भी होंगे, हमें देखकर खुश होते होंगे कि उनके दिए संस्कार आज भी हमारे जीवन का मार्गदर्शन कर रहे हैं।" सुनील अग्रवाल कहते हैं कि उन्होंने अपने पिता की सीख अपनी बेटी सेजल और बेटों अभिषेक व अभिनव को देने का प्रयास किया है। उनके अनुसार तीसरी पीढ़ी भी आज रामदास अग्रवाल के बताए रास्ते पर चल रही है। वे भावुक होकर कहते हैं, "हमें अपने पिता से इतना लगाव है कि हम तीनों भाइयों ने अपने नाम के आगे स्वयं अपने पिता का नाम जोड़ लिया। क्योंकि समाज में जो सम्मान और विश्वास रामदास जी ने कमाया था, वही आज हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। जहां भी जाते हैं, लोग हमें हमारे नाम से कम और रामदास जी के बेटों के रूप में ज्यादा जानते हैं। यही हमारे जीवन की सबसे बड़ी कमाई है।" अपने बच्चों की परवरिश को लेकर वे कहते हैं कि समय बदल गया है। "हमारे समय में पिता की डांट ही सबसे बड़ी सीख होती थी। आज बच्चों को प्यार और दोस्ताना व्यवहार से समझाना पड़ता है। मैंने भी अपने बच्चों को दोस्त की तरह पाला है। लेकिन बाबूजी की एक सीख आज भी उन्हें देता हूं—दूसरे के दुख को अपना दुख समझो, जरूरतमंद की मदद के लिए हमेशा आगे बढ़ो और कर्म को सबसे ऊपर रखो।" उनका मानना है कि धन कमाने की इच्छा हर व्यक्ति में होती है, लेकिन अंत में पहचान धन से नहीं, कर्म और संस्कारों से बनती है। यही विरासत उन्हें अपने पिता से मिली और यही विरासत वे आने वाली पीढ़ी को सौंपना चाहते हैं।
ऐतिहासिक होगा इस्कॉन रायगढ़ का जन्माष्टमी महामहोत्सव
एनआईटी रायपुर और खैरागढ़ से भजन करने आयेगा युवाओं का ग्रुप , स्वस्तिवाचन, हरिनाम जप और भगवान का पुष्प अभिषेक रहेगा विशेष आयोजन
भंग कर दीजिए शांति समिति ! जब सड़क पर मनमानी ही चलनी है तो बैठकों का प्रहसन क्यों?
त्योहारों के नाम पर सार्वजनिक सड़कों की घेराबंदी, निर्देशों की फाइलें भारी और अमल शून्य; जनता जाम में कैद, व्यवस्था के जिम्मेदार मौन
दम तोड़ती ट्रैफिक व्यवस्था : रायगढ़ की सड़कों पर आजादी भी मुश्किल
बड़े कारोबारियों के आगे कार्रवाई से परहेज मुख्य मार्गों पर कब्जे से लेकर शहर के बाहर ट्रकों की कतारों तक, यातायात व्यवस्था पर उठे सवाल
रीलबाजों का राजतिलक: ₹2 करोड़ का स्टूडियो, जवाबदेही का पता नहीं
सरकारी संसाधन मिलेंगे तो कंटेंट की विश्वसनीयता कौन परखेगा और गलत सूचना की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
कैद हो जाएं घरों में रायगढ़ की सड़कें अब चलने लायक नहीं रही !
निगम और जिला प्रशासन अतिक्रमण हटाने तो यातायात विभाग जिम्मेदारी में हुआ फेल, औद्योगिक नगरी में अधिकारियों का फोकस जनसुविधा नहीं धनसुविधा पर
भंग कर दीजिए शांति समिति ! जब सड़क पर मनमानी ही चलनी है तो बैठकों का प्रहसन क्यों?
त्योहारों के नाम पर सार्वजनिक सड़कों की घेराबंदी, निर्देशों की फाइलें भारी और अमल शून्य; जनता जाम में कैद, व्यवस्था के जिम्मेदार मौन
दम तोड़ती ट्रैफिक व्यवस्था : रायगढ़ की सड़कों पर आजादी भी मुश्किल
बड़े कारोबारियों के आगे कार्रवाई से परहेज मुख्य मार्गों पर कब्जे से लेकर शहर के बाहर ट्रकों की कतारों तक, यातायात व्यवस्था पर उठे सवाल
रीलबाजों का राजतिलक: ₹2 करोड़ का स्टूडियो, जवाबदेही का पता नहीं
सरकारी संसाधन मिलेंगे तो कंटेंट की विश्वसनीयता कौन परखेगा और गलत सूचना की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
कैद हो जाएं घरों में रायगढ़ की सड़कें अब चलने लायक नहीं रही !
निगम और जिला प्रशासन अतिक्रमण हटाने तो यातायात विभाग जिम्मेदारी में हुआ फेल, औद्योगिक नगरी में अधिकारियों का फोकस जनसुविधा नहीं धनसुविधा पर
कलेक्टर भीम सिंह ने भारी बारिश के बीच संभाला मोर्चा, देखें तस्वीरें
निगम अमला बीती रात से आयुक्त के साथ पूरे शहर में डटा हुआ है
तस्वीरों में देखें रायगढ़ में जनता कर्फ्यू का असर
22 मार्च यानी रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर जिले में भी जनता कर्फ्यू का असर देखने को मिला। दोपहर तक पूरा शहर स्वस्फूर्त बंद था। हर मुख्य मार्ग और बाजार बंद मिले। गली-कूचे तक कोई व्यक्ति बाहर नहीं निकला।
हरि बोल, जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ निकली रथयात्रा, देखें गैलरी
रायगढ़ में दो दिनों की रथयात्रा आयोजित होती रही है। इसी क्रम में आज रथ द्वितिया के दिन शहर के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से भगवान श्री को विधिविधान पूर्वक पूजा अर्चना पश्चात मंदिर के गर्भगृह तथा मंदिर परिसर से जय जगन्नाथ के जयघोष और घंट शंख ध्वनि के बीच ससम्मान बाहर निकाला गया। राजापारा स्थित प्रांगढ़ में मेले सा माहौल था और हजारो की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण भगवान श्री के दर्शन करने के लिए पहुंचे हुए थे। इससे पहले कल भगवान जगन्नाथ की विधि विधान से पूजा की गई जिसे फोटोग्राफर वेदव्यास गुप्ता ने अपने कैमरे में कैद किया।
इप्टा रायगढ़ के 25वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की झलकियां
27 से 31 जनवरी तक पॉलिटेक्निक ऑडिटोरिम में इप्टा रायगढ़ द्वारा 25वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जिसमें चार नाटक एवं दो फीचर फिल्में दिखाई गईं। समारोह की शुरुआत रायपुर के मशहूर रंगकर्मी मिर्जा मसूद को 10वां शरदचंद्र वैरागकर अवार्ड देकर की गई। यह कूवत सिर्फ रंगमंच रखता है जो वर्तमान सत्ता के मठाधीशों पर अजब मदारी गजब तमाशा नाटक के माध्यम से सीधे कटाक्ष कर सकता है। जहां एक मदारी को राजा बना दिया जाता है, शब्दों के अस्तित्व को खत्म कर दिया जाता है। बंदर राष्ट्रीय पशु बन जाता है। गांधी चौक नाटक में गांधीजी की प्रतिमा स्वयं यह चलकर वहां से हट जाती है कि जब रक्षक की भक्षक बन गए तो कोई क्या कर सकता है। नोटबंदी और जीएसटी पर गांव वाले सीधे प्रहार करते हैं। सुबह होने वाली है की लेखी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध होने के बाद लोगों को जागरूक करने को किताब लिखती और किताब को ही फांसी हो जाती है। बोल की लब आजाद हैं तेरे लोगों को दर्शकदीर्घा में झकघोर के रख देती है। तुरूप और भूलन जैसी फिल्में लोगों के मनोरंजन के अलावा दमदार संदेश भी देती है। तो देखें इस शानदार नाट्य समारोह एवं फिल्म फेस्टिवल की कुछ झलकियां
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